Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

3.2.09

यह कैसी श्रद्धा......?

आज नर्मदा जयंती थी .जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा है जैसे यदि हम इसी तरह से आस्था का पाखंड किसी पागल की तरह बघारते रहे तो एक दिन ऐसा भी आएगा जब हम माघ शुक्ल सप्तमी पर पतित पावनी चिर कुंवाRI मानी जाने वाली माँ नर्मदा की बरसी मनाने लगेंगे.मेरी इस चिंता के पार्श्व में ढेरों कारण हैं .राम की गंगा की तरह भोले शंकर की नर्मदा भी मैली हो रही है .भक्तों की अगाध किंतु खतरों से अनभिज्ञ श्रध्दा माँ का गला घोंट रही है .नर्मदा नदी को जीवन दायिनी माना जाता है .किंतु यदि यही हाल रहा तो इसका प्रदूषण ना केवल भक्तों के लिए खतरनाक हो जाएगा बल्कि नदी को भी रोगग्रस्त कर देगा .पुराणों में कहा गया है की जो पुण्य गंगा में स्नान करने से मिलता है वह नर्मदा के दर्शन मात्र से मिल जाता है ,फिर भी क्यों नहीं रोक पाते हम स्वयं को श्रध्दा का अतिरेक दिखाने से .दरअसल हम सब तमाशबीन बन गए हैं .कुछ मदारी और कई जमूरे मिलकर धर्म -धर्म खेल रहे हैं और मेरे जैसे तथाकथित बुद्धिजीवी ब्लॉग पर अपनी भड़ास निकालकर ख़ुद को चिन्तक सिद्ध करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ले रहे हैं .मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के थिंक टेंक का तमगा लगाकर घूम रहे अनिल माधव दवे जैसे नेता भी ,जो नर्मदा प्रदूषण मुक्ति का झंडा लेकर घूम रहे हैं,खामोश हैं, शायद हिंदू वोट बैंक के क्षरण के डर से.नर्मदा अभी हमें करोड़ों वर्षों तक पानी विहीन होने से रोक सकती है बशर्ते हम अपनी शर्म का पानी बचाए रखें.कुतांत दूत -कालभूत-भीती हारी वर्मदे,त्वदीय पाद पंकजम-नमामि देवी नर्मदे.
Posted by meri awaj suno at 10:20 AM

0 comments:

1 comment:

Bandmru said...

sare bahre hain yahaaaaaaaan. koi sunne wala nahi. chillate raho koi faida nahi hai... padhenge, hasange, comment denge, aur so jayenge. jaise ki main. koi faida nahi.. koi faida nahi...koi faida nahi.. koi faida nahi...koi faida nahi.. koi faida nahi...koi faida nahi.. koi faida nahi...koi faida nahi.. koi faida nahi...!
aap bhi so jao.....