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16.1.12

राधे तूने .........



राधे  तूने मुरली  क्यूँ है  चुराई  ?
लगती  है  भोली पर करे  चतुराई   
राधे तूने ................

माता जसोदा के लल्ला सुनो 
जो कुछ भी पूंछूं सच सच कहो 
इसमें ही कान्हना  है तेरी भलाई !
राधे तूने .....



किसने सिखाया मीठी मुरली बजाना ?
घर घर में जाकर माखन चुराना ;
किसने तुम्हे ये मोहनी सिखाई ?
राधे तूने .......................



कोयल से सीखा है मुरली बजाना ,
सिखलाते मित्र  मुझे माखन चुराना ,
तुमने ही मुझको ये मोहनी सिखाई 
राधे तूने ..............



भोला  नहीं तू सीधा नहीं है ;
गोपियों की मटकी फोड़े तू ही है ,
कैसे करे तू इतनी ढिठाई ?
राधे तूने .....


राधे सुनो इन प्रश्नों को छोडो ,
लीला हमारी है परदे न खोलो ;
ढूंढ ली है मुरली जो थी छिपाई  
राधे तूने .........
[मेरी आवाज़ में ]


                                  शिखा कौशिक 
                         [विख्यात ]



5 comments:

https://worldisahome.blogspot.com said...

जय हो !
कमाल का भजन बनाया है,
और यु टूब पर जिसने भी गया है बहुत सुन्दर है, ढोलक भी बहुत गजब कि है ,

में इस लिए बता सकता हूँ कि मैं भी भजन गायक व् कथा वाचक हूँ. ताल, सुर , भाव खुद बेशक कम हों पर पहचान तो जाता ही हूँ.

सबको साधुवाद है .

किसी तरह यु टूब में चित्र भी दाल सकते होते तो आनंद और बढ़ जाता.

दासानुदास
अशोक गुप्ता, दिल्ली

vandan gupta said...

वाह आनन्द आ गया इस मधुर मीठी ठिठोली पर्।

Shikha Kaushik said...

ashok ji v vandna ji -bahut bahut dhanyvad .Y TUBE par ise maine hi gaya hai .choonki main hi baja rahi hun is karan chitr nahi dal paai .protsahan hetu hardik dhanyvad .

Shri Sitaram Rasoi said...

बहुत मधुर गीत है, मीरा की याद आ गई।

ओम

Shri Sitaram Rasoi said...

बहुत मधुर गीत है, मीरा की याद आ गई।

ओम