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15.10.16

संस्कृत गीतों और धुनों ने किया मंत्रमुग्ध

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के 'पूर्व विद्यार्थी सम्मेलन' में संस्कृत बैंड ध्रुवा की प्रस्तुति

भोपाल, 15 अक्टूबर। वेदों की ऋचाओं और श्लोकों से संस्कृत बैंड ध्रुवा ने जब अपनी प्रस्तुति शुरू की, तब श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए। एक ओर रवीन्द्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर शरद पूर्णिमा की चाँदनी शीतलता का अहसास करा रही थी, वहीं ध्रुवा बैंड के सुर-ताल पर संस्कृत श्रोताओं के हृदय में उतर रही थी। संस्कृत गीतों, भजनों और श्लोकों की यह सांगीतिक प्रस्तुति ध्रुवा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी सम्मेलन के अवसर दी। संस्कृत के मंत्रों के साथ भारतीय पारंपरिक और पाश्चात्य के इस अद्भुत संगम को सुनने के लिए देशभर के मीडिया और संचार संस्थाओं में कार्यरत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ अध्यापक, अधिकारी और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

शायद पार्टी ही कन्फ्यूज है राहुल के भविष्य पर

अजय जैन ' विकल्प '

जिसने कभी खुद मंडी में जाकर या ठेले वाले भय्या से आलू नहीं  खरीदा हो ,वो भला कैसे समझेगा कि आलू की फैक्टरी नहीं होती है।अरे अभी तक जो अपने संगठन कॊ जी ही नही पाया ,वो भला मानुष तो 'सर्जिकल स्ट्राइक' कॊ भी आलू ही मानेगा न।इसके लिए इनकी कांग्रेस पार्टी सहित कॊई भी नेता अगर इनको जिम्मेदार मानता है तो गलती उस संगठन की है,जिसने इनको 'खून की दलाली' कहने के लिए देश में नेता के भेष में अकेले छोड़ दिया है।बस जनपथ से ही चल रही पार्टी की मुखिया कॊ अब तो समझना-स्वीकारना चाहिए कि ,गाँधी का मतलब ही स्वीकार्य सत्ता,लोकप्रिय छवि  और जनप्रतिनिधि नहीं होता है।ऎसा बनने के लिए जीवन तक त्यागना पड़ता है।सेना की 'सर्जिकल स्ट्राइक 'पर भाजपा के श्रेय कॊ लेकर राहुल ने क्या कहा,सवाल अब यह नही है।वरन ये है कि राहुल गांधी आखिर बात-हालात की गहराई कॊ नापना कब समझेंगे-सीखेंगे।इनके अब तक के राजनीतिक सफर में इतने उतार-चढ़ाव आने पर भी इन्होंने कोई सबक सीखा हो,इस पर विश्वास करना अभी भी ज़रा मुश्किल है।

पत्रकारिता : मानक नहीं, मान्यता बदलें

अर्पण जैन "अविचल" 

तेज गति से चलने वाले जनजीवन में पत्रकारो और पत्रकारिता का महत्व क्षणे-क्षणे कमतर होता जा रहा है, जनसामान्य ना जाने क्यू वर्तमान में पत्रकारो को हेय की दृष्टि से देखने की आदत डाल रहा है? ना जाने किस भय से आक्रांतित है जनमानस, या ना जाने पत्रकारो ने कौन सी भूल कर दी, या कौनसा ऐसा अपराध हो गया इस कुनबे से जो आज मानस पटल से पत्रकारो को सम्मान उतना नहीं मिल पा रहा है, जितना आज़ादी के पहले और बाद के कुछ सालो तक मिला | इस क्षणभंगूर दुनिया को कितनी ही आज़ादी का पाठ पत्रकारो ने पड़ाया, कितना मानवीय दृष्टिकोण के साथ हर संभव प्रयासो द्वारा उनके दुख को कम किया , अपनी हर भूमिका में जनहित किया / करवाया , किंतु आज विडंबना यह है की पत्रकार पहले से और दूरी बना रहे है जनता के साथ |

उप्र चुनाव : ओपीनियन पोल से भाजपा की खुशफहमी जरूर बढ़ी होगी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दशहरे के मौके पर लखनऊ के ऐशबाग रामलीला कमेटी मंच से जय-जय श्री राम का उद्घोष क्या किया, समाजवादी पार्टी में घट रहा असमाजवाद बजाए थमने के उफान लेने लगा। यह कयास भी लगाए जाने लगे कि कहीं भाजपा ने चुनावी एजेण्डा तो नहीं तय कर दिया? भाजपा उत्साहित है तो दूसरी पार्टियों में अब भी अनिश्चितता का माहौल दिख रहा है। अब तो सपा सुप्रीमों ने भी साफ-साफ कह दिया कि उप्र में मुख्यमंत्री सरकार बनने के बाद ही तय होगा। यानी अहम का पटाक्षेप होने के बजाए अभी केवल ‘तू बड़ा कि मैं’ का ट्रेलर ही सामने आया है। परिवार के विवाद में उलझी सपा और आयाराम-गयाराम के नफा-नुकसान को आंक रही बसपा के बीच, उम्मीदों का अंकुर पाल, नए सिरे से जोश के साथ आगे बढ़ रही कांग्रेस को एक झटके में ही, खबरिया चैनलों के ओपीनियन पोल ने सकते में डाल दिया।

राजेश बादल बोले- अखबारों में अच्छा लिखने और टीवी पर अच्छा दिखाने के लिए अच्छा पढना पहली शर्त

माखनलाल विश्वविद्यालय के 'पूर्व विद्यार्थी सम्मेलन' में विद्वानों और विद्यार्थियों ने रखे विचार

भोपाल, 15 अक्टूबर। पत्रकारिता मात्र रोजगार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सरोकारों से जुड़ा पेशा है। एक रोते हुए व्यक्ति के आँसू पोंछने की ताकत पत्रकारिता में है। पत्रकारिता से समाज को उम्मीदें हैं। एक सामान्य आदमी पत्रकारिता पर भरोसा रखता है। उसके भरोसे को बनाए रखना पत्रकारों की जिम्मेदारी है। पत्रकारिता में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। तकनीक बदल रही है। नए माध्यम आ रहे हैं। इस परिवर्तन के साथ हमें कदमताल करते हुए मीडिया में आगे बढऩा चाहिए, लेकिन अपने मूल्यों को साथ लेकर। व्यावसायिकता के इस दौर में भी मूल्यों की पत्रकारिता कठिन कार्य नहीं है। बस एक पहल की जरूरत है। यह विचार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के 'पूर्व विद्यार्थी सम्मेलन' में वक्ताओं ने प्रकट किए। सम्मेलन का आयोजन रजत जयंती वर्ष के तारतम्य में किया गया।

गरीब मरीजों से बुरा बर्ताव करता है बनारस का ये बाल रोग विशेषज्ञ डा. अशोक राय, पढ़िए एक बेबस पिता का पत्र


बिहार में राशन उपलब्ध कराने की सम्पूर्ण जानकारी वेबसाइट पर अपलोड नहीं

“केंद्र सरकार के सर्वर पर जगह नहीं है रहने के कारण बिहार में जिन परिवारों को राशन दिया जाता है इसकी सूची प्रकाशित नहीं की गयी है”... आज सेवा सेतु द्वारा दायर लोक शिकायत परिवाद की सुनवाई के दौरना बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोगता संरक्षण विभाग के IT मैनेजर ने यह बात बताई....

क्या है मामला ?

बिहार में किन परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना (PHH) और अन्त्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत राशन उपलब्ध कराया जा रहा है इसकी सम्पूर्ण जानकारी खाद्य एवं उपभोगता संरक्षण विभाग के वेब साईट पर सार्वजनिक नहीं किया गया है.

यूपी में जंगलराज : थाने में मां-बेटे को थर्ड डिग्री, महिला से दुर्व्यवहार



अलीगढ़ : कस्बा चंडोस के थाना चंडोस के गांव जलाक्सेरु में पुलिस का कारनामा... माँ बेटे को थर्ड डिग्री दी... थाने में दरोगा ने किया महिला से दुर्व्यवहार... जलकसेरु गांव के लोकेश को गांव में अवैध कब्जों को लेकर प्रधान और दबंगों के विरुद्ध कार्यवाही करना व हाईकोर्ट जाना महँगा पड़ गया। दबंगों ने लोकेश को घर में घुसकर मारा और उसकी माँ राजेंद्रजी को भी मारा एवं उसके कपड़े फाड़ दिए।

हिन्दुस्तान और प्रभात ख़बर ने सुशील मोदी और संजय सिंह को दिया आरक्षण!



ऐसा लगत है हिन्दुस्तान और प्रभात ख़बर ने सुशील मोदी और संजय सिंह को आरक्षण दे दिया है. प्रति दिन के हिन्दुस्तान में “राजकाज” और प्रभात में के “राजपाट” नामक पृष्ट में सुशील मोदी और संजय सिंह का एक खबर लगा होता है. कई बार दोनों अखबारों में एक ही खबर छपी होती है. 14 अक्टूबर को हिंदुस्तान में “लोहिया के मुद्दे को पीएम कर रहे हैं पूरा: सुशील मोदी” और प्रभात ख़बर में “लोहिया के सपनो को गला घोट दिया: मोदी”दोनों खबर एक ही है ये कैसा सांठ- गाँठ है?

यूपी में जंगलराज : एक भूमाफिया ने पत्रकार के पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी

सेवा में,
श्रीमान् पुलिस महानिदेशक
उ0प्र0 लखनऊ।

विषयः- भू माफिया एंव दबंग शातिर संजीव गुप्ता उर्फ वासी द्वारा प्रार्थिया के पति एंव समूचे परिवार को जान से मारने की धमकी दिये जाने के सम्बन्ध में।

महोदय,

मीडिया में रुचि रखने वाले मीडियाकर्मी ज़रूर पढ़ें...

लिखने का ये सिलसिला उस वाकये से शुरू होता है, जब रोज़ की तरह, सुबह से रात तक युवाओं की टीम काम कर रही थी, एक ऐसे चैनल के लिए, जिसकी बड़ी पहचान नहीं है, जो बिल्कुल नया है, फ़िर भी आत्मविश्वास से भरी टीम के युवा उस चैनल की आईडी को जीते हैं, उसे फ़ेसबुक, व्हाट्सएप, हर जगह जीना शुरू करते हैं, रात तक की ड्यूटी करने के बाद जैसे ही ये युवा आराम करने का मन बनाते हैं, अचानक उनके सीनियर का फ़ोन आता है, फ़ोन सिर्फ इत्तला करने के लिए, कि शहर में कुछ मसला हो गया है, जाना चाहो तो देख लो, लेकिन आधी रात का समय है और ख़बर की जगह काफ़ी दूर है, कार भी नहीं है।

भास्कर के पत्रकार साहिब संधू पर देश द्रोह का मामला दर्ज करने की मांग


साहिब संधू भदौड़ जिला बरनाला पंजाब से दैनिक भास्कर का पत्रकार है जो गत कई वर्षों से देश विरोधी ताकतों के साथ मिलकर समय समय पर देश विरोधी कार्रवाइयों में शामिल रहा है। इसके अलावा दैनिक भास्कर के जिला इंर्चाज हिमांशु दुआ के साथ मिलीभगत के चलते दैनिक भास्कर कार्यालय में बैठे स्थानीय संपादकों को पता नहीं चलने दिया और दैनिक भास्कर के नाम के तले देश विरोधी कार्रवाईयां चलती रही।

किताब 'गुस्ताखी माफ़ हरियाणा' की पत्रकार-छायाकार स्व. बुद्धिराजा द्वारा लिखी गई समीक्षा


स्वाद हरियाणा का... भारतीय मानचित्र पर हरियाणा एक छोटा सा प्रदेश है। हमेशा चर्चा में रहने वाला। राजनीति से लेकर अफसरशाही तक, आम आदमी की जीवन शैली से लेकर रोजमर्रा के हालात पर आए दिन किस्से बनते रहते हैं। कोई किस्सा खबर बन कर सामने आया तो कोई बिना शीर्षक बने खत्म हो गया। चर्चित और अनाम किस्सों को संकलित कर उसे एक किताब के रूप में सामने लाने का नवोदित लेकिन उल्लेखनीय प्रयास है – गुस्ताखी माफ हरियाणा।

कहीं हम नदियों को जोड़कर भविष्य की आपदा तो नहीं बुला रहे?

नदियों को जोड़ने की मुहिम देश के लिए कितनी उपयोगी या घातक होगी, बेहद सुर्खियों में है। इसे लेकर बहुत से विशेषज्ञों की अलग-अलग राय तथा सरकार की अपनी योजनाएं हैं। सच्चाई यह कि प्रमाणित आधारों या अपर्याप्त उदाहरणों से संशय ज्यादा उपजा है। हर कहीं केवल अपने तर्क हैं, तर्कों पर नीतियां-योजनाएं नहीं बनतीं, इसके लिए वैज्ञानिक आधार चाहिए। तमाम विवादों और प्रकरणों के बाद सबसे पहले अब यह जरूरी हो गया है कि जितनी भी नदी जोड़ परियोजनाएं हैं उनका वैज्ञानिक आधार सार्वजनिक हो ताकि उपयोगी होने पर, जनसमर्थन तो मिले ही जनजागृति भी बढ़े। लेकिन इस परिपेक्ष्य में अब तक जितनी भी बातें सामने हैं, वो बताती हैं कि योजनओं के नफा-नुकसान पर दुविधा ज्यादा है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के चलते भविष्य में जल की उपलब्धता और भी प्रभावित होने वाली है।

पत्रकारिता की मर्यादा बनाये रखना ज़रूरी : डॉ. बिजेंदर कुमार



डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज में फ्रेशर पार्टी का आयोजन

दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीम राव अम्बेडकर कॉलेज में हिंदी पत्रकारिता विभाग की फ्रेशर पार्टी ‘कलरव 2016’ का आयोजन किया गया। इस दौरान पत्रकारिता विभाग के सीनियर छात्रों ने प्रथम वर्ष के नव आगंतुक छात्रों का धूमधाम से स्वागत किया। सीनयर छात्रों ने नव आगुंतक  छात्रों से उनके पत्रकारिता कोर्स में आने को लेकर सवाल पूछे, जिसका सभी फ्रेशर ने अपने-अपने अंदाज में जबाव दिया। इसके अलावा मिस व मिस्टर फ्रेशर को चुनने के लिए ट्रेजर हंट, सामान्य व मीडिया ज्ञान, डांस परफॉर्मेंश आदि प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। जिसमें सभी फ्रेशर ने पूरी तैयारी के साथ बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के सभी राउंडों को क्लियर करते हुए सूरज रॉय ने मिस्टर फ्रेशर और गुलफ्शां ने मिस फ्रेशर का खिताब अपने नाम किया।

13.10.16

उरी के शहीदों के परिजनों से मुलाकात का भावुक पल


मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की धर्मपत्नी श्रीमती अमृता फडणवीस और ‘परमवीर’ की लेखिका मंजू लोढ़ा ने उरी हमले के शहीदों की विधवाओं और उनके परिवारजनों से मुलाकात। उरी में हुए महाराष्ट्र के चार शहीदों नासिक के संदीप ठोक, अमरावती के जानराव उईके, सातारा के चंद्रकांत गालांडे और यवतमाल के विकास कुलमेठे के परिजनों से मिलकर श्रीमती फडणवीस और श्रीमती लोढ़ा भावुक हो गईं।

10.10.16

दुर्गा पूजा और महिषासुर : चामुंडा देवी द्वारा महिषा का वध करने का कोई साक्ष्य नहीं

-एस.आर.दारापुरी
आई.पी.एस 
(से.नि.) 

पिछले वर्ष एक बार फिर जेएनयू में दुर्गा पूजा की अनुमति दिए जाने तथा महिषासुर पूजा की अनुमति न देने तथा लोकसभा में भी महिषासुर का सन्दर्भ आने के कारण महिषासुर का मुद्दा पुनः चर्चा आया था. हम जानते हैं कि नवरात्र के दौरान दुर्गा के नौ अवतारों की नौ दिन तक बारी बारी पूजा की जाती है. इसी अवधि में दुर्गा की सार्वजानिक स्थलों पर मूर्तियों की स्थापना की जाती है जहाँ पर रात को तरह तरह के गाने व् भजन होते हैं और माता के भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा करते हैं और चढ़ावा चढाते हैं. नौ दिन के बाद दुर्गा मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है. यह देखा गया है कि पहले सार्वजानिक स्थलों पर बहुत कम मूर्तियों की स्थापना की जाती थी परन्तु इधर इन की संख्या बहुत बढ़ गयी है जो शायद हिंदुत्व के सुनियोजित कार्यक्रम का हिस्सा है.

नवरात्रि साधना (स्वाध्याय) – Day 9

Discourse By Shraddhey Dr. Pranav Pandya Ji
(Chancellor of Dev Sanskriti Vishwavidyalay & Head of All World Gayatri Pariwar)
Date – 09/10/2016_

* नवरात्रि का अंतिम दिन श्लोक 4/42वां – ज्ञान की महिमा का शिखर । इस श्लोक में यह बताया गया है कि ज्ञान के शिखर में कैसा लगता है । जीवन की साड़ी दुविधाएं समाप्त हो जाती है । हमें अपने जीवन को किस प्रकार जीना चाहिए यह सिखाता है श्लोक ।
* गीत – लागी रे लगन हो मान एक तेरे नाम की... ।

धान की सरकारी खरीद शुरू न होने से किसान बेहाल

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद शुरू न होने से किसान बेहाल हैं और मंडियों में व्यापारियों के हाथों लुटने के लिए मजबूर है. यह बात आज एस.आर. दारापुरी पूर्व आई. जी. एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है. उन्होंने इस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले महीने घोषणा की थी कि 1 अक्तूबर से पूरे प्रदेश में धान की खरीद के लिए सरकारी धान क्रय केन्द्रों की स्थापना हो जाएगी और परन्तु आज तक पूरे प्रदेश में एक भी धान क्रय केंद्र स्थापित नहीं हुआ है जब कि धान की कटाई शुरू हो चुकी है.

9.10.16

मजीठिया : आखिर क्या चाहते हैं मालिकान

पहले तो न्यायपालिका आभार उसने लोकतंत्र के दरकते चौथे खंभे के अस्तित्व को बचाये रखने में लगातार उसका साथ दिया। मजीठिया वेजबोर्ड के अधिसूचित होने के बाद जबसे मामला अदालत की शरण में आया है तबसे लेकर अवमानना की लंबी लड़ाई तक कमोबेश हर सुनवाई में अदालती कार्यवाही अखबार कर्मियों के पक्ष में ही रही है। मालिकानों ने थोक में देश के नामी - गिरामी वकीलों को "ढाल" बनाया, तरकश के सारे तीर इस्तेमाल कर डाले लेकिन वे माननीय न्यायाधीशों कवच को नहीं भेद पाये।

पांच लाइन में पांच गलतियां


अमर उजाला। हरिद्वार। 4 अक्तूबर। पांच लाइन में पांच गलतियां- डेस्क कहां गई थी। मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तक का नाम सही नहीं। रिपोर्टर ने जल्दबाजी कर दी होगी लेकिन क्या डेस्क भी जल्दी में थी।

मजीठिया : आखिर वही हुआ जिसकी आशंका थी

मजीठिया वेजबोर्ड के अनुसार वेतन का डिफरेंस दिलवाने के इकलौते  (29-08-16) दावे को उत्तराखंड के " काबिल श्रम विभाग ने पीठासीन अधिकारी, श्रम न्यायालय के हवाले कर दिया।  बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन कराने की कौन कहे। उत्तराखंड का श्रम विभाग इसे औद्योगिक विवाद मान बैठा और तीन-चार तारीख लगाने के बाद श्रम न्यायालय के हवाले कर अपने कर्तव्य की "इतिश्री" कर ली। श्रम विभाग ने अब गेंद न्यायपालिका के हवाले कर दिया। अब देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसले की समीक्षा जिला स्तर की अदालत करेगी। यानी साल-छह महीने मामला श्रम न्यायालय में चलेगा, फैसला आएगा, उस फैसले के खिलाफ मेरे नियोक्ता हाईकोर्ट जाएंगे। हो सकता है कि दो-तीन साल वहां लग जाए और जब फैसला आये तो कोई एक पक्ष सुप्रीम चला जाए। तो क्या सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले की जिसके अवमानना का मामला दो साल से चल रहा है।

फिर गुजरात सरकार बर्बर कानून को लेकर बेकरार हुई

संजय रोकड़े 


गुजरात प्रोटेक्शन ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट जिपिसा। यह वही पुराना बिल है जिसको पहले गुजरात कंट्रोल ऑफ  टेररिज्म एंड ऑर्गनाइज्ड क्राइम गुकटॉक जैसे विवादित बिल के नाम से जाना जाता था। गुजरात सरकार ने एक बार फिर इस बिल को नाम बदल कर पेश करने का मन बना लिया हंै। राज्य सरकार ने फिलहाल इस बिल का न केवल नाम बदला है बल्कि इसे आगामी विधानसभा सत्र में सदन के पटल पर रखे जाने की भी पूरी-पूरी तैयारी है। इस बिल को लेकर यूपीए सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच तकरार भी हो चुकी है। अपराधियों से निपटने के भाव से बनाए जा रहे इस प्रस्तावित बिल में आज भी कई ऐसे पेच है जो बड़े-बड़े विवादों को जन्म दे सकता है।

पत्रकार हैं पक्षकार नहीं

अर्पण जैन "अविचल"

जमाने में बहस जारी है क़ि फलाँ टीवी चैनल उसका समर्थक है, फलाँ इसका | सवाल समर्थन के अधर से शुरू होकर चाटुकारिता के पेट तक पहुँचने में जुटा हुआ है |  आख़िर राजा राममोहन राय के आदर्शों से शुरू हुई चिंतन की पराकाष्ठा पर आज मीडिया के कई मानवीय मूल्य दाँव पर लग चुके हैं, जनता के विश्वास की बलिवेदी पर यदि मीडिया इसे अपनी वैश्विक प्रगति मान रहा है तो इसे इस समय की सबसे बड़ीं भूल मानना पड़ेगी, आख़िर किन मानवीय मूल्यों की हत्या करना चाह रहे हैं आज के तथाकथित न्यूज चैनल मालिक, या उनके पत्रकार......

डाक्टरों की नजर में यह है पत्रकारों की औकात

लापरवाह डाक्टर, क्लीनिक में घूमते बीमार कुत्ते...  

मऊ। जिले में उस दौरान हड़कम्प मच गया जब जिले के बच्चों के डाक्टर के यहा जिले के ही एक वरिष्ठ पत्रकार अपने संबंधित ब्यक्ति द्वारा अस्पताल में भर्ती बच्चों को देखने पहुचे। मामला नगर क्षेत्र के नरई बाध स्थित डाक्टर राजकुमार सिंह के यहाँ राविवार सुबह करीब दस बजे भर्ती बच्चे को देखने जब वरिष्ट पत्रकार पहुचे तो देखा कि वार्ड के पास में ही एक कुत्ता शो रहा था जो तेज गति से हाफ रहा था। इसकी सुचना पास में ही बैठे एक वार्ड व्याय को पत्रकार द्वारा दिया गया तो वार्ड व्याय ने कहा कि कुत्ते के बैठने से क्या मतलब , लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक होते हुये और कुत्ते से कही इंफेक्शन संबंधी रोग और न बढ़ जाय । इस भय से इसकी सुचना डाक्टर राजकुमार सिंह को देना उचित समझते हुये देना चाहे कि कुत्ते की बात सुनते ही डाक्टर ने उल्टे पत्रकार पर ही भड़क गये कि कुत्ते को भगाना नगर पालिका का काम है हमारा काम नही है आपको भागना है तो भगाइये मैं क्यों भगाउ। अभी इतनी बात कह ही रहे है थे कि उसी दौरान पत्रकार के हाथ से डाक्टर ने मोबाइल छीन लिया। और कहा कि जाओ जो करना हो करिये।

कानपुर प्रेस क्लब : कब होगा चुनाव?

कानपुर : कानपुर प्रेस क्लब का तो वैसे तो विवादों से पुराना नाता है लेकिन बीते 2 साल के घटना क्रम पर अगर नजर डालें तो ये कानपुर प्रेस क्लब के लिए किसी अभिशाप से काम नहीं थे, बीते साल जून से लगातार एस.आर.न्यूज़ के प्रबन्ध सम्पादक बलवन्त सिंह ने कानपुर प्रेस क्लब के 2014 में हुए चुनावो को चुनौती देते हुए पदाधिकारियों पर फर्जीवाड़ा का प्रेस क्लब पर कब्ज़ा करने का आरोप लगया था, जिसके बाद उनके द्वारा कोर्ट में भी 2 मुक़दमे लगाए गए थे जिसमे लगभग दोनों ही मुकदमों में आने वाले कुछ दिनों में प्रेस क्लब के विपक्ष में एक पक्षीय कार्यवाही हो सकती हैं,

हम असुर लोग इस धोखे की निंदा करते हैं

कोलकाता की एक संस्था ने धोखे से हम असुरों को बुलाकर महिषासुर शहादत अभियान को बदनाम करने की कोशिश की. इसका हम असुर समुदाय घोर निंदा करते हैं. हम असुर कोलकाता के किसी आयोजन में शामिल होने नहीं जा रहे हैं. हमारे संगठन की महासचिव वंदना टेटे ने आयोजकों को बता दिया है दुर्गा पूजा के किसी आयोजन में असुर लोग भाग नहीं लेंगे. यह आर्यों का छल-बल का पुराना तरीका है.

खून की दलाली बनाम राजनीतिक स्यापा

अर्पण जैन 'अविचल'

दिल्ली से लेकर दंतेवाड़ा, मुंबई से लेकर मीरपुर और बंगाल से बारामूला तक हिंद के जनमानस में केवल और केवल 'सर्जिकल स्ट्राइक' ही बसा हुआ है| कुछ समय पहले सर्जिकल स्ट्राइक जिसकी परिभाषा से भी देश का वास्ता नहीं रहा उसी परिभाषा ने आज देश को सेना के प्रति ज़िम्मेदार बनाया है| सन 1971-72 के बाद और कारगील युद्ध के समय सेना के प्रति राष्ट्रवासियों का प्रेम उमड़ा था, वही हाल आज सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी देश की जनता के है वही प्रेम, वही अपार स्नेह| किंतु जब राष्ट्रवासी सीमा के रक्षकों के त्याग का महिमामंडन कर रहे हो, उसी दौर में ज़िम्मेदार राजनीतिक दल के युवराज का बचकाना बयान कही ना कही उस दल के मानसिक अपरिपक्व होने का प्रमाण भी देता है|

8.10.16

अब समय मांगने का नहीं, छीनने का है

चरण सिंह राजपूत

सड़कों पर भी लड़ें मान-सम्मान व अधिकार की लड़ाई : 

हर काम को प्रभावित करने वाली राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि अब इस पर बड़े स्तर पर मंथन की जरूरत है। समाजसेवा के रूप में जाने जाने वाली यह राजनीति अब धंधा बनकर रह गयी है। समाजसेवा के जितने भी पेशे थे वे अब राजनीतिक धंधे के रूप में तब्दील होते जा रहे हैं। मरीजों का इलाज करने वाले डाक्टर, जरूरतमंदां को इंसाफ दिलाने वाले वकील, बच्चों का भविष्य बनाने वाले शिक्षक  अपना मूल पेशा छोड़कर राजनीति करने में मशगूल हैं। ऐसा भी नहीं कि ये लोग समाजसेवा की राजनीति कर रहे हों। इनका राजनीति में आने का मकसद इसे ढाल के रूप में इस्तेमाल करना है। राजनीति में आने का मकसद या तो पैसा कमाने या फिर गलत ढंग से कमाए गए पैसे को ठिकाने लगाना मात्र रह गया है। डाक्टर राजनीति करेगा तो स्वभाविक है कि अस्पताल में जनसेवा नहीं राजनीति होगी।

साहित्य की ये सनी लियोनी और विपाशा बसुएं

रासबिहारी पाण्डेय

पिछले दिनों युवा संभावनाशील रचनाकार को दिया जानेवाला भारतभूषण पुरस्कार दिल्ली की जिस छात्रा को दिया गया उसकी सरस्वती पर लिखी एक निहायत घटिया और फूहड़ कविता को मंगलेश डबराल और उनके लगुए भगुओं ने फेसबुक पर वायरल कर दिया और लगे हाँकने कि यह तो बहुत ऊँची कविता है.... लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं  ।थोड़े ही दिन बाद भाई लोगों ने तोताबाला और दोपदी नाम से दो फेंक आइडी बनायी और सुबह शाम दोपहर लगे कवितायें पोस्ट करने ..... कवितायें भी कैसी कैसी ......मैंने नहीं उतारा दरोगा के सामने अपना पेटीकोट...चाहे जो करूं शरीर तो मेरा है.....देहराग से ओतप्रोत .....सिर्फ और सिर्फ रोमांस नहीं ....संभोग के इर्द गिर्द का व्यायाम... रूस में बैठे एक अध्यापक तो बाकायदा प्रवक्ता ही बन बैठे इनका.....डमी के लिए कितने दिन तक मेहनत करते भला....चुप हो गये.... अब आँधी के बाद वाला सन्नाटा पसरा है। भाई लोग किसी नयी प्रतिभा की तलाश में लगे हैं ।हिंदी पाठकों के लिए ऐसी छिछोरी कवयित्रियों की औकात सनी लियोनी और विपाशा बसु से रत्ती भर ज्यादे नहीं है।

सांस्कृतिक एकता की प्रतीक विजयदशमी

-डॉ. सौरभ मालवीय

भारत एक विशाल देश है. इसी भौगोलिक संरचना जितनी विशाल है, उतनी ही विशाल है इसकी संस्कृति. यह इस भारत की सांस्कृतिक विशेषता है ही है कि कोई भी पर्व समस्त भारत में एक जैसी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है, भले ही उसे मनाने की विधि भिन्न हो. ऐसा ही एक पावन पर्व है दशहरा, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है. दशहरा भारत का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. विश्व भर के हिन्दू इसे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. यह अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अवतार राम ने रावण का वध कर असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की थी. रावण भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण करके लंका ले गया था. भगवान राम देवी दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन रावण का वध कर अपनी पत्नी को मुक्त कराया. दशहरा वर्ष की तीन अत्यंत महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है, जिनमें चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा भी सम्मिलित है. इस दिन लोग नया कार्य प्रारंभ करना अति शुभ माना जाता है. यह शक्ति की पूजा का पर्व है. इस दिन देवी दुर्गा की भी पूजा की जाती है. दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन को बहुत ही शुभ माना जाता है.

मानसिक गुलामी को हटाएगा लोकमंथन : दत्तात्रेय होसबोले

भोपाल। पिछले कुछ समय में एक खास विचारधारा के लोगों ने सुनियोजित ढंग से राष्ट्र और राष्ट्रीयता पर प्रश्न खड़े करने का प्रयास किया है। उन्होंने राष्ट्रीय विचार को उपेक्षित ही नहीं किया, बल्कि उसका उपहास तक उड़ाया है। जबकि इस खेत में खड़े किसान, कारखाने में काम कर रहे मजदूर, साहित्य सृजन में रत विचारक, कलाकार और यहाँ तक कि सामान्य नागरिकों के नित्य जीवन में राष्ट्रीय भाव प्रकट होता है। आजादी के 70 वर्षों में इस देश को मानसिक औपनिवेशिकता ने जकड़कर रखा गया है। अब समय आ गया है कि वह टूटना चाहिए। लोकमंथन इस मानसिक गुलामी को हटाने का माध्यम बनेगा। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने व्यक्त किए। विश्व संवाद केन्द्र, भोपाल की ओर से 'लोक मंथन : वैचारिक अवधारणा और कार्ययोजना' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में श्री होसबोले मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। लोक मंथन एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका आयोजन 12, 13 और 14 नवम्बर को भोपाल में होना है। इस कार्यक्रम में देशभर के विचारक और कर्मशील आएंगे।          

मोदी को शहीदों के खून की दलाल कहना भारी पड़ सकता है कांग्रेस को

-निरंजन परिहार-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शहीदों के खून की दलाली करनेवाला बताना राहुल गांधी की राजनीतिक भूल साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि उनका यह बयान कांग्रेस को बहुत भारी पड़ सकता है। ताजा माहौल में भी साफ दिख ही रहा है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को शहीदों के खून की दलाली करनेवाला कहकर खुद को तो चौतरफा हमले के माहौल में डाल ही दिया है, कांग्रेस पार्टी के लिए भी उन्होंने बड़ी मुसीबत मोल ली है। आनेवाले कई दिनों तक माहौल इसी राहुल गांधी के इस बयान के खूनी रंग में रंगा रहेगा, यह साफ दिख रहा है।

मजीठिया मामला : अखबारों के एचआर हेड को सुप्रीम कोर्ट में बनाया जाएगा पार्टी

देश भर के पत्रकारों के वेतन, एरियर और प्रमोशन से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड मामले में लेबर विभाग में  17(1) का क्लेम लगाने वाले समाचार पत्र कर्मियों को गलत तरीके से टर्मिनेट करने और उनके ट्रांसफर सस्पेंशन मामले में अब जल्द ही देश भर के समाचार पत्रों के एच आर हेड को भी सुप्रीमकोर्ट में दौड़ना पड़ेगा। मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने जानकारी दी कि जिस तरीके से मजीठिया वेज बोर्ड के क्रियान्यवन के मामले में अब तक अखबार मालिकों को पार्टी बनाया गया है, उसी तरह देश भर के समाचार पत्रों के एच आर हेड को भी सुप्रीमकोर्ट में पार्टी बनाया जाएगा, वह भी उनके नाम के साथ।

6.10.16

आरएसएस का निच्छद्दम राज है और विपक्ष गायब है : प्रो. चौथी राम यादव

'वनांचल लेखक एवं पत्रकार मंच' तथा 'रीडिंग रूम्स पब्लिकेशन, नई दिल्ली' द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'साहित्य और मीडिया में सत्ता की घुसपैठ' विषयक गोष्ठी का हुआ आयोजन


वाराणसी । लोकसभा चुनाव-2014 के बाद परिस्थितियां तेजी से बदली हैं और यह पहली बार है कि लेखकों के लिखने और बोलने एवं उनकी अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं और लेखकों की हत्याएं हो रही हैं। यह शुद्ध रूप से उग्र हिंदुत्ववादी आरएसएस की सरकार है जो कि अपनी पूर्ववर्ती एनडीए सरकार से भी भिन्न है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय भी लेखकों और मीडिया पर इस तरीके के हमले नहीं हुए। आरएसएस का निच्छद्दम राज है और विपक्ष गायब है।

भास्कर की इस घटिया पत्रकारिता से आसाराम बापू के चाहने वाले दुखी

Lokesh Mahawar : पेज ले-आउट के दोयम दर्जे के पैंतरों, भ्रमित हेड-लाइन्स लगा देने के हुनर से तडकामार टाइप की खबरें छापने में माहिर दैनिक भास्कर जिस घटिया स्तर पर उतर आया है, देश के प्रिंट मीडिया में फिलहाल जारी ‘येलो-जर्नलिज्म’ के चलन में यह अव्वल दर्जे का कहा जा सकता है। कुछ दिनों पहले रांची के एक बड़े अस्पताल में एक महिला को जमीन पर खाना परोसने वाले करुणाजनक दृश्य का फोटो छापकर मुद्दे की अधूरी जानकारी देकर अखबार ने जो अपनी ‘बुलंद पत्रकरिता’ का जो बौड़म मचाया उसका कहना ही क्या? अगले दिनदैनिक जागरण द्वारा उसी खबर का विस्तृत विवरण देने के बाद हल्ला-गुल्ला अभी थमा भी नहीं था कि भास्कर अपनी नयी करतूत के साथ आ खड़ा हुआ। इस बार संत आसाराम बापू पर ऐसी सनसनीखेज मसालेदार न्यूज के चक्कर में बनावटी खबर लगा डाली कि बवाल खड़ा हो गया है. बेशक संत आसाराम बापू के समर्थक गुस्से में है और इस बार वे दैनिक भास्कर के संपादकों की बखिया उधेड़ने के लिए उतारू हैं।




रेड एफएम 93.5 जमशेदपुर का कैंपेन : सफाई की सुपारी- माफ़ कर साफ़ कर

रेड एफएम 93.5 जमशेदपुर ने बीते दिनों एक रेडियो कैम्पेन "सफाई की सुपारी - माफ़ कर साफ़ कर" किया ! इस कैम्पेन के तहत रेड एफ एम  ने शहर जमशेदपुर को स्वक्छ रखने का सन्देश दिया ! एक हफ्ते के अपने इस कैम्पेन के तहत रेड ऍफ़ एम् ने शहर वासियों को स्वक्षता के प्रति जागरूक किया ! जैसा की हाल में आये आंकड़ों के  हिसाब से झारखण्ड राज्य देश का सबसे गंदे राज्य में शुमार हुआ और जमशेदपुर शहर जो कभी स्वक्ष शहर में गिना जाता था वो गंदे शहरों में गिना जाने लगा!



5.10.16

दिल्ली प्रेस क्लब का काम आखिर है क्या?

पढ़ने को मिला कि दिल्ली प्रेस क्लब में कई साथियों ने बड़े अंतर से चुनाव जीता। कई साथी फिर से अपने पदों पर काबिज हुए। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है और चलता रहेगा। ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिरकार प्रेस क्लब में चुनाव जीतने वाले इन पदाधिकारियों का काम है क्या ? प्रिंट मीडिया में ईमानदार और देशभक्त पत्रकार भुखमरी के कगार पर हैं। जगह-जगह पत्रकारों की हत्या की खबरें सुनने को मिलती हैं। लगभग सभी समाचार पत्रों में मालिकान व संपादक मीडियाकर्मियों का जमकर शोषण व उत्पीड़न कर रहे हैं। प्रिंट मीडिया के लिए गठित मजीठिया वेजबोर्ड सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं लग पा रहा है। अखबारों में आतंक का माहौल बना हुआ है। जो साथी मजीठिया मांगते हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

सरकार जितना ‘हगती’ नहीं है, उससे ज़्यादा पत्रकार उसे ‘गंधवाने’ पर तुले हैं!

तेल लेकर घूमने वाले पत्रकारों की बाढ़ आ गई है... फूंक मार-मार कर छाती को चौड़ा करके 56  तक पहुंचाया जा रहा... किसी पत्रकार की इतनी औकात नहीं है कि वो एक सवाल उस आदमी से पूछ सके... जो सर्वशक्तिमान बनकर बैठा हुआ है... जो कहा, वो मानो... जो नहीं कहा, वो मत मानो... फिर भी हमारे दिग्गज पत्रकार तेल का कटोरा साथ में लेकर चाटने में जुटे हुए हैं... अगर एक छोटी सी बात भी हो जाती है.. तो सीधे मोदी से जोड़ कर माहौल टाइट कर दिया जाता है... टॉप बैंड में चाहे जितनी ख़तरनाक लाइन लिख दो... आखिरी में विस्मयादीबोधक (!) चिह्न लगा दो... आप पास हो जाते हो...

3.10.16

“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” मानवता की कलात्मक हुंकार!

मंजुल भारद्वाज
(रंग चिन्तक- “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” के सृजक और प्रयोगकर्ता)

नब्बे का दशक देश, दुनिया और मानवता के लिए आमूल बदलाव का दौर है.”औद्योगिक क्रांति” के पहिये पर सवार होकर मानवता ने सामन्तवाद की दासता से निकलने का ख्वाब देखा.पर नब्बे के दशक तक आते आते साम्यवाद के किले ढह गए और ”औद्योगिक क्रांति” सर्वहारा की मुक्ति का मसीहा होने की बजाय पूंजीवाद का खतरनाक,घोर शोषणवादी और अमानवीय उपक्रम निकला जिसने सामन्ती सोच को ना केवल मजबूती दी अपितु विज्ञान के आविष्कार को तकनीक देकर भूमंडलीकरण के जरिये दुनिया को एक शोषित ‘गाँव’ में बदल दिया. ऐसे समय में भारत भी इन वैश्विक प्रक्रियाओं से अछुता नहीं था .

यूपी के जंगलराज में बौध परिपथ पर रोज गिरता है खून....

गाजीपुर में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शुरू किया 'आपरेशन एनएच'






गाजीपुर, उत्‍तर प्रदेश। सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कुछ मरीजों को चारपाई पर लिटाकर रौजा की सडक पार कराया। हाथों में स्‍लोगन लिखी तखितयां लेकर सडक पार कराते वक्‍त शासन/प्रशासन एवं जिम्‍मेदार माननीयों की सदबुद्धि के नारे भी लगाये। सभी ने कहा कि अच्‍छी सडकों पर चलना आम आदमी का मौलिक अधिकार है। जनपद में सडकों की जर्जरता को लेकर अपने अन्‍दाज में लगातार अनोखे आन्‍दोलन चलाकर शासन/प्रशासन का ध्‍यानाकर्षण कर रही सामाजिक संस्‍था समग्र विकास इंडिया के कार्यकर्ताओं ने कुछ दिन पूर्व नन्‍दगंज के जलजमाव में स्‍नान एवं दूसरे दिन जिम्‍मेदार लोगों केे नाम पिण्‍डदान भी किया था।

साहित्यकारों ने कहा- मुक्तिबोध की भूमिका में हैं कवि प्रभात

गुरूवार को साहित्यकार प्रभात सरसिज के काव्य-संग्रह ‘लोकराग’ का लोकार्पण हुआ. लोकार्पण खगेन्द्र ठाकुर, रामवचन राय, शिवानन्द तिवारी, हृषिकेश सुलभा और शेखर ने समवेत रूप से की. कवि खगेन्द्र ठाकुर ने कहा कि कवि प्रभात सरसिज में एक श्रेष्ठ कवि कि सम्भावना है. उनके काव्य-संकलन में प्रछन्न रूप से मनुष्यता को व्यक्त करने कि कोशिश कि गई है. काव्य के साथ व्यक्त होने वाली इस पुस्तक कि भाषा भी बहुत समर्थ है.

आगंनबाडियों के आन्दोलन की जीत

लखनऊ : आज आगंनबाड़ियों के संघर्ष के बदौलत उनके मानदेय में 800 रु की हुई वृद्धि पर यू0 पी0 वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष व आइपीएफ के प्रदेश संगठन सचिव दिनकर कपूर ने बधाई दी है। आज प्रेस को जारी अपने बयान में वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पिछले पच्चीस दिनों से लगातार  आंदोलनरत आगंनबाड़ियों के हौसले को कल अखिलेश सरकार के द्वारा कराए लाठीचार्ज से भी रोका नहीं जा सका।

डेंगू, चिकनगुनिया, वायरल का होम्योपैथिक उपचार जानिए

लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

इन दिनों देशभर में डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल फीवर ने कहर बरपा रखा है। देश के समर्पित डॉक्टर इन बीमारियों से पूरी निष्ठा के साथ लड़ रहे हैं। जिसके परिणामस्वरूप हम हमारे अपनों को इन बीमारियों के कहर से बचा पा रहे हैं। यद्यपि बीमारी के दौरान और बीमारी के उपचार के बाद जो हड्डीतोड़ दर्द उठने-बैठने, चलने-फिरने और नैतिक क्रियाकर्म तक करने में बाधक बन रहा है, वह केवल दर्द-निवारक दवाओं के भरोसे छोड़ा जा रहा है। जो कतई भी उचित नहीं है। ऐसे रोगियों की दशा गठिया के रोगियों की जैसी हो जाती है, क्योंकि गठिया में भी असहनीय दर्द होता है, लेकिन गठिया से सामान्यत: कोई मरता नहीं और इस दर्द से भी कोई मरता नहीं है। इसी कारण डॉक्टर और परिजन भी ऐसे रोगियों के दर्द के प्रति अगम्भीर रहते हैं। यह स्थिति ऐसे रोगियों के साथ क्रूरतम अन्याय से कम नहीं।

सिटी कनेक्शन स्वच्छता अभियान

सिटी कनेक्शन साप्ताहिक समाचार पत्र ने महात्मा गांधी जयंती व राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस के अवसर पर लखनऊ के कई क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान का आयोजन किया। साथ ही कुछ थानों व पुुलिस बूथों पर कीटनाशक का छिड़काव किया।

Remembering Deo Krishna Vyas

Members of the Delhi Union of Journalists proudly remembered Deo Krishna Vyas, veteran journalist, freedom fighter, trade unionist and so much more at a meeting held at the DUJ office on Thursday, Sept 29.  Many of his former colleagues at the Dainik Hindustan and other fondly recalled Vyasji who was known for his professional competence, political beliefs and simple, austere lifestyle.

2.10.16

मौजूदा सड़ी हुई व्यवस्था की मुक्ति का महानायक भगत सिंह और उसके राजनीतिक विचार

विवेक दत्त मथुरिया

पिछले दिनों शहीदे आजम भगत सिंह की जयंती थी। अफसोस और विडंबना इस बात की है कि परिवर्तन और प्रगति का आकांक्षी देश का युवा वर्ग अपने को भगत सिंह के राजनीतिक विचार और आदर्शो को आज तक समझ नहीं पाया। इंकलाब से जुड़े शहीद भगत सिंह के विचार विश्व दृष्टि के साथ मानवता की मुक्ति और श्रम की श्रेष्ठता की स्थापना से जुड़े हैं। आजादी के बाद गहरी राजनीतिक साजिश के तहत भगत सिंह और उनके विचारों से इस देश के युवाओं को दूर रखा गया। मानवता की मुक्ति से जुड़े भगत सिंह के राजनीतिक विचार सार्वभौमिक सच हैं।

ब्राह्मणों को लुभाने के लिये सियासी ब्रह्मस्त्र

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर करीब दस प्रतिशत ब्राह्मणों को लेकर सियासत गरम हो गई है। ब्राह्मणों को सभी दल अपने खेमें में खींचने को ललायित हैं। कभी कांग्रेस का मजबूत वोट बैंक समझे जाने वाले ब्राह्मणों ने 1989 में मण्डल-कमण्ड के दौर में कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। करीब दो दशकों तक ब्राह्मणों का बीजेपी से लगाव बना रहा,इस सिलसिले को बसपा ने तोड़ा। 2007 में जब बसपा ने खालिस दलित राजनीति से किराना करके  सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अख्तियार करते हुए ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का नया नारा बसपाइयों को दिया तो बीजेपी के ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लग गई। बीएसपी का दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम गठजोड़ का फार्मूला जबर्दस्त हिट रहा। 2007 में बीएसपी पहली बार इस गठजोड़ के सहारे बहुमत के साथ सत्ता हासिल करने में कामयाब रही। इसका प्रभाव यह हुआ कि 2007 से पूर्व तक बसपा में जिन पदों पर दलित नेता विराजमान थे,वहां ब्राह्मण चेहरे नजर आने लगे। पहली बार मुख्यमंत्री मायावती ने ब्यूराक्रेसी मंे भी दलित अधिकारियों को अनदेखा करते हुए तमाम महत्वपूर्ण पदों पर ब्राह्मण अधिकारियों की तैनाती कर दी, लेकिन 2012 के चुनाव करीब आते-आते माया को ब्राह्मणों को तरजीह देने के कारण दलित वोटरों की नाराजगी का अहसास होने चुका था।

मुस्लिम साक्षरता 03%, बिन साक्षरता और रोजगार कैसे संभव होगा विकास यह मंथन जरूरी है : मो. तारिक

भोपाल ! सर सैयद अहमद, अल्लामा इकबाल, रफी अहमद किदवई, अशफाक उल्ला खान, मौलाना अबुल कलाम आजाद, डॉ जाकिर हुसैन, फखरुद्दीन अली अहमद, कैप्टेन हमीद, एपीजे अब्दुल कलाम यह वह महान हस्तियां हैं जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर मुस्लिम समाज का भी नाम ऊंचा किया परंतु अब शिक्षा प्राप्त करना इतना आसान नहीं जो एक जटिल समस्या बन गई है !

EX.LOKAUKTA TO FIGHT CORRUPTION IN NEW AVTAR

PAWAN KUMAR BANSAL

NEW-DELHI

 Justice Pritam Pal,  former   Judge of Punjab and Haryana High court
and former  Lokaukta of Haryana has decided to continue his fight
against corruption although in new Avatar .By enlarging area of his
fight he has   formed ‘Social Justice Front which will be formally
launched on auspicious day of 2nd October at Ladwa.A large number of
retired Judges, civil servants, social workers and journalists  have
also joined with him in his fight against  injustice of any kind
Pritam Pal .During his tenure  as Lokaukta this scribe who has
launched signature campaign for  empowerment of Lokaukta, has written
that  he was dummy having no powers. But within his limited powers he
had created history by ordering registration of cases   against six
legislators of ruling party including one Chief Parliamentary
Secretary for allegedly demanding money for getting permission for
change of land use .After writing the judgement which had put then
chief minister ,Bhupinder Hooda in a  very embracing  position,
Justice Pritam pal rang to this scribe telling that he had proved that
he was not dummy. Another landmark judgement was ordering enquiry into
ten thousands crores Rs. Value added tax scam involving top officer of
taxation department and several top cops.

WILL MODI ENQUIRE WHO LEAKED INFORMATION BOUT BANSAL.S SONS, BLACK MONEY DECLARATION

PAWAN KUMAR BANSAL

NEW-DELHI

Times of India has carried a front page report claiming that  five
days before former corporate affairs D,G,B,K, Bansal and his son
,Yogesh allegedly ended their life, the later appears to  have
declared around RS.2.4 Crore under the Income Declaration Scheme 2016
of the Income tax department. Million dollar question being asked in
political and administrative circles is that will Prime  Minister
,Narender Modi  order  high level probe to find out as who in the
department has leaked this information to the paper. According to the
provisions of the scheme all information was to be kept secret and
leakage has made mockery of the scheme. Those   who had declared black
money under the scheme  now fear that their identity will also be
disclosed to vested interests. It is feared that several potential
declarants may now have second thoughts .It is the serious case of
breach of trust and confidential clause of the scheme.

30.9.16

शहीदों को श्रद्धांजली में दिखा मुंबई का अद्भुत अंदाज



किसी की आंख नम हुई, किसी का गला भर आया और किसी का अंतस रोया

विशेष संवाददाता

मुंबई। ग्लैमर की राजधानी कहे जानेवाले मुंबई शहर को भले ही बहुत हसीन सपनों का शहर माना जाता हो। लेकिन यह शहर अपने राष्ट्र प्रेम के लिए तो समर्पित है ही, देश के लिए अपनी जान देनेवाले शहीदों के प्रति बहुत संवेदनशील, भावुक और मुसीबत के मर्म को समझनेवाला शहर भी है। इसका ताजा सबूत श्रीमद राजचंद्र मिशन के प्रमुख पूज्य राकेशभाई के 50वें जन्मदिवस पर उस वक्त देखने को मिला, जब शहीदों की विधवाओं एवं उनके परिवारजनों का अद्भुत और आत्मीय अंदाज में बहुत भावुक अभिनंदन हुआ।

28.9.16

HP High Court decision on Sanawar School : Lawrence School is Private or Public ?

HC refers the matter back to CIC, Delhi
Court orders CIC for time-bound decision on Sanawar School

Himachal Pradesh High Court at Shimla has referred the issue of
accountability of Lawrence School, Sanawar under RTI Act back to
Central Information Commission, New Delhi. Over eight years back, CIC
had held in 2008 that by no criteria could the school be outside the
purview of the RTI Act, and had, therefore, declared Lawrence School a
‘Public Authority’ attracting all provisions of the RTI Act.
Accordingly, the school headmaster was directed to provide information
to the appellant.

26.9.16

आदरणीय प्रधानमंत्री जी, पाकिस्तान से युद्ध में मैं एक सैनिक के रूप में शामिल होना चाहता हूँ

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

आज मेरी माँ ने पूछा कि क्या युद्ध हो सकता है? अगर हो तो बेटे तुम जरूर जाना, क्यों कि आज परिवार से ज्यादा देश को तुम्हारी जरूरत है, आजकल हमारे देश का युवा नकारात्मक होता जा रहा है, और छोटी मोटी बातों को लेकर क्राइम कर देता है, युवा अधिकतर नशा, ड्रग्स, आत्महत्या और प्रेम प्रसंग में फंसा हुआ है । और मैं चाहती हूँ, कि तुम देश प्रेम का संदेश आज के युवा को समझा सको, और इसमें तुम्हारी जान भी चली जाये, तो मुझे गर्व होगा ।

22.9.16

मधुबनी बस हादसा और विधायक की सेल्फी

Bj Bikash 
bjha45@gmail.com


बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी थाना क्षेत्र अंतर्गत सुन्दरपुर टोला के पास सोमवार को भयानक बस हादसा हुआ। बस अनियंत्रित होकर पोखरे में गिर गई। हादसा इतना भयानक था की बस में सवार सभी 50 से अधिक यात्रियों के मरने की आशंका जाहिर की गई। जबकि आंकड़ो के हिसाब से हादसे के एक दिन बाद तक लगभग 40 शव को पोखरे से निकाला जा चूका है। हादसे के बाद से पुरे इलाके में चीख-पुकार मची थी। सभी यात्रियों के परिजन इधर उधर दौड़ भाग रहे थे। घटना सोमवार को करीब 11 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया की घटना का कारण एक साईकिल सवार युवक की जान बचाने में हुई। बस की गति इतनी तेज थी की बस पोखरे में जाते ही इतनी अन्दर तक डूब गई की बस दिकाही भी नहीं दे रहा था। घटना के समय बस के ड्राईवर अभय चौधरी और खलासी बिल्टू सहनी बस से कूद कर भाग गया। पुलिस जाँच में मंगलवार को खलासी बिल्टू साहनी को पुलिस ने मधुबनी के जयनगर से गिरफ्तार कर लिया है। जबकि ड्राईवर अभय चौधरी अभी भी गिरफ्त से बाहर है।

उम्मीद की किरन मगर तलाशता हूं मैं...

कवि डी एम मिश्र के गजल संग्रह का विमोचन व परिसंवाद ...

विमल किशोर

जन संस्कृति मंच की ओर से हिन्दी के चर्चित कवि डी एम मिश्र ;सुल्तानपुरद्ध के नये गजल संग्रह ‘आईना-दर-आईना’ का विमोचन 15 सितम्बर 2016 को लखनऊ के जयशंकर प्रसाद सभागार, कैसरबाग में किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ लोक गायिका व गजलकार डा. मालविका हरिओम के डी एम मिश्र की गजलों के सस्वर पाठ से हुआ। उन्होंने पहली गजल ‘मुहब्बत टूटकर करता हूं मगर अंधा नहीं बनता, खुदा से भी अपना प्यार इकतरफा नहीं करता।’ इसके बाद दूसरी गजल ‘कभी लौ का इधर जाना कभी लौ का उधर जाना, दीये का खेल है तूफान से अक्सर गुजर जाना’ सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि श्री मिश्र की गजलें अदम गोंडवी की परंपरा को आगे ले जाती हुई दिखती हैं। उनकी रचनाएं प्रगतिशीलता का परिचायक हैं।

Letter to CMD Air India

Dear Journo Frens

we are pleased to announced that a Letter being handed over to CMD, Air India, Mr. Ashwani Lohani, by Vice President, Press Association, Delhi, Mr. Shishir Soni, seeking priority on spot ticketing of AI and 50 percent concession to the working Journalists travelling to AI.

14.9.16

Stop insulting Bharat Mata, Stop raping Womens because of their Religion

Are you a Muslim Women? Do you eat beaf ? If yes, then few people belonging to hindu community would gangrape you, They will gang rape your daughters, who are under aged. Those arrested for murder or rape would soon be liberated. This is india, a country where idols of women are worshipped by hindus. But when it comes to Muslim womens they are free to rape them.

13.9.16

मोदी के इंटरव्यू के दौरान टॉप पर रहा IBN7, आज तक, इंडिया TV को पछाड़ा

नई दिल्ली। 2 सितंबर, शुक्रवार रात 9 बजे जिस वक्त IBN7 न्यूज चैनल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू टेलिकास्ट हुआ, IBN7 देश के तमाम हिंदी समाचार चैनलों को पीछे छोड़ते हुए नंबर-1 रहा। बीएआरसी के आंकड़ों के मुताबिक, IBN7 ने इस इंटरव्यू के दौरान आज तक, इंडिया टीवी, एबीपी और जी न्यूज जैसे हिंदी चैनलों को पीछे छोड़ दिया।

पत्रकारों से भिड़ा भाजपा नेता, माफी मांगने की लगा रहा गुहार

चन्द घंटों में उतरा नेतागिरी का भूत, हजार रुपये के विज्ञापन का पैसा बाकी.. आपराधिक मुकदमों में लम्बा चौड़ा इतिहास, विवादों से पुराना नाता, भाजपा की छवि पर दाग लगाता नेता, चुनाव से पहले पत्रकारों से बैर...

ऊधमसिंह नगर। जहां एक ओर भाजपा पार्टी अपने अनुशासन और शिष्टाचार की दुहाई देती नहीं थकती है और ऐसे दावा किया जाता है जैसे मानों इस राजनीतिक दल को छोड़ इनसे अच्छा और कोई नहीं ? तो वहीं दूसरी ओर जनपद यूएस नगर के किच्छा विधानसभा में एक भाजपा नेता कहलवाने वाला नेता अपनी ही पार्टी की छवि पर दाग लगा रहा है और अनुशासन की धज्जियां उड़ा अपने आपको पार्टी से बड़ा होने का दाम भर रहा है, जहां एक ओर वो खुले आम पत्रकारों पर अपनी दबंगता दिखाने से बाज नहीं आ रहा है तो वहीं उसको देख आवाम के मन में सवाल उठ रहा है कि जो भाजपा अनुशासन की दुहाई देती नहीं थकती है तो आखिर उसी पार्टी में ये नेता कैसे बना हुआ है जो पत्रकारो पर ही अपनी दबंगता दिखाने से बाज नहीं आ रहा है और खुलेआम हुंकार भरता है देख लेने की धमकी दे रहा है।

हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स में कर्मियों से यह फार्म साइन कराया जा रहा



खाट कांग्रेस की लुटी, बदनाम गरीब हो गया

अजय कुमार, लखनऊ
   
खाट कोई लूट रहा है और तोहमत किसी और पर लगाई जा रही है। खाट लूट कांड में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी गरीबों को बदनाम कर रहे हैं, जबकि वह जानते हैं कि खाट पर बैठने और उसे लूटने वाले दोंनो ही कांग्रेसी थे, जिन्हें राहुल की खाट पंचायत के लिये विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था। इसी लिये राहुल गरीबों की आड़ में कांग्रेसियों के कुकर्माे पर पर्दा डाल रहे हैं। जिन्होनंे दशकों तक देश को लूटा वह लोग ही सत्ता से बाहर होने पर खाट लूट काड को अंजाम दे रहे हैं। गरीब मंे अगर लूटपाट करने की हिम्मत होती तो वह ताउम्र गरीबी का दर्द क्यों सहता रहता, जो गरीब आजादी के 70 वर्षाे के बाद भी अपना वाजिब हक नहीं हासिल कर सका, वह खाट लूट की हिम्मत कैसे कर सकता है ?

जियो सिम ब्लैक होने का बड़ा अड्डा बना उत्तर प्रदेश का बरेली

जियो सिम के चक्कर में घण्टों लाइन फिर भी हाँथ लगता है धोखा, स्टोर की प्रक्रिया बनाई गई जटिल और अपारदर्शी ताकि लोग खरीदें ब्लैक में सिम


रामजी मिश्र 'मित्र'

बरेली (उत्तर प्रदेश) /जबसे जियो सिम आया है तबसे इसकी चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही। इसके चर्चा की बड़ी वजह बना है इसका फ्री बताया जाना। और तो और तीन महीनो तक तमाम सुविधाओं का भी मुफ्त मिलना इसकी जोरदार चर्चा का बड़ा कारण बनकर उभरा है। जियो सिम के बाजार में उतरते ही लोगों का हुजूम इसे पाने के लिए जगह जगह उमड़ने लगा और यही से शुरू हुआ जियो की ब्लैक मार्केटिंग का फलता फूलता धंधा। जानने में यह बात भले ही अटपटी लगे लेकिन जियो सिम मुफ्त में पाना जीतनी टेढ़ी खीर है इसे ब्लैक में उतनी ही आसानी से पाया जा सकता है। जियो सिम की सबसे ज्यादा तादाद में कालाबाजारी इन दिनों उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हो रही है। जियो सिम में मुफ्त में मिल रही तमाम सेवाओं के चलते सिम को पाने के लिए बड़ी तादाद में ग्राहक तैयार हो चुके हैं जिसे अब काला बाजारी के दलालों को सीधा लाभ मिलना शुरू हो गया है।




यूं ही कोई अपने कपड़े नहीं उतरवाता!

अक्षय जैन

दुनिया में ता़कतवर तो हर कोई होना चाहता है, नंगा कोई नहीं होना चाहता। यह नियम अमरीका पर लागू नहीं होता। नंगा होने में और दूसरे को नंगा करने में अमरीका का मु़काबला दुनिया का कोई मुल़्क नहीं कर सकता। जो लोग हिंदुस्तान में तीसमारखां बनते हैं, अमरीका के एयरपोर्ट पर अपने कपड़े उतारने में एक मिनट की भी देर नहीं लगाते। य़कीन न हो, तो शाहरु़ख खान से पूछ लीजिये।

काश... मैं 30 साल का होता!

राजेश ज्वेल

अपनी मोबाइल सेवा जियो की धमाकेदार लॉन्चिंग के साथ रिलायंस प्रमुख मुकेश अम्बानी एक बार फिर सुर्खियों में हैं... देशभर के स्मार्ट मोबाइल फोन धारक इन दिनों जियो सिम कबाडऩे की जुगत में भिड़े हैं और तमाम रिलायंस डिजीटल स्टोर्स के बाहर कतारें लगी हैं। सालों से टेलीफोन और मोबाइल कम्पनियां उपभोक्ताओं को लूटती आ रही है। ऐसे में जियो के ऑफर काफी ललचाने वाले हैं। हालांकि मुकेश अम्बानी भी पक्के कारोबारी हैं और जियो के जरिए भी वे कोई समाजसेवा तो करने नहीं निकले हैं... मुनाफा जरूर कमाएंगे, लेकिन पूरे मार्केट पर कब्जा कर लेंगे। जानकारों ने अभी जो गणित-ज्ञान लगाकर बताया, उसके मुताबिक प्रति उपभोक्ता औसतन 180 रुपए की बिलिंग पर जियो घाटे की दुकान साबित नहीं होगा और मेरे हिसाब से तो 180 रुपए का औसत बिल बहुत अधिक नहीं है। अभी सामान्य रूप से ही मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल करने पर 1000-800 रुपए से कम का खर्चा नहीं आता।

निसबड ने माना सोशल मीडिया मार्केटिंग को एक स्किल

नोएडा। आज के दौर में अगर कोई माध्यम है जो अपनों को और अनजानों को एक समान जोड़ता है तो वो है सोशल मीडिया। भला आज ऐसा कौन है जो सोशल मीडिया पर नहीं। व्हाट्सएप, फ़ेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब जैसे सोशल नेटवर्किंग के तरीके घर-घर में अपनी जगह बना चुके हैं। कई लोग तो दिन की शुरुआत ही फ़ेसबुक पर पोस्ट देखकर करते हैं। वहीं बहुत से लोगों के लिए तो दिन का आखिरी पहर भी सोशल मीडिया पर ही होता है।

हिंदी दिवस पर विशेष लेख : स्वाधीन चेतना की भाषा हिन्दी की उपेक्षा क्यों?

मनोज कुमार

हिन्दी को लेकर भारतीय मन संवेदनशील है लेकिन उसका गुजारा अंग्रेजी के बिना नहीं होता है। सालों गुजर गए हिन्दी को राष्ट्रभाषा का मान दिलाने का प्रण ठाने लेकिन हिन्दी आज भी बिसूरती हुई अपनी हालत पर खड़ी है। हर साल सितम्बर का महीना हिन्दी के नाम होता है और बाकि के 11 महीने अंग्रेजी को समर्पित। ऐसे में हिन्दी को जनभाषा के रूप में प्रतिष्ठापित किये जाने की जो कवायद है, वह आयोजनों तक ही रह गई है। कल तो इलीट क्लास के लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाते थे, अब निम्र आय वर्ग भी अंग्रेजी स्कूलों के मोहपाश में बंध गया है। आखिर यह स्थिति आयी क्यों, इस पर चिंतन की जरूरत है। यह क्या गर्व की बात है कि हम कहते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति अमुक मंच से हिन्दी में भाषण देकर आए हैं और उनमें भी चुनिंदा नाम गिनाये जाते हैं। जब भारत वर्ष की भाषा हिन्दी है तो किसी ने हिन्दी में भाषण देकर अपनी परम्परा को आगे बढ़ाने का काम किया है बल्कि हमें तो बार बार इस बात की आलोचना की जाना चाहिए कि अमुक राजनेता अपनी भाषा छोडक़र अंग्रेजी में बात कर रहा है। जिस दिन हम अपनी इस सोच में बदलाव करेंगे, हिन्दी की दशा और दिशा दोनों ही बदल जाएगी।

8.9.16

Bjp has crossed all levels of Hypocrisy

In my view  there should be a limit to hypocrisy and fascism. Congress is just standing as a mute spectator. Bjp has crossed all levels of Hypocrisy. It has banned Beef in many of indian  states. It is isolating and mob lynching Muslims who are rumored to have eaten Beef. My question to  phadnivis is,  if a muslim is found eating or carrying beef , He would be sent to jail.

बिहार की मीडिया का मजाक उड़ाता न्यूज़ ऑफ़ बिहार वेब पोर्टल




nidhi kashyap 
कुछ दिन पहले ही शुरू हुए वेब पोर्टल न्यूज़ ऑफ़ बिहार इन दिनों काफी चर्चा में है चर्चा का विषय  है समाचार में लिखी जा रही गलतिया, गलतिया भी ऐसी की मुख्यमंत्री नितीश कुमार तक को नहीं बक्शा, न्यूज़ का स्लग था "बाढ़ राहत शिविर में नितीश ने किया महादलित  महिला का दुष्कर्म" न्यूज़ का लिंक फेसबुक पर शेयर होते ही बात पुरे मीडिया में फ़ैल गयी, न्यूज़ ऑफ़ बिहार के इस घटिया रिपोर्टिंग के लिए लोगो के कमेंट भी आने सुरु हो गए थे, कुछ मीडिया कर्मी ने पोर्टल के कार्यालय में फ़ोन किया तब जा के पोर्टल ने न्यूज़ डिलीट कर दिया,

जिम्सी के सभी मित्रों और अध्यापकों से माफी चाहता हूं....


माफी चाहता हूँ अपने सभी अजीज मित्रों से और जिम्सी के सभी अध्यापकों से माफ़ करना या मत करना ये आपकी स्वतंत्र मानसिकता है .. मै इसके सिवा आपसे कुछ और नही कह सकता हूँ क्यों मुझे माफ़ी मागने अलावा कोई दूसरा अधिकार मेरे पास नही है .......कालेज के दिनों में जो सीखा पढ़ा लिखा वो सब मेरे साथ ही शायद समाप्त होजायेगा ,,, मेरा परिवार किसी को भी दोषी नही ठहरायेगा ,,,क्योंकि उनको कोई जानकारी ही नही है ,,,,,,,,,

संपादक ने पैसे लेकर रोकी खबर! शिकायत पर आई जांच टीम

पत्रिका होशंगाबाद के संपादक हरमिंदर लूथरा की खनन माफिया के साथ साठगांठ खबर रोकने की शिकायत प्रबंधन और डायरेक्टर से हुई है। इसमें उनकी ही कंपनी के एक पूर्व रिपोर्टर ने दर्जनों दस्तावेजों के साथ शिकायत की है। माफिया से साठगांठ के खुलासे के बाद पत्रिका प्रबंधन सकते में आ गया है। उसने लूथरा के खिलाफ जांच दल का गठन किया है।










The New Constitution of India

Markandey Katju 

A long time has expired since 1950 when the Indian Constitution was made, and it has now become necessary to frame and promulgate a new Constitution in view of the changed circumstances. Hence this new Constitution has been drafted by the best legal minds of India, and submitted to the people for their approval.

संपादक बड़ा या पप्पू?

एक बड़े अख़बार के गेट के सामने एक प्रसिद्ध समोसे की दुकान थी. लंच टाइम मे अक्सर अख़बार के कर्मचारी वहाँ समोसे खाया करते थे. एक दिन अखबार के संपादक समोसे खाते खाते समोसेवाले (पप्पू) से मजाक के मूड मे आ गये. संपादक ने समोसेवाले से कहा, "यार पप्पू, तुम्हारी दुकान तुमने बहुत अच्छे से मेंटेन की है. लेकिन क्या तुम्हें नहीं लगता के तुम अपना समय और टॅलेंट समोसे बेचकर बर्बाद कर रहे हो? सोचो अगर तुम मेरी तरह इस कंपनी में काम कर रहे होते तो आज डी एनई या एन ई होते..

पीलीभीत में एक चिकित्सक की लोकप्रियता ने उड़ाये दिग्गजों के होश, सत्ता की ताकत को ढाल बनाने की कोशिशों से लोगों में नाराजगी




पत्रकारिता से भी है चिकित्सक का लगाव, ‘एमएस’ के बाद बाकायदा ‘मॉस-कॉम’ की डिग्री ली
14 अगस्त को शुरू हुआ ‘बीमारी से आजादी’ अभियान
सत्ता की ताकत से अभियान को थामने की हो रही है कोशिश
समाजसेवियों, कारोबारियों, चिकित्सकों, पत्रकारों और युवाओं का मिला साथ
शहरी चिकित्सकों ने दल-बल के साथ पकड़ी गांव की राह, गरीब मरीजों को राहत

पीलीभीत। एक ईमानदार मामूली पहल ही किस तरह लोगों के लिए उम्मीद की रोशनी बन जाती है और सिस्टम के लिए आइना, अगर यह देखना हो तो पीलीभीत के बरखेड़ा आ जाइये। एक जोशीले चिकित्सक की सियासत के रास्ते तब्दीली की कोशिश और उसे मिल रहे समर्थन ने बड़े-बड़ों के होश गुम कर दिये हैं। नतीजा यह कि अब सत्ता की ताकत के सहारे रास्तों में कांटे बिछाने की कोशिशें की जा रही हैं। ‘ बीमारी से आजादी ‘  अभियान की मल्टी यूटिलिटी व्हीकल के पहिए को पुलिस ने जब थाम लिया तो इसके पीछे की ताकत के बारे में कयास लगने लगे।

सुप्रीमकोर्ट के नए आदेश के बाद कामगार अधिकारियों के चेहरे पर उड़ रही हैं हवाइयां

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीमकोर्ट के विद्द्वान् न्यायाधीश रंजन गोगोई सर और पंत सर द्वारा जिस तरह उत्तराखंड के  लेबर कमिश्नर के खिलाफ  वारंट निकाल दिया गया और उत्तर प्रदेश के लेबर कमिश्नर को जेल भेजने की चेतावनी देते हुए 6 सप्ताह में इस वेज बोर्ड को लागू कराकर इसकी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया उससे देश भर के लेबर कमिश्नरों,लेबर अधिकारियों के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं।जो अधिकारी समाचार पत्र कर्मचारियों से ठीक से बात तक नहीं करते थे और हर पल की डायरेक्ट रिपोर्टिंग अखबार मालिकों को करते थे  अब समाचार पत्र कर्मचारियों को देखते ही हल्कि सी स्माइल देते हुए बैठा रहे हैं।

स्वराज एक्सप्रेस के कर्ताधर्ता माननीय S.P. त्रिपाठी हुए आपे से बाहर!

स्वराज एक्सप्रेस के कर्मचारियों के छोड़कर जाने के कारण और पुराने कर्मचारियों के वेतन एवं पी एफ मांगने पर त्रिपाठी जी गाली गलौच और जूते मारने की बाते करने लगे हैं। इससे मालूम चलता है कि उनकी मानसिक दशा ठीक नहीं है। उन्हें मनोचिकित्सक की जरूरत है। इन हरकतों से पीड़ित कर्मचारियों ने labour court जाने की तैयारी की है।

मुंबई के एक भी समाचार पत्र ने नहीं कराया है टांसफर, टर्मिनेशन, ससपेंशन के नियम को प्रमाणित

आर टी आई से हुआ खुलासा.... मुंबई के एक भी समाचार पत्र प्रतिष्ठानों ने इंडस्ट्रीयल एम्प्लायमेंट (स्टैंडिंग आर्डर ) एक्ट १९४६ के तहत टांसफर, टर्मिनेशन, ससंपेशन के नियम को  लेबर विभाग से प्रमाणित नहीं कराया है। और  बिना आदेश को प्रमाणित कराये ये समाचार पत्र स्टैंडिग आर्डर से बचने के लिये माडल स्टैंडिंग आर्डर का सहारा लेरहेहै। यह खुलाशा हुआ है आर टी आई के जरिये।

अमर उजाला रुड़की ने कोतवाली को बना दिया शमशान



अमर उजाला देहरादून से जुड़े रुड़की सेंटर के प्रभारी विनोद सिंह ने कोतवाली को ही शमशान बना डाला। अगर आपको यकीन नहीं आता तो आप अमर उजाला रुड़की में 4 सितंबर को पेज 4 पर छपी इस खबर को देख सकते हैं।

विमल कुमार हिन्दी का कवि है या सत्ता का दलाल

विनय श्रीकर

विमल कुमार का एक पोस्ट पढ़कर मैं विचलित हो गया। यह आदमी हिन्दी का कवि है या सत्ता का दलाल। यह रामवृक्ष बेनीपुरी जी के लिए भीख मॉंग रहा है।
बेनीपुरी जी ऐसे लोगों के कभी मोहताज नहीं रहे।

मैंने बेनीपुरी जी को मन से पढ़ा है। उस महान व्यक्ति के लिए यह आदमी दुष्प्रचार कर रहा है। इस आदमी की फेसबुक पोस्ट से ऐसा लगता है जैसे इस देश में कोई बेनीपुरी जी को जानता ही नहीं। हर पढ़ा-लिखा लेखक बेनीपुरी जी को अवश्य पढ चुका होता है। विमल कुमार बेनीपुरी जी के बहाने अपनी मार्केंटिंग पर उतारू है। न यह आदमी पत्रकार होने के लायक है न ही कभी कवि रहा है। इसके सारे फेसबुक पोस्ट मसीहाई मुद्रा में होते हैं। इसे अपने निजी इतिहास तक का ज्ञान नहीं है।

यूपी बीजेपीः एक अद्द ‘मोदी’ की अधूरी तलाश

संजय सक्सेना, लखनऊ

भारतीय राजनीति का दुर्भाग्य है कि यहां विरोधी दलों के नेताओं की किसी भी बात और सुझाव को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता हैं,जब तक की सत्तारूढ़ दल को इस बात का अहसास नहीं हो जाता है कि उसके विरोधी उसे किसी तरह का नुकसान पहंचा सकते हैं। वहीं विरोधी दलों के नेताओं के नेताओं ने भी ऐसी इमेज बना ली है मानों उनकी राजनीति सिर्फ सत्तारूढ़ दल के कामों का विरोध करके ही आगे बढ़ सकती है। नेताओं के व्यक्तिगत जीवन का तो पता नहीं, लेकिन उनके राजनैतिक जीवन में इसका बेहद खराब असर सियासत और समाज पर पड़ रहा है। नेताओं में एक-दूसरे के प्रति न केवल सम्मान का भाव कम हुआ है बल्कि दूसरे दलों के नेताओं के विचार सुनने की प्रवृति में भी कमी आई है। सियासतदारों को कभी-कभी इसका नुकसान भी उठाना पड़ जाता है, लेकिन आदत से मजबूर नेता अपनी बेढंगी चाल ठीक करने को तैयार ही नहीं होते है। अगर ऐसा न होता तो बीजेपी वाले  बसपा सुप्रीमों माावावती के आजमगढ़ की रैली में दिये गये उस बयान को गंभीरता से लेते जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी वाले उनके रिजेक्टेड माल (नेताओं) को पार्टी में शामिल कर रहे हैं। माया ने भले ही सियासी रूप से यह बात कही हो लेकिन इसके पीछे की हकीकत को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। बसपा छोड़कर जिन भी नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा है उसमें से अधिकांश नेता बसपा में हासिये पर पड़े हुए थे।

उ0प्र0 में मुलायम की जमीन दरक रही है

चुनावी नुकसान की जिम्मेदारी अब उ0प्र0 में प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले?

विनय ओसवाल

क्या कांग्रेस और भाजपा को छोड़ कर कोई दूसरा राजनैतिक दल आज पूरे हिन्दुस्तान में राजनैतिक पहचान और थोडा या बहुत जनाधार रखता है ? इसका जबाब है नही । इन दोनों दलों को छोड़ कर , कभी कोई तीसरा राजनैतिक दल ऐसी हैसियत बना पायेगा ? इस सम्भावना पर भी राजनेताओं की महत्वाकांछाओं का ग्रहण लगा हुआ है । लगातार सिकुड़ती जा रही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए यह सबसे उपुक्त समय है कि वह , यह चिंतन करे कि उसे अपने सम्रद्ध राजनैतिक इतिहास की पहचान को जिन्दा रखना हैं या दो ध्रुवीय विश्व की राजनीति में तीसरे ध्रुव को जन्म और नेतृत्व देने वाले अपने शीर्ष नेताओं के वंशजों की पहचान को जिन्दा रखना , आज उसकी प्राथमिकता है ।

7.9.16

राजनीतिक व्यंग्य : मोदी को कोट तो राहुल को खाट पसंद है

प्रभुनाथ शुक्ल

अमां हम क्या बोलें। सबकी अपनी पसंद है। वालीवुड वाले खान भईया को तो बेबी की बेस पसंद तो कभी संजय भाई को चोली और चुनरी के नीचे क्या है...बेहद पसंद रहा। इ ससुरी पसंद को भी क्या बोलें। एकदम निखट्टू बेशर्म और हरजाई है। जहां जब इसके जी में आता है पसंद ना पसंद पर दांत चिंगार अपना मुहर लगाने लगती है। इंडिया में तो सारे फसाद की जड़ भी ससुरी यही है। अब उ अपने टीवी सीरीरयलवाली पंक्षी को देखिए जिस लौंडे पर वह लट्टू है वह ससुरा पूरा निखट्टू है हां भाई हां...पंक्षी जिस पर लट्टू है वह लौंडा बड़ा निखट्टू है। अब अपनी विद्यावालन को देखिए उनकी सोच और पसंद भी अजीब है वह टीवी पर बताती फिरती हैं कि जहां सोच वहीं शौचालय।

आजम खान का दर्शन : अपनों को गलीचा, दूसरों को गाली

अजय कुमार, लखनऊ

समाजवादी पार्टी में आजम खान की हैसियत किसी से छिपी नहीं है। आजम हैं तो अखिलेश सरकार में मंत्री, लेकिन कथित रूप से उनकी  वफादारी सपा प्रमुख मुलायम सिंह के प्रति रहती है। वह अखिलेश सरकार में अपने आप को काफी महत्वपूर्ण समझते हैं, लेकिन अखिलेश इन्हें कभी ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं। अखिलेश की बेरूखी के चलते आजम ने कई बार नाराजगी का नाटक भी किया, परंतु उनका यह दांव कभी सफल नहीं हो पाया। एक बार सपा से बाहर का रास्ता देख चुके आजम ने उस समय सपा प्रमुख मुलायम सिंह के ऊपर तमाम अमार्यादित टिप्पणियां की थीं,जिनके लिये वह आजकल कसीदे पढ़ते रहते हैं। तब मुलायम सिंह ने आजम की किसी सही-गलत बात का कोई जबाव नहीं दिया था जैसा आजकल पीएम मोदी कर रहे हैं। हिन्दुस्तान में शायद दो ही ऐसे नेता ( दिल्ली के सीएम अरिवंद केजरीवाल और आजम खान ) होंगे जो अपना वजूद बचाये रखने के लिये  पूरी शिद्दत के साथ दिन-रात मोदी को कोसते रहते हैं, ताकि एक बार ही सही मोदी उनके खिलाफ मुंह खोल दें, जिससे उनको बैठे-बैठाये पब्लिक सिटी मिल जाये, लेकिन मुलायम भी सब जानते थे और मोदी ने भी कच्ची गोलिया नहीं खेली है। मोदी ऐसे लोंगो को कभी तरजीह नहीं देते हैं जो अपनी सियासत चमकाने के लिये उनके(मोदी) नाम का जाप करते रहते हैं।

न्योता... भड़ास के कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए


मित्रों.... 11 सितंबर को कांस्टीट्यशन क्लब में भड़ास4मीडिया के कार्यक्रम में आप निमंत्रित हैं.. कृपया इस आनलाइन निमंत्रण को स्वीकार करें....

हम हैं लुटेरे जनम जनम के...

डॉ राकेश पाठक

देखा आपने... यूपी के देवरिया में राहुल गांधी की खाट सभा के बाद किस तरह खटिया लूट मची। नहीं देखा तो देखिये..और सोचिये यही हैं हम..लुटेरे कहीं के.. राहुल गांधी की सभा में आये लोग जिस बेशर्मी से खाट लूट रहे थे उसे देख कर हैरानी नहीं हुयी। हमने कभी कोई मौक़ा नहीं छोड़ा है लूटने का... अभी हरियाणा में जाट आंदोलन में चाय की गुमटी से लेकर बड़े बड़े शॉपिंग मॉल तक हमने निर्लज्ज़ता से लूटे थे। पूरे ठाठ से,न शरम न लिहाज़।



5.9.16

झोलाछाप डॉक्टरों का गोरखधंधा अधिकारियों के संरक्षण में फलता फूलता नजर आ रहा है

छतरपुर। नगर ही नहीं बल्कि आसपास बसी कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रो में बगैर डिग्री के झोलाछाप डॉक्टरों का गौरखधंधा अनबरत रूप से जारी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का संरक्षण इन्हे प्राप्त है। जिसके कारण ये अधिकारी इन झोला छाप डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करते। मजबूरी बस लोग इनसे इलाज करवा रहे है। जिसके बदले में खुलेआम ये डॉक्टर मौत भी परोस रहे है। प्रशासनिक अधिकारी कुम्भकरणीय नींद में सो रहे है।

3.9.16

गोरखपुर पुलिस ने ट्विटर पर उच्चाधिकारियों और वादी को दी झूठी सूचना

गोरखपुर पुलिस के ट्विटर एकाउंट से आईजी, डीआईजी और पीड़ित को झूठी सूचना दी गई है। वादी वेद प्रकाश पाठक ने ट्विटर पर इस सूचना पर आपत्ति जताते हुए, एफबी और ट्विटर के जरिये पुलिस अफसरों से 11 सवाल पूछे हैं। उन्होंने बताया कि गोरखपुर पुलिस के ट्विटर एकाउंट से उनके शिकायत के बारे में बताया गया कि मामला फोरम न्यायालय में दाखिल है। जबकि मामला किसी भी फोरम में दाखिल ही नहीं है। प्रकरण सिटी माल के पार्किंग परिसर से 17 जनवरी 2015 की शाम को श्री पाठक के नये हेलमेट चोरी से जुड़ा है।

प्रशासन आजादी के 70 साल बाद भी समाज में अपनी जगह बनाने में सफल नहीं हो पा रहा

मीडिया और प्रशासन का अन्योनाश्रय संबंध है। आजादी के लगभग 70 साल बाद भी प्रशासन, समाज के बीच अपनी जगह बनाने में सफल नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण इलाकों में लोग पुलिस के नाम से डरते हैं। लेकिन समय के साथ प्रशासन के कार्यों में भी बदलाव हो रहा है। समाज के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध के लिए प्रशासन कई योजनाएं भी चला रहा। समाज और प्रशासन के संबंधों को जोड़ने में मीडिया का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। समाज और प्रशासन के बीच मीडिया मध्यस्था की भूमिका अदा करता है। उक्त बातें महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनंसंचार विभाग में मीडियाः प्रशासन और समाज का अंतर्संबंध पर आयोजित मीडिया संवाद में वर्धा के पुलिस अधीक्षक अंकित गोयल ने कही।

बरेली मण्डल में एड्स के 270 मरीज लापता!

नशे के आदी लोगो पर मंडराता एड्स रूपी मानव बम का बड़ा खतरा 

बरेली मण्डल में इंजेक्शन से नशा करने के आदी लोगों पर एड्स बम का बड़ा खतरा मंडरा रहा है. 2012 से 2013 के बीच बरेली के जिला अस्पताल में इलाज कराने 86 एच् आई वी मरीज पहुँचे थे पर इलाज छोड़ कर अचानक बीच से ही गायब हो गये. खास बात यह है कि ये मरीज बरेली के ही पुराना शहर, काली बाड़ी, फरीदपुर, फतेगंज पश्चिमी विसलपुर, पुरनपुर तथा बदायूँ जनपद के सहसवान क्षेत्र के हैं लेकिन इन मरीजों के बारे में जिला अस्पताल बरेली के पास कोई जानकारी नहीं है.

सत्यजीत रे ने यथार्थवादी सिनेमा दिखाने के लिए कभी गालियों का सहारा नहीं लिया

भोपाल । वैदिक काल से मनोरंजक का अस्तित्व रहा है। नाट्यशास्त्र की रचना इसका उदाहरण है। देवताओं के राजा इंद्र ने कहा था कि देवताओं को रंगमंच का भय रहता है। इसके लिए ज्ञानी लोगों की जरूरत है। अमृत मंथन को दुनिया की पहली नाट्य प्रस्तुति माना जाता है। इस नाटक को देखने के बाद प्रजापति ने कहा कि इसमें सौन्दर्य का अभाव है। इसके बाद उन्होंने इंद्र को 25 अप्सरायें दी। आज भी फिल्मों में अप्सराओं की जरूरत पड़ती है। सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक व अभिनेता डा. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने यह बात कही। श्री द्विवेदी शुक्रवार को मुंबई प्रेस क्लब में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता व जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल के रजत जयंती वर्ष के मौके पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।

मोदी जी का दलित हितैषी होने का दावा निरा धोखा

लखनऊ : “मोदी जी का दलित हितैषी होने का दावा निरा धोखा” यह बात आज एस.आर. दारापुरी, भूतपूर्व पुलिस महानिरीक्षक एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस नोट में कही है. उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ मोदी जी दलित हितैषी और दलितों के विकास के लिए समर्पित होने का दावा कर रहे हैं वहीँ उनके अपने राज्य गुजरात में दलित अपने उत्पीड़न और गुजरात के विकास माडल के कारण पिछड़ेपन के खिलाफ आन्दोलन चला रहे हैं. मोदी जी के दलित संरक्षक होने की पोल हाल में राष्ट्रीय अपराध अनुसन्धान ब्यूरो द्वारा क्राईम इन इंडिया- 2015 रिपोर्ट से ही खुल जाती है.

कितनी मुस्लिम हितैषी है मायावती?

एस.आर. दारापुरी
भूतपूर्व पुलिस महानिरीक्षक

आजमगढ़ रैली में मुसलमानों को फुसलाने के लिए मायावती ने कहा है कि “ निर्दोष मुसलमानों को आतंक के मामलों में झूठा फंसाया जाता है.” मायावती का यह कथन केवल चुनावी जुमला है. यह सर्वविदित है कि मायावती के 2007 वाले मुख्य मंत्री काल में ही सब से अधिक निर्दोष मुसलमान निम्नलिखित बम बिस्फोटों के मामलों में फंसाए गए थे: (1) तीन बम  विस्फोट, गोरखपुर. 22 मई, 2007, (2) वाराणसी कचेहरी विस्फोट, 23 नवम्बर, 2007,  (3) फैजाबाद कचेहरी विस्फोट, 23 नवम्बर, 2007 तथा (4) लखनऊ कचेहरी विस्फोट, 23 नवम्बर, 2007.

आयकर छापे की खबर भास्कर ने दबाई, हरिभूमि भोपाल ने उठाई, देखें कवरेज



मध्य भारत के आइसक्रीम किंग कहे जाने वाले रामानी ब्रदर्स के 18 ठिकानों पर आयकर विभाग के 200 अफसरों ने छापेमारी कार्रवाई की।  दैनिक समाचार पत्र हरिभूमि ने इस समाचार को पूरी डिटेल के साथ प्रथम पेज लीड बनाकर लिया, जबकि भास्कर समूह ने भोपाल संस्करण के पेज 3 पर समाचार को लिया, जिसमें कंपनी और निर्माताओं के नाम गायब कर दिए गए। अब जिन पाठकों ने दैनिक भास्कर को नंबर वन बनाया है, उनको संपादक अवनीश जैन का गला पकड़कर पूछना चाहिए कि छापे पर पूरी डिटेल क्यों नहीं छापी गई? क्यों हमें पूरे समाचार से महरूम रखा गया?