रातों को नींद में
डरता है,
क्यों अन्ना अन्ना
करता है।
जो तेरी नीयत में
खोट नहीं,
तो अन्ना से क्यों
लड़ता है।
छोड़ दे कुर्सी
आ मैदान में,
क्यों मैडम का
पानी भरता है।
अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...
1 comment:
"कुर्सी तो रानी लागे बड़ी सुहानी लगे , कोई भी मर्द नहीं जनता जनानी लगे शेम शेम""
पर अब जनता जनानी अब शेर है ......गीदड़ तो अब मांद में दुबके बैठे है
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