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17.7.08

कन्या भ्रूण हत्या पर

वर्तमान में समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसा जघन्य अपराध लगातार हो रहा है. सरकार, समाजसेवी संस्थाएं आदि अपने-अपने स्तर पर इस बुराई को दूर करने का प्रयास कर रहे है. इसके बाद भी भ्रूण लिंग की जाँच हो रही है, लड़की के होने पर उसकी गर्भ में ह्त्या हो रही है। बचाव के इन प्रयासों के बीच कुछ नारियों ने एक नया सवाल खड़ा कर पूरे मुद्दे को अलग दिशा में ले जाने का काम किया. इन महिलाओं का सवाल है की वे लड़की नहीं चाहतीं क्योंकि उनके परिवार में पहले से दो या तीन लड़कियां हैं। ऐसे में या तो सरकार उनको लिंग परीक्षण एवं चयन की आजादी दे. यदि सरकार चाहती है कि भ्रूण में कन्या की हत्या न हो तो वो उस लड़की के पैदा होने के बाद उस बच्ची की देखभाल की जिम्मेवारी ले. इन महिलाओं का तर्क है कि कितने और किन बच्चों को जन्मना है इस बात की आज़ादी महिलाओं को होनी चाहिए। आख़िर वे ही गर्भ में बच्चे को पालती हैं. बहस का मुद्दा ये है कि क्या वास्तव में उन परिवारों को लिंग जाँच या लिंग चयन की आज़ादी होनी चाहिए जिनके पहिले से एक से अधिक लड़कियां हैं?=================================================क्या महिलाओं को गर्भ धारण करने की शक्ति के कारण इस बात की आज़ादी होनी चाहिए कि वे किसे जन्म देना चाहती हैं? ये सवाल कपोल-कल्पित नहीं, फील्ड में काम करने के बाद मिले हैं। ऐसे एक नहीं अनेक सवाल हैं बस बहस इस बात पर है कि क्या पारिवारिक स्थिति हमें भ्रूण लिंग जांच, लिंग चयन या भ्रूण हत्या (गर्भपात) की आज़ादी देती है या इस बात पर आज़ादी मिलनी चाहिए? ===================================================आइये बनिए समाज का अहम् हिस्सा, साथ में इस बहस का हिस्सा. भेजिए अपने विचार dr.kumarendra@gmail.com ये तो बहस की शरुआत है.............कहाँ तक जायेगी पता नहीं।

4 comments:

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

स्त्री-पुरुष मुद्दा पुराना हो गया है जो समस्या है इसके बीच में यानि लैंगिक विकलांग लोगों की समस्या यानि मनीषा दीदी जैसे लोग उन पर चर्चा और बहस करके नतीजे पर पहुंचना चाहिये.....

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

Doctor saahab,

kinki baat kar rahe ho or kis se, samaj ke un pairokaar se jo mudda banana jaante hain apne swarth ke liye or uska upyog apne hit ke liye. mujhe lagta hai ki in stri-purush vishyak charcha hi bemaani hai kyoun ki majaj ye apne swarth ki nishani hai. samaaj se kisi ko sarokaar nahi samajik jimmedaari kiski ye inhe pata nahi magar samaj ki samasya par ray jaroor denge.
ese bemel behisaab begairat namakoolon ko main lanat malanat bhejta hoon jo be sir pair ki baat ko charcha ka vishay banana chahta hai.

jay jay bhadas

हिन्दी साहित्य सभा said...

हमें भी जानकारी भेंजे। प्रकाशनार्थ। - शम्भु चौधरी

Anonymous said...

a son is a son till he is not married but a daughter is a daughter through out her life. today in no field girls are inferior to boys instead they r one step ahead therefore save girls.they are the one 2 take the generation ahead