दो दिनों में उन्होंने पुरे हिन्दुस्तानको देहला कर रख दिया । परसों बंगलोर में ९ और कल अहमदाबाद में २० धमाकों ने पुरे देश की सुरक्षा की तमाम दलीलों की पोल खोल कर रख दी । लेकिन शायद हमारे देश के नेताओं के दलगत हित अभी भी देश हित के उपर हें और आतंकवादियों को उन्हें देश हित के बारे में सोचने के लिए मजबूर करने हेतु अभी और विस्फोट करने की आवश्यकता हे ।
देश की कांग्रेस सरकार(माफ़ कीजिये केन्द्र सरकार ) ने अपनी नीचता दिखाते हुए एक बार फ़िर इन विस्फोटों को भाजपा का (माफ़ कीजिये राज्य सरकारों का ) आंतरिक मामला बताया हे और वही रटारटाया वाक्य दोहराया हे की राज्यों ने इंटेलिजेंस सुचना को महत्व नही दिया ।
लेकिन क्या देश की सरकार जनता को सुरक्षा का भरोसा इस तरह देगी ? विस्फोट भले किसी ने किए हो कम से कम देश की सरकार को इस समय तो दलगत राजनीती से उपर उठकर कुछ ऐसा कहना और करना चाहिए जिससे जनता को इस मुश्किल घड़ी में राहत महसूस हो, ना की देश की गन्दी राजनीती की तस्वीर सामने आए ।
क्या इन सब से यह नहीं लगता की देश राम भरोसे (राज्यों की भाजपा सरकारों के ) चल रहा हे न की भारत सरकार के ।
हे राम ! ?
27.7.08
हे राम !
Labels: मेरी बकवास मेरी भड़ास- अरुण जैन
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3 comments:
यही मौका है जब चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी हमारी कमज़ोरी का फायदा उठा सकते हैं। अभी तक तो सिर्फ थोड़ा सा सिक्किम, अरुणाचल, और कश्मीर छीना है। अगर आज की तारीख में इन दोनों ने मिलकर हमपर हमला किया तो २ दिन में पूरा भारत दुनिया के नक्शे से साफ हो जायेगा। राजनेता सबसे पहले अपने-अपने जेट निकालकर चंपत हो लेंगे। इसी दिन के लिये गोलियां खायीं थी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने? ये भी देखें।
गुरु,
किस राम कि बात करते हो, जिस राम ने अपनी बीवी के साथ सबसे ज्यादा अन्याय किये हों उसके, माँ सीता के इस बेटे को राम राज्य और राम के नाम पर ही आपत्ति है,
रही बात विष्फोट कि तो ये निंदनीय है और तमाम भारतवासी को एकजुटता के साथ इसका सामना करना होगा ना कि नेताओं के ऊपर आरोप प्रत्यारोप करके क्यूंकि नेता चाहे कोंग्रेसी हों या भाजपा सभी ससुरे एक ही तेल से नहाए हुए हैं, और इन्ही चूतियों ने हमारे देश का बंटाधार भी कर रखा है, बस हमारी जनता अपनी चुतियापा को छोरे और देश हित देखे.
जय जय भड़ास
आपका प्रयास सराहनीय है
पर ब्लॉग पर प्रकाशित समाचार पर कोई कार्यवाही कराने का जरिया नहीं होता है, जैसे समाचार पत्र की कटिंग किसी अधिकारी या मंत्री को भेजी जा सकती है या टीवी तो अधिकारी व मंत्री देखते ही हैं । पर ब्लॉग तो वे पढते नहीं और पढते हों भी तो कुछ करते नहीं । इसका कोई उपाय आप लोग निकालें तो बात बने ।
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