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16.2.11

देख तेरे इन्सान की हालत क्या हो गयी भगवान........


देख तेरे इन्सान की हालत क्या हो गयी भगवान.........
दिनांक -14/02/11
आज हमारे देश में चारों तरफ  आम आदमी खाद्य वस्तुओं की महंगाई से लेकर सभी वस्तुओं में 17 फीसदी का इजाफा और भ्रष्टाचार की वजह से सरकार में उसकी आस्था की जड़ों को हिला कर रख दिया है। आज देश के अधिक्तर लोगों के अन्दर यह बात पैठ गयी है कि सरकार और नौकरशाह खूब पैसे बना रहे हैं, जबकि जनता को उसके एक-एक बुनियादी वस्तुओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। समाज के हर व्यक्ति के अन्दर एक मंद अग्नि सी सुलगती हुई दिखाइ दे रही है। लोग परिस्थियों से संघर्ष करते हुए, देखते हुए, सुनते हुए, झेलते हुए, समाज के प्रत्येक मनुष्य के अंतःकरण में एक सुशुप्त ज्वालामूखी का निर्माण हो चुका है। प्रत्येक समाज की सहन शक्ति का एक निश्चित मापदंड है। हमारे समाज के कुछ लोग इस समय तो मौन हैं, कुछ एक लोग लगातार अपने शब्दों से, और कुछ लोग अपने लेखन द्वारा समय-समय पर इस पर कुठाराघात करते चले आ रहे हैं। कुल मिला कर समाज का प्रत्येक मनुष्य अपने घर से लेकर समाज तक में होने वाले परिर्वतनों, घटित घटनाओं से बहुत प्रभावित होकर क्या करे या न करे की स्थिती तक पहुँच गये हैं किसी भी समाज की यह स्थिति अत्यन्त विस्फोटक या खतरनाक होती है। अभी-अभी हमने मिश्र की जन आन्दोलन की विस्फोटक स्थिति को पढ़ा, सुना व देखा। ऐसी स्थिति अचानक पैदा नहीं होती है, बल्कि यह स्थिति अनेकों वर्षों के बाद समाज की सहनशीलता लांघ कर विस्फोटक स्थिति के उच्चतम शिखर पर पहुँच कर विस्फोट होता है। समाज में ऐसी स्थिति तब उत्पन्न होती है जब प्रशासन कुछ न कर पाने की स्थिति में आ जाती है और तब जनाक्रोश सहसा फूट कर सब कुछ तहस- नहस कर देता है।  इस समय जनता के सामने सबसे अहम मुद्दा बढ़ती हुई किमतों को लेकर है। आज मध्यम वर्ग से लेकर समाज के गरीब तबकों  मे एक ही स्वर सुनाई दे रहा है कि क्या करें किस तरह अपने परिवार को चलायें ,बच्चों को शिक्षा-दीक्षा दिलाएं एवं घर में विमार चल रहे बड़े बुजुर्ग मरीज का इलाज कैसे कराएं कुछ भी समझ में नहीं आता। पिछले ढेड़ सालों में दवाओं की कीमतों के साथ-साथ लगभग सभी वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऊपर से नकली दवाइयों, खाद्यान्न से लेकर मिट्टी के तेल व पेट्रोल तक में मिलावटखोरी दूध, घी से लेकर नकली दवा बनाने वालों एवं मिलावटखोरों पर अनेकों बार छापे डाले जाते रहे, कुछ एक दिनों तक मीडिया से तरह- तरह के समाचर पत्रों में छपते रहे, अंत में इस संम्बंध में क्या हुआ उसका अता पता ही नहीं चला। अभी-अभी कुछ दिन पहले महाराष्ट्र प्रदेश में प्रेट्रोल में मिलावट करने वाले गैंग पर एक अधिकरी द्वारा छापा मारा गया तो वे अपने जान से हाथ धो बैठे। इस घटना से हमारे समाज के उन बचे गिने-चुने कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों एवं ईमानदार व्यक्तियों के मध्य क्या संन्देश गया कि ईमानदारी करो और जान से हाथ धो बैठो। आज हमारे समाज में शासन ही भ्रष्ट्रजनों को बचाने के लिए उन्हे अंगरक्षक देती है और निरीह ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति खुलेआम भ्रष्ट्राचारियों के शिकार होते रहेंगे तो समाज के छुपे हुए गद्दारों-भ्रष्ट्रजनों, जमाखोरों और मिलावटखोरों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले लोग यदि धीरे-धीरे खत्म हो जायेंगे  तब हमारे देश और समाज का एक वीभत्ष रुप उभर कर हमारे सामने होगा उस स्थिति की परिकल्पना करके आज साधारण जनमानस के रोंगटे खड़े हो जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। हमारे समाज में घटने वाली ऐसी घटनाओं पर कुछ एक दिन बड़े ही गर्मजोशी के साथ समाचार पत्रों में छपने के साथ-साथ अधिकारी वर्ग सक्रिय रहते हैं उसके बाद वही मिलावटखोर दुसरी जगह अपना धंधा शुरु कर लेते हैं और सब कुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है। और कभी न खत्म होने वाला सिलसिला पुनः शुरु हो जाता है। दरअसल यहां कोई ऐसा नियम-कानून और उसे शक्ती से लागू करने वाला वर्तमान समय मे नहीं दिखाई दे रहा है। शायद भविष्य में इस काली रात में कोई उजाले की एक किरण दिखाई पड़े।

2 comments:

vandan gupta said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (17-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

Niraj Kumar Jha said...

You have well written about the prevailing scenario. But what I feel that most of the people only complain but do nothing on their part. In their actions they are often equally bad or even worse than the people they complain about.Basically most of us are hypocrites. Many of us do not care even to vote. True, some people are cynical but they should realize that choosing the lesser evil over time would certainly make great difference.