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20.5.20

अचानक किए गए 'लॉकडाउन' की वजह से आत्महत्या करने को मजब़ूर गरीब मजदूर लोग!

विभिन्न समाचार माध्यमों से हम देश के लगभग हर हिस्से से प्रतिदिन अचानक किए गए 'लॉकडाउन 'से फैक्ट्रियों के बंद होने,यातायात के बड़े साधनों यथा रेलवे और बस आधारित ट्रासपोर्ट व्यवस्था को भी एक साथ जाम कर देने से भूख से पीड़ित मजदूर परिवारों के किसी भी हालात में अपने हजारों किलोमीटर दूर अवस्थित अपने गाँव जाने के लिए पैदल,सायिकिल, मोटरसाइकिल,जुगाड़,ऑटो,ट्रैक्टर,डंफर,ट्रक आदि किसी भी साधन से जाने,पुलिस द्वारा भयानक रूप से पीटे जाने,40डिग्री सेंटीग्रेड की भीषण गर्मी में जाने से लगभग हर रोज रोड एक्सीडेंट,बिमारी,लू लगने,अत्यधिक थकावट, भूख और प्यास से सैकड़ों मजदूर लोगों की मरने की दुःखद खबरे आ ही रहीं थीं,आज कुछ समाचार पत्रों की खबरों के अनुसार उससे भी ज्यादे दुःखदायी खबर यह आई है कि गुजरात जैसे विकसित कहे जाने वाले राज्य के सूरत शहर में कल तीन लोगों ने नौकरी छूटने,घर न जाने और भूख की हताशा से तंग क्रमशः 28 वर्षीय बाँदा निवासी,55 वर्षीय महाराष्ट्र निवासी व एक 60 वर्षीय, तीन मजदूर लोगों ने आत्महत्या कर लिए!

पिछले छः साल से भारतीय मिडिया और सत्तारुढ़ दल के पालित आईटीसेल द्वारा जिस प्रकार मोदी के व्यक्तित्व के आभामण्डल को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा था,इसके साथ ही 'कथित गुजरात मॉडल 'का ढिंढोरा पीटा जा रहा था,यथा मोदी जैसा हिंदू हृदय सम्राट शासक पिछले कई सौ सालों बाद दिल्ली की सत्ता पर बैठा है,इतना बहादुर व काबिल प्रधानमंत्री स्वतंत्रता के बाद पहली बार दिल्ली की सत्ता पर पदासीन हुआ है,आदिआदि बहुत से कसीदे पिछले सालों में पढ़ने को मिले,परन्तु श्रीमान मोदीजी के केवल दो पागलपन की हद तक मूर्खतापूर्ण निर्णयों मसलन अचानक की गई 'नोटबंदी 'और अब उसी क्रम में बगैर उसके परिणाम और आगे-पीछे सोचे-विचारे जो 24 मार्च को 'लॉकडाउन 'घोषित किया गया है,इन दोनों 'तुगलकी पागलपनभरे निर्णयों ' से इस देश की आर्थिक स्थिति का तो 'भट्ठा ' बैठा ही दिया है,इसके चलते कई सौ इस देश के उद्योगों की रीढ़ मजदूर लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है !

हमें याद आता है सन् 1325 ईस्वी में दिल्ली की गद्दी पर बैठा मुहम्मद बिन तुगलक,जो अपने मूर्खताभरे कार्यों से इतिहास में बहुत प्रसिद्ध है। उसने भी अपने राज्य में अचानक मुद्रा में परिवर्तन किया था,उसने चाँदी के बदले ताँबे के सिक्कों का प्रचलन करने का शाही फर्मान जारी किया,मजेदार बात उसने यह किया कि ताँबे और चाँदी के सिक्कों की कीमत बराबर ही रख दी,लोगों ने मौके का फायदा उठाते हुए ताँबे के नकली सिक्के बनाने शुरु कर दिए और उससे चाँदी के सिक्कों को खरीदना शुरु कर दिया ! फलस्वरूप राज्य को राजस्व का भारी नुकसान हुआ,इसकी क्षतिपूर्ति के लिए उसने बेहिसाब जनता पर टैक्स बढ़ा दिया,परन्तु हारकर उसे ताँबे के सिक्कों को बंद करना पड़ा,लेकिन बंद किए गए ताँबे के सिक्कों की जगह राज्य को चाँदी के सिक्कों को जनता को लौटाना पड़ा ! जिससे उसके राज्य के राजस्व का पूरी तरह भट्ठा ही बैठ गया !

इसी प्रकार उसने एक और बहुत बड़ा कड़ा फैसला लिया,उसे राजधानी दिल्ली से दक्षिण भारत के सूदूर जगहों पर शासन करने में बड़ी कठिनाई होती थी, इसलिए उसने दिल्ली से 1227 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के दौलताबाद (अब देवगिरी )में अपनी राजधानी स्थानांतरित करने का भूत सवार हुआ,उसने अचानक फर्मान जारी किया कि 'राज्य के सारे लोग मसलन कर्मचारी, कारीगर,उलेमा,मौलवी आदि सभी दौलताबाद को तुरंत प्रस्थान करें। 'उसने अपने तत्कालीन बड़े वजीरों को आदेश दिया कि 'उसके आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए,दिल्ली में कोई रह ना जाए। ' फिर दिल्ली के अशक्त, बूढ़ों और बीमारों को भी चलने के लिए बाध्य किया गया,इस अवस्था में जो जाने में अपनी असमर्थता जताई उसे बादशाह सलामत के हुक्म उर्दुली के जुर्म में घोड़े के पैरों से बाँधकर दौलताबाद की तरफ घसीटते हुए ले जाया गया ! इस फर्मान के परिपालन में हजारों निर्दोष लोगों को अपने प्राण गवाने पड़े। मुहम्मद बिन तुगलक इतने से ही संतुष्ट नहीं हुआ,उसे कुछ दिनों बाद दौलताबाद की आबोहवा दिल्ली के मुकाबले अच्छी नहीं लगी, अब उसने फिर अपना निर्णय एक झटके में ही बदल दिया और फिर अपनी राजधानी दौलताबाद से दिल्ली बनाने का दृढ निश्चय कर लिया। अबकी बार अपना निर्णय और कठोरता से लागू किया। राजधानी बदलने के इस हेर-फेर में हजारों लोग फिर अपने प्राण गवाँ बैठे।

आधुनिक युग में मोदीजी के निर्णय ठीक मुहम्मद बिन तुगलक की तरह ही हैं। ये श्रीमान अपने अचानक मूर्खताभरे निर्णय इसलिए ले रहे हैं कि इनकी 'नायकत्व 'की धवि चमक जाय ! नोटबंदी और लॉकडाउन दोनों ही घटनाओं में ये अचानक लिए गये निर्णय अपने मंत्रीमंडल के अन्य लोगों से या विशेषज्ञों से बगैर गंभीर विचार विमर्श किए अचानक 4 घंटे की मोहलत देते हुए किए हैं ! नोटबंदी में कथित कालेधन और भ्रष्टाचार खतम करने के लिए 500 और 1000 के नोट 4 घंटे के अन्दर-अन्दर अमान्य कर दिए गए, परन्तु मूर्खता की हद देखिए उनकी जगह साथ-साथ 2000 के नोट भी शुरू कर दिए गए ! इस 2000 के नोटों के प्रचलन में लाने से 500 और 1000 के नोटों को बंद करने के औचित्य पर स्वतः ही पानी फिर गया। इसके अतिरिक्त इस मूर्खतापूर्ण व अविचारित अचानक किए गये निर्णय से करोड़ों लोगों की नौकरियाँ गईं,लाखों छोटी कम्पनियों का दिवाला निकला,देश की जीडीपी 7 से सीधे 4 पर आकर लुढ़क गई।

ठीक इसी प्रकार 24 मार्च 2020 को रात्रि 8 बजे आप आकर अचानक यह घोषणा करते हैं कि रात 12 बजे से सम्पूर्ण देश 'लॉकडाउन ' हो जाएगा,मतलब रेल,बस,यातायात के सारे साधन,स्कूल, ऑफिस आदि सभी कुछ बन्द ! मजे की बात आप कुछ समय पहले ही तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विडिओ कानफेरेंसिंग कर रहे थे,परन्तु 'लॉकडाउन 'करने में उन सभी लोगों को एक किनारे कर दिए,क्योंकि उन्हें साथ लेने पर आपके 'नायकत्व ' की छवि को धक्का लगता ! वह तो 'सामूहिक फैसला ' हो जाता !और आपके इसी मूर्खतापूर्ण और तुगलकी फैसले के कारण देश के अब तक कई सौ बेचारे गरीब मजदूर लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है और पता नहीं आपके 'इस फैसले 'से भविष्य में कितने और लोगों की जान अभी जाएगी ?

-निर्मल कुमार शर्मा,18-05-2020

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