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13.6.23

अंग्रेज़ गए, रियासतें गईं, पर ‘राजा‘ बढ़ने लगे!

Ashwini Kumar shrivastava-

- देश में वीआईपी कल्चर कम होने की बजाय लगातार बढ़ता जा रहा 
- ज्यादातर वीआईपी करते हैं जनता के बीच रियासतों के राजा सा बर्ताव 

आजादी के तीन साल के भीतर देश में संविधान लागू कर दिया गया।इस मकसद से कि अब आम जनता ही नहीं बल्कि खुद को वीआईपी समझने वाले लोग भी संविधान और देश के नियम कानून के अनुसार चलें। लेकिन बाद में बनने वाली हर सरकार ने किया संविधान की इस भावना का ठीक उल्टा। 

वीआईपी कल्चर को बढ़ावा देते हुए ऐसे लोगों के लिए हर सरकार ने वेतन- भत्ते, पेंशन, सब्सिडी, सुविधाएं, मकान, गाड़ी, स्टाफ, सुरक्षा आदि में ज्यादा से ज्यादा बढ़ोतरी ही की। 
जबकि होना तो यह चाहिए था कि सरकारें धीरे-धीरे इस वीआईपी कल्चर को खत्म करती रहतीं। अब तो हालात यह हैं कि इस वीआईपी कल्चर ने ही देश में हर कहीं राजा रजवाड़े पैदा कर दिए हैं। जो न सिर्फ आम लोगों के लिए बड़ा सर दर्द बन चुके हैं बल्कि देश के लोकतंत्र के लिए भी बड़ा खतरा हैं। 

कैसे, यह जानने के लिए पहले यह जानना होगा कि संविधान बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। दरअसल संविधान बनने से पहले देश में बड़ी तादाद में तमाम ऐसे लोग थे, जो किसी भी नियम- कानून से खुद को ऊपर मानते थे। 

मसलन सैकड़ों रियासतों के राजा- रजवाड़े, धार्मिक कट्टरपंथी नेता, क्षेत्रीय/ भाषाई/ नस्लीय/ जातीय राजनीति करके आपस में लड़वाने वाले नेता, भ्रष्ट नेता, आईएएस, आईपीएस, अफसर, माफिया, धनकुबेर व्यापारी, साधू - संत/ पंडित,  मूल्ला - मौलवी या सेना- पुलिस आदि बलों के ताकतवर लोग आदि। 

इतनी बड़ी तादाद में खुद को नियम कानून से ऊपर मानने वाले ऐसे ही वीआईपी लोगों को देखकर ही संभवतः आजादी देने से पहले तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि भारत लंबे समय तक लोकतंत्र और आजाद देश बना रह पाएगा। उन्हें यह यकीन था कि चाहे जितने नियम - कानून बना दिए जाएं, भारत के ये तथाकथित वीआईपी लोग हर नियम कानून की धज्जियां उड़ा देंगे। 

चर्चिल सही साबित न हों और आजाद भारत में कोई नियम कानून की धज्जियां न उड़ाए, इसके लिए ही आजादी के तीन साल के भीतर संविधान बनाया गया। संविधान बनने से पहले भारत में आजादी के समय ही एक बड़ी अड़चन आ भी चुकी थी, जब सैकड़ों रियासतों का विलय भारत में किया गया था। विलय होने के बावजूद उन रियासतों के राजा आजाद भारत में विशेषाधिकार चाहते थे, जो किसी भी आम नागरिक के मुकाबले उन्हें अलग ही दर्जा दे सके। 

संविधान बनने के बाद सरकार ने कई कड़े कदम उठाकर सबसे पहले उन्हें ही यह एहसास कराया कि आजाद भारत में अब वे भी आम नागरिक ही हैं। उन्हें भी संविधान और कानून के सामने किसी आम आदमी की तरह ही नतमस्तक होना पड़ेगा। हालांकि तब भी कई मांगें सरकार को माननी पड़ी थीं। 

जिनमें से एक उन्हें हर साल प्रिवी पर्स के रूप में सरकारी खजाने से मिलने वाला धन था। यह धन भारत के उन 562 राजाओं को लंबे समय तक सरकार देती थी, जिसे दशकों बाद 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खत्म कर दिया था। 

फिर भी उन दशकों में इन राजाओं को वाकई यह यकीन नहीं आ रहा था कि अब वे भी आम नागरिक हैं। इसलिए आजादी के वक्त हुए रियासतों के एकीकरण के बावजूद वे हर चुनाव में अपनी अलग ही पार्टी बनाकर चुनाव लड़ते रहे। इस उम्मीद में कि उनका राज एक बार फिर लौट आएगा। 

जनता ने उन्हें पहले ही चुनाव में नकार दिया तो उनकी पार्टी खत्म हो गई लेकिन उसके बाद उन राजा - महाराजाओं ने बैक डोर से एंट्री लेकर कांग्रेस और अन्य दलों के टिकट पर चुनाव लड़ना शुरू कर दिया। 

इससे वह पूरी तरह से आम नागरिक बनने से बच गए और सांसद- विधायक आदि पद लेकर फिर से खुद को किसी रियासत का महाराजा समझने लगे। 

धीमे- धीमे उनकी इसी सोच को उन बाकी श्रेणियों के उन्हीं वीआईपी लोगों ने भी अपना लिया, जिन्हें इतनी बड़ी तादाद में भारत में मौजूद देखकर चर्चिल ने उसे वक्त भारत में लोकतंत्र और आजादी के बने रहने पर संदेह जताया था। 

अगर समय रहते इस वीआईपी कल्चर को खत्म नहीं किया गया तो भारत का लोकतंत्र वापस राजा - महाराजाओं के प्राचीन सामंती तंत्र में न बदल जाए, इसका खतरा भी मंडराता रहेगा।
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हिंदू राष्ट्र का मेरा सपना कैसे टूटा

ashwini Kumar Shrivastava-

नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ जैसे हिंदू कट्टरपंथी नेताओं का राज यह साबित कर रहा है कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना करोड़ों हिंदू देख रहे हैं। इन्हीं करोड़ों लोगों की तरह अपने जीवन में अपनी पूरी युवावस्था तक मैंने भी हिन्दू राष्ट्र का सपना ही देखा है लेकिन अब मैं इस विकराल भीड़ से अलग खड़े होकर बहुत ही कम लोगों की तरह एक ऐसा सपना देखता हूं, जिसमें हिंदू समाज में जातिवाद न हो और समानता हो। 

हिंदू राष्ट्र के सपने से नाता तोड़ने की शुरुआत तब हुई , जब अपने घर- परिवार से दूर निकलकर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान मैंने असल हिन्दू समाज को जीकर देखा। वहां मैं तीन साल से ज्यादा समय रहा लेकिन जब यह देखा कि इलाहाबाद पढ़ाई के साथ-साथ जातिवाद का भी गढ़ है तो मुझे हिन्दू राष्ट्र से विरक्ति होने लगी। 

जबकि अपनी युवावस्था तक देखे हिन्दू राष्ट्र के इस सपने के बीज मेरे जन्म से ही मेरे जीवन में थे क्योंकि आम हिंदुओं की तरह बेहद धार्मिक हिन्दू परिवार में मैंने भी जन्म लिया है। 

उसके बाद अपनी शुरुआती पढ़ाई भी आरएसएस के स्कूल सरस्वती शिशु मंदिर से ही की थी। शिशु यानी केजी से कक्षा पांच तक का मेरा अनुभव वहां बहुत ही शानदार और अविस्मरणीय रहा। 

मैं उस स्कूल में क्लास ही नहीं स्कूल टॉपर्स में था और वहां बच्चों की स्टूडेंट यूनियन शिशु भारती का लगातार दो साल पदाधिकारी व अध्यक्ष भी रहा। 

फिर क्लास सिक्स्थ से लखनऊ के एक बेहद प्रतिष्ठित ईसाई मिशनरी स्कूल में पढ़ाई करने के बावजूद मेरे भीतर भरा हिंदुत्व इस क़दर उफान पर आ चुका था कि सूर्योदय से पहले उठकर घंटों पूजा-पाठ और योग ध्यान करके ही मैं अपने दिन की शुरुआत करता था। उसी दौरान राम मंदिर आंदोलन शुरू हुआ तो मैं भी किशोर उम्र से ही कट्टर हिन्दू संगठनों और भाजपा से जुड़ गया था। 

हिंदुत्व का मेरा यह जुनून हल्का पड़ने लगा , जब स्नातक की पढ़ाई के दौरान इलाहाबाद में मैंने जातिवाद से भरे हिन्दू राष्ट्र का सैंपल बरसों तक उसका हिस्सा बनकर देख- समझ और महसूस कर लिया। 

तिग्मांशु धूलिया और अनुराग कश्यप जैसे नामी गिरामी लोगों को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी समेत पूर्वांचल व बिहार के उसी भयावह जातिवाद का अपनी फिल्मों के जरिए महिमा मंडन करते देखता हूं तो मुझे बड़ी कोफ्त भी होती है। 

क्योंकि उनकी फिल्मों में जिस तरह इसे गर्व करने वाली चीज दिखाया जाता है, दरअसल हिन्दू समाज के लिए सबसे शर्मनाक और सारी समस्याओं की जड़ यही चीज है। 

कैसे, यह बताने के लिए वहां के अनुभवों पर आधारित पोस्ट्स की पूरी सीरीज ही लिखनी पड़ जाएगी। हालांकि व्यक्तिगत रूप से मुझे खुद इस जातिवाद की लड़ाई में कोई नुकसान कभी नहीं हुआ क्योंकि मैं खुद क्षेत्र के आधार पर बने वहां के सबसे मजबूत छात्र गुट का बहुत अहम हिस्सा था। 

मगर मैंने इस जातिवाद के चलते छात्रों के बीच फैले वैमनस्य के ऐसे-ऐसे जीवंत उदाहरण देखे कि तभी मैंने समझ लिया था कि अगर कभी भारत में हिन्दू राष्ट्र आया तो उसका असल परिदृश्य कैसा होगा। 

यही नहीं, तब यह भी समझ गया था कि इतिहास में हमें जिन हिंदू राजाओं पर गर्व करने  की पढ़ाई करवाई जाती है दरअसल वह हिंदू गर्व नहीं बल्कि जातीय गर्व है, जिस पर मुलम्मा हिंदुत्व का चढ़ाकर सबको शामिल करने की कोशिश की जाती है। 
तभी इतिहास की पढ़ाई और हिन्दू समाज व भारत की राजनीति को देखने का मेरा नजरिया एकदम यू टर्न लेकर भाजपा और आरएसएस विरोधी हो गया। 

हालांकि तब तक भी मुझे जातिवाद में छुआछूत और भेदभाव देखने को नहीं मिला था क्योंकि मेरा वास्ता तब पिछड़े और दलित छात्रों से कभी पड़ा ही नहीं। मैंने तो वहां यूनिवर्सिटी में उस जबरदस्त जातीय लड़ाई को ही देखा, जो तब केवल सवर्णों के बीच ही अपने चरम पर थी। वहां तब हर हॉस्टल और कैंपस में पंडित, कायस्थ, ठाकुर और भूमिहार जातीय गुट थे, जो वर्चस्व की लड़ाई में एक- दूसरे से दिन - रात उलझे रहते थे। 

यानी भारत में हिन्दू राष्ट्र भले ही न हो लेकिन इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में यह तब पूरी शान से कायम था। मैंने उसी मिनी हिन्दू राष्ट्र में अपने जीवन के तीन-चार साल बिताए, जिस हिन्दू राष्ट्र को पूरे भारत में लागू करने का सपना मैंने अपनी किशोरावस्था से देखना शुरू कर दिया था। 

कैंपस में ही थोड़ा बहुत पिछड़े वर्ग की ताकतवर ओबीसी जातियों से भी राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई चलती रहती थी लेकिन कब्जा तब सवर्ण खेमे का ही था। दलित व मुस्लिम खेमे का तो चर्चा भी वर्चस्व की इस लड़ाई में कहीं दूर-दूर  तक नहीं था। 
हिंदू राष्ट्र के उसी सैंपल को जातिवाद के चश्मे से देखने के बाद इसके विरोध का मेरा नजरिया तब और मजबूत हो गया ,  जब  इलाहाबाद के बाद दिल्ली में आईआईएमसी के दौरान मैंने जातिवाद का असली चेहरा देखा, जिसमें दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों को अपने सम्मान, संसाधनों और सत्ता में हिस्सेदारी की लड़ाई लड़ते हुए देखा। 

इतना कुछ देखने, पढ़ने और जीवंत महसूस करने के बाद जब मेरे परिवार,  नातेदार- रिश्तेदार, सहपाठी, कलीग या अन्य परिचित लोग आरएसएस या भाजपा के मेरे विरोध से चिढ़कर मुझसे बहस करते हैं या जबरन मुझे भी हिन्दू राष्ट्र का समर्थक बनाने का प्रयत्न करते हैं तो एक ही शेर मुझे याद आता है कि 

" या-रब वो न समझे हैं न समझेंगे मिरी बात 
दे और दिल उन को जो न दे मुझ को ज़बाँ और" 

उन्हें यह डर है कि जिस तरह पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और कश्मीर में हिन्दुओं का नामोनिशान मिट गया , उसी तरह एक दिन पूरे भारत से इसे मिटाने की कोशिश इस्लामी आतंकवादी या कट्टरपंथी कर रहे हैं। उनका यह डर कहीं से गलत भी नहीं है क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथी और आतंकवादी सिर्फ हिन्दुओं को ही नहीं, बौद्धों, ईसाईयों और सिखों आदि को भी दुनिया से मिटाकर पूरी दुनिया को केवल एक ही धर्म में रंगना चाहते हैं. 
बिल्कुल उसी तरह , जिस तरह हिन्दू पूरे भारत को भगवा रंग में रंगना चाहते हैं। 

यह धार्मिक लड़ाई तो बाकी सभी धर्मों के बीच भी है, जो इस्लाम के आने के पहले से चल रही है। इस्लाम नहीं आया था तो बौद्ध धर्म से यह लड़ाई हिन्दुओं ने लड़ी। 

मगर अनवरत चलने वाली इस धार्मिक लड़ाई की आड़ में क्या हिंदुओं के बीच फैले इस जातिवादी वैमनस्य को दूर करने की बजाय केवल धार्मिक लड़ाई पर ही फोकस किया जाना चाहिए? 
पहले तो इस कड़वे सच को हजम करना सीखिए कि इतने जातिगत वैमनस्य के कारण कभी एकजुट न हो पाने की वजह से हिंदू यह लड़ाई स्थाई रूप से जीत नहीं सकते। यदि यह धार्मिक लड़ाई थोड़े समय के लिए हिन्दू उसी तरह जीत भी गए, जैसे इतिहास में कई बार जीत चुके हैं.... तो इसकी क्या गारंटी है कि आपस में जातिगत लड़ाई का लंबा दौर फिर शुरू करके यह इसे किसी विदेशी हमलावर धर्म के हाथों गंवा नहीं देंगे? 
जिन्हें इस सच का न पता हो , उन्हें इतिहास खुद पढ़ कर यह जान लेना चाहिए कि जातिवाद के इसी वैमनस्य के चलते हर बार अपने हिन्दू राष्ट्र को हमने खुद ही आपसी लड़ाई और नफरत के खेल में उलझ कर विदेशी हमलावरों को सौंपा है। हमें किसी विदेशी हमलावर या जयचंद ने नहीं हराया है। 

हम तो अपने जातिगत वैमनस्य और इसके चलते बने छोटे छोटे रजवाड़ों की लड़ाइयों से उपजी फूट के कारण हारते रहे हैं। 
बाकी उन अनपढ़ों से क्या बहस करना , जिन्हें इतिहास का या तो ज्ञान नहीं है या फिर वॉट्सएप यूनिवर्सिटी से ज्ञान लेकर बाकी हिंदुओं और मुसलमानों को दिन रात गरिया कर हिन्दू राष्ट्र बनाने में लगे हैं।
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हिन्दू धर्म में आस्था के चलते मुस्लिम युवक की संकट में आई जान, योगी से की फरियाद

हिन्दू धर्म में आस्था के चलते मुस्लिम युवक की संकट में आई जान, योगी से की फरियाद

संजय सक्सेना,लखनऊ

उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले एक मुस्लिम युवक को अपने घर में देवी-देवताओं की मूर्तियां रखने के कारण जान के लाले पड़ गए हैं.उसे लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही है.युवक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा मांगी है. मुस्लिम युवक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से खुद के सनातन धर्म अपनाने की गुहार लगाते हुए कहा है कि योगी जी मुझे सनातन धर्म में शामिल करा दीजिए। इन पापियों से मुझे बचा लीजिए। दरअसल जुनैद अपने घर में भगवान की प्रतिमाएं रखकर पूजापाठ करते हैं। इसके साथ ही भगवा वस्त्र पहनकर मंदिर जाते हैं।यह बात कुछ कट्टरपंथियों को रास नहीं आ रही है.

मामला कानपुर के बाबूपुरवा कोतवाली क्षेत्र स्थित खटिकाना में रहने वाले जुनैद के साथ जुड़ा हुआ हैं। जुनैद की मॉ रानी बेगम ने बताया कि जुनैद जब छोटा था, तो उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। रानी बेगम जुनैद को लेकर शोभन सरकार दर्शन के लिए जाने लगी थीं। शोभन सरकार जाने और वहां के दर्शन से जुनैद के आखों की रोशनी लौट आई । तभी से मॉ रानी बेगम और बेटे जुनैद का सनातन धर्म के प्रति आस्था बढ़ गई। जुनैद घर में  हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियों की पूजापाठ करने लगा। इसके साथ ही भगवा वस्त्र धारण कर मंदिर जाना शुरू कर दिया।

इसी बीच मार्च 2019 में फतेहपुर के बिंदकी में रहने वाली अफरोज से जुनैद का निकाह हुआ था। अफरोज जब निकाह के बाद ससुराल आई, तो उसने पूजापाठ का विरोध करना शुरू कर दिया। सनातन धर्म के प्रति आपत्तिजनक बाते कहने लगी। जिसकी वजह से आए दिन विवाद होने लगा,लेकिन इस सबके बाद भी  जुनैद की सनातन धर्म के प्रति आस्था कम नहीं हुई। जुनैद की पत्नी अफरोज ने पूरा किस्सा अपने मायके में बताया, जिसपर अफरोज कीमां मुस्तकीमा, पिता मुइन अहमद, भाई मुसीर खान और मोहसिन विरोध और मारपीट पर उतारू हो गए।जुनैद को धमकी देने लगे। जुनैद का अरोप है कि सास-ससुर और साले सनातन धर्म को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। मां-बेटे को जान से मारने की धमकी देते हैं। इसके साथ घर आकर गाली-गलौच और मुझसे मारपीट करते हैं। तरह-तरह से प्रताड़ित करते हैं।जुनैद का कहना है जब हिंदूस्तान में रहकर भी हम लोग सनातन धर्म की पूजापाठ नहीं कर पा रहे हैं तो हम कहां सुरक्षित रह सकते हैं। ससुरालियों की प्रताड़ना से परेशान होकर बीते 09 फरवरी 2023 को जुनैद ने मुख्यमंत्री योगी से शिकायत करके पूरा मामला उन्हें बताया और सुरक्षा की मांग की है।

गौरतलब हो,जुनैद ने 08 जून 2023 को बाबूपुरवा कोतवाली में तहरीर भी दी थी। बाबू पुरवा पुलिस ने जुनैद की तहरीर पर आईपीसी की धारा 298, 504, 506 में मुकदमा दर्ज किया है। वहीं,डीसीपी शिवाजी शुक्ला का कहना है कि ऐसा मामला सामने आया है। इसकी जांच कराई जा रही है।



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Bhadas Media 

Stringers Need Wages Not Dismissals, Says DUJ


The Delhi Union of Journalists is shocked but not surprised at the overreaction of Union Minister Smriti Irani and the Dainik Bhaskar management to a journalist's request for a news byte.

The cameraperson Vipin Yadav, along with other local media persons, had waited for the Minister to visit Krishnanagar Chauraha in Amethi. When she came but was leaving without speaking to them, Yadav asked her for a comment. Her reaction was unfortunately arrogant and annoyed. She threatened to complain to the newspaper 'malik' about his temerity. The episode was on camera and it's circulation led to the immediate and blatantly unfair dismissal of both Yadav and the Dainik Bhaskar stringer Rashid Hussain who was also present for the Minister's visit. 

  Dainik Bhaskar tweeted that they had no journalist in the area. Irani added fuel to the fire by tweeting that the journalist himself was 'fake'. While publicly humiliating the journalist the newspaper management privately demanded the return of the Mic ID from Hussain. The ID is the major proof of employment, in the absence of a formal contract. 

The episode focusses attention on the precarious nature of employment offered to local journalists by media outfits. Stringers are badly paid or unpaid and often there is no formal contract. They are simply given an ID card and if they are lucky some equipment. Others have to invest in their own cameras and microphones. Some are paid per newsbyte. Many stringers work merely for the prestige and access to local officials that the job gives them.

The Delhi Union of Journalists demands that such employment be formalised and decent remuneration be given to local journalists who are our grassroots news network. They enable information to percolate upwards. Without them there would be no rural or small town news, only information from state capitals where usually correspondents are employed. 

  Instead of humiliating journalists the Minister is expected to be sensitive to the tough conditions under which journalists work and to advocate decent employment for the profession.

News18 India Open Mic Chhattisgarh conclave concludes on a high note

Chief Minister Bhupesh Baghel speaks extensively about his transformative approach to politics and philosophy for growth and development

Raipur, 13th June 2023 - News18 India, the No.1 Hindi news channel in the country, successfully concluded the second edition of News18 India Open Mic in Chhattisgarh. The conclave provided a platform to celebrate the exceptional achievements of Chhattisgarh and its remarkable people, while fostering engaging conversations and thought-provoking discussions.

दुनिया में कोई कैसी भी मीडिया आ जाए, प्रिंट मीडिया का महत्व कायम रहेगा

छत्तीसगढ़ अंचल के लोकप्रिय दैनिक लोक सदन के14 वे स्थापना दिवस के परिप्रेक्ष्य में रविवार 11 जून को संध्या  कोरबा के पंडित मुकुटधर पांडे साहित्य भवन घंटाघर चौक में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कोरबा जिले के वरिष्ठ और सक्रिय पत्रकार रहे स्व. रमेश पासवान की स्मृति में पत्रकारिता सम्मान कार्यक्रम (द्वितीय वर्ष) 2023 के तहत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात स्वर्गीय रमेश पासवान के छाया चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। अतिथियों का स्वागत अभिनंदन उपरांत वरिष्ठ पत्रकार मनोज ठाकुर ने पत्रकार सत्य नारायण पाल को दिए जा रहे सम्मान का पाठ किया। पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान के लिए देशबन्धु, कोरबा के पत्रकार सत्यनारायण पाल( सत्या) को  वर्ष 2023 के लिए शॉल-श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं 10 हजार रुपये की सम्मान राशि मुख्य अतिथि राकेश श्रीवास्तव उपस्थित अतिथियों  एवम सपादक सुरेशचंद्र रोहरा द्वारा चेक भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस अवसर पर सत्यनारायण पाल  की धर्मपत्नी श्रीमती लाजवन्ती दीवान का भी सम्मान किया गया।
 

सी एम सिटी में भाजपा कार्यकर्ता ने मीडिया से कहा..पुलिस चला रही है गुंडाराज !

सत्येंद्र कुमार-
गोरखपुर: सी एम सिटी में अपने आपको भाजपा कार्यकर्ता बताने वाले आदित्य चौहान भी आखिर खाकी की हनक और सनक का शिकार हो ही गए । जमीन पर जबरिया निर्माण की शिकायत लेकर विधायक और एस डी एम तक पहुँचे भाजपा कार्यकर्ता को उम्मीद नही थी कि अपनी ही पार्टी की सत्ता में इतने अच्छे लिंक के बावजूद उन्हें बेआबरू होकर थाने से निकलना पड़ेगा ।

8.6.23

News18 India presents ‘News18 India Open Mic Chhattisgarh’

Raipur, 8th June, 2023 - News18 India, the No.1 Hindi news channel in the country, is all set to announce its second edition of News18 India Open Mic. The highly anticipated conclave is scheduled to take place on 11th June in Chhattisgarh.

जेलों पर बढ़ता कैदियों का भार एवं उनकी सुरक्षा में लापरवाही!

अभी हाल ही में आपने पढ़ा होगा कि देश की सबसे सुरक्षित कही जाने वाली तिहाड़ जेल में बहुत ही कम अंतराल में दो कैदियों को उनके विरोधी कैदियों ने पीट-पीटकर मार डाला। यह घटना सिर्फ दिल्ली की तिहाड़ जेल में ही नहीं हो रही, देश की लगभग सभी जेलों में होती है। और अब यह आम बात होने लगी है, जो अपने आपमें बड़ी चिन्ता का विषय है। दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के मेरठ मंडल की जेलों के ताजा आंकड़े जरा देखें। मेरठ जेल की क्षमता 1707, निरुद्ध बंदी 3357; गाजियाबाद की क्षमता 1704 व बंदी 3631; बुलंदशहर में बंद हैं तेईस सौ, जबकि क्षमता है 840। भारत की जेलों में बंद लोगों के बारे में सरकार के रिकार्ड में दर्ज आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। अनुमान है कि इस समय कोई चार लाख से ज्यादा लोग देश भर की जेलों में बंद हैं जिनमें से लगभग एक लाख तीस हजार सजायाफ्ता और कोई दो लाख अस्सी हजार विचाराधीन बंदी हैं। देश में दलितों, आदिवासियों व मुसलमानों की कुल आबादी चालीस फीसद के आसपास है, वहीं जेल में उनकी संख्या दो तिहाई यानी सड़सठ प्रतिशत है। इस तरह के बंदियों की संख्या तमिलनाडु और गुजरात में सबसे ज्यादा है। दलित आबादी सत्रह फीसद है जबकि जेल में बंद लोगों का बाईस फीसद दलितों का है। आदिवासी लगातार सिमटते जा रहे हैं व ताजा जनगणना उनकी जनभागीदारी नौ प्रतिशत बताती है, लेकिन जेल में नारकीय जीवन जी रहे लोगों का ग्यारह फीसद वनपुत्रों का है। मुसलिम आबादी चौदह प्रतिशत है लेकिन जेल में उनकी मौजूदगी बीस प्रतिशत से ज्यादा है।

5.6.23

चेन्नई में पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की मूर्ति लगाने के मायने

सौरभ सिंह सोमवंशी
लखनऊ।


प्रयागराज में जन्मे और देश के सातवें प्रधानमंत्री रहे राजा मांडा विश्वनाथ प्रताप सिंह की आदमकद मूर्ति तमिलनाडु के चेन्नई में लगाने का फैसला वहां के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने लिया है। विश्वनाथ प्रताप सिंह के जन्म स्थली प्रयागराज से करीब 2100 किलोमीटर  दूर उनकी मूर्ति दक्षिण भारत में लगाने का फैसला आश्चर्यचकित कर देने वाला फैसला है। वह भी तब जब उत्तर भारत के राजनीतिक दल उनका नाम लेने से डरते हैं।

क्या संयुक्त राष्ट्रसंघ से अलग हो सकता है भारत

अशोक मधुप, वरिष्ठ पत्रकार

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्रसंघ में अपने  लिए विटो पावर देने की मांग करता आ रहा है।वह मानता है  कि विटो पावर धारक पांच राष्ट्र  संयुक्त राष्ट्र  संघ को अपनी बपौती समझे  बैठे हैं।वह अपनी मर्जी के हिसाब से इसे  चला रहे हैं। चाहे आतंकवाद का मसला हो, या रूस और यूक्रेन युद्ध का। सूडान के आंतरिक विद्रोह और म्यामार के  मामले में  भी  तमाशबीन के अलावा संयुक्त राष्ट्रसंघ कोई महत्वपूर्ण भूमिका  नही निभा  पा रहा।  मनमर्जी का प्रस्ताव न होने पर विटो पावर धारक कोई भी देश अपनी विटो पावर का इस्तमाल कर प्रस्ताव को रोक देता  है। भारत इस सब हालात को लेकर वह चिंतित है। वह इस व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहा है।  उसकी लंबे समय ये मांग  है कि भारत को विटो पावर दी जाए। किंतु संयुक्त राष्ट्रसंघ में यदि भारत को विटो की पावर न मिली तो हाे सकता  है कि आगे चलकर भारत इससे अलग हो जाए।ये  बात विटो पावर देश  भी  धीरे – धीरे समझने लगे हैं।

27.5.23

सिविल सेवा में चयनित युवाओं को जाति और धर्म में मत बांटिए



अशोक मधुप, वरिष्ठ पत्रकार

संघ लोकसेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा का कल रिजल्ट आया। भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और केंद्रीय सेवा समूह 'ए' और समूह 'बी' में नियुक्ति के लिए कुल 933 उम्मीदवारों की अनुशंसा की गई है। अनुशंसित 933 उम्मीदवारों में से 345 सामान्य , 99 ईडब्ल्यूएस , 263 ओबीसी के हैं, 154 एससी , 72 एसटी के हैं। 178 उम्मीदवारों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। परीक्षा में इशिता किशोर ने  एयर एक रैंक हासिल की है। उसके बाद गरिमा लोहिया, उमा हरथी एन और स्मृति मिश्रा रहीं। इस बार खास बात यह  की लड़कियों ने परीक्षा में दबदबा कायम किया है।

21.5.23

समय की बात करती हैं प्रमोद दुबे की कहानियां




प्रयागराज। आज के समय में अपनी रचनाओं के जरिए समाज की विडंबनाओं को
उकेरना, ग़लत चीज़ों के खिलाफ़ अपनी रचनाओं के जरिए खड़ा होना बड़ी बात हैं।
कहानियों और ग़़ज़लों के जरिए क़लमकार अपनी बात कहता आया है और आगे भी कहता
रहेगा। यह चीज़ स्पष्ट रूप से प्रमोद दुबे की कहानी संग्रह ‘घोंसला’ और
डॉ. इम्तियाज़ समर के ग़ज़ल संग्रह ‘मोहब्बत का समर’ में दिखाई देती हैं। इन
दोनों ही लोगों ने वर्तमान समय की विसंगतियों को समझा, देखा और परखा है,
इसी हिसाब से सृजन किया है। यह बात रविवार को साहित्यिक संस्था
‘गुफ़्तगू’ की ओर से करेली स्थित अदब घर में अयोजित कार्यक्रम के दौरान
मशहूर न्यूरो सर्जन और कवि डॉ. प्रकाश खेतान ने अपने वक्तव्य में कही।

नौसिखियों की तरह भास्कर हुआ मुंबई में लांच

 

 दैनिक भास्कर जबलपुर समूह मुंबई में लांच हो गया है। लेकिन पहले दिन का इस अखबार को देखें तो यह किसी नौसिखिए की तरह निकला है। इसमें तमाम गलतियों की भरमार है। हालात यह है क‌ि डेटलाइन में मुंबई की जगह कई जगह मंबई छपा है। साथ ही ब्रीफ की खबरों में रिपोर्टर की एक के नीचे एक बाइलाइन है।

तो क्या फर्जी के आगे झुक गए लखनऊ के असली पत्रकार !

sanjay srivastava-

मैं संजय श्रीवास्तव लखनऊ में 28 वर्ष से सक्रिय पत्रकारिता से जुड़ा हूं। हिंदुस्तान, स्वतंत्र भारत, कुबेर टाइम्स, राष्ट्रीय स्वरूप,  जनसत्ता एक्सप्रेस, श्री टाइम्स, कैनविज टाइम्स, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट इत्यादि में मैंने निष्पक्ष, निर्भीक और ज़मीनी पत्रकारिता की। लखनऊ के सभी वरिष्ठ साथी मेरी पत्रकारिता और आचरण से भली - भांति- परिचित हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए दौर में साइबर एनकाउंटर्स

 

कौशल किशोर | twitter @mrKKjha

पिछले साल भारत में लगभग बीस लाख साइबर क्राइम की रिपोर्ट दर्ज की जाती है।  इसका मतलब औसतन पांच हजार से भी ज्यादा अपराध प्रति दिन दर्ज किए गए थे। इसके अतिरिक्त भारत और अन्य देशों में रिपोर्ट नहीं किए गए साइबर अपराधों की लंबी फेहरिस्त है। यह बेहद गंभीर मामला है। वैश्विक स्तर पर ठगी का यह आंकलन एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर सालाना हो चुका है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रणेता और कंप्यूटिंग के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले जेफ्री हिंटन को अपनी उपलब्धि पर पछतावा हो रहा है। एक दशक की लंबी सेवा के बाद हाल ही में वह गूगल की मातृ संस्थान अल्फाबेट इंक से इस्तीफा दे चुके हैं। इसके साथ ही एआई के लगातार बढ़ते जोखिम के बारे में खुल कर बात भी करने लगे हैं।

कानपुर में बार एसोसिएशन ने अधिवक्ताओं और पत्रकारों को किया सम्मानित

 



कानपुर बार एसोसिएशन ने शनिवार को अधिवक्ताओं और पत्रकारों को सम्मानित किया। कानपुर कचहरी में पिछले दिनों हुए आंदोलन में शामिल अधिवक्ताओं को सम्मानित किया। वह निष्पक्ष पत्रकारिता से आंदोलन की धारदार खबरें लिखकर अधिवक्ताओं की आवाज़ बुलन्द करने वाले पत्रकारों का भी सम्मानित किया गया। जिसमें कानपुर जर्नलिस्ट क्लब के महामंत्री अभय त्रिपाठी, हिंदुस्तान अखबार के गौरव श्रीवास्तव, जागरण के अलोक शर्मा, अमर उजाला के आशीष अग्रवाल को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किए गए, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अधिवक्ता और बार के पदाधिकारी कानपुर कचहरी पहुंचे। अधिवक्ताओं को सम्मानित किया गया।

रोने की हजार वजहें कम पड़ जाएं यदि हंसने की एक वजह मिल जाए

आज के भागदौड़ भरे जीवन में लोग तनाव और डिप्रेशन जैसी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इससे न सिर्फ इंसान का काम प्रभावित होता है, बल्कि इसका असर उसके जीवन और परिवार पर भी पड़ता है। आजकल तो चारों तरफ के हालात देखकर व्यक्ति वैसे ही परेशान रहता है। लेकिन हमें अपनी जिंदगी में जरूर खुश रहना चाहिए और हंसना चाहिए। डिप्रेशन और तनाव दूर करने के लिए हंसना सबसे प्रभावी माना जाता है। हंसने से न सिर्फ वह इंसान खुशी महसूस करता है बल्कि उसके आसपास के लोगों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ता है। हंसने से रोग दूर होते हैं और दिल के साथ-साथ दिमाग भी स्वस्थ रहता है। लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि बात करते समय हम जितनी ऑक्सीजन लेते हैं, उससे छह गुना ज्यादा ऑक्सीजन हम हंसते समय लेते हैं। इंसान के जीवन में हंसी के पल बढ़ाने के लिए विश्व हास्य दिवस मनाया जाता है। शरीर में एंडोर्फिन का स्राव होने से हंसी दर्द को कम करने के साथ ही मांसपेशियों के तनाव को भी कम करती है. यह मई महीने के पहले रविवार को मनाया जाता है। विश्व हास्य दिवस लोगों में हंसी के स्वास्थ्य लाभ और चिकित्सीय प्रभावों को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है


 


सुरेश गांधी-

आधुनिक जीवनशैली में तकनीकी विकास ने हमें बहुत सारी चीजें दी हैं, बहुत-सी सुविधाएं प्रदान की हैं। लेकिन बहुत कुछ छीन भी लिया है। इनमें हंसी और खुशी भी शामिल हैं। तमाम भौतिक संसाधनों और सुख-सुविधाओं ने जीवन को आरामदेह और आसान तो बना दिया लेकिन हमसे हमारा वक्त, खुशियां और मुस्कराहटें छीन लीं। ऐसे में हास्य योग मनुष्य के जीवन में बहुत उपयोगी है, इंसान को जिंदगी हंसते-हंसाते हुए गुजारनी चाहिए। जिंदगी में हंसते हुए रहने से शरीर भी पूर्ण रूप से स्वस्थ्य रहता है। हास्य योग के अनुसार, हास्य सकारात्मक और शक्तिशाली भावना है जिसमें व्यक्ति को ऊर्जावान और संसार को शांतिपूर्ण बनाने के सभी तत्व उपस्थित रहते हैं। यह व्यक्ति के विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करता है और व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। जब व्यक्ति समूह में हंसता है तो यह सकारात्मक ऊर्जा पूरे क्षेत्र में फैल जाती है और क्षेत्र से नकारात्मक ऊर्जा को हटाती है।

दिल्ली वालों के साथ पब्लिक एप्प कर रहा है फ्रॉड

दिल्ली के रिपोर्टरों को जानबूझ कर पेमेंट दे रहा कम

पब्लिक एप्प इन दिनों दिल्ली के रिपोर्टर के साथ फ्रॉड कर रहा है. पब्लिक अप्प ने अपने वीडियो से लाइक और व्यूज ऑप्शन बंद कर  दिया है जिससे कि रिपोर्टर को पता न चल सके कि कितने लोग देख रहे हैं, कितने लाइक कर रहे हैं.

News18 India Open Mic Uttarakhand Celebrates the Spirit of Uttarakhand with Prominent Personalities

 

1st May, Dehradun: News18 India, India’s No.1 Hindi News Channel conducted News18 India Open Mic Uttarakhand as a special initiative to showcase the diversity and talent of Uttarakhand. The conclave brought together leaders, artists, and other prominent personalities to discuss a range of themes and topics. The event was a great success, with inspiring speeches and performances.

आयुष्मान कार्ड से इलाज में खेल, पैसे न देने पर बीमार बच्ची को निकाला अस्पताल से बाहर


निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड से इलाज पर भी कर रहे वसूली, हद दर्जे की बदतमीजी पर उतरा अस्पताल का संचालक डाक्टर

कासगंज। आयुष्मान कार्ड से इलाज के नाम पर शहर के कलावती हॉस्पिटल पर धन वसूली का आरोप लगा है। एक तीमारदार ने आयुष्मान कार्ड होते हुए भी अस्पताल कर्मियों और डॉक्टर द्वारा दबाईयों के रुपये लिए जाने का आरोप लगाया है। इतना ही नही पैसे न दिए जाने पर अस्पताल कर्मचारियों और डॉक्टर द्वारा रोग पीड़ित बच्ची को अस्पताल से बाहर निकालने की बात भी तीमारदार ने कही है।

18.5.23

यूपी बीजेपी के पुराने ब्राह्मण चेहरे हाशिए पर!

 अजय कुमार, लखनऊ

      भारतीय जनता पार्टी में मोदी युग की शुरूआत के बाद कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बीजेपी की पिछले करीब एक दशक की राजनीति पर नजर दौड़ाई जाए तो यह कहा जा सकता है कि जहां कभी पार्टी की विचारधारा सर्वोपरि हुआ करती थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(आरएसएस) की मर्जी के बिना पार्टी में कोई फैसला नहीं लिया जाता था। संघ के कई नेता बीजेपी में आकर संघ की विचारधारा को आगे बढ़ाते थे। पार्टी के भीतर पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान मिलता था।समय-समय पर उन्हीं में से किसी नेता/कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया जाता था। ऐसी परम्परागत भारतीय जनता पार्टी में आज की तारीख में विचारधारा की बात गौढ़ हो गई है। अब चुनाव में प्रत्याशी के चयन का आधार उसकी सोच से नहीं उसकी चुनाव जिताऊ क्षमता से तय किया जाता है। इसी प्रकार से अन्य दलोें की तरह बीजेपी में भी अब किसी नेता के ‘कद’ का निर्धारण उसकी विचारधारा और काबलियत से अधिक उसकी आक्रमकता से तय किया जाता है। मौजूदा बीजेपी के लिए वोहि नेता ‘काम’ का होता है जो सच-झूठ सब बोलने की क्षमता के साथ-साथ मतदाता तक अपनी बात सलीके से पहुंचाने में महारथ रखता हो, इसके साथ-साथ वोट बैंक की सियासत में फिट बैठता हो। पार्टी में अब ऐसा नेता ही आगे बढ़ता है। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षो में दिल्ली से लेकर राज्यों तक की बीजपी इकाई में आयातित नेताओं के साथ-साथ पूर्व नौकशाहों का भी दबदबा बढ़ा है, जबकि बदलती राजनीति में बीजेपी के लिए अपना पूरा जीवन खपा देने वाले कई दिग्गज नेता हासिये पर चले गए हैं।  

तो क्या अटल बिहारी वाजपेयी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी घुटने टेकने वाले नेता थे नड्डा जी ?

चरण  सिंह राजपूत -

बेशर्मी की पराकाष्ठा है मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले देश को भ्रष्ट और घुटने टेकने वाला बताना

क्या सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा गीत भी मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद लिखा गया है ? क्या भाखड़ा नागल बांध भी मोदी के पीएम बनने इ पहले बना है ? क्या बैंकों का एकीकरण भी मोदी के पीएम बनने के बाद किया गया है। क्या 1965 और 1971 का युद्ध भी मोदी के पीएम बनने के बाद जीता गया है ?  क्या देश परमाणु शक्ति भी मोदी के पीएम बनने के बाद हुआ है ? क्या सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, गांधी, लोहिया, जेपी सब भ्र्ष्ट और घुटने टेकने वाले थे ? बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कर्नाटक में दिए गए बयान से तो ऐसा ही लग रहा है।  दरअसल जेपी नड्डा ने कर्नाटक विधान सभा चुनाव में कहा है कि मोदी के पीएम बनने से पहले देश भ्रष्ट और घुटने टेकने वाला था। नड्डा का यह बयान ने केवल आज़ादी के बाद के सभी नेताओं और लोगों का अपमान कर रहा है बल्कि आजादी की लड़ाई में सब कुछ न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारियों की शहादत को भी बेकार साबित कर रहे हैं। नड्डा का यह बयान मोदी के पीएम बनने से पहले सेना के जवानों को भी कायर बताने वाला है।

10.5.23

आने वाले 50 से 100 वर्षों में पृथ्वी पर जीवन ही नहीं बचेगा!

राजीव थेपड़ा-

पर्यावरण की दुर्दशा और हमारी मासूमियत... हममें से ऐसा कोई नहीं, जो इस पर्यावरण की दुर्दशा से हैरान और परेशान नहीं । लेकिन  हैरान जिस बात से सबको होना चाहिए, उस पर कोई भी हैरान नहीं । बरसों से पर्यावरण पर आए संकट पर सभी रोना रोते हैं। लेकिन उस संकट का कारण कोई भी स्वयं को नहीं मानता, अपितु सब दूसरों पर दोषारोपण करते हैं ।  एक बहुत छोटी सी बात करना चाहता हूं मैं, यदि इसे कोई उसी रूप में समझ ले, जिस रूप में मैं इसे कहना चाह रहा हूं, तो पर्यावरण के संकट की जिम्मेवारी उसी क्षण हम सब ऊपर, हरेक व्यक्ति पर आ जाती है।

वृद्धावस्था पेंशन लेने के लिए 70 वर्षीय महिला प्लास्टिक की कुर्सी के सहारे नंगे पैर चल रही है!

Naveen sinha-

 

ओडिशा में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से वृद्धावस्था पेंशन लेने के लिए 70 वर्षीय महिला प्लास्टिक की कुर्सी के सहारे नंगे पैर चल रही है। अचानक यह तस्वीर हर किसी का ध्यान आकर्षित करती है और सोशल मीडिया पर मशहूर हो जाती है लेकिन क्यों? बैंक ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए अपने बुनियादी ढांचे के अनुकूल क्यों नहीं बनाया है? 

 

23.4.23

नन्द बाबू के कथेतर में स्थानीय रंग - पल्लव

 उदयपुर में नन्द चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान



उदयपुर। नन्द चतुर्वेदी जितने बड़े कवि हैं उतने ही श्रेष्ठ गद्यकार भी हैं। उनका कथेतर गद्य जीवन संघर्षों की धीमी और कष्टपूर्ण आँच पर निखरा गद्य है जिसमें कवि ने पिछली शताब्दी के अँधेरे में भी अम्लान रोशनी की तलाश नहीं छोड़ी। सुपरिचित युवा आलोचक और दिल्ली के हिन्दू कालेज में शिक्षक पल्लव ने 'नन्द चतुर्वेदी का कथेतर साहित्य' विषय पर कहा कि उनका गद्य लेखन भी समता और मनुष्यता के पक्ष में किया गया साहित्य कर्म है। नन्द चतुर्वेदी फाउंडेशन द्वारा कोटा खुला विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र सभागार में आयोजित नन्द चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान में पल्लव ने नन्द बाबू की पुस्तकों 'अतीत राग' और 'जो बचा रहा' का संदर्भ देते हुए इनमें संकलित उन संस्मरणों पर चर्चा की जो देवीलाल सामर, अश्क दम्पति, आलमशाह खान, प्रकाश आतुर,नईम,क़मर मेवाड़ी जैसे लेखकों और पंडित जवाहरलाल नेहरू, रजनीकांत वर्मा, हीरालाल जैन जैसे राजनेताओं पर लिखे गए हैं। उन्होंने नन्द बाबू के पारिवारिक और ग्रामीण जीवन पर लिखे गए कुछ मार्मिक संस्मरणों का उल्लेख भी किया जिनमें जीवन के स्थानीय रंग घुल मिल गए हैं।

शशिभूषण प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान से नवाजे जाएंगे पत्रकार : आईपीसी

 नई दिल्ली : वरिष्ठ पत्रकार शशिभूषण प्रसाद सिंह की जयंती समारोह के मौके पर अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद् के द्वारा पत्रकार सम्मान की बात आज बैठक के दौरान कही गई । बताते चले कि शशिभूषण प्रसाद सिंह बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले थे । जिन्होंने हिंदुस्थान समाचार की नींव बिहार में स्थापित की व कई वर्षों तक संपादन का कार्य किया । इसके अलावा उन्होंने हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्लीज की स्थापना की व संपादन करते रहे । 2021 में 71 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से वे पत्रकारिता जगत को अलविदा कह चले ।

भारतीय साहित्य सिद्धांत और नए विमर्शों के समायोजन को लेकर दो दिन चली बहस

 
(‘हिंदी साहित्य पर पश्चिमी प्रभाव और देशज प्रतिमान’ पर गोष्ठी)


-शशांक कुमार

28-29 मार्च, 2023 को ‘हिंदी साहित्य पर पश्चिमी प्रभाव और देशज प्रतिमान’ विषय पर दो दिन की विचार गोष्ठी का आयोजन दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की एनेक्सी में किया गया। आयोजन डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली की साहित्य अध्ययन पीठ के देशिक अभिलेख-अनुसंधान केंद्र (सीआए-आईआईएलकेएस) ने किया।

फ्रांस की मशहूर मैगजीन में लखनऊ के इस पत्रकार को दो पेज पर छाप दिया

लखनऊ। भारत के पत्रकार विदेशी अखबारों की सुर्खियों में आने लगे हैं। हाल ही में फ्रांस की मशहूर मैगजीन "LE FIGARO" ने लखनऊ मूल के पत्रकार सत्य प्रकाश भारती को दो पेजों पर छाप दिया है। यह मैगजीन अब फ्रांस में चर्चा का विषय बनी हुई है। उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद से बढ़े जातीय और धार्मिक भेदभाव की खबरे सोशल मीडिया के माध्यम तक विदेशों में पहुंच रही है। इन्हीं खबरों को फोलो करते हुए फ्रांस के दो पत्रकार उत्तर प्रदेश पहुंच गए। बहुजन मीडिया में छाए हुए मीडिया प्लैटफॉर्म "द मूकनायक" के पत्रकार सत्य प्रकाश भारती इस दौरान विदेशी पत्रकारों के साथ रहे और काम किया।

रामनगरी अयोध्या का आधुनिकीकरण में मिटता अस्तित्व

आधुनिक होती अयोध्या कहीं विनायक बनते बनते वानर ना बन जाए

पर्यटन सिटी में तब्दील हो रही तीर्थ अयोध्या को लेकर सोशल मीडिया पर छलका अयोध्या प्रेमियों का दर्द

ओम प्रकाश सिंह, अयोध्या 

जीवनभर अयोध्या के स्वर्णिम की कामना व उसके अनुरूप कर्म करने वाले भी रामनगरी के पर्यटननगरी में तब्दीली पर निराश हैं। अयोध्या न सिर्फ रूप बदल रही है बल्कि रूप को ही पहचान बना रही है। सदियों तक जिसकी पहचान प्रवाह और प्रार्थना रही है, अब भव्य भवन उसकी पहचान होंगे। यह अलग बात है कि पुनरुद्धार उन पहचान को धूमिल ही करेगा जो अयोध्या कहाये जाते हैं। तीर्थ अयोध्या को पर्यटन की दृष्टि से ही विकसित किया जा रहा है। मोक्षदायिनी सप्तपुरियों में से एक अयोध्या के बनते बिगड़ते स्वरूप को लेकर अब संत समाज में भी आवाज उठने लगी है। भाजपा व हिंदुत्व के पैरोकार भी सोशल मीडिया पर मुखर हो उठे हैं।
रामनगरी के प्रतिष्ठित मंदिर हनुमत निवास के मंहत आचार्य मिथिलेशनंदनीशरण ने अपने फेसबुक वाल पर बनती बिगड़ती अयोध्या का दर्द उड़ेल दिया है। सरकार को लेख व उस पर हुए कमेंट्स के आइने में अयोध्या को विकसित करने का तानाबाना बुनने में झिझकना नहीं चाहिए। आचार्य ने लिखा है कि निर्माण सदा एक चुनौतीभरा कार्य होता है, पुनर्निर्माण उससे भी अधिक। जगत् का निर्माण करने वाले ब्रह्मा भी इसके लिये तप करते हैं और प्रलय के पूर्व की सृष्टि को पुनर्निर्माण का आधार बनाते हैं। 

महोबा में ABP GANGA के पत्रकार के ऊपर डॉक्टर से अवैध वसूली के लगे आरोप

 



अधिकारियों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले महोबा जिले में अब पत्रकार भी कम नही,जिला अस्पताल में तैनात डॉ आरपी सिंह ने abp गंगा इमरान और तीन अन्य वहीद,शारिक और अपसार के ऊपर गाली गलौज और जबरन वसूली के आरोप लगाए है।

सेवा में श्रीमान संपादक भडास 4 मीडिया... पत्रकार उत्पीड़न का मामला है... कृपया देख लें

AFSAR AHMAD-

सेवा में
         श्रीमान संपादक
          भडास 4 मीडिया

विषय: जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर आरपी सिंह द्वारा बरती जा रही अनिमित्ताओं की खबर चलाये जाने पर साजिशन झूठी शिकायतें, फर्जी मुकदमा लिखाये जाने की साजिश और मान सम्मान को ठेस पहुंचाए जाने और छवि धूमिल करने के सम्बन्ध में..

पूरनपुर में मेडिकल एजेंसी स्वामी से पत्रकार द्वारा फ्री में दवाएं और रंगदारी मांगने के गंभीर आरोप

 


पीड़ित मेडिकल स्वामी पहुंचा पीलीभीत सूचना विभाग कार्यालय  पत्रकार की छानबीन कर कोतबाली में तहरीर देकर की कार्यवाही की मांग 

क्षेत्र में कथित पत्रकार बनकर लोगों का रहे शोषण होनी चाहिए कठोर कार्यवाही  




सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें भेजकर मीडिया की सत्यता पर भी उठा देते सवाल ऐसे लोगों पर हो कठोर कार्यवाही 

पूरनपुर/पीलीभीत। 

मेडिकल एजेंसी स्वामी से दवा की कीमत मांगने पर युवक ने रौब दिखाते हुए फ्री में दवा न देने पर मेडिकल स्वामी को बदनाम करने की धमकी दी गई। वहीं मेडिकल स्वामी को विभिन्न सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्मो पर वीडियो के जरिये भ्रामक तरीके से मेडिकल स्वामी को नशीली दवाओं का व्यापारी बताकर बदनाम किया गया है। फिलहाल मेडिकल स्वामी ने इस मामले में पूरनपुर कोतवाली पुलिस को लिखित तहरीर देकर आरोपी युवक के विरुद्ध कार्यवाही किए जाने की गुहार लगाई है। ताकि ऐसे कृत्य करने वालों को नसीहत मिल सके।

प्यार में लुटे मायूसों को चाय में छूट

 


लीजिए साहब ,अब प्यार में धोखा खाए हुए लोगों को निराश होने की आवश्यकता नहीं है।  डोबी ,गया ,बिहार उच्च पथ पर स्थित  "बेवफा चाय वाले " ने प्यार में लुटे हुए मायूसों के लिए 34 प्रतिशत छूट के साथ चाय का लुत्फ़ उठाने की योजना के मार्फ़त  "पुण्य" कमाने की योजना शुरू की है। प्यार में लुटे हुए आशिकों के लिए चाय मात्र 10  रुपये में ,जबकि प्रेमी युगलों के लिए प्रति कप चाय की कीमत 15  रुपये है।
तो देर ,किस बात की है ,कीजिये "भरपाई"।
* विजय सिंह




21.4.23

अनुभवी वीडियो एडिटर चाहिए

 आवश्यकता है उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से संचालित हापुड़ हलचल न्यूज़ यूट्यूब चैनल को एक अनुभवी वीडियो एडिटर की, वेतन कार्य और अनुभव के अनुसार दिया जाएगा

12.4.23

केपीएस के अत्रि भारद्वाज व वीपीसी के अरुण मिश्रा अध्यक्ष निर्वाचित

 



काशी पत्रकार संघ का द्विवार्षिक चुनाव सकुशल संपंन

प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद के लिए अरुण मिश्रा निर्विरोध चुने गए, विनय शंकर मंत्री व संदीप कोषाध्यक्ष निर्वाचित 

सभी विजेता प्रत्याशियों को देर रात बधाई देने वालों का चला दौर

सुरेश गांधी

वाराणसी। काशी पत्रकार संघ के द्विवार्षिक चुनाव (सत्र 2023-2025) के लिए अध्यक्ष पद पर अत्रि भारद्वाज, महामंत्री पद पर अखिलेश मिश्र व कोषाध्यक्ष के लिए पंकज त्रिपाठी निर्वाचित घोषित किये गये। जबकि संघ से संचालित वाराणसी प्रेस क्लब के भी द्विवार्षिक चुनाव में अरुण मिश्रा निर्विरोध निर्वाचित हुए। जबकि मंत्री पद पर विनय शंकर सिंह ने जीत दर्ज की।

Voice of People न्यूज़ चैनल (डिजिटल) में वैकेंसी

 


Voice of People न्यूज़ चैनल (डिजिटल) को सोशल मीडिया प्रोड्यूसर, वीडियो एडिटर, फीमेल एंकर की रिक्वायरमेंट है, इंटर्नशिप के लिए फ्रेशर्स भी संपर्क कर सकते हैं, मेहनती लोग जो मीडिया में कुछ बेहतर करना चाहते हैं वो जल्द से जल्द संपर्क करें-
Contact: 9415042885

9.4.23

नए आईटी नियमों में सट्टेबाजी और खबरों पर नकेल कसने की कवायद

सरकार ने खुला, सुरक्षित और विश्वसनीय और जवाबदेह इंटरनेट के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 में संशोधन अधिसूचित किए. ये संशोधन ऑनलाइन गेमिंग इको-सिस्टम के लिए एक व्यापक रूपरेखा निर्धारित करते हैं और सरकार के बारे में ऑनलाइन सामग्री से जुड़े तथ्य की पड़ताल से भी संबंधित हैं. ये नियम ऑनलाइन गेमिंग इनोवेशन को उत्प्रेरित और विस्तारित करने की दोहरी चुनौतियों का समाधान करते हैं और साथ ही नागरिकों को अवैध सट्टेबाजी और ऑनलाइन दांव लगाने से बचाते हैं। खेल और सट्टेबाजी के परिणाम पर दांव लगाने पर प्रतिबंध लगाने/निषेध करने के दौरान, नवाचार के विस्तार के लिए नियम उत्प्रेरक होंगे.

1.4.23

समाचार न्यूज़ इंडिया को आवश्यकता है...

 SNI- समाचार न्यूज़ इंडिया ला रहा है खबरों का एक हिंदी डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म जहां उत्तरप्रदेश समेत भारत के कई राज्यों की खबर और सूचना को जनहित में जनता और सरकार तक पहुंचाया जाएगा। समाचार न्यूज़ इंडिया को आवश्यकता है उत्तर प्रदेश के हर जिलों से ब्यूरो और करेस्पॉन्डेंस की। इसके साथ ही गोरखपुर ऑफिस पर कई पदों पर नियुक्ति होनी है। अपना रिज्यूम hr.samacharnewsindia@gmail.com पर भेजे या फिर 9336264623 पर व्हाट्सएप करें।

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के विनियमितीकरण के लिए मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

लखनऊ 01 अप्रैल ,

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने आज प्रदेश के मुख्यमंत्री के आधिकारिक ईमेल पोर्टल पर एक पत्र लिखकर प्रदेश में विभिन्न सेवा प्रदाता एजेंसियों के माध्यम से कार्य कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के सेवा संरक्षण एवं वेतन संरक्षण का मुद्दा सुलझाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। जे एन तिवारी ने एक प्रेस विज्ञप्ति अवगत कराया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा पुरानी पेंशन की बहाली से भी बड़ा मुद्दा है पुरानी पेंशन का मुद्दा जहां केंद्र सरकार का मुद्दा है वही प्रदेश में लाखों की संख्या में कार्य कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन संरक्षण एवं सेवा संरक्षण का मुद्दा उत्तर प्रदेश सरकार को ही सुलझाना है।

31.3.23

यूं ही नहीं हुई सहारा में क्रांति!

चरण सिंह राजपूत-

सहारा नोएडा परिसर से उठी बगावत की चिंगारी अब पूरे देश में आग का रूप ले चुकी है। यह वही संस्था है जिसमें डंडे के जोर पर कर्मचारियों से जहां चाहे हस्ताक्षर करा लिए जाते रहे हैं। चाटुकारिता की सभी हदें पार की जाती रही हैं। हक की आवाज को दमन के बल पर दबा दिया जाता रहा है। चेयरमैन (सुब्रत राय) को भगवान की तरह पूजा जाता रहा है। राजनेताओं, नौकरशाह, बाहुबलियों, बालीवुड और खेल हस्तियों तक पकड़ दिखाकर कर्मचारियों और निवेशकों को डराया जाता रहा है। मालिकानों और अधिकारियों ने तो जमकर अय्याशी की पर कर्मचारियों का बस शोषण और दमन ही किया गया। इस संस्था में अन्याय के खिलाफ ऐसा बिगुल बजा कि आंदोलन ने क्रांति कर रूप ले लिया। जिस मीडिया के बल पर गलत को सही कराते थे उसी मीडिया हाउस में टैंट गाड़ दिया गया था। तिहाड़ जेल में बंद चेयरमैन को जाकर खरी-खोटी सुनाई गई। ललकार दिया गया। सहारा के दमन, काले कारनामों और अन्याय के खिलाफ छिड़े इस आंदोलन को सही शब्दों में उतार दिया जाए तो बालीवुड के लिए एक बढ़िया क्रांतिकारी फिल्म बन जाए।

मुलायम राज में अपहरण, माया काल में केस, योगी सरकार में सजा

अजय कुमार, लखनऊ

      पूर्वांचल का खूंखार गुण्डा अतीक अहमद जो राजनैतिक संरक्षण में खूब फलाफूला था, आज उसके कर्मो का हिसाब हो गया। प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने अतीक अहमद सहित उसके दो साथियों दिनेश पासी और खान सौलत हनीफ को उम्र कैद की सजा सुनाई। अतीक का भाई अशरफ और अन्य सात आरोपी जरूर बरी हो गये।इसके साथ ही यह भी साफ हो गया कि भले ही सौ मुकदमों में उसके खौफ के चलते कोई गवाह सामने नहीं आया था,लेकिन एक मामला उस पर भारी पड़ा,जिसमें उसे उम्र कैद हो गई, जबकि हकीकत यह थी कि अतीक अहमद के काले कारनामों और जघन्य अपराधों की लम्बी लिस्ट थी और उसकी यह कू्ररता कई लोगों ने अपनी आंखों से देखी थी,लेकिन अतीक का खौफ ही ऐसा था कि कोई गवाह देने की हिम्मत नहीं कर पाता था,जिसने हिम्मत की तो उसे साम-दाम-दंड से ‘तोड़’ दिया गया। न जाने कितने गवाह ऐन मौके पर गवाही से मुकर गए,लेकिन कहते हैं कर्मो का हिसाब तो होता ही है, इसी लिए 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में गवाही देने जब उमेश पाल नाम का एक शख्स सामने आता है तो अतीक और उसके गुर्गे उसको सबक सिखाने के लिए उसका अपहरण कर लेते हैं और उसे गवाही न देने की धमकी देते हुए मरणासन कर छोड़ देते हैं,लेकिन उमेश पाल बच जाता है,ेलेकिन पूरे मामले में मुलायम सरकार सोती रहती है।क्योंकि उसका हाथ अतीक के साथ था। सपा नेतृत्व अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे गंुडों के सहारे मुस्लिम वोट बैंक पर अपनी नजर जमाए रखता था।सपा के लिए यह गुंडे नहीं वोट बैंक के सौदागर थे। आज भी कहीं न कहीं अखिलेश यादव और उनकी पार्टी अतीक के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है। वैसे बसपा भी समय-समय पर अतीक और मुख्तार का साथ लेती रही है। कुछ समय पूर्व ही बसपा ने अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन को पार्टी की सदस्यता दिलाई थी।शाइस्ता को बसपा ने  नगर निकाय चुनाव में प्रयागराज से मेयर पद का चुनाव लड़ाने का भी फैसला लिया था।

योगी जी, सरकार में बैठे माफियाओ को भी देखें

मैं पत्रकारिता के बाद किसान के तौर बेहतर खेती कर रहा हू। मेरे खेत के पास एलएमसी की जमीन थी। जिसको गांव सभा ने लेकर उसमें बारातघर का निर्माण करा दिया। उस जमीन के बीच में से 11 हजार की बिजली लाईन जा रही थी। जिसको विजली विभाग के अफसरों ने चुपके से हटाकर मेरे खेत में लगे ईंजन और बोरिंग के उपर से बिजली लाईन बना (खींच) दी। मै दो बार मुख्यमंत्री को मेल के जरिए पत्र भेज चुका हू। पांच बार बिजली विभाग में सचिव लखनऊ , दो बार चैयरमेंन कारपोरेशन लखनऊ, अधिशासी अभियंता दादरी और एसडीओ दादरी से शिकायत कर चुका हूं। अभी तक किसी भी अफसर के कान पर जूं नी रेंगी है।

नेत्रहीन छात्र ने मांगा प्रधानमंत्री से न्याय

भाष्कर गुहा नियोगी-

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विधि संकाय के नेत्रहीन छात्र संतोष त्रिपाठी ने शहर के सांसद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर न्याय मांगा है। पत्र में लिखा है कि संकाय प्रमुख प्रो. अजय कुमार छात्रों के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाते हैं। सारे नियमों के परे जाकर कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय की बेटी श्रद्धा राय की उपस्थिति को मैनेज कर उसे परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देते हैं इसके विरोध में जब संकाय के छात्र- छात्राएं आंदोलन करते हैं तो उन्हें धमकाते हैं। मुझे और मेरे साथ के छात्र विवेक कुमार तिवारी को निलंबित कर देते है। लेकिन निलंबन का कोई ठोस कारण मुझे बताते हैं।

News18 Rajasthan honours brave warriors of the state at ‘Shoorveer Samman’

  

Jaipur, 30th March 2023: News18, India’s No. 1 network, successfully hosted Shoorveer Samman, an award ceremony honouring the brave hearts who have shown extraordinary courage and resilience in the face of adversity for the safety of our nation. Held on 28th March at Hilton, Jaipur, the event was attended by several renowned dignitaries, army personnel of Rajasthan, and their families.

Urgent Requirement for Voice Over

Amit Kumar-
 

प्रतिदिन 5 से 7 वॉयस ऑवर वर्क फ्रॉम होम हेतु एक लो बजट फीमेल आर्टिस्ट की तलाश है। ऐसी कोई भी फीमेल साथी संपर्क कर सकता है जो टेंशन फ्री घर से हमे 5 से 7 वॉयस ऑवर करके भेज सके। कृपया मेल आर्टिस्ट संपर्क ना करें, एक अनुभवी मेल आर्टिस्ट/साथी की सेवा हम पहले से ही ले रहे हैं।

मेवाड़ विश्वविद्यालय के बप्पा बर्मन ने बैंकॉक में लहराया योग का परचम


-अंतर्राष्ट्रीय योगासन चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण व रजत पदक

 गाजियाबाद। मेवाड़ विश्वविद्यालय में योग संकाय के छात्र बप्पा बर्मन ने थाईलैंड के बैंकॉक शहर में आयोजित चार दिवसीय आठवीं अंतर्राष्ट्रीय योगासन चैंपियनशिप-2023 में बेहतरीन योग प्रदर्शन कर स्वर्ण व रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। अंतर्राष्ट्रीय एमेच्योर गेम्स की ओर से यह चैंपियनशिप आयोजित की गई। चैंपियनशिप में 23 देशों के चुने हुए खिलाड़ियों ने भाग लिया। बप्पा ने यह पदक नेपाल, भारत और थाईलैंड के खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन कर हासिल किया है।

digital awareness on Artificial Intelligence (AI)

 ABP Majha to telecast "Majha Maharashtra Digital Maharashtra - 2023" to promote digital awareness on Artificial Intelligence (AI)


Mumbai, March 31, 2023: ABP Majha, Maharashtra’s leading Marathi news channel, recently hosted 'Majha Maharashtra, Digital Maharashtra – 2023, a conclave to bridge the gap between emerging technology and the public with a focus on Artificial Intelligence (AI). The event will be aired from Friday, March 31 to Monday, April 3, 2023, at 4.30 pm. A special session will also be aired at 9.30 pm on Sunday, April 2.

A News Today में नौकरी के अवसर

 

न्यूज 18 और ईटीवी जैसे मीडिया संस्थानों में पिछले 13 सालों से बतौर एंकर और रिर्पोटर कार्यरत राम कृष्ण शुक्ला लखनऊ से अपना न्यूज चैनल लेकर आ रहे हैं। चैनल का नाम A News Today है जो फ़िलहाल mx player, hotstar aur Jio tv के अलावा यूट्यूब पर मौजूद है। 

Maharashtra On My Lips

 


Maharashtra On My Lips: Directorate of Tourism, Government of Maharashtra, and TV18 Broadcast Limited Successfully Commence a Series on Maharashtra

31st March, Mumbai, Maharashtra – The Directorate of Tourism, Government of Maharashtra, and TV18 Broadcast Limited have announced the successful launch of a new travelog series titled "Maharashtra On My Lips." This six-part series showcases the diverse culture, heritage, food, and hidden aspects of six locations in Maharashtra, namely Kolhapur, Vengurla, Tharkarli, Nashik, Amravati, and Nagpur. The series features popular actors Sonalee Kulkarni and Kunal Vijaykar.

20.3.23

कविता क्या है

डॉ श्याम किशोर प्रसाद-
 
आत्मा की उपज ‘कविता '

वाक्यं रसात्मकं काव्यम् अर्थात् रस युक्त वाक्य ही काव्य है। कविता आत्मा की अनुभूति, आदि प्रेरणा है। आत्मा की गूढ़ और छिपी हुई सौंदर्य राशि का भावना के आलोक से प्रकाशित हो उठना ही ‘कविता’ है। जिस समय आत्मा का व्यापक सौंदर्य निखर उठता है उस समय कवि अपने में सीमित रहते हुए भी असीम हो जाता है, ताल, लय एवं संगीत की प्रधानता होती है, वही कविता है। कविता सरस होती है। वो एक प्रबल अनुभूति है। रूप और ध्वनियां साकार और निराकार होती हैं। दृश्य और अदृश्य उसे अपने संगीत से ओतप्रोत कर देते हैं, समस्त जगत हृदय में गतिशीलता भरकर तिरोहित हो जाता है, उसी गतिशीलता का नाम ‘कविता’ है। काव्य ही अपने व्यापक रूप में अनेक सौंदर्य कोटियां निर्धारित करता है। जब काव्य अपने उदात्त रूप में ब्रह्मानंद के समकक्ष होता है, तब जिस प्रकार ब्रह्म की परिभाषा देना कठिन है, उसी प्रकार काव्य की परिभाषा देना भी कठिन हो जाता है।

9.3.23

नगर आयुक्त ने पत्रकारों को किया मिलन समारोह से दूर

संजय कुमार-
 
बिहारशरीफ नगर निगम का होली मिलन समारोह भी हो गया हैं कॉन्फिडेंटियल?
 


बिहारशरीफ। जहां लोकसभा, राज्यसभा तथा सभी विधानसभाओं की कार्यवाही का सीधा प्रसारण संचार माध्यमों के द्वारा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर बिहारशरीफ नगर निगम की बैठकों को छोड़ दीजिए, नगर निगम द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह भी कॉन्फिडेंटियल हो गया है तथा पत्रकारों को इस होली उत्सव समारोह से दूर रखा गया। समाचार कवरेज कर रहे हैं संवाददाताओं को साफ शब्दों में नगर आयुक्त ने कहा कि आप लोग वीडियो फोटो बनाकर सभागार से चले जाइए।
 बताया जाता है कि बिहारशरीफ नगर निगम के सभागार में 6 मार्च को नगर निगम द्वारा होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में मेयर ,उप मेयर, वार्ड पार्षद नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद थे। बाहरी लोगों की भी भरमार थी, बावजूद सिर्फ पत्रकारों को सभागार से बाहर जाने के लिए कहा गया।

6.3.23

Save Journalism Day

Hyderabad/Chandigarh, 6 March 2023:  Indian Journalists Union (IJU) calls on all journalists, journalist groups, all media organisations and all those who cherish the values of democracy to observe March 23, the day of matedom of Shaheed-e-Azam Bhagat Singh, a committed and multi lingual journalist, besides being a venerated freedom fighter, as ‘Save Journalism Day’.

Vastu Housing Finance Rolls Out Menstruation Leave for Women Employees

 Mumbai, March 06, 2023: Vastu Housing Finance Corporation Limited, a digital-first housing finance company, has introduced a menstruation leave policy effective March 2023. The women employees can avail one full-day wellness leave, or two half-day wellness leaves every month, to prioritise their well-being.

2.3.23

दुनिया को देखने का नजरिया सिखाती है फोटोग्राफी : प्रो. द्विवेदी

 



आईआईएमसी के अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों ने किया फोटोग्राफी प्रदर्शनी का आयोजन

नई दिल्ली, 28 फरवरी। भारतीय जन संचार संस्थान के अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित फोटोग्राफी प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए संस्थान के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी ने कहा कि फोटोग्राफी दुनिया को देखने का नजरिया सिखाती है। उन्होंने कहा कि कैमरा वह इंस्ट्रूमेंट है, जो सिखाता है कि कैसे बिना कैमरे के देखा जाए। इस अवसर पर डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह, अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग की पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. संगीता प्रणवेन्द्र, प्रो. राकेश गोस्वामी एवं वरिष्ठ फोटो पत्रकार श्री भागीरथ बासनेत सहित संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि बहुत से फोटोग्राफर सोचते हैं कि वे अच्छा कैमरा खरीदकर अच्छी तस्वीरें ले सकते हैं। लेकिन कैमरा कितना भी बढ़िया हो, वह कुछ नहीं कर सकता, यदि आपके दिमाग और दिल में कुछ न हो। उन्होंने कहा कि सबसे अच्छी तस्वीरें वे होती हैं, जो अपनी ताकत और अपना असर वर्षों तक कायम रखती हैं, चाहे उन्हें जितनी भी बार देखा जाए।

इस अवसर पर अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग की पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. संगीता प्रणवेन्द्र ने कहा कि फोटोग्राफी से संबंधित तकनीकी बारीकियों का ज्ञान मिलने से विद्यार्थियों को अपने प्रोफेशन के साथ-साथ एक नई विधा को जानने और समझने का अवसर मिला है।

वरिष्ठ फोटो पत्रकार श्री भागीरथ बासनेत द्वारा तीन दिवसीय फोटोग्राफी कार्यशाला के बाद अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों ने इस प्रदर्शनी का आयोजन किया। श्री भागीरथ ने अपनी कार्यशाला में छात्रों को फोटोग्राफी की बारीकियां और उससे जुड़ी तकनीक सिखाई। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने फोटोवॉक के माध्यम से दिल्ली के अनेक रंगों को अपने कैमरे में कैद किया।

विद्यार्थियों को मिला पुरस्कार

फोटोग्राफी प्रदर्शनी में छात्रों द्वारा क्लिक की गई 150 से अधिक तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा खींची गई तस्वीरों में से सर्वश्रेष्ठ तस्वीरों को पुरस्कृत भी किया गया। ओपन कैटेगरी में पहला स्थान जीशान अंजुम, दूसरा स्थान ज्योर्तिमय हलदर एवं तीसरा स्थान अनुग्रह प्रवीण को मिला। आकृति भंडारी को स्पेशल मेंशन का अवॉर्ड दिया गया।

आखिर हिन्दू राष्ट्र से फायदा किसको....!


-राजेश पंकज ’रंगीला’  
आजकल देश में एक नया मुद्दा जोर-शोर से उछाला जा रहा है। ऐसा लगता है, जैसे बोतल से फिर एक जिन्न बाहर आने को आमादा हो रहा है। मुद्दे को जिन्न के नाम की संज्ञा दी है। तो स्वाभाविक है, वह अच्छे के लिए तो होगा नहीं। हां जो इसे बोतल से बाहर निकाल रहा है, वह इससे अपने हित साधेगा ही। इसमें कोई शक भी नहीं होना चाहिए। जिन्न तो जिन्न है, वह यह थोड़े ही देखेगा कि निर्दोष को नुकसान न पहुंचाया जाए। वह तो ’जो हुक्म मेरे आका’ की भांति चलाएमान रहेगा। यहां जिस नए मुद्दे की बात यहां की जा रही है, वह है हिन्दू राष्ट्र का मुद्दा। वर्ष 2024 के आम चुनाव की बिछाई जा रही बिसात में एक मुद्दा यह भी शामिल होने जा रहा है। इससे पहले राम मंदिर निर्माण पूर्ण करना और उसे दर्शनों के लिए खोलना तो है ही।

शराब के नशे में नवभारत कर्मचारियों का प्रेस क्लब में हंगामा

 

Unmesh Gujarathi






यह सिर्फ मूर्तियों की पूजा नहीं है, अगर *"श्री* का *"निवास"* नहीं है तो मन में अहंकार, उन्माद होना तय है। सोचें) संगठन की मूर्खता के बारे में और फिर संगठन और संगठन के अच्छे मालिकों को शर्मसार करें। इस आधे-अधूरे ग्रुप से ऊपर, मालिक की जेब में है, हम मालिक के लिए "खास" हैं, हमारे बिना मालिक का पन्ना नहीं चलता, हम उसे रैगटैग इनकम बना देते हैं।

जनतंत्र टीवी ने खाया मेरा हक

 जब मैंने जनतंत्र टीवी जॉइन किया तो बड़ी उम्मीदें थी। कुछ अच्छा करने और कुछ रोचक करने का मन लेकर सेक्टर 4 स्तिथ जनतंत्र टीवी के ऑफिस पहुँचा लेकिन यहां पहुँचकर पता चला कि मैं एक जाल में फंस गया हूँ। क्योकि यहां 2 माह बाद यहां सैलरी मिलती थी कभी कभी दो बार मे मिलती है इससे पहले की कुछ समझ पाता मैंने निर्णय लिया कि यहां 6 माह नोकरी करूँगा और इस बीच दूसरी जगह नोकरी की तलाश करता रहूंगा।

प्रेस क्लब बुलंदशहर का होली मिलन समारोह


पीएमसी के होली मिलन समारोह में जमकर थिरके लोग, फूलों की होली ने बांधा समां
 
बुलंदशहर। पीएमसी की ओर से निकुंज हॉल में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर डीएम सीपी सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार, बीडीए उपाध्यक्ष डा. अंकुर लाठर और विशिष्ट अतिथि के तौर पर सीडीओ कुलदीप मीना, एडीएम प्रशासन डा. प्रशांत कुमार, एसपी सिटी सुरेंद्रनाथ तिवारी, एसपी क्राइम कमलेश बहादुर, सीएमओ डा. वीके सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष मनोज गर्ग ने शिरकत की। निकुंज हॉल में आयोजित होली मिलन समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया।