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14.2.09

और इस बार जूते की शिकार बनी "अरुंधती रॉय"

जूते की तीसरी शिकार बनी "अरुंधती राय".
और चल गया सैंडल ,इस बार निशाना बनी अरुंधती रॉय, विश्व विख्यात लेखिका और बुकर प्राइज़ से सम्मानित अरुंधती रॉय।कल दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी में AISA द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अरुंधती राय को जूते खाने वालों की पंक्ति में शुमार होना पड़ा।शुक्रवार सुबह जब अरुंधती राय दू पहुँची तो उन्हें कार्यक्रम में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।" युवा " नाम से बैनर लिए कुछ विद्यार्थिओं ने उनका जमकर विरोध किया और नारेबाजी की। YUVA- yoth unity for vibrant action। का विरोध मुख्यतः पिंक चड्डी के खिलाफ था।
उन्होंने अरुंधती रॉय के उस बयान का पुरजोर खंडन किया जिसमे उन्होनो कहा था की कश्मीर , पाकिस्तान को दे देना चाहिए। अजमल कसाब के मामले पे उनकी की गई टिपण्णी से भी युवा के कार्यकर्ता नाराज़ दिखे। उन्होंने विवेकानान्द मूर्ति के सामने ऐसे देशद्रोही का बैठना गंवारा नही था। ख़बर ये भी है की उस जूते की नीलामी की जायेगी।प्रस्तुत है इस link पर जारी ख़बर ......
http://www.expressindia.com/latest-news/du-battleground-for-freedom-vs-culture/423424/New Delhi With Valentine’s Day this year turning into culture battle of sorts, the Vivekananda statue area at the DU Arts Faculty turned the into a battleground fomenting conflicting views on “Indian Culture”, separated by a thin line of policemen। A protest against ‘moral policing’, called by the All-India Students Association (AISA) and the All-India Progressive Women’s Association (AIPWA) was matched with sloganeering by the BJP student outfit, Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP), on Friday afternoon।While the AISA protest, “Love in Our Times” was a series of poetry readings and discussions on the concept of love and sexuality, ABVP protesters attacked the concept of Valentines Day। A third protest by the Youth Unity for Vibrant Action (YUVA), also made a brief appearance, with slogans shouted against the overt ‘sexualisation’ and ‘politicisation’ of V Day celebrations। “We condemn the actions of the Sri Ram Sene, but why are people implying that to be modern, a woman has to be overtly sexual?” said YUVA member Beauty Kumari Singh from Jamia। Writer Rajendra Yadav, present on the occasion, said: “Love is a rebellion against everything। Why should we carry around the burden of a 5000-year old history? Liberation of thought is important to grow।”ABVP members, meanwhile, questioned the credentials of writer-activist Arundhati Roy, who was invited by the AISA to speak at the gathering।“If they can insult the dignity of Indian women by politicising something that should be kept under wraps, Indian women will send them chunris to cover up,” said an activist।

2 comments:

यशवंत सिंह yashwant singh said...

अरुंधति राय पर जूते फेंकने की घटना की मैं कड़ी निंदा करता हूं। इस लोकतांत्रिक देश में सभी को अपनी बात कहने का हक है। ऐसे में किसी को अपनी बात कहने से रोकना और जूते फेंकना फासिस्ट मानसिकता का परिचायक है।

यशवंत

Rajendra said...

juta to juta aise desh drohiyon ka gala kat dena chahiye.ya phir kam se kam des ki nagrikta samapt karke des se to bhi nikal dena chahiye.