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17.11.10

betiyon ko bechara mat banaiye !

''हिंदुस्तान 'दैनिक समाचार-पत्र के १० नवम्बर  के अंक में ''दहेज़ में कार मांगने पर दुल्हन के पिता को हार्ट अटेक  ; मौत'' की खबर पढ़कर आँखे नाम हो गयी. बेटी की बारात २३ नवम्बर को आनी  थी .दुल्हन के पिता कुछ दिन पहले सगाई की रस्म अदा कर आये थे.शादी में ५१ हजार की नकदी के अलावा; बाइक और फर्नीचर देना तय किया गया था . लड़के वालों ने फोन पर धमकी दे दी क़ि ' यदि दहेज़ में कार देनी है तो बरात आएगी वर्ना रिश्ता कैसिल   समझो '. समझ में नहीं आता विवाह जैसे पवित्र संस्कार को ''ब्लैकमेलिंग '' बनाने वाले ऐसे दानवों के आगे लड़की क़ा पिता कब तक झुकता रहेगा.अनुमान कीजिये उस पुत्री के ह्रदय की व्यथा क़ा जो जीवन भर शायद इस अपराध-बोध  से न निकल पायेगी क़ि उसके कारण उसके पिता की जान चली गयी .होना तो यह चाहिए था क़ि जब वर-पक्ष  ऐसी ''ब्लैकमेलिंग ' '' पर उतर आये तो लड़की क़ा पिता कहे क़ि ''अच्छा हुआ विवाह पूर्व ही तुमने मुझे यह दानवी रूप दिखा दिया;मेरी बेटी क़ा जीवन अभिशप्त होने से बच गया''.पर .....ऐसा होने में अभी कितना समय लगेगा ?कुछ कहा नहीं जा सकता . मै तो बस इतना कहना चाहूंगी --
                  ''बेटियों को इतना भी हीन मत बनाइये;
                 क़ि विधाता भी सौ  बार सोचे इन्हें पैदा करने से पहले. 

1 comment:

shalini kaushik said...

matra soch ka antar hai.aaj dekha jaye to bechare beton ke maa-baap hain.betiyon ke maa-baap to keval unke vivah par yatna jhelte hain jabki beton ke maa-baap to sari umra yatna jhelte hain.isliye main lekhika ki bat se sahmat hote hue bas yahi kahoongi ki apni soch ko badaliye.