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28.4.09

यांदें ...

कितनी लम्बी हैं उसकी यांदें ...
हर जगह संजोई हैं यांदें
तब अलग था याद करने वाला
रोने और मुस्कराने मैं थी यांदें
फ़िर.....
कुछ समय बिता यांदें धूमिल हुंई
चढ़ती उम्र मैं
बहुतेरे वर्ष उसकी यांदों मैं बीतेऐ
सच कहें तो
याद करके हम बहुत पछताए
आखिरकार .......
वह उम्र भी कहीं बहुत पीछे छुट गयी
वो यांदें न जाने कहाँ खो गयी
लेकिन बीमारी यह हुयी की
दिल को हमेशा याद करने की फितरत हो गयी
अब कोई नही है हमारा अपना
जिसकी यादें आयें
यश हो प्रतिष्ठा हो
प् द हो या सम्पदा हो
भीतर बैठे फैलाकर
ठीक ठीक कहिये तो चौकरी मारकर
दो कोडी की चीज भी यहाँ सस्ती नहीं मिलती
यह दुकान कीसी को दिखायी नही देती
और
अपनी याद करने की आदत को अब क्या कहूँ
जिंदगी के आखिरी मुकाम पर भी थमती नही दिखती .......

1 comment:

Unknown said...

Tham jatee hai. Apne aap ko Khush rakhiye jo karana chahte the sada wah kariye.