Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

27.6.20

लड़कियों सावधान! जाब के चक्कर में कहीं प्रॉस्टीट्यूट न बन जाएं...




लॉकडाउन के चलते ऑनलाइन जिस्मफ़रोशी के धंधे ने ज़बरदस्त तेज़ी पकड़ी है। नई-नई ID's के ज़रिए यह काम धड़ल्ले से किया जा रहा है। ऐसी ही एक ID हमको मिली है। जिसमें जिस्मफ़रोशी को "नौकरी" बताया गया है। ID में अन्य कोई जानकारी नहीं डाली गई है। लेकिन पोस्ट में दो फ़ोन नंबर दिए गये हैं। जिसकी ट्रू कॉलर में जानकारी "बॉय जॉब और इंडियन जॉब" शो कर रहा है। ज़ाहिर है यह नंबर भी फ़ेक ID के ज़रिए निकलवाए गए होंगे। यानी इनको ट्रैस करना मुश्किल होगा। ख़ैर इन नंबर पर बक़ायदा whatsapp एकाउंट भी मैनेज हो रहा है। ताकि डील की जा सके।

वर्तमान में यह काम जिस बेख़ौफ़ अन्दाज़ में किया जा रहा है वह चिंता का सबब है। क्योंकि अपने पोस्ट में यह एस्कॉट सर्विस की डिटेल के साथ लड़कियों की फ़ोटो भी पोस्ट करते हैं। यानी किस लड़की को कौन "प्रॉस्टीट्यूट" बताकर किसको फ़ॉर्वर्ड कर रहा है यह उस लड़की को भी नहीं पता होता। बहरहाल यह फ़ोटोज या तो किसी साइट से निकाली होती है या फिर सोशल मीडिया में जिन लड़कियों ने अपनी फ़ोटो "पब्लिकली" पोस्ट की होती है, वह होती है। सोशल मीडिया सेंसेशन बनने और चंद लाईक बटोरने की चाहत में लड़कियाँ अक्सर ऐसा करती हैं और यहीं वो सबसे बड़ी गलती करती हैं।

अमूमन फ़्रेंड सजेशन में किसी लड़की की ID और खूबसूरत फ़ोटो देखकर हम बिना प्रोफ़ाइल पर गए उसे एड की रिक्वेस्ट सेंड कर देते हैं। यही वजह है कि ऐसी id या पेज से जुड़े लोगों की संख्या दोगुनी-चौगुनी होती है। इन लोगों से संपर्क करने पर यह आपको रेट के साथ लड़की की फ़ोटो दिखाते हैं। लेकिन ज़रूरी नहीं की वो लड़की "प्रॉस्फ़ोटीट्यूट" हो। फोटो दिखाकर आपसे 50% एडवांस पे करने बोला जाता है। यदि आप बस फ़ोटो देखकर पे कर देते हैं तो फँस जाते हैं।

ऐसा ही एक मामला 2013 में सामने आया था। जहां गुडग़ांव कॉल गर्ल्स नाम से सोशल मीडिया पेज चलाया जा रहा था जिसमें क़रीब 4 हज़ार लोग जुड़े थे। इनमें से 670 मेंबर पूरी तरह एक्टिव थे और कमेंट करते रहते थे। यहाँ भी लड़कियों की फोटोज की भरमार थी।

आपको बता दें कि 2012 में भी गुड़गाँव में कुल 12 सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया गया था। और क़रीब 37 कॉलगर्ल्स को गिरफ्तार किया गयाथा। ये सभी रैकेट पॉश इलाकों में बने होटलों व गेस्ट हाउसों में चल रहे थे। बहरहाल जिस्मफरोशी धंधे के पर्दाफाश के बाद इममोरल ट्रैफिकिंग एक्ट की धारा 3,4,5,6,7 के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है। ये सभी धाराएं गैर जमानती हैं। अदालत द्वारा इस अपराध में लिप्त लोगों को अधिकतम सात साल तक की सजा सुनाई जा सकती है। बावजूद इसके रैकेट चलाने वाले कोई नया तरीक़ा इजाद कर ही लेते हैं।


आशीष चौकसे

पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और ब्लॉगर

No comments: