शिव महापुराण -६
[शिव mahapuran के भाग-१,२,३,४,५bhagon का आनंद उठाने हेतु ''भक्ति-अर्णव ''पर पधारें . ]
कथा पूर्ण होने पर संत चरणों में गिरी ;
मुक्ति का उपाय उनसे पूछने वो लगी ,
संत बोले ''शिव पुराण'' श्रवण ही उपाय है ;
पुण्य उदित होते हैं और पाप ये घटाए है .
इसकी कथा के श्रवण से तुम पूर्ण मुक्ति पाओगी ;
राग-क्लेश मुक्त हो शांत-चित्त हो जाओगी ,
साक्षात्-शिव ह्रदय में हैं अनुभव तुम्हे होगा यही ;
शिव मयी है ये जगत,शिव-शिव हैं हर कहीं .
शिव पुराण स्वयं में शिव की दिव्य शक्ति है ;
गणेश-कार्तिकेय की मिलती इससे भक्ति है ,
चंचुला बोली प्रभु-इसकी कथा सुनाइए
मैं बड़ी हूँ पापिनी पाप से बचाइए .
संत के निर्देश पर स्नान करके शुद्ध हुई ;
जटावल्कल धारण कर कथा सुनी अमृतमयी ,
शिव की भक्ति में वो ऐसे लीन थी होती गयी
कथा श्रवण करते करते देह मुक्त वो भई .
देह मुक्ति के अनन्तर शिव पुरी को वो गयी ,
गौरी शंकर के हुए दर्शन उसे महिमामयी ,
भक्त वत्सल शिव की लीला होती सभी महान हैं ;
गौरी शंकर के ह्रदय में भक्त का स्थान है .
माता गौरी ने उसे वरदान ये था दे दिया
'तुम रहो समीप मेरे 'मीठे वचनों में कहा ,
चंचुला को एक दिन पति-गति का पता चला ,
यातनाएं भोगता पिशाच yoni में पडा .
चंचुला ने माता से प्रार्थना फिर ये करी
मुक्ति दो मेरे पति को 'मात हे ममतामयी '
तुम्बरू गन्धर्व को आदेश माता ने दिया
शिव पुराण की कथा विन्दुग को तुम दो सुना !
तुम्बरू विन्ध्याचल पर सुनाने लगे अमृत कथा
विन्दुग के संग-संग श्रोता समूह भी आ जुटा,
कथा श्रवण मात्र से विन्दुग का पाप कट गया ;
शिव ने उसे गणसमूह में गण का पद भी दे दिया .
शिखा कौशिक

5 comments:
padhkar hi man prasanna ho gaya....
om namah shivaay..
abhar...
कल-शनिवार 20 अगस्त 2011 को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा नयी-पुरानी हलचल पर है |कृपया अवश्य पधारें.आभार.
dhanyvad anupma ji .
BLOG PAHELI NO.1
bahut sundar aadhyatmik prastuti.badhai shikha ji.
नई पुरानी हलचल से आपकी इस पोस्ट पर आगमन हुआ.
आपकी सुन्दर प्रस्तुति पढकर मन प्रसन्न हो गया.
बहुत बहुत आभार आपका.
मेरे ब्लॉग पर भी आईयेगा.
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