11.2.10
खबरचियो की खराब खबर...
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shyam parmar
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20.4.09
बाल हक के लिए फोटोग्राफी मंच
http://www.crykedost.blogspot.com
मुंबई। ‘चाईल्ड राईटस एण्ड यू’ ने फोटो और उसके पीछे छिपी कहानियों को बाल-हक अभियान से जोड़ने के लिए फोटोग्राफी मंच बनाया है जिसमें इस क्षेत्र के पेशेवर और शौकिया फोटोग्राफर शामिल होंगे. इस दिशा में दिलचस्पी रखने वाले हर फोटोग्राफर को कार्यशाला में आने का मौका मिलेगा. हर चुनिंदा फोटोग्राफ मीडिया सामग्री के लिहाज से अहम होगा. फोटोग्राफी के आधार पर लेख, फीचर और कविताएं लिखे जा सकते हैं. इस तरह फोटोग्राफी को प्रचार योजनाओं का हिस्सा मानकर ज्यादा से ज्यादा असरदार बनाया जा सकेगा.‘वालिन्टियर विभाग’ की हावोवी वाडिया ने बताया कि- ‘‘हम ऐसे समूह बना रहे हैं जहां लोग अपने फोटाग्राफी के हुनर को बच्चों की स्थिति दर्शाने में इस्तेमाल करें. इसी कोशिश के तहत एक ऑनलाइन फोरम भी बनाया जाएगा. इसमें फोटो और उससे जुड़ी आलोचना, टिप्पणी, शूटिंग के अनुभव और मुद्दों पर बातचीत की जाएगी.’’
फिलहाल देश के 6 पेशेवर फोटोग्राफर सैमित्र भट्टाचार्य, सौमिक कर, राहुल चिटेल्ला, फ्रेडरिकनोरोन्हा, अतुल लोके, विद्या कुलकर्णी और निवेदन मंगलेश ने जरूरी संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी ली है. सैमित्र भट्टाचार्य ने बताया कि- ‘‘मैं इस क्षेत्र में काफी वक्त से काम कर रहा हूं लेकिन इस तरह की पहल को कभी होते नहीं देखा. यह मंच शौकिया फोटोग्राफर को भी जगह दे रहा है. इससे जुड़ना सभी के लिए नया अनुभव होगा. जल्दी ही अच्छे नतीजे मिलेंगे. ’’
सौमिक कर के मुताबिक- ‘‘जो बात एक तस्वीर कहती है वह हजार शब्द नहीं कह पाते. कैमरा लोगो के जज्बात को ज्यों का त्यों कैद करता है. वह जन-जन तक पहुंचने का आसान रास्ता भी है. मीडिया के इस हथियार को अलग-अलग ढ़ंग से इस्तेमाल किया जाता है. कई फोटोग्राफर अपने हुनर से अंधियारी सच्चाईयों को रोशन करते हैं. इनमें से कुछ फोटोग्राफर बच्चों की बेहतर दुनिया बनाने में भरोसा रखते होंगे. हमें ऐसे ही दोस्तों की तलाश है.’’
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CRY के दोस्त
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बच्चियों के लिए माइक्रोसाइट
यह माइक्रोसाइट लिंग-अनुपात में असंतुलन की वजह और बच्चियों के प्रति सामाजिक धारणा को समझने में मदद करेगी. भारत में 6-14 साल तक के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्राप्त है. इसके बावजदू 51 प्रतिशत लड़िकयां आठवीं कक्षा तक पहुचंते-पहचुंते स्कूल जाना बंद कर देती हैं.
सर्वेक्षणों से निकले ज्यादातर तथ्यों में भी लडक़ों के मुकाबले लड़िकयों की हालत बदतर पायी गई है। ‘चाईल्ड राईटस एण्ड यू’ से संगीता कपिला ने बताया कि- ‘‘इस गैरबराबरी को बच्चियों की कमी नही बल्कि उनके खिलाफ मौजदू स्थितियों के तौर पर देखा जाना चाहिए. अगर लडक़ी है तो उसे ऐसा ही होने चाहिए, इस प्रकार की बातें उसके सुधार की राह में बाधाएं बनती हैं. यदि हर कोई अपनी लडक़ी को मनमर्जी से जीने की आजादी दे तो उसके जीवन में स्थायी बदलाव लाया जा सकेगा.’’ ‘चाईल्ड राईटस एण्ड यू’ के बारे में- संस्था 2006-07 में 5250 गांवो और बस्तियों के 497,343 बच्चों के साथ जुडी। इस दौरान संस्था ने लोगों के साथ मिलकर बंद पड़े 143 शासकीय प्राइमरी स्कूलों को दोबारा चालू किया. संस्था ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार जोर दिया. इसका नतीजा ही है कि 192 शासकीय प्राइमरी स्कूलों में 1 भी बच्चा ड्रापआउट नहीं हो सका. संस्था ने 317 गांवों की पंचायत शिक्षा समितियों को सक्रिय बनाया और 22,736 बच्चों को प्राइमरी स्कूलों तक लाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा.
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CRY के दोस्त
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28.3.09
प्रभात खबर के सभी संस्करणों में 'भड़ास4मीडिया' बना है बाटम
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यशवंत सिंह yashwant singh
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17.6.08
Owner's side said there should be no Interim Relief
June 16, 2008
Dear friends,
The hearing for recommending the rates of Interim Relief were held for two days by the Wage Boards and at the end of the hearing proposals for the quantum of Interim Relief were made but no decision could be arrived at. The Chairman adjourned the meeting and the declared that the next meeting would be held after 15 days.
The employee's side proposed 65% of the basic pay, and the owner's side said there should be no Interim Relief but a proposal for 25% was brought up by the member secretary and was supported by another independent member.
Thus, therefore there are three proposals before the board. An informal attempt for an agreement was made from the employees' side but the chairman was keen on postponing the meeting for two weeks. The matter rests there.
As for as NUJ(I) is concerned it made very impressive power point presentation through a team of Shri Rajendra Prabhu and Shri Ashok Malik. No other organization before the board presented such a detailed and well documented case.
This is all for your information and sharing it with other friends.
With best wishes
(Dr N K Trikha)
In charge, International Affairs, NUJ(I) &
Member, Wage Board for Working Journalists
(भड़ास के लिए आई प्रेस विज्ञप्ति ताकि देश भर के सभी पत्रकार इस मामले के लैटेस्ट अपडेट से अवगत रहें....यशवंत)
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यशवंत सिंह yashwant singh
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9.6.08
पति की शामत आई
राजस्थान विश्वविद्यालय की लक्ष्मीबाई छात्रावास की लडकियां आजकल वास्तव में अपने हास्टल के नाम को सार्थक करते हुए लक्षमीबाई बनी हुई है। मीडिया को इनका सपोर्ट मिल गया है। बस क्या था आजकल जयपुर के अखबारों में छाई हुई है।
वार्डन ने घर पर ताला लगाने पर लडकियों के खिलाफ शिकायत क्या की। इन लडकियों ने इसका जीना हराम कर दिया। बस फिर क्या था वार्डन के पति की शामत आ गई। छात्राओं ने आरोप लगा दिया कि वार्डन के पति रात को अघोवस्त्र में घूमते रहते है। नशा करते है। पति-पत्नी रात को झगड़ा करते है जिससे छात्राओं की पढ़ाई नहीं हो पाती है।
अब वार्डन के पति बेचारे सफाई देते फिर रहे है। लड़कियां है कि मानती नहीं।
पत्नी जब वार्डन बन कर आई थी तो काफी खुश थे कि कृष्ण कन्हैया बन कर गोपियों में रहेंगे पर अब ये ही गोपियां उनके लिए झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बनी हुई है उन्हें अपने बचाव का तरीका भी नहीं मिल पा रहा है।
एक पाठक
जयपुर से भडास के लिए
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यशवंत सिंह yashwant singh
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30.5.08
वरिष्ठ पत्रकार राजेश माथुर का निधन
68 वषीय माथुर को पिछले कुछ समय से फेफड़ों में तकलीफ थी। उनके परिवार में दो पुत्र व एक पुत्री है।
20 जनवरी 1940 को उज्जैन में जन्मे राजेश माथुर ने दैनिक नवयुग से पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। 1962 से 1992 तक वे राजस्थान पत्रिका में रहे। इस दौरान उन्होंने मिडलची के नाम से `मझधार में´ कॉलम लिखा। मध्यमवर्ग की समस्याओं पर माथुर का यह कॉलम व्यंग्य पर आधारित था। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में माथुर की कई व्यंग्य रचनाएं प्रकाशित हुई। माथुर को पत्रकारिता के लिए भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार भी मिला।
भड़ास की तरफ से राजेश जी को श्रद्धांजलि।
(साभारः http://shuruwat.blogspot.com/)
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यशवंत सिंह yashwant singh
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11.5.08
क्या यही खबर है..............................
लानत मलानत ऐसे समाज के, लोकतंत्र के टूटे हुए पाये की।
पत्रकारिता और एक्सक्लूसिव के सचित्र उदाहरण ऊपर हैं. अब आप ही बताइए इन्हें लानत मलानत ना दूं तो क्या करूं.
जय जय भडास.
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1.5.08
और पत्रिकाओं में नंबर वन का ताज बरकरार रखा सरस सलिल ने
Top 10 magazines
Position Name Language Total readership
1 Saras Salil Hindi 98 lakh
2 Grih Shobha Hindi 76 lakh
3-4 Kumudam and Kungumam Tamil 74 lakh
5 India Today English 69 lakh
6 India Today Hindi 67 lakh
7 Vanitha Malayalam 60 lakh
8 Meri Saheli Hindi 59 lakh
9 Ananda Vikatan Tamil 56 lakh
10 Cricket Samrat Hindi 52 lakh
((उपरोक्त टाप टेन सभी कैटगरी के मैग्जीनों को शामिल करके हैं। इसमें साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक...तीनों तरह की मैग्जीन हैं))
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अब आइए मैग्जीन सेक्शन के आंकड़ों को अलग-अलग देखें। मतलब, टाप टेन साप्ताहिक कौन हैं, टाप टेन पाक्षिक कौन हैं, टाप टेन मासिक कौन हैं...कौन चढ़ा, कौन गिरा.....इसके लिए नीचे दो विश्लेषण हैं, दुर्भाग्य से ये अंग्रेजी में हैं क्योंकि ये सब काम अभी तक अंग्रेजी में ही होते आए हैं, उम्मीद करते हैं आगे से यह सब हिंदी में भी होने लगेगा.....
1..........
Saras Salil retains its No. 1 position amongst the magazines
...........
Saras Salil, the Hindi fortnightly, with a total readership of 98 lakh, is at No. 1 position amongst all the magazines. Grih Shobha, Hindi monthly, with a total readership of 76 lakh stands at No. 2 position. Kumudam and Kungumam, the two Tamil weeklies, with a total readership of 74 lakh each, share the No. 3 position.
India Today, with a total readership of 69 lakh, is the only English magazine to make it to the top 10 list in the magazine section. It stands at No. 5 position.
India Today Hindi, with a total readership of 67 lakh, is at the No. 6 position. Vanitha, the Malayalam fortnightly, with a readership of 60 lakh is at the No. 7 position. Meri Saheli, the Hindi monthly, with a readership of 59 lakh, is at the No. 8 position. Ananda Vikatan, the Tamil weekly with a total readership of 56 lakh , stands at the No. 9 position. Cricket Samrat, the Hindi monthly, with a total readership of 52 lakh, stands at the tenth position.
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2...........
IRS 2008 R1: Saras Salil continues its lead in the overall magazine genre
............
According to the Indian Readership Survey (IRS) 2008 Round 1, the magazine genre is dominated by Hindi and other vernacular publications, with India Today being the only English magazine to make it to the top 10 list. In fact, five of the top 10 magazines are in Hindi language.
Hindi fortnightly Saras Salil leads in the overall magazine genre with a total readership of 98 lakh, followed by Hindi monthly Grih Shobha with a total readership of 76 lakh. Tamil weeklies Kumudam and Kungumam share the No. 3 position with a total readership of 74 lakh each. India Today, the only English magazine to make it to the top 10 list, is at No. 5 with a total readership of 69 lakh.
India Today Hindi takes the sixth slot with a total readership of 67 lakh. Malayalam fortnightly Vanitha follows with a readership of 60 lakh. Hindi monthly Meri Saheli is at No. 8 with a readership of 59 lakh. Tamil weekly Ananda Vikatan is at No. 9 with a total readership of 56 lakh, while Hindi monthly Cricket Samrat is in the tenth slot with a total readership of 52 lakh.
The Media Research Users’ Council (MRUC) has further broken up the data on the basis of the periodicity of the magazines.
The top 10 weeklies see Tamil publication Kungumam lead the chart with a total readership of 74 lakh. India Today English and India Today Hindi follow with readerships of 69 lakh and 67 lakh, respectively.
Ananda Vikatan (Tamil) has a total readership of 56 lakh; Tamil bi-weekly Junior Vikatan has a total readership of 36 lakh; Balarama Malayalam has a total readership of 35 lakh; Swati Sapari Vara Patrika (Telugu) has a total readership of 28 lakh; Malayala Manorama has a total readership of 28 lakh; Sadin (Assamese) has a total readership of 24 lakh; while English weekly Outlook takes the tenth position with a total readership of 19 lakh.
In the top 10 fortnightlies’ list, Hindi publication Saras Salil leads with a total readership of 98 lakh, followed by Vanitha (Malayalam) with a readership of 60 lakh. Champak (Hindi) is at 41 lakh, and Sarita is at 37 lakh. Tamil publication Aval Vikatan takes the fifth position with a total readership of 22 lakh. Bengali publications Sananda (21 lakh) and Anandalok (17 lakh) take the sixth and seventh slots, respectively. Hindi fortnightly Balhans follows at 16 lakh, while English magazines Femina and Business Today have a total readership of 14 lakh each.
Among the top 10 monthlies, the top four positions are taken by Hindi publications – Grih Shobha leads with a total readership of 76 lakh, followed by Meri Saheli (59 lakh), Cricket Samrat (52 lakh) and Grehlakshmi (49 lakh). English magazine Readers’ Digest is at No. 5 with a total readership of 45 lakh.
Hindi publication Pratiyogita Darpan takes the sixth slot with a total readership of 42 lakh. General Knowledge Today is at 39 lakh; Manohar Kahaniyan is at 37 lakh; Filmfare is at 35 lakh; and Competition Success Review is at 31 lakh.
(पहली खबर इंडियनमीडियाआब्जरवर.काम से और दूसरी खबर एक्सचेंजफारमीडिया.काम से साभार)
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यशवंत सिंह yashwant singh
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दैनिक जागरण, तुम्हें सलाम !
हिंदी के टाप टेन अखबार और उनकी प्रसार संख्या
1 दैनिक जागरण (566 lakh)
2 दैनिक भास्कर (319 lakh)
3 अमर उजाला (296 lakh)
4 हिंदुस्तान (252 lakh)
5 राजस्थान पत्रिका (137 lakh)
6 पंजाब केसरी (111 lakh)
7 आज (74 lakh)
8 नवभारत टाइम्स (52 lakh)
9 नवभारत (52 lakh)
10 प्रभात खबर (50 lakh)
अंग्रेजी के आठ बड़े अखबार और उनकी प्रसार संख्या
1 Times of India 136 lakh
2 Hindustan Times 63 lakh
3 Hindu 56 lakh
4 Economic Times 20 lakh
5 Indian Express 20 lakh
6 Mid-Day 18 lakh
7 Mumbai Mirror 16 lakh
8 DNA 13 lakh
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(उपरोक्त दोनों आंकड़े आईआरएस 2008, राउंड वन के हैं। आपने एक चीज गौर की, अंग्रेजी के सबसे बड़े अखबार की प्रसार संख्या हिंदी के पांचवें नंबर के अखबार से भी कम है। लानत है अपने हिंदी वालों पर जो इतनी बड़ी संख्या में होते हुए भी इन मुट्ठी भर अंग्रेजी वालों से आतंकित रहते हैं)
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उपरोक्त दोनों खबरें बस कुछ दिन पुरानी है, सभी पत्रकारों को पता भी है, हर जगह छप भी चुकी है, पढ़ी भी जा चुकी है, पर अब तक भड़ास पर नहीं आई। इसकी दो वजह है। एक तो मेरी व्यस्तता और दूसरी अन्य भड़ासियों पर निर्भरता। सोच रहा था कि कोई न कोई भड़ासी पत्रकार बंधु इस खबर को भड़ास पर डाल ही देगा पर किसी ने नहीं डाला।
आईआरएस 2008 राउंड वन के नतीजे आ चुके हैं। और इसमें एक बार फिर दैनिक जागरण देश के सभी तरह के अखबारों, पत्रिकाओं, टैबलायडों में नंबर वन आया है। नंबर वन यह पहली दफे नहीं बल्कि दसवीं दफे आया है। मजेदार यह है कि दैनिक जागरण हर बार अपने दूसरे नंबर के प्रतिद्वंदी दैनिक भास्कर को कहीं ज्यादा अंकों से पीछे कर दे रहा है।
अगर कोई भड़ासी साथी आईआरएस 2008 राउंड वन के नतीजों को विस्तार से इस भड़ास पर डाल दे तो बड़ी कृपा होगी। जैसे मैग्जीन सेक्शन में सरिस सलिल नंबर वन पर है। टाप टेन में कुल 10 मैग्जीन हैं, कौन कौन हैं और इनका कितना प्रसार है, ये भड़ास पर डालना चाहिए। इसी तरह टाप टेन हिंदी अखबारों जिसमें जागरण नंबर वन पर है और प्रभात खबर नंबर 10 पर है, की सूची व उनकी प्रसार संख्या भी भड़ास पर डाली जानी चाहिए। तो कोई है माई का लाल जो इन आंकड़ों को विश्लेषित करके भड़ास पर डाल सके ताकि देश के कोने कोने के पत्रकार बंधु भी अपनी धंधे की दुनिया की हकीकत व तथ्यों को जान सकें।
आइए, इस सर्वे के बारे में दैनिक जागरण ने खुद जो खबर अपनी साइट पर दी है, उसे पढ़ें....
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लगातार दसवीं बार दैनिक जागरण नंबर वन
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नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। दैनिक जागरण माने नंबर 1. अपने सुविज्ञ पाठकों के प्रिय समाचार पत्र ने अद्भुत अभूतपूर्व कीर्तिमान कायम किया है। भारतीय प्रिंट मीडिया के इतिहास में लगातार दसवीं बार पहले स्थान पर बने रहने का रिकार्ड बनाया है दैनिक जागरण ने। ये है पाठकों के प्रति दैनिक जागरण की प्रतिबद्धता और दैनिक जागरण के प्रति पाठकों के विश्वास की बेमिसाल बानगी।
समाचार पत्रों की पाठक संख्या के आंकड़े जुटाने वाली मान्यता प्राप्त अधिकृत संस्था इंडियन रीडरशिप सर्वे [आईआरएस] 2008 राउंड 1 के परिणामों के मुताबिक दैनिक जागरण को पढ़ने वाले पाठकों की संख्या बढ़ कर पांच करोड़ 66 लाख हो गई है। इसके पूर्व जब आईआरएस 2007 राउंड 2 के परिणाम घोषित किये गए थे तो दैनिक जागरण के पाठकों की संख्या पांच करोड़ 36 लाख थी। इन दोनो सर्वे के अंतराल में दैनिक जागरण के पाठकों की संख्या में 30 लाख का इजाफा हुआ है यानी कुल छह प्रतिशत की बढ़ोतरी। जागरण ने अपने मूल पाठकों की थाती तो संभाल कर रखी ही है वहीं अपनी विश्वसनीयता के बूते बड़ी संख्या में नए पाठकों को भी जोड़ा है।
देश के अखबारी जगत के इतिहास में ऐसा पहली बार देखा गया है कि कोई दैनिक समाचार पत्र लगातार दसवीं बार अपनी सर्वोच्चता कायम रखने में कामयाब रहा हो। एक कहावत है कि चोटी पर पहुंचना अगर मुश्किल है तो उस पर लगातार बने रहना नामुमकिन लेकिन दैनिक जागरण ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है।
इंडियन रीडरशिप सर्वे के नतीजों की एक और खास बात ये है कि दैनिक जागरण ने अपने बाद दूसरे नंबर पर आने वाले समाचार पत्र को लगातार और ज्यादा पीछे छोड़ने का सिलसिला कायम रखा है। आईआरएस 2007 राउंड 2 के नतीजों में ये जाहिर हुआ था कि नंबर 1 दैनिक जागरण और दूसरे स्थान पर रहने वाले समाचार पत्र के पाठकों की संख्या के बीच दो करोड़ तीस लाख का अंतर [गैप] था। ताजा सर्वे में अब ये अंतर और बढ़ कर दो करोड़ 50 लाख हो गया है यानी नंबर दो पर आये अखबार के पाठकों की कुल संख्या से दैनिक जागरण के पाठकों की संख्या ढाई करोड़ ज्यादा है।
उल्लेखनीय है कि दैनिक जागरण को मीडिया जगत के बहुमुखी सुपर ब्रांड का अलंकरण भी हासिल है। यह उपलब्धि हासिल करने वाला दैनिक जागरण देश का एकमात्र भाषाई समाचार पत्र है। ब्रांडिंग के क्षेत्र में तमाम आयामों पर खरा उतरने के लिए दैनिक जागरण को पिछले साल 'कंज्यूमर सुपर ब्रांड' सार्टिफिकेट से नवाजा गया था। इस वर्ष अपने पाठकों के इस चहेते अखबार ने 'बिजनेस सुपर ब्रांड' का सार्टिफिकेट भी हासिल करने का गौरव पाया है। इस तरह दैनिक जागरण ने ब्रांडिंग की कसौटी पर भी दोहरी उपलब्धि दर्ज की है।
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और ये दूसरी खबर एक्सचेंजफारमीडिया.काम से.....
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Dainik Jagran continues the lead in Hindi dailies; TOI leads English
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The Media Research Users’ Council (MRUC) has released the data for the Indian Readership Survey (IRS) 2008 Round 1. There aren’t any surprises in the numbers this time as well.
The top 10 Hindi dailies see Dainik Jagran topping the charts again with a total readership of 566 lakh. Dainik Bhaskar follows with a total readership of 319 lakh. Amar Ujala is at No. 3 with a total readership of 296 lakh; Hindustan is on the fourth spot with a total readership of 252 lakh, and Rajasthan Patrika is at No. 5 with a total readership of 137 lakh.
Punjab Kesari, with a total readership of 111 lakh, is in the sixth position, followed by Aj at No. 7 with a total readership of 74 lakh. Navbharat Times shares the eighth position with Navabharat (Mah/Chh), both having a total readership of 52 lakh. Prabhat Khabar is at No. 10 with a total readership of 50 lakh.
The top 10 English dailies see The Times of India lead the charge with a total readership of 136 lakh for all its editions put together. The Hindustan Times follows with a readership of 63 lakh. The Hindu with a total readership of 56 lakh is at No. 3. The Economic Times is the only financial daily to have made it to the top English dailies list with a total readership figure of 20 lakh. It shares the fourth position with The New Indian Express, which too has a total readership figure of 20 lakh. Mid-Day follows at No 6 with a readership of 18 lakh, Mumbai Mirror at No. 7 with a readership of 16 lakh, and DNA at No. 8 with a total readership of 13 lakh.
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यशवंत सिंह yashwant singh
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19.4.08
आप बात बात में लोगों को नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं....(एक मीडियाकर्मी का त्यागपत्र)
विषयः त्याग-पत्र
प्रति,
श्री अरूण आनंद,
कार्यकारी संपादक
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस,
1बी-, रावतुला राम मार्ग,
नई दिल्ली-110022ण्
महाशय,
कल रात दिनांक 10 मार्च 2008 को डेस्क प्रभारी संजीव स्नेही जी का फोन आपके हवाले से आया कि मैंने कहीं अन्य जगह नौकरी कर ली है। उन्होंने आपके हवाले से यह भी कहा कि मैं इस्तीफा दूं। इस बावत मुझे कार्यालय से नोटिस भेजे जाने की भी तैयारी हो रही है। मेरे बीमार पड़ने से और छुट्टी पर जाने से नये लोगों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। संजीव जी से कल रात 10-15 मिनटों की बात के कुछ मुख्य बातों में से यह बातें सार हैं।
बीमार पड़ने पर कुछ दिनों की छुटि्टयां लेकर घर में आराम करने से किसी को नौकरी मिल जाती हो तो मेरे ख्याल से हम और आप सभी बीमार पड़ते रहे हैं। आपको भी कुछ समय पहले कमर में दर्द था और आपने छुट्टी की थी तो क्या आप भी कहीं नौकरी का प्रयास तो नहीं कर रहे थे! कोई पत्रकार इतना संवेदनाविहीन कैसे हो सकता है! खैर, आपने मुझसे इस्तीफे की मांग की है। मैं आपकी इस मांग को पूरा कर रहा हूं और त्याग-पत्र भेज रहा हूं।
मैंने इंडो-एशियन न्यूज सर्विस की हिन्दी सेवा में लगभग सवा तीन महीने काम किए परंतु दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि मुझे इस दौरान कभी भी आपके संस्थान में काम करने का उचित माहौल महसूस नहीं हुआ। हिन्दी सेवा के कार्यकारी संपादक अरूण आनंद को अपने साथ काम करने वाले पत्रकार कर्मचारियों के साथ कभी भी मुफीद (उचित) व्यवहार करते हुए मैंने नहीं पाया। कार्यकारी संपादक का स्वभाव बहुत हद तक व्यापारिक मानसिकता से ग्रस्त है। वह अपने साथ काम करने वालों को एक ग्राहक की तरह देखते हैं और उनसे ऐसा ही वर्ताव करते हैं। उन्हें खबरों की गिनती का बहुत शौक है। आप खबरों की गिनती में विश्वास करते हैं न कि गुणवत्ता में। साक्षात्कार के समय और नियुक्ति के कुछ दिनों बाद तक आप (अरूण आनंद) बहुत ही सहिष्णु बने रहते हैं और कर्मचारियों की नब्ज टटोलते हैं। इस संस्थान की अंग्रेजी सेवा में आपके एक जूनियर साथी की भाषा में कहूं तो कार्यकारी संपादक अपने सामने अपने कर्मचारियों को समर्पित करवाने चाहते हैं। माफ कीजिए, यह सब नौकरीपेशा में एक हदतक सभी को स्वीकार्य होता है लेकिन लंबे समय तक इस गुलाम बनाने की मनोवृत्ति को ढो पाना किसी भी गैरतमंद इंसान के लिए मुिश्कल होता है। इसके बहुत से नजीर माननीय अरूण जी के सेवाकाल में देखने को मिले हैं।
आईएएनएस से मेरी जानकारी में कुछ लोग मेरी नियुक्ति के पहले भी छोड़कर जाते रहे हैं या उन्हें छोड़कर जाने को बाध्य किया जाता रहा है। मेरे इन सवा तीन महीनों के दौरान भी चार लोगों ने इनके व्यवहार के कारण नौकरी छोड़ी है। हालांकि उन्होंने नौकरी छोड़कर जाने की कई घटनाओं के बाद अपनी शैली में परिवर्तन लाया है। यह उनकी जरूरत है। उम्मीद करता हूं कि यह नई शैली उनकी आदतों में शुमार हो जाए। यह दिक्कत श्रीमान कार्यकारी संपादक के अंदर किस कारण विकसित हुआ है, यह तो कोई मनोविश्लेषक ही बता सकता है। कार्यकारी संपादक का कहना है- ‘’journalism should flow in your blood.’’ क्या पत्रकारिता कार्यकारी संपादक की धमनी और िशराओं में बहने लगे तो उनके स्वास्थ्य पर इसका विपरीत असर तो नहीं पड़ेगा।
पत्रकारिता का लेना, देना केवल पैसों, नियुक्ति दे सकने का सामथ्र्य रखने, महज कुछ समर्थ लोगों से अपने संबंध बेहतर बनाकर रखने या खबरों की गिनती रखने से नहीं होता है। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में पत्रकारिता की नींव रखने और उसे सींचने वाले लोगों का मन शायद इन क्षणिक महत्व रखनेवाली बातों में कभी नहीं गया था। पत्रकारिता को सींचने वाले लोगों में संवेदनाएं कूट-कूटकर भरी हुई थीं। कार्यकारी संपादक में इसका सर्वथा अभाव है। हमारे कहने से, लिखने से और संस्थान छोड़ देने से उनका हृदय परिवर्तित हो जाएगा, मैं ऐसा नहीं मानता हूं। माननीय कार्यकारी संपादक को इसके लिए बहुत मेहनत की जरूरत होगी ठीक उसी तरह जिस तरह मुझे अपनी कॉपी बेहतर से बेहतर बनाने के लिए कहा जाता रहा है। शायद इससे भी ज्यादा मेहनत की जरूरत होगी। मैं आपके व्यवहार के कारण बहुत पहले ही संस्थान छोड़ देता लेकिन मैं भागने वालों में से नहीं हूं। मैं आपसे मेेरी अपनी कॉपी के लिए अच्छे रिमार्क्स देने को मजबूर करवाना चाहता था। मेरी कॉपी के लिए आप ‘excelent copy’ कह चुके हैं। मैं अपनी चुनौतियों से पार पा गया हूं। अनुवाद विशेषकर खबरों का मेरे लिए नया काम था। नये काम में समय लगता है, सो मुझे भी लगा।
‘original copy’ आपके हिसाब से मैं बहुत अच्छी लिखता हूं। ऐसा डेस्क प्रभारियों ने भी कई मौकों पर कहा है। खैर, इसके लिए मुझे आपके प्रमाण-पत्र की जरूरत नहीं है। आपके साथ काम करते हुए मुझे दो बड़े संस्थानों ने आईएएनएस से बेहतर पगार और पद की पेशकश की थी लेकिन मैं अपनी चुनौतियों से पीछे नहीं हटना चाहता था। सो, मैंने इन प्रस्तावों को तव्वजो नहीं दी। आपने नियुक्ति के समय senior-sub editior की पेशकश की थी और बाद में जब नियुक्ति पत्र देने की बात आई तब आपने मेरा पद कम करके sub-editor कर दिया। अपनी बात से पीछे हटना आपकी फितरत है। नियुक्ति के समय 10-12 खबरों का अनुवाद तथा 8 घंटे काम करवाने की बात आपने की थी लेकिन दो हफ्तों के बाद आपने अपने काम करवाने की परिभाषा ही बदल डाली और मेरे एक सहकर्मी से कहा-``पत्रकारिता में कार्यालय आने का समय होता है लेकिन कार्यालय से जाने का कोई समय नहीं होता है।´´ मुझे लगता है कि कार्यकारी संपादक को working journalist act जरूर पढ़ लेना चाहिए।
आप बात-बात में लोगों को यह धमकी देते हैं कि यहां से नौकरी से निकाले जाने के बाद कहीं नौकरी नहीं मिलेगी। यह एक किस्म का फतवा है। आपने जिन लोगों को आईएएनएस से बाहर का रास्ता दिखाया है या बाहर का रास्ता देखने को मजबूर किया है, माफ कीजिए वे सारे लोग देश के नामी-गिरामी संस्थानों में अपनी बेहतर सेवा दे रहे हैं। कुछ लोग पत्रकारिता में व्यवहारिक होकर नौकरी खोजकर संस्थान छोड़कर चले गए। मैं नौकरी और भविष्य की चिंता किए बगैर आपकी नौकरी से इस्तीफा दे रहा हूं। पत्रकारिता में कुछ साल या बहुत साल बिताने से पत्रकारिता और मानवीयता की समझ नहीं आ जाती है। जिसको पत्रकारिता और मानवीयता की समझ आनी होती है उसे कुछ समय में ही आ जाती है। शायद मैं अपनी बात आपको समझा पाया हूं। इसी उम्मीद के साथ।
आपका शुभेच्छु
स्वतंत्र मिश्र
11 मार्च 2008
सी-1/118, मुस्कान अपार्टमेंट सेक्टर-17, रोहिणी, दिल्ली-110089, मो,-09868851301
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(कारवां से साभार)
2.3.08
पुण्य प्रसून के सहारा समय छोड़ने के निहितार्थ
पक्की खबर मिली है कि अपने समय के सचेत व तेवरदार पत्रकारों में से एक, मशहूर एंकर और पिछले कई महीनों से सहारा समय न्यूज चैनल के सर्वेसर्वा पुण्य प्रसून वाजपेयी ने इस चैनल को बाय बाय बोल दिया है। इसके पीछे वजह क्या रही? यह तो नहीं पता चल पाया है लेकिन पुण्य प्रसून का जाना उनके चाहने वालों को दुखी कर गया। उनमें मैं भी हूं। फोन पर संक्षिप्त बातचीत में पुण्य प्रसून ने सहारा छोड़ने की खबर की पुष्टि की।
पुण्य प्रसून के चलते पिछले कई महीनों में सहारा समय पर ठीकठाक खबरें, बहस और मुद्दे देखने व सुनने को मिले। अब शायद वो सब न देखने को मिले। कई बार यह होता है कि आप काम तो ठीक से करते हो, मेहनत व विजन से करते हो पर सोकाल्ड टीआरपी की जो महिमा है उसमें दूसरे बाजी मार ले जाते हैं। न्यूज चैनल अब बाजार का हिस्सा हैं, सो उन्हें खबरों से ज्यादा टीआरपी से लेना होता है, गलती बस यही है। तो अगर पुण्य प्रसून जी को टीआरपी के पैमाने पर आंका गया होगा तो हो सकता है कि ढेर सारे छिछोरे चैनल इसमें बाजी मार ले गए हों और उन छिछोरे चैनलों के छिछोरे व रीढ़विहीन मुखिया लोग इसी बात से खुश हो होकर पार्टियां कर रहे हों और अपने चेलों से अपनी पीठ थपथपवा रहे हों कि उनके चैनल की टीआरपी ज्यादा है, लेकिन दरअसल पत्रकारिता के इतिहास में इन छिछोरों का जिक्र किसी हाशिए पर भी नहीं होना है, यह तय है।
अब तो ढेर सारे दर्शकों को यही नहीं पता है कि कुल कितने न्यूज चैनल हिंदी में चल रहे हैं। जो भी न्यूज चैनल खोलिए तो उसमें खबर कम, हल्ला ज्यादा दिखता है। देश की नीति व दशा-दिशा की तस्वीरें कम, खेल व मनोरंजन के विजुअल ज्यादा परोसे जाते हैं। हद तो ये है कि प्राइम टाइम जैसे समय में ढेर सारे कथित बड़े नाम लोगों को चूतिया बनाते हुए सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट व मनोरंजन की खबरों का खामखा हाईप देकर लोगों को बांधे रखने की कोशिश करते हैं।
खैर, यहां न्यूज चैनलों की मीमांसा करने नहीं बैठा हूं बल्कि पुण्य प्रसून वाजपेयी के सहारा समय छोड़ने की जिस खबर का पता चला है, उसे भड़ासियों तक पहुंचाने में लगा हूं। मैं निजी तौर पर पुण्य प्रसून का काफी सम्मान करता हूं। हालांकि उनसे केवल एक दो बार की चलताऊ मुलाकात है, लेकिन वो व्यक्ति आज भी इतनी ऊंचाई पर होने के बावजूद लोगों से जिस सहजता के साथ मिल लेते हैं, बतिया लेते हैं, उनके फोन काल रिसीव कर लेते हैं, अपने विचार व विजन पर अड़े रहते हैं, पत्रकारिता के तेवर को कायम रखने के लिए लड़ते रहते हैं, उससे जाहिर होता है कि इस व्यक्ति के पास अगर कोई कुर्सी न भी हो तो वो उन सभी से बड़ा और सम्मानीय है, जो कुर्सियों के लिए ही जीते मरते हैं और उसको बचाने में अपनी आत्मा की ऐसी तैसी कराते हैं, पत्रकारिता को भरेचौराहे लतियाकर डस्टबिन में फिंकवा देते हैं।
तो भई पुण्य प्रसून जी, हिम्मत न हारिएगा, परेशान मत होइएगा। आप के साथ हम सारे संवेदनशील और सजग लोग हैं जिन्हें वाकई लगता है कि पत्रकारिता कुछ व्यभिचारियों, छिछोरों की रखैल नहीं है बल्कि इस देश की आम जनता की तकलीफों और दशा-दिशाओं को प्रतिध्वनित करने वाला माध्यम है, जिसे आप बखूबी अपने करियर में कायम रखने में, जीते रहने में, आगे ले जाने में कामयाब रहे हैं।
तुच्छताओं के इस दौर में अगर पुण्य प्रसून जैसे लोग हैं, तो उम्मीद की जानी चाहिए कि उन्होंने अगर सहारा समय को बाय बाय कहा है तो जरूर इसके पीछे अपने मूल्यों पर टिके रहने की जंग ही होगी, वरना नौकरी बचाये रखने व चलाये रखने के लिए हजार फंडे होते हैं जिसे पुण्य प्रसून जी भी आजमा सकते थे, पर उन्होंने ऐसा न करके, अपनी सोच व समझ के लिए चैनल को ही बाय बाय कह दिया।
और, अगर कोई व्यक्ति किसी संस्थान में सर्वेसर्वा की हैसियत में काम करता है तो जाहिर है कि वहां उसके विरोधी भी होती हैं, जो तमाम आंय बांय सांय अफवाहें फैलाते हैं। इन लोगों की बातों, अफवाहों पर ध्यान न देकर हम तो इतना ही कहेंगे.....प्रसून बाबू, डटे रहिए। भड़ासी आपके साथ हैं। जनता आपके साथ है। आप जल्द ही अपने तेवर के साथ फिर किसी प्रिंट या इलेक्ट्रानिक के जरिए अपनी उपस्थिति की दस्तक दें, यह अपेक्षा है, यह अनुरोध है। होली जमकर खेलिएगा, हम भी खेलने आएंगे, फाग गाएंगे, चैन के दो चार पल जिएंगे......और फिर चल पड़ेंगे जीवन की जंग में अपने विचार के हथियार और अस्त्र-शस्त्र नुकीले करके, आगे बढ़ने। इसी को तो ज़िंदगी कहते हैं।
जय भड़ास
यशवंत
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यशवंत सिंह yashwant singh
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Labels: अफवाह, इलेक्ट्रानिक मीडिया, खबर, पुण्य प्रसून वाजपेयी, विश्लेषण, सहारा समय
9.2.08
सेल्समैन हो गए हैं आज के पत्रकार !! ...कुछ खबरें
पहले कुछ सूचनाएं, पत्रकारों की आवाजाही से संबंधित....
--भरत कपाड़िया जागरण व टीवी 18 के नए हिंदी बिजनेस डेली के सीईओ व मैनेजिंग एडीटर होंगे। ये खबर एक साइट से चार दिन पहले ही मिली पर इसे डाल नहीं पाया।
--वीर सिंघवी की बेआबरू होकर विदाई तो पुरानी खबर हो गई है पर दूर दराज के भड़ासियों को बता दें कि एक नए न्यूज चैनल को लांच करने की जिम्मेदारी लेकर गए वीर सिंघवी को प्रबंधन ने चैनल लांच से पहले ही बहरिया दिया। बाद में एक प्रेस कांफ्रेंस कर दोनों पक्षों ने इसे सम्मानपूर्ण विदाई और जाने क्या क्या कहकर विवाद शांत करने की कोशिश की पर मार्केट में इससे पहले हल्ला तो फैल ही चुका था।
--दैनिक जागरण, नोएडा में सेंट्रल डेस्क के इंचार्ज विष्णु त्रिपाठी अब तरक्की पाकर सह संपादक बन गए हैं। सीनियर जर्नलिस्ट विष्णु त्रिपाठी इससे पहले आईबीएन 7 व उससे पहले दैनिक जागरण लखनऊ में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।
--पूजा प्रसाद ने आईएनएस छोड़कर अब हिंदी सर्च इंजन और न्यूज पोर्टल रफ्तार डाट काम को बतौर असिस्टेंट कंटेंट एडीटर ज्वाइन कर लिया है।
((उपरोक्त कई सूचनाएं आपमें से कइयों को पता भी होंगी। अगर पत्रकारों की आवाजाही व तरक्की डिमोशन की सूचना आपके पास भी हो तो आप इसे भड़ास पर डायरेक्ट पोस्ट कर सकते हैं। बस ये ध्यान रखें, सूचना पक्की हो और आप अपने ओरिजनल नाम से ही पोस्ट करें।))
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फ्रस्टेशन और उल्लास का मौसम है पत्रकारों के लिए
एक खबर ये है कि इनक्रीमेंट व प्रमोशन के पिछले महीने का रिजल्ट इस महीने आते ही प्रिंट मीडिया जगत में भूचाल आया हुआ है। कोई रो रहा है, कोई गा रहा है, कोई चुपचाप है, कोई स्तब्ध है, कोई शून्य में निहार रहा है, कोई घर बैठ गया है, कोई नये शहरों की यात्रा पर निकल चुका है, कुछ ने पुराने संबंधों को जिंदा करना शुरू कर दिया ....। मतलब, जिसकी जैसी गोटी बैठी, वैसी मुख मुद्रा बनाए है। कई साथियों के फोन मेरे पास आए। दहाड़े मार रहे थे। बास को इतना तेल लगाया लेकिन साले ने क्या रिजल्ट दिया, कुच्छ नहीं पैसा बढ़ा। दो हजार रुपये का बढ़ना भी कोई बढ़ना होता है। फ्रस्टेशन इतना है भाईसाहब की अभी कोई नौकरी मिले तो छोड़ दूं.....। आप अपने में मन में झांकिए, और देखिए। बताइए आप किस स्थिति में है। वैसे, मुझे याद आता है कि इन सब चूतियापों को लेकर पहले मैं भी बहुत पजेसिव हुआ करता था, उसका इतना क्यों बढ़ गया और मेरा इतना क्यों रह गया, उसका पद क्यों बढ़ गया मेरा क्यों नहीं बढ़ा.....पर ये सब चूतियापा है, आपको एक छोटे खांचे, सांचे में सोचने व जीने को मजबूर करने वाला।
क्या आजकल के पत्रकार वाकई सेल्समैन हो गए हैं, जैसा कि प्रभाष जोशी कहते हैं....
आप संपादक हो जाएं या सह संपादक या सहायक संपादक या उप संपादक.....ये शब्द आपके साथ नहीं जाने वाले। कल ही तो दिल्ली पुस्तक मेले में प्रभाष जोशी ने कहा कि आज के पत्रकार सेल्समैन हो गए हैं और मीडिया हाउस पूंजी इकट्ठा करने वाली दुकानें। तो भई, सेल्समैनी में पद व पैसे की मार तो होनी ही चाहिए, इसी के लिए जीना मरना होना चाहिए। .....पर हममें से कई सारे दिल से सेल्समैन नहीं हैं। ऐसे लोगों को ज्यादा कष्ट होता है, कि किस तरह सेल्समैन प्रमोट होकर मैनजर हो रहे हैं और एक असली पत्रकार को चूतिया व स्लो व पिछड़ा बताकर पीछे रहने के लिए, फ्रस्टेट होने के लिए छोड़ दिया जाता है। ऐसे सच्चे दिल पत्रकारों को सलाह है कि वे वाकई इस सेल्समैनी वाली पत्रकारिता को बाय बाय कह दें और जब सेल्समैनी ही करनी है तो अपनी सेल्समैनी करिए, अपना धंधा करिए, अपनी कंपनी खड़ी करिए, अपना कोई काम कीजिए......। जितना पैसा इस वक्त पा रहे हैं, अपने काम को करने में इससे ज्यादा पाएंगे, ये मेरी गारंटी है। चूतियों की फौज में खामखा फ्रस्टेट हो रहे हो। अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे बताओ, मेरे पास तो खुद का कामधाम शुरू करने संबंधी इस वक्त ढेर सारे नुस्खे हैं.....।
याद रखिए, धूमिल की लाइनें हैं जिससे भाव ये निकलता हैं...पार्टनर, अगर ज़िंदगी जीने के पीछे कोई तर्क नहीं है तो रामनामी बेचने और रंडियों की दलाली करने में कोई फर्क नहीं है क्योंकि दोनों से पैसा आता है.....
मतलब, ज़िंदगी के एक-एक दिन किसी तार्किक चूतियापे में नष्ट करते रहने के बजाय ज्यादा अच्छा है भटकिए और भोगिए।
फिर मिलते हैं...
जय भड़ास
यशवंत
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यशवंत सिंह yashwant singh
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18.1.08
बड़ी खबर
अब तक की सबसे बडी खबर यही है की पायल सिंह वाली खबर चलाने वाले टीवी न्यूज चैनल के सभी लोगो को ये बता दिया गया है की पायल सिंह वाली न्यूज़ को ना चलाए।
गलती का पता तो चला ।
आखिरकार हमारा मकसद पूरा हो ही गया।
आप अपनी राय दें।
फिलहाल तो हार गया झूठ फैलाने वाला न्यूज चैनल।
सभी ब्लोगरो को मुबारकबाद।
19.10.07
हिंदी मीडिया: हलचल-हालचाल....पार्ट तीन
-दैनिक जागरण, नोएडा में कार्यरत नीलकमल ने अब नई नौकरी शुरू कर दी है। उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड के नए हिंदी बिजनेस डेली का दामन पकड़ लिया है। वे दैनिक जागरण में जागरण सिटी डेस्क पर कार्यरत थे। उन्हें ताजे उछाल के लिए ढेर सारी बधाई।
-वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान जी को दैनिक जागरण ने तरक्की देकर पूरे ग्रुप का डिप्टी फीचर इंचार्ज बना दिया है। श्री सचान दैनिक जागरण के संपादकीय विभाग के वरिष्ठतम लोगों में से हैं। वे संपादकीय पेज के अलावा सारे फीचर पेजों व साप्ताहिक परिशिष्टों को देखते हैं। राजीव जी को नए दायित्व के लिए भड़ास की ओर से शुभकामनाएं व प्रमोशन के लिए ढेर सारी बधाइयां।
-शंकर सिंह ने जनसत्ता, नई दिल्ली को बाय बाय कह दिया है। उन्होंने नई दिल्ली में ही नवभारत टाइम्स में बतौर सीनियर करेस्पांडेंट काम शुरू कर दिया है। शंकर ने अपना कैरियर पंजाब केसरी, नई दिल्ली से शुरू किया था और बाद में कुछ वर्षों के लिए दैनिक जागरण, मेरठ में कार्यरत रहे। नए संस्थान और नए काम के लिए शंकर को भड़ास की ओर से ढेरों शुभकामनाएं।
-पीयूष मिश्रा का तबादला अमर उजाला, कानपुर से इंपैक्ट, गाजियाबाद कर दिया गया है। उन्होंने कार्यभार संभाल लिया है।
-भरत कपाड़िया जागरण व टीवी 18 के साझे में लांच होने वाले नए हिंदी बिजनेस डेली के सीईओ व मैनेजिंग एडीटर बनाए गए हैं।
-विष्णु त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार, दैनिक जागरण, नोएडा को तरक्की देकर दैनिक जागरण प्रबंधन ने उन्हें समूह का सह संपादक बना दिया है। श्री त्रिपाठी इससे पहले आईबीएन 7 व दैनिक जागरण, लखनऊ में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। उन्हें भड़ास की तरफ से बधाई।
-पूजा प्रसाद ने आईएनएस छोड़कर अब हिंदी सर्च इंजन और न्यूज पोर्टल रफ्तार डाट काम को बतौर असिस्टेंट कंटेंट एडीटर ज्वाइन कर लिया है।
सहारा न्यूज चैनल के वरिष्ठ संवाददाता संजीव श्रीवास्तव ने आने वाला चैनल इंडिया न्यूज ज्वाईन कर लिया है।
बीटीवी (भास्कर टीवी) भोपाल में कार्यरत सुनील शर्मा ने भी इंडिया न्यूज चैनल ज्वाईन कर लिया है।
दैनिक जागरण समूह का टैबुलाइड अखबार आईनेक्स्ट अब भोपाल समेत राज्य के दूसरे शहरों से भी शुरु होने जा रहा है। इसके लिए राजधानी भोपाल में समूह ने यूएनआई की बिल्डिंग किराये पर ली है। उम्मीद है कि अगले कुछ ही महीनों में आईनेक्स्ट और समूह का बिजनेस अखबार शुरु हो जाएगा।
खबर है कि गिरीश उपाध्याय ने राजस्थान पत्रिका छोड़ने के बाद नई दुनिया भोपाल में बतौर स्थानीय संपादक ज्वाइन किया है। श्री उपाध्याय राजस्थान पत्रिका समूह में डिप्टी एडिटर पद पर थे।
वीर संघवी ने अपना रुख फिर से हिन्दुस्तान टाइम्स की ओर कर लिया है। आगे वे न्यूज एक्स की बजाय एचटी को अपनी सेवा देंगे। सूत्रों के मुताबिक सिंघवी एचटी टेली के लिए बतौर चीफ एडीटर के रुप में काम करेंगे।
ईटीवी के सत्येंद्र चौधरी अब बीटीवी जयपुर में क्राइम रिपोर्टर होंगे। गौरतलब है कि बीटीवी भास्कर समूह का केबल चैनल है।
राजीव तिवारी ने बतौर संपादक डेली न्यूज जयपुर ज्वॉइन किया है। इससे पहले वे अमर उजाला नोएडा, दैनिक भास्कर जयपुर और राजस्थान पत्रिका उदयपुर में काम कर चुके हैं।
न्यूज चैनल न्यूज एक्स के प्रमुख वीर संघवी ने चैनल लांच से पहले ही बाहर होने के बाद अब हिन्दुस्तान टाइम्स जाने की तैयारी कर ली है।
ईटीवी के सत्येंद्र चौधरी अब बीटीवी जयपुर में क्राइम रिपोर्टर होंगे। गौरतलब है कि बीटीवी भास्कर समूह का केबल चैनल है।
राजस्थान पत्रिका समूह में डिप्टी एडिटर गिरीश उपाध्याय ने इस्तीफा दे दिया।
नमिता डोगरे, झनक दवे और आनंद प्रकाश ने आईबीएन7 ज्वाइन किया है।
सुरेंद्र कुमार ने राजस्थान पत्रिका ज्वाइन किया है।
नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ एनके सिंह के बारे में चर्चा है कि वो भोपाल से प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स ज्वाइन करने वाले हैं।
गोरखपुर ईटीवी में कार्यरत रवीश रंजन शुक्ला ने वहां से छोड़कर दिल्ली में एनडीटीवी ज्वाइन कर लिया है।
विनोद शुक्ल, जो खुद में हिंदी पत्रकारिता के एक संस्थान माने जाते हैं, जिन्होंने ढेर सारे पत्रकार गढ़े, जिन्होंने कई मानक कायम किए, जिन्होंने अपने लंबे करियर में ढेर सारी सफलताएं हासिल कीं, जो हमेशा चर्चाओं और विवादों के केंद्र में रहे, जो कई दशकों तक हिंदी पत्रकारिता की दशा-दिशा तय करते रहे...ने अब सक्रिय मीडिया जीवन को टाटा बाय बाय कह दिया है। लखनऊ में एक भव्य लेकिन सादगी भरे समारोह में भइया नाम से मशहूर विनोद शुक्ल को दैनिक जागरण के साथियों व अन्य गणमान्य जनों ने विदाई दी। बताया जाता है कि बढ़ती उम्र व स्वास्थ्य संबंधी वजहों से पंडीजी ने ऐसा निर्णय लिया। भड़ास की तरफ से भइया को जीवन की नई पारी के लिए ढेरों शुभकामनाएं।
दैनिक जागरण, देहरादून के जनरल मैनेजर संजय शुक्ला के बारे में खबर है कि उन्होंने वहां से जल्द प्रकाशित होने वाले हिंदुस्तान अखबार में काफी बड़े पैकेज व पद पर ज्वाइन कर लिया है। वे कई वर्षों से दैनिक जागरण, देहरादून के कर्ताधर्ता बने हुए थे। पिछले कई सप्ताह से श्री शुक्ला के जाने को लेकर खबर सरगर्म थी।
हिंदुस्तान, इलाहाबाद के सीनियर रिपोर्टर संजय कुमार मिश्रा ने अब चोला बदल लिया है। वे इलाहाबाद में ही अब अमर उजाला के नए बच्चा अखबार कॉम्पैक्ट में अपना जौहर दिखाएंगे।
रविप्रकाश मौर्य के बारे में खबर मिली है कि उन्होंने बतौर सब एडीटर हरिभूमि, रायपुर में ज्वाइन किया है।
सब एडीटर मनोज राय ने कांपैक्ट, कानपुर को छोड़ दिया है। अब वे दैनिक जागरण, पटना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
दैनिक भाष्कर, इंदौर के चीफ सब एडीटर और सीनियर जर्नलिस्ट रवींद्र व्यास अगले महीने से ठीकठाक पैकेज पर नई दुनिया, इंदौर ज्वाइन करने वाले हैं।
सुरेंद्र कुमार ने पंजाब केसरी, जयपुर से नवज्योति ज्वॉइन किया है। वे इससे पहले दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका में काम कर चुके हैं।
महेश यादव ने राजस्थान पत्रिका अजमेर से अमर उजाला नोएडा ज्वाइन किया है। इससे पहले वे दैनिक भास्कर जोधपुर में थे।
आईटीवी उर्फ इंडिया न्यूज से एक और विकेट गिर गया। खबर है कि प्रवीन शर्मा ने इकनोमिक टाइम्स के हिन्दी संस्करण को ज्वाइन कर लिया है। प्रवीन ने 2006-07 में आईआइएमसी से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया था।
सीनियर जर्नलिस्ट टिल्लन बिसारिया ने दैनिक भाष्कर, नोएडा से रिजाइन कर दिया है। उनकी नई ज्वायनिंग के बारे में पता नहीं चल सका है।
अमित त्यागी ने दैनिक भाष्कर, नोएडा से छलांग लगाकर ईटी के नए हिंदी बिजनेस डेली में बतौर सीनियर रिपोर्टर ज्वाइन किया है।
यह खबर भी दैनिक भाष्कर, नोएडा से ही है कि शैलेंद्र राय ने आज समाज, दिल्ली में ज्वाइन किया है। शैलेंद्र पेजीनेशन और लेआउटिंग डिपार्टमेंट में हैं।
अमर उजाला, जम्मू से जिन तीन लोगों ने त्यागपत्र देकर वहीं पर दैनिक जागरण ज्वाइन किया है, उनके नाम मालूम पड़ चुके हैं। वे हैं- अश्विनी शर्मा, सुमित शर्मा और अजय गडिया। ये तीनों ही सीनियर सब एडीटर बने हैं।
सूचना है कि आज तक से ऋषिरंजन काला और संदीप शर्मा त्रिवेणी जा रहे हैं। दोनो पहले आज तक के शोध विभाग में थे। पैकेज में ठीकठाक बढोत्तरी हुई है।
एसएन विनोद, जो पहले सीनियर मीडिया ग्रुप यानी सीनियर इंडिया मैगजीन और एसवन चैनल के समूह संपादक थे, उन्होंने गुड मॉर्निंग इंडिया समूह के नये चैनल में बतौर एडिटर ज्वाइन कर लिया है. इससे पहले दैनिक नवभारत और लोकमत समाचार के समूह संपादक रह चुके है.
शिशिर शरण राही ने दैनिक भास्कर जयपुर से 12 साल का रिश्ता तोडकर यहीं पर डेली न्यूज में बतौर सीनियर सब एडिटर ज्वॉइन किया है।
जी बिजनेस से भुवन भाष्कर ने इकोनॉमिक टाइम्स के हिंदी संस्करण में असिस्टिंट न्यूज एडिटर के पद पर ज्वाइन किया है। भुवन पहले सीएनबीसी आवाज में थे।
मिथिलेश सिंह के बारे में सूचना मिली है कि वे आईनेक्स्ट, देहरादून के संपादकीय प्रभारी के रूप में ज्वाइऩ करने वाले हैं। वे इस वक्त दैनिक भाष्कर में राजस्थान के पाली जिले में कार्यरत हैं। उससे पहले वे अमर उजाला और प्रभात खबर में काम कर चुके हैं।
अमर उजाला, जम्मू से तीन लोगों के छोड़कर दैनिक जागरण, जम्मू ज्वाइन करने की खबर मिली है। इनके नाम और पद के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।
अभिषेक श्रीवास्तव ने इकानामिक टाइम्स के नए निकलने वाले हिंदी बिजनेस डेली को ज्वाइन किया है।
आशीष दीप ने दैनिक जागरण, नोएडा से विदाई ले ली है। अब वे दैनिक हिंदुस्तान में लखनऊ अपने घर पहुंच गए हैं। उन्होंने बतौर सीनियर सब एडीटर ज्वाइन किया है।
संदीप निगम छोड़ने पकड़ने में लगे हुए हैं। वे दैनिक जागरण से आईबीएन 7 गए थे। वहां एस्ट्रोनामी व एस्ट्रोलाजी वाले कार्यक्रम करते रहे और इसी आधार पर उन्होंने टीवी में जगह बना ली। फिर लाइव इंडिया चले गए। अब इसे भी छोड़कर स्टार न्यूज पहुंच गए हैं।
शोभना यादव ने आईबीएन 7 ज्वाइन किया है। वे सहारा समय से आईं हैं। कहा जा रहा है कि वे आईबीएन में आने वाले दिनों में एंकर पद के लिए दावेदार हैं।
आईबीएन 7 वाले अपूर्व श्रीवास्तव जल्द ही दूसरे संस्थान से जुड़े नजर आने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि वे त्रिवेणी के नए आने वाले चैनल को बतौर सीनियर प्रोड्यूसर ज्वाइन करेंगे।
सुनील राणा ने दैनिक भाष्कर, लुधियाना को छोड़कर बिलासपुर में दैनिक जागरण को सेवा देना शुरू किया है। वे बतौर सब एडीटर गए हैं।
लुधियाना भास्कर में सीनियर रिपोर्टर के पद पर कार्यरत दिनेश अग्रहरि ने ईटी के नए लांच होने वाले हिंदी बिजनेस डेली में ठीकठाक पैकेज पर छलांग लगा दी है।
राजू सजवान का दैनिक हिंदुस्तान ने तबादला कर दिया है। उन्हें फरीदाबाद संस्करण के प्रभारी की जगह अब नोएडा का इंचार्ज बनाया गया है।
नए लांच होने वाले न्यूज चैनल सीएनईबी टीवी के एडीटर मुकेश कबीर ने इस्तीफा दे दिया है। अब वे त्रिवेणी के नये लांच होने वाले न्यूज़ चैनल मे बड़े पद व पैकेज पर गए हैं।
सुमन कुमार झा ने संडे इंडियन, नई दिल्ली को छोड़ दिया है। अब वे अमर उजाला, नोएडा में चले गए हैं।
नवभारत टाइम्स, दिल्ली के तुषार ने अब जी न्यूज ज्वाइन कर लिया है। तुषार नभाटा में बिजनेस डेस्क पर थे।
आईएएनएस, नई दिल्ली के अरविंद ने नई नौकरी ज्वाइन कर ली है। वे अब अमर उजाला, गाजियाबाद की टीम के सदस्य हैं। इसी तरह खबर है कि आईएएनएस की सुनीता ने नई दिल्ली में ही आज समाज अखबार ज्वाइन कर लिया है।
अमर उजाला के राष्ट्रीय ब्यूरो में रिपोर्टर मुकेश केजरीवाल का दिल प्रिंट में काम करते हुए भर गया तो अब इलेक्ट्रानिक मीडिया की राह पकड़ ली है। उन्होंने बैग के नए चैनल न्यूज 24 में काम शुरू कर दिया है।
दैनिक जागरण, नोएडा आफिस में बतौर सीनियर रिपोर्टर कार्य कर रहे निशांत राघव ने अब जागरण को टाटा बाय बाय कहकर दैनिक हिंदुस्तान से दोस्ती कर ली है। वे हिंदुस्तान के फरीदाबाद ब्यूरो के इंचार्ज बनाए गए हैं।
प्रणय उपाध्याय ने भी अब प्रिंट की बजाय इलेक्ट्रानिक मीडिया को हमराही बना लिया है। उन्होंने बैग के नए चैनल न्यूज 24 को ज्वाइन किया है। श्री उपाध्याय इसके पहले दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो में सीनियर रिपोर्टर हुआ करते थे।
देहरादून से दैनिक जागरण जल्द ही आई-नेक्स्ट का प्रकाशन शुरू करने वाला है। इसके लिए अनुपम त्रिवेदी को बतौर रिपोर्टिंग इंचार्ज अप्वाइंट किया गया है। श्री त्रिवेदी इससे पूर्व ईटीवी उत्तर प्रदेश/उत्तरांचल के लिए हैदराबाद स्थित मुख्यालय में न्यूज के इनपुट इंचार्ज के बतौर काम देख रहे थे। नई पारी में ढेरों सफलता के लिए अनुपम को अग्रिम बधाई!
आईबीएन 7 के रिपोर्टर नीलू रंजन के बारे में खबर मिली है कि उन्होंने आज तक ज्वाइन कर लिया। लेकिन सड़क हादसे के एक मामले में आरोपी होने के कारण फिलहाल वो मुश्किलों में फंसे हुए हैं।
विनोद कापड़ी के बारे में सूचना मिली है कि उन्होंने इंडिया टीवी में बतौर न्यूज डायरेक्टर ज्वाइन किया है। इसके पहले वे स्टार ऩ्यूज में महत्वपूर्ण स्थिति में थे।
अमर उजाला, बरेली के न्यूज एडीटर सुनील शाह ने इसी पद पर लेकिन अच्छे पैकेज के साथ अब दैनिक हिंदुस्तान के देहरादून से नए लांच होने वाले संस्करण में ज्वाइन किया है। श्री शाह लंबे समय से अमर उजाला, बरेली में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
विवेक श्रीवास्तव ने अमर उजाला, जालंधर को बाय बाय कह दिया है। अब उन्होंने दैनिक जागरण, पानीपत का दामन पकड़ लिया है।
लाइव इंडिया न्यूज़ चैनल ने लखनऊ में फरमान अब्बास को रिपोर्टर बनाया है। मंजुल के नाम से जाने जाने वाले फरमान के नाम लखनऊ में कई बड़ी स्टोरियाँ दर्ज हैं। लाइव इंडिया ज्वाइन करने से पहले वह IBN-7 में भी लखनऊ में ही काम कर चुके हैं।
आईनेक्स्ट कानपुर से ब्रजेश कुमार दुबे ने दैनिक भास्कर अजमेर में प्रिंटर डेस्क पर ज्वाइन किया है। उनका नया नंबर 9928397889 है। आइनेक्सट से पहले वे जयपुर दैनिक भास्कर में ही सब एडिटर थे।
इकानामिक्स टाइम्स के नए हिंदी बिजनेस डेली के लिए भर्तियां लगभग खत्म होने वाली हैं। अभी तक जो सूचना है उसके मुताबिक मोबाइल मीडिया कंपनी लाइवएम के राहुल कुमार ने वहां नई दिल्ली आफिस में बतौर कापी एडीटर ज्वाइन किया है।
सत्य प्रकाश उर्फ सत्या ने गुड मार्निंग समूह के अखबार आज समाज, नई दिल्ली को बाय बाय कहते हुए इकानामिक्स टाइम्स के नए लांच होने वाले हिंदी डेली में बतौर कापी एडीटर ज्वाइन किया है।
डीएलए ने आगरा के बाद अब नए शहरों में खुद को लांच करने के क्रम में अगला ठिकाना मेरठ को बनाया है। वहां वरिष्ठ पत्रकार और हरिभूमि, रोहतक के संपादक ओमकार चौधरी को संपादक बनाया गया है। श्री चौधरी हिंदी पत्रकारिता के वरिष्ठ लोगों में से है और उन्होंने कई उल्लेखनीय वर्ष दैनिक जागरण और अमर उजाला के विभिन्न संस्करणों में बतौर संपादकीय प्रभारी काम करते हुए गुजारे हैं। उन्हें डीएलए की सफलता के लिए अग्रिम बधाई।
मेरठ से लांच होने वाले डीएलए में दैनिक भाष्कर से नीरज अधिकारी ने ज्वाइन किया है। वे दैनिक भाष्कर से पहले मेरठ में ही दैनिक हिंदुस्तान में हुआ करते थे। उन्होंने डीएलए में बतौर डीएनई ज्वाइन किया है।
दैनिक भाष्कर महिलाओं के लिए एक स्पेशल मैग्जीन आठ जनवरी को लांच करने वाला है। इस मैग्जीन का नाम होगा शी।
देहरादून में इस समय कई अखबारों को तेज तर्रार वरिष्ठ और कनिष्ठ हिंदी पत्रकारों की जरूरत है। दैनिक जागरण अपना आईनेक्स्ट और अमर उजाला अपना कांपैक्ट जल्द ही लांच करने वाले हैं। इन दोनों बच्चा अखबारों के लिए दोनों समूहों ने एक दूसरे के पत्रकारों को तोड़ना शुरू कर दिया है। इस बीच, वहां से हिंदुस्तान ने भी खुद को लांच करने की तैयारियां तेज करते हुए अमर उजाला और दैनिक जागरण के पत्रकारों को तोड़ने का प्रयास शुरू कर दिया है। इसके चलते वहां पत्रकारों की अच्छी खासी जरूरत महसूस की जा रही है।
आज तक के संजीव चौहान ने अपराध प्रमुख वन कर आइटीबी ज्वाइन किया है।
एसएन विनोद ने टीवी चैनल अब तक ज्वाइन कर लिया है। इससे पहले वे सीनियर इंडिया नामक मैग्जीन में एडीटर थे।
अमरदीप गुप्ता ने नई दुनिया, रायपुर को बाय कहकर अब दैनिक भाष्कर, लुधियाना में बतौर सब एडीटर सिटी डेस्क पर ज्वाइन किया है। उन्हें आप 9915544922 पर बधाई दे सकते हैं।
निश्छल भटनागर ने अमर उजाला, चंडीगढ़ को टाटा बाय बाय कहकर अब दैनिक भाष्कर, लुधियाना का साथ पकड़ लिया है। वे बतौर सीनियर रिपोर्टर एप्वाइंट किए गए हैं।
सूचना मिली है कि पवन सरन ने एस1 चैनल छोड़कर अब बैग का न्यूज चैनल ज्वाइन किया है।
वेदरत्न शुक्ल के बारे में खबर मिली है कि उन्होंने अमर उजाला, अलीगढ़ को छोड़कर स्टार न्यूज, नई दिल्ली ज्वाइन किया है।
हृदयेंद्र प्रताप सिंह ने दैनिक भाष्कर, लुधियाना को बाय कहकर अब दैनिक जागरण, पटियाला का साथ पकड़ लिया है। वे दैनिक जागरण में बतौर सीनियर सब एडीटर गए हैं।
प्रदीप अवस्थी ने दैनिक जागरण, लुधियाना को छोड़कर इसी शहर में दैनिक भाष्कर को ज्वाइन किया है। वे रिपोर्टिंग की टीम में हैं।
कमलेश भट्ट के बारे में खबर मिली है कि उन्होंने पंजाब केसरी को बाय बाय कहकर दैनिक जागरण, लुधियाना का दामन थाम लिया है। वे सीनियर रिपोर्टर के बतौर कार्य करेंगे।
मुकेश मिश्रा के बारे में सूचना मिली है कि उन्होंने अमर उजाला, मेरठ छोड़ दिया है और अब दैनिक भाष्कर, लुधियाना की नैया पर सवार हो गए हैं।
एक अपुष्ट सूचना है कि सुधीर अग्निहोत्री ने नई दुनिया, रायपुर को छोड़कर इलाहाबाद से हाल में ही लांच हुए आईनेक्स्ट को ज्वाइन किया है।
सुरेंद्र कुमार मीणा ने दैनिक भास्कर से बतौर रिपोर्टर पंजाब केसरी ज्वॉइन किया है। इससे पहले वे राजस्थान पत्रिका में काम कर चुके हैं।
रत्नाकर दीक्षित का तबादला दैनिक जागरण, आगरा से दैनिक जागरण, वाराणसी कर दिया गया है। ऐसा उनके अनुरोध पर किया गया है। रत्नाकर का होमटाउन बनारस है।
विकास परिहार ने भड़ास को सूचित किया है कि उनकी नियुक्ति 93.5 एस एफएम जबलपुर में बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर और रेडियो जाकी के रूप में हो गई है। उन्होंने सभी भड़ासियों और दोस्तों को उनकी दुवाओं के लिए शुक्रिया कहा है और इसी तरह प्यार बनाए रखने का अनुरोध किया है। विकास को उनके मोबाइल नंबर 9329833298 पर आप भी बधाई दे सकते हैं।
विवेक सत्य मित्रम ने स्टार न्यूज को छोड़कर गुड मार्निंग समूह के नए आने वाले टीवी चैनल को ठीकठाक पैकेज पर बतौर प्रोड्यूसर के रूप में ज्वाइन किया है। विवेक को उनकी नई तैनाती पर भड़ास की ओर से ढेर सारी बधाइयां।
सीनियर जर्नलिस्ट अनिल मिश्रा ने आगरा के नए अखबार अकिंचन भारत को बाय बाय कहकर वहीं पर दैनिक जागरण ज्वाइन कर लिया है। वे अकिंचन भारत से पहले आगरा में ही लंबे समय तक अमर उजाला में कार्यरत रहे।
इकानामिक टाइम्स हिंदी में बिजनेस अखबार ला रहा है और इसके लिए हिंदी पत्रकारों के अप्वायंटमेंट भी शुरू हो चुके हैं। इसके जवाब में दैनिक जागरण टीवी18 के साथ मिलकर एक और हिंदी बिजनेस अखबार लाने की घोषणा कर दी है। कुल मिलाकर हिंदी पत्रकारों की बल्ले बल्ले है।
विजय झा, विजय रावत और बृज बिहारी चौबे ने दैनिक जागरण, नोएडा में सेंट्रल डेस्क पर ज्वाइन किया है। विजय झा नवभारत टाइम्स, दिल्ली से आए हैं और विजय रावत व बृज बिहारी चौबे अमर उजाला, नोएडा से आए हैं।
दैनिक जागरण समूह का टैबलाइड अखबार आईनेक्स्ट ने 27 दिसंबर से इलाहाबाद शहर से भी प्रकाशन शुरू कर दिया है।
आईनेक्स्ट इलाहाबाद में जिन नए लोगों ने ज्वाइन किया है उनके नाम इस तरह से हैं- अमर उजाला मिर्जापुर से कैलाश सिंह, अमर उजाला इलाहाबाद से सुरेश पांडेय, अमर उजाला गाजीपुर से कमल वर्मा, दैनिक भाष्कर ग्वालियर से संतोष उपाध्याय। ये सभी लोग अब आईनेक्स्ट इलाहाबाद की नाव पर सवार हो चुके हैं। इन्हें भड़ास की तरफ से बधाई।
आईनेक्स्ट कानपुर से श्याम शरण का तबादला आईनेक्स्ट इलाहाबाद के लिए कर दिया गया है।
दैनिक जागरण, देहरादून से कई पत्रकारों के अमर उजाला, देहरादून ज्वाइन करने की खबर मिली है। खबर है कि वहां से कांपैक्ट लाया जा रहा है जिसके चलते लोग ज्वाइन कर रहे हैं।
देहरादून मीडिया के नए युद्धस्थल के रूप में तब्दील होता दिख रहा है। वहां हिंदुस्तान भी अपना संस्करण लांच करने जा रहा है। खबर है कि सीनियर जर्नलिस्ट दिनेश जुयाल को देहरादून दैनिक हिंदुस्तान का संपादक बनाया गया है। श्री जुयाल ने अपनी टीम भी बनानी शुरू कर दी है।
अमर उजाला समूह का टैबलायड अखबार कांपैक्ट अब इलाहाबाद से भी निकलने जा रहा है। इसके लिए जोरशोर से भर्तियां और तैयारियां चल रही हैं। कांपैक्ट की इलाहाबाद से लांचिंग की डेट 16 जनवरी तय की गई है।
अमर उजाला ने अपने कांपैक्ट, इलाहाबाद के लिए फिलहाल इलाहाबाद दैनिक जागरण के दो विकेट गिराए हैं। आशुतोष श्रीवास्तव और राहुल शर्मा ने दैनिक जागरण इलाहाबाद छोड़कर कांपैक्ट, इलाहाबाद को ज्वाइन किया है।
मिथिलेश श्रीवास्तव ने आईनेक्स्ट आगरा में ज्वाइन किया है। वे इससे पहले दिल्ली में कार्यरत थे।
जयपुर न्यूज टुडे में सब एडीटर अजीत सिंह ने दैनिक हिन्दुस्तान मेरठ ज्वाइन किया है।
राजस्थान पत्रिका ने अब राजस्थान से बाहर पांव पसारने की तैयारी कर ली है। वह अब दैनिक भाष्कर के गढ़ मध्य प्रदेश में अपने संस्करण लांच करने की गुपचुप तैयारी में लगा है।
चंडीगढ़ में दैनिक भाष्कर को पल्लवित-पुष्पित करने वाले वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी को जब भाष्कर ग्रुप ने मुंबई में जब अपने मोबाइल और न्यू इन्नोवेशन विंग के हेड के रूप में भेज दिया तो उसके कई महीनों बाद श्री त्यागी ने वहीं पर मुंबई मिरर ज्वाइन कर लिया। वे डिप्टी एडिटर पद पर गए हैं। निधीश जी दैनिक भास्कर के सिटी भास्कर पुल आउट के ग्रुप एडिटर भी रहे हैं।
मणिकांत सोनी ने न्यूज एजेंसी वार्ता और यूएनआई को अलविदा कहकर दैनिक भास्कर, भोपाल में सेंट्रल डेस्क पर ज्वाइन कर लिया है। इसी तरह सुभाष ने भी न्यूज एजेंसी वार्ता व यूएनआई को त्याग कर जी बिजनैस न्यूज चैनल ज्वाइन किया है।
बैग का चैनल लांच हो गया। पहले हफ्ते उसकी टीआरपी ठीकठाक बताई जा रही है। गुड मार्निंग समूह भी जल्द ही चैनल लांच करने वाला है। इसी क्रम में महाराष्ट्र का मीडिया समूह सकाल भी दो चैनल लाने जा रहा है। ये इंटरटेनमेंट चैनल होंगे। एक चैनल का नाम शाम मराठी और और दूसरे का शाम हिन्दी होगा। साथ ही एक अंग्रेजी अखबार भी निकालने की तैयारी है। सकाल समूह अभी सकाल और गोमंत्रक नाम से मराठी भाषा, गोमंत्रक टाइम्स और महाराष्ट्र हैराल्ड नाम से अंग्रेजी में समाचार पत्र प्रकाशित करता है।
आईनेक्स्ट कानपुर में आशीष ने ज्वाइन किया है। वे इससे पहले जयपुर में दैनिक भाष्कर में कार्यरत थे।
सहारा समय से नाता तोड़कर पंकज तोमर ने अब बतौर वरिष्ठ कैमरामैन आईबीएन-7, नोएडा में ज्वाइन कर लिया है।
आगरा में तहलका मचाने वाला डीएलए अब कई शहरों से लांच किया जाने वाला है। चर्चा है कि इसके मेरठ संस्करण के लिए संपादकीय प्रभारी की नियुक्ति भी हो चुकी है। हालांकि अभी नाम की पुष्टि नहीं हो पाई है।
दैनिक जागरण, मेरठ में कार्यरत नीरज और संजीव ने दिल्ली में एमएच1 चैनल ज्वाइन कर लिया है।
The End




