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30.9.11

बुद्धिवादी सलीब

* [कविता ]
जब तुम खुद अपनी मूर्खताएँ
जीना बंद कर दोगे
तब हम तुम्हारी मूर्खताएं जियेगे
जब हिन्दू मूर्तिपूजा बंद कर देगा
आर्य समाजी यज्ञ करना बंद कर देंगे
बौद्ध बुद्ध को , जैन अपने तीर्थंकरों की
बात नहीं मानेंगे ,
ईसाई यीशु को परमात्मा पुत्र और
मुस्लिम मोहम्मद को सन्देश वाहक
मानना बंद कर देंगे ,
तब मैं यह सब , इन सबको
मानना शुरू कर दूंगा ,
मैं इनमे से किसी को समाप्त
होने नहीं दूंगा , अपने धरोहर को ज़िदा ,
सुरक्षित रखने ज़िम्मा मै उठाउँगा,
तुम्हारा सलीब मैं ढोऊंगा ।
तुम चलो अपने रास्ते
तुम बुद्धिवादी बनने में भय खाओ ,
संकोच करो , कहीं कुछ भी
बिगड़ने पायेगा , निश्चिन्त - बेफिक्र रहो । #

2 comments:

Anonymous said...

Tum bhaukna kab band karoge.

Ugra Nath Nagrik said...

The best comment and advice I have received yet. I am seeking others' view and referendum on this matter. Thanks.