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27.6.11

जन धोखपाल बिल और कुटिल सिब्बल

नुक्कड़ पर बड़े दिनो से फ़जीहत झेल रहे भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी आज
अपने बचाव के लिये कुटिल सिब्बल को ले पहुंचे थे आज शर्मा जी को जन
धोखपाल बिल पर दो टूक जवाब देना था । पहुंचते ही कुटिल जी ने घोषणा कर दी
हमारी नीयत साफ़ है और हम सभ्य समाज की ओर से पेश किये गये बिल के अधिकांश
बिंदुओ से सहमत है । खाली छोटे मोटे कुछ बिंदू है जिस पर सहमति नही है ।
बाकी पार्टियों से चर्चा की जायेगी और बिल पास हो जायेगा ।

मैने पूछ लिया किस बात मे असहमति कुटिल जी जवाब मिला एक तो धोखपाल कौन
चुनेगा इस पर है इस पर भी इन लोग सर्च कमेटी बनाना चाहते हैं । मैने पूछा
कुटिल जी क्या चोरो को अपने जज खुद चुनने की छूट होना चाहिये जो आप
लोगों को धोखपाल चुनने का अधिकार दें कुटिल जी भड़क गये किसने कहा हम चोर
हैं । मैने जवाब दिया आप को तो कोई चोर साबित कैसे करे कैसे आप के कामो
की जांच भी आप खुद करते हो इसीलिये तो ये जनधोखपाल का जरूरत पड़ गया ।

कुटिल जी ने मुद्दा बदला बोले ये लोग प्रधानमंत्री को दायरे मे रखना
चाहते हैं । तभी जनता से आवाज आयी वो बेचारा तो खुद ही तैयार हैं पहले ही
मम्मी से लेकर मामा लोगो के दायरे मे है नजर के सामने से राजा दो लाख
करोड़ ले गया सारी ईमानदारी धरी की धरी रह गयी नाम खराब हुआ वो अलग
जनधोखपाल होता तो उसका डर दिखा कम से कम रोक तो पाते । कुटिल जी तब तक
नया विचार रख चुके थे बोले संसद के अंदर सांसद लोगो का व्यहवार दायरे के
बाहर है । जवाब मिला ऐसा व्यहवार जिसमे कुर्सिया फ़ेकी जाती हों वोट
बेशर्मी से खरीदे बेचे जाते हो नोट लहराये जाते हो जहां अध्यक्ष अपनी
पार्टी का भोपू बना हो भाई यह तो नैतिकता के दायरे मे भी नही आता इस बारे
मे कुछ लिखा है क्या आप के संविधान मे ?

पूरा पढ़ने के लिये
http://aruneshdave.blogspot.com/2011/06/blog-post_22.html

2 comments:

arvind said...

ऐसा व्यहवार जिसमे कुर्सिया फ़ेकी जाती हों वोट
बेशर्मी से खरीदे बेचे जाते हो नोट लहराये जाते हो जहां अध्यक्ष अपनी
पार्टी का भोपू बना हो भाई यह तो नैतिकता के दायरे मे भी नही आता इस बारे
मे कुछ लिखा है क्या आप के संविधान मे ?
....katu satya.

तीसरी आंख said...

सवाल तो आने मौलिक उठाया है, मगर लोकतंत्र में जो व्यवस्था है, उसमें अन्ना जैसों के हाथ में कमान नहीं सौंपी जा सकती, उनकी जवाबदेही क्या है