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19.4.08

नरेंद्र मोदी के कवरेज का पत्रकारों ने बहिष्कार किया

यह एक ऐसी खबर है जो शायद ही कहीं छपे क्योंकि अब किसी भी मीडिया हाउस का प्रबंधन भाजपा के सुपर स्टार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से पंगा नहीं ले सकता। हाल में हुए गुजरात चुनावों में फिर जीत हासिल करके असीम ताकत के प्रतीक बने मोदी आजकल दिल्ली में हैं।

यहां सिविल लाइंस में गुजराती समाज की तरफ से आज मोदी के अभिनंदन का कार्यक्रम था। समारोह के कवरेज के लिए बाकायदा पत्रकारों को निमंत्रण पत्र भेजे गए। वहां जब पत्रकार पहुंचे तो उनसे निमंत्रण पत्र मांगा गया लेकिन कई पत्रकार साथी बिना निमंत्रण पत्र पहुंचे थे क्योंकि ये वो पत्रकार थे जो लगातार बीजेपी बीट को कवर करते हैं। इन पत्रकारों ने बीजेपी नेताओं को फोन कर किसी तरह अंदर जाने का जुगाड़ किया। वहां कैमरे वगैरह लगाए।

इसी बीच नरेंद्र मोदी पहुंच गए। समारोह में मौजूद कुछ लोगों ने एकाएक चिल्लाना शुरू कर दिया कि इन मीडिया वालों को किसने यहां बुलाया, इन्हें यहां से भगाओ। इतना सुनते ही समारोह में मौजूद 20-25 लोगों ने मीडिया वालों को भगाने के लिए नारेबाजी व बदतमीजी शुरू कर दी। इस पूरी परिघटना के दौरान नरेंद्र मोदी चुप बैठे रहे। अंततः पानी सिर से उपर निकलता देख और बदतमीजी की हद पार होते देख टीवी पत्रकारों ने कवरेज के बहिष्कार का फैसला किया और समारोह से बाहर निकल गए।

सभी प्रमुख टीवी न्यूज चैनलों एनडीटीवी, आजतक, जी न्यूज, आईबीएन7....आदि के पत्रकारों ने पत्रकारों से बदतमीजी की घटना की निंदा की और इसे मीडिया के प्रति नेताओं के असहिष्णु रवैये का परिचायक बताया। भड़ास इस घटना की निंदा करता है और सभी पत्रकार बंधुओं से अपील करता है कि वो अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए ऐसे कार्यक्रमों का बहिष्कार भविष्य में भी करते रहें जहां उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया जाता।

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दो सूचनाएं भड़ास से संबंधित ...

1- भड़ास पर कुल पोस्ट की संख्या 2025 हो गई है, जो अपने आप में एक रिकार्ड है।

2- भड़ास की सदस्य संख्या 260 से बढ़कर 272 तक पहुंच गई है, ये भी एक नया रिकार्ड है।


जय भड़ास
यशवंत सिंह

4 comments:

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

दादा,भड़ास के अलावा कोई ऐसा मंच नहीं है जिधर इस तरह की बात को जगह मिल सके और न ही किसी चैनल में दम है कि इस बात की खबर दिखाते कि हम लोगों ने बहिष्कार किया है.....

DEEPAK said...

यशवंत दादा, आदमी को जब लगातार विजय मिलते जाता है तो उसकी अन्दर गुमान और अहंकार भर जाता है ऐसा ही कुछ लालू जी के साथ भी था किंतु अब........ जो लोग ये सोचते हैं की तत्राकारों को अपने करतूतों से दूर रखकर साडी खिचडी पकाऊंगा और जनता को कुछ नहीं मालूम . ऐसा होने वाला नहीं मोदी टाइप नेता और उन्के अनुचरों का bycott तबतक जरी रखना चाहिए जबतक लिखित माफी इन झुंडों के द्वारा ना माना जाय किंतु कुछ पत्रकार ऐसे भी होंगे जो मोदी के हाथ को जाकर चूम लेंगे

रजनीश के झा said...

dada aapne satya kaha,
magar modi ki esi ki taisee.

hum bhadaasi hain modi to kya sare fanne khan se pange le sakte hain.

jai jai bhadaas

Swami said...

Let me put the things in perspective here. Gujaratis, especially Modi supporters, hold grudge against media for venomous campaign they had on their agenda for last 6 years. We characterise media as 1) Pseudo-secular 2)liars and 3) incompetent. Now this opinion was formed by media itself by biased reporting of Godhra, post-Godhra and minority appeasement politics of UPA. So we, as Modi supporter, consider media as numero uno enemy of national interest. With internet as medium we no more need traditional print and tv media to remain informed or develop opinion. Please boycott all Modi sessions, we will be happy. Because media is useless and meaningless for us.