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20.8.11

कुंवर प्रीतम का मुक्तक


कभी फागन,कभी सावन,मुझे हर रूत सताती है
मिलन मावस औ पूनम का,न होता,मां बताती है
शनिचर ले रहा अंगड़ाइयां मेरे मुकद्दर में
कुंवर को आसमानी चाहतें अक्सर सताती हैं
कुंवर प्रीतम