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17.11.10

परिणय सूत्र में बंधेगे भगवान

आज देव उठनी  ग्यारस (तुलसी विवाह) का त्यौहार धूमधाम से मनाया जायेगा. गत चार माह से छीर सागर में विश्राम कर रहे भगवान विष्णु आज विश्राम समाप्त कर उठेगे और माता तुलसी से विवाह संपन्न होगा. तुलसी विवाह से सभी प्रकार के मांगलिक कार्यो की शुरूआत हो जाएगी. कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात दीपावली से ग्यारहवी तिथि में देवोत्थान उत्सव देवतत्व प्रबोधन एकादशी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन हिन्दू अपने-अपने घरो के आगन में तुलसी के चारो ओर गन्ने से आकर्षक मंडप सजायेगे और चौक पर भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह विधि विधान से संपन्न करायेगे. चार माह के शयनोपरांत इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर से जगेगे इसलिए उनके शयनकाल में मांगलिक कार्य संपन्न नहीं किये जाते है. हरी जागरण के उपरांत ही शुभ मांगलिक कार्य प्रारंभ होते है.

परिणय सूत्र में बंधेगे  भगवान
महिलाओं द्वारा ग्यारस के त्यौहार पर आगन में चौक पूरकर भगवान विष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करती है. तेज धुप में विष्णु के चरणों को ढँक दिया जाता है. रात्रि को विधिवत पूजन के बाद प्रातःकाल भगवान को संख, घंटा, घड़ियाल आदि बजाकर जगाया जाता है. इसके बाद पूजा कर कहानी सुनाई जाती है. तुलसी विवाह की तैयारियों को लेकर गन्ना कृषको द्वारा बाजारों में गन्ने बेचने के लिए लाये जाते है साथ ही बेर, चने की भाजी, आवला आदि की भी जमकर बिक्री होती है.

वृन्दावन चमक उठे
तुलसी विवाह को लेकर नागरिको में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है. घरो के आगन में स्थित तुलसी दीवाले को नागरिको ने रंग रोगन कर आकर्षक रूप दे दिया है. आज माता तुलसी को आकर्षक चुनरी से सजाया जाएगा और महिलाये भजन कीर्तन कर उनका विवाह संपन्न कराएगी. जमकर पटाखे भी चलाये जायेगे . तुलसी विवाह के दौरान चहल-पहल से दिवाली की यादे फिर ताजा हो उठती है.

फिर मनेगी दिवाली
दीपावली उत्सव की तरह ही देवउठनी ग्यारस पर भी दीपावली की तरह ही तुलसी विवाह होने के उपरांत ख़ुशी में आतिशबाजी की जायेगी. लोगो ने तुलसी विवाह पर आतिशबाजी करने के लिए जमकर पटाखे की खरीददारी की ताकि वह खुशिया मना सके.


विवाह मुहूर्त शुरू
तुलसी विवाह के बाद सभी प्रकार के मांगलिक कार्यो एवं विवाह मुहूर्तो की शुरूआत होती है. तुलसी विवाह करने के उपरांत शादी योग्य पुत्र-पुत्रियों के अभिभावक भी शादियों की तैयारियों को अंतिम रूप देना प्रारंभ कर देगे. वही कुछ अभिभावक ऐसे भी रहते है जो देव उठने पर ही शुभ विवाह की चर्चा करना पसंद करते है. ऐसे अभिभावक भी अपने-अपने पुत्र-पुत्रियों का विवाह की चर्चा करना प्रारंभ कर देगे.

4 comments:

ana said...

shubhakamnaae

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छी जानकारी ...

वन्दना said...

ज्ञानवर्धक आलेख्।

Navin C. Chaturvedi said...

महत्वपूर्ण और सम-सामयिक प्रस्तुति