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26.1.24

पीलीभीत में पत्रकारों ने केक काटकर मनाया नेशनल यूनियन जर्नलिस्ट (इंडिया) का स्थापना दिवस

एनयूजेआई मीडियाकर्मियों के हित के लिए समर्पित : निर्मल कांत शुक्ल 

पत्रकारों का एनयूजेआई 52 वर्ष पुराना संगठन 


पीलीभीत। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (इंडिया) की स्थापना की 52 वीं वर्षगांठ संगठन के पीलीभीत के जिला कार्यालय पर मनाई गई। संगठन के सदस्यों ने केक काटा। हर स्तर पर पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष का संकल्प दोहराया गया। 

यूनियन के छतरी का चौराहा स्थित जनपद शाखा कार्यालय पर यूनियन के संरक्षक/ वरिष्ठ सदस्य विश्वामित्र टंडन, यूनियन के जिलाध्यक्ष निर्मल कांत शुक्ल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने संगठन की 52 वीं वर्षगांठ पर केक काटा।

इस अवसर पर संगठन के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए यूनियन के जिलाध्यक्ष निर्मल कांत शुक्ल ने कहा कि एनयूजे (आई) भारत में एकमात्र ट्रेड यूनियन है, जिसने हमेशा उच्चतम लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखा है। 23 जनवरी, 1972 को नई दिल्ली में प्रतिष्ठित पत्रकारों द्वारा संगठन की स्थापना की गई। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) मीडियाकर्मियों के हित के लिए समर्पित एक राष्ट्रीय संगठन है। यह संगठन उन सभी सदस्य पत्रकारों को साथ लेकर चल रहा है, जो उम्र या दुर्बलता के कारण काम से सेवानिवृत्त हो जाते हैं या जिन्होंने पेशे या संगठन के लिए उत्कृष्ट सेवा की है। ऐसे वरिष्ठ सदस्यों का मार्गदर्शन लेकर ही संगठन निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि एनयूजेआई निरंतर पत्रकार सुरक्षा कानून व मीडिया कमीशन की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है। जल्द ही संगठन बड़ा आंदोलन करने वाला है।

कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी 


स्थापना दिवस कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार सुशील कुमार शुक्ल, जिला महामंत्री बिभव कुमार शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष प्रशांत वर्मा, डॉ. प्रेम सागर शर्मा, महेश वर्मा अमित कुमार 'अल्प', राजेंद्र वर्मा आदि पत्रकार मौजूद रहे।

23.1.24

हिन्दी-उर्दू साहित्यकारों की मौजूदगी में अनहद कोलकाता सम्मान से विभूषित किए गये डॉ अभिज्ञात

नहद कोलकाता और मनीषा त्रिपाठी फाउडेंशन द्वारा स्थापित तृतीय मनीषा त्रिपाठी स्मृति सम्मान कवि, कहानीकार, अभिनेता, चित्रकार डॉ. अभिज्ञात को दिया गया. उन्हें यह सम्मान उर्दू के वरिष्ठ लेखक फ़े सीन एजाज़ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुए एक कार्यक्रम में मिला. 


डॉ अभिज्ञात को मानदेय, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और उत्तरीय प्रदान किया गया और उनकी रचनाओं पर चर्चा की गयी. अध्यक्षीय वक्तव्य में फ़े सीन एजाज़ ने कार्यक्रम की रूपरेखा की सराहना करते हुए अभिज्ञात को बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न रचनाकार कहा. 

आयोजक डॉ. विमलेश त्रिपाठी ने मंचासीन वक्ताओं का परिचय देते हुए स्वागत वक्तव्य दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि, 'यह सम्मान नहीं है वरन एक कला साधक की रचनात्मकता को महत्व देना और उसके साथ खड़ा होना है.' 

डॉ गीता दूबे ने अभिज्ञात के साहित्यिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की. शैलेंद्र शान्त ने मनीषा त्रिपाठी की स्मृति में आयोजित अनहद कोलकाता सम्मान की प्रशंसा करते हुए इसे साहित्य, कला के लिए एक अच्छा प्रयास कहा. महाराष्ट्र से आये कवि-अनुवादक एवं साहित्याक्षर और हिंदी अनुसंधान केंद्र के प्रमुख डॉ.संजय बोरुडे ने अपनी हिन्दी कविताओं का पाठ करते हुए इस बात पर जोर दिया कि, 'हमें हिन्दुस्तान की भिन्न-भिन्न भाषाओं के साथ मिलकर काम करना चाहिए.' 

गया से आये कवि सुरेंद्र प्रजापति ने अपनी कविताओं का पाठ किया. वे पेशे से किसान हैं और गांव में रहकर महत्वपूर्ण कविताएँ लिख रहे हैं. कार्यक्रम के दौरान संजय बोरुडे द्वारा विमलेश त्रिपाठी की चुनी हुई कविताओं के मराठी अनुवाद की पुस्तक 'कवितेपेक्षा दीर्घ उदासी' का विमोचन भी मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया.

डॉ.अभिज्ञात ने अपने वक्तव्य में अनहद कोलकाता सम्मान 2023 से खुद को सम्मानित किये जाने पर आभार और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि, 'यह मेरे लिए गौरव के साथ जिम्मेदारी का भी क्षण है और अपनी एक प्रसिद्ध कविता 'मेरी नाभि में बसो' कविता का पाठ किया.' 

कार्यक्रम में निलय उपाध्याय, नील कमल, सेराज खान बातिश, शैलेन्द्र शांत ने अपनी कविताओं का पाठ किया. कार्यक्रम में विनय मिश्र, दिनेश राय, प्रकाश त्रिपाठी, विनय भूषण, प्रभात मिश्र, रवि गिरि सहित कई रचनाकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित थे. धन्यवाद ज्ञापन युगेश गुप्ता ने किया. 

22.1.24

सेब बेल्ट के उत्पादक भी 'ग्राम बंद' की हिमायत में संयुक्त किसान मोर्चा के साथ...

अमरीक-                                          

संयुक्त किसान मोर्चा को देश के सेब उत्पादकों का साथ हासिल हो गया है। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड को भारत की 'सेब बेल्ट' माना जाता है। इन प्रदेशों में सेब का उत्पादन मुख्य फसल के तौर पर होता है। यहां के सैकड़ों सेब किसान अथवा उत्पादक चंडीगढ़ के सेक्टर 30 स्थित चीमा भवन में एप्पल फॉर्म्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एएफएफआई) के बैनर तले दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में जुटे और खुलकर केंद्र सरकार के खिलाफ बरसे।                                              

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में सेब उत्पादकों को दरपेश दिक्कतों के अलावा उनकी लंबित मांगों को लेकर इंटेंस कैंपेन शुरू करने के साथ-साथ 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड और 16 फरवरी को केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से बुलाए गए 'ग्राम बंद' की हिमायत करने का फैसला लिया गया।                            

राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन अखिल भारतीय किसान सभा के वित्त सचिव पी. कृष्णप्रसाद ने किया। उनके मुताबिक, "केंद्र सरकार सेब किसानों की सरासर अनदेखी कर रही है। उत्पादकों को फसल का सही मूल्य नहीं मिलता और न सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान किया जा रहा है। जबकि सेब एक महत्वपूर्ण और जरूरी फसल है। सरकारी बेरुखी के चलते बेशुमार किसान सेब उत्पादन से किनारा कर रहे हैं। इसके लिए सरकार जिम्मेवार है।" हिमाचल प्रदेश के पूर्व विधायक राकेश सिंघा कहते हैं, "घटती कीमतों और सरकार की उपेक्षा के चलते सेब पट्टी के किसान बदहाल हैं। 

सेब बेल्ट अक्सर ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से कुप्रभावित होती है, जिससे सेब की उपज पर अति गंभीर प्रभाव पड़ता है। सरकारें मुआवजा देने में आनाकानी करती हैं। गिरदावरी तक नहीं कराई जाती। हजारों किसान पीढ़ी दर पीढ़ी सेब की फसल उगाते आए हैं। यहां का सेब सुदूर देशों तक जाता है। नुकसान के आलम में सरकार साथ नहीं देती तो किसान क्या करें? आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं!" 

अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव विजू कृष्णन के अनुसार, "सरकारी नीतियों के चलते सेब-फसल की उत्पादकता में ठहराव है। किसान तंगहाली में हैं। पर्याप्त और सब्सिडीशुदा कोल्ड चेन बुनियादी ढांचा वक्त की मांग है। अपनी मुनासिब मांगों को लेकर देश भर के किसान आंदोलन की राह पर हैं। सेब उत्पादक भी उनका हिस्सा हैं। इस बार के व्यापक किसान आंदोलन में लाखों सेब किसान संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में शिरकत करेंगे।" 

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सेब किसान नेता बृजेश सिंह राणा कहते हैं, "सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है लेकिन असली फायदा पूंजीपतियों को पहुंचाया जा रहा है। सेब उत्पादक लागत मूल्य या घाटे में अपनी फसल बड़े व्यापारियों के हवाले करने को मजबूर हैं। बड़े व्यापारियों पर सरकारपरस्त धनाढ्य पूंजीपतियों का हाथ है, जिन्हें किसानों की मूलभूत समस्याओं से कोई सरोकार नहीं। कभी सेब की फसल को बहुत मुनाफे वाली माना जाता था लेकिन अब बाजार के खेल ने इसे घाटे का सौदा बना दिया है। सेब उत्पादक निरंतर सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों के कर्जदार हो रहे हैं। सरकारें उनकी सुध नहीं ले रहीं। सेब किसान भी अपनी मांगे मनवाने के लिए आंदोलन की राह अख्तियार करने के लिए मजबूर हो गए हैं।"                                                  

उल्लेखनीय है कि एप्पल फॉर्म्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के दो दिवसीय चंडीगढ़ सम्मेलन में राष्ट्रीय संयोजक और सहसंयोजकों के साथ कोर कमेटी का चुनाव भी किया गया। सम्मेलन में 2024 के अंत तक कुल 56,000 उत्पादकों की सदस्यता पूरी करने का निर्णय भी लिया गया। एएफएफआई के पास फिलहाल तकरीबन 10,000 किसानों की सदस्यता है।                               

संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता उजागर सिंह के अनुसार, "सेब उत्पादकों कि समस्याएं अलहदा नहीं हैं। हम खुलकर उनके साथ हैं। देश के किसान सरकारी नीतियों के चलते भारी मुसीबतों में हैं। हमारी पुरजोर कोशिश है कि हर फसल का उत्पादक हमारे आगामी आंदोलन में हिस्सा ले। 

17.1.24

बोकारो में प्रशासन की मेहरबानी से तय मूल्य से ज्यादा पर बिक रही है शराब!

किसी भी वस्तु या सामग्री के निर्माण सहित दुकानों तक पहुंचने वाले सामानों का मूल्य कर सहित उस वस्तु पर अंकित होता है इसके लिए बाकायदा राज्य या केंद्र सरकार द्वारा नियमावली बनाई गई है. कोई भी वस्तु मिनिमम रिटेल प्राइस (एमआरपी) एवं मैक्सिमम रिटेल प्राइस (एमआरपी) के अंतर्गत आता है. इससे ज्यादा की कीमत ग्राहकों से वसूलने पर संबंधित दुकानदार पर कार्रवाई का प्रावधान है परंतु झारखंड के बोकारो जिले के शराब दुकानों में जिस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. 


यह किसी से छुपा नहीं है ऐसा भी नहीं है कि इस पूरे मामले की खबर संबंधित विभाग के हुक्मरानों को नहीं है परंतु संबंधित अधिकारी सहित विभाग इस पूरे मामले पर पूरी तरह से मूकदर्शक बना बैठा हुआ है, एक तरफ जहां ग्राहकों को मिले अधिकारों का हनन झारखंड में शराब दुकानदारों के द्वारा किया जा रहा है वहीं जिम्मेदारों का इस पूरे मामले पर खामोशी से बैठना गले से नहीं उतर रहा है. 

आखिरकार झारखंड में प्रशासनिक अमला इतना बेबस क्यों है? यह तो वही बता सकते हैं परंतु एक बात तो साफ है कि इस पूरे मसले पर नुकसान सिर्फ मदिरापान करने वाले ग्राहक को ही उठाना पड़ रहा है. हम बात कर रहे हैं बोकारो जिले के विभिन्न क्षेत्र में संचालित होने वाली सरकारी शराब दुकानों की जहां शराब के शौकीनों के द्वारा हमसे संपर्क कर संबंधित मामले की बात रखी गई जिसमें ग्राहकों का कहना है कि बोकारो, रामगढ़, पलामू, हजारीबाग, गिरिडीह, लातेहार, समेत राज्य की राजधानी रांची जिले में आरके नामक एजेंसी द्वारा संचालित होने वाली समस्त शराब दुकानों में तय मूल्य से ज्यादा दर पर शराब बेची जा रही है. 

मनमाने दाम पर हो रही है शराब की बिक्री

बोकारो जिला मुख्यालय सहित राज्य के विभिन्न सात जिले बोकारो, रामगढ़, पलामू, हजारीबाग, गिरिडीह, लातेहार,और राज्य की राजधानी रांची जिलों में संचालित होने वाली जगहों पर मदिरा दुकानों में बेची जा रही शराब निर्धारित मूल्य से 10 रुपए से 50 रुपए तक ज्यादा दर पर भेजी जा रही है. एक तरफ जहां शराब बिक्री करने वालों के लिए यह आदेश मद्य निषेध विभाग के सचिव का था कि संबंधित शराब विक्रेता दुकानों के बाहर ब्रांड एवं उसका मूल्य बोर्ड पर चस्पा करेगा ताकि दुकानों पर अवैध वसूली नही हो परंतु यह अभी तक प्रचलन में नहीं आ सका है, संबंधित नियमों को ठेंगा दिखाते आरके नामक एजेंसी के द्वारा संचालित होने वाले दुकानदारों के द्वारा शराब के विभिन्न ब्रांड पर निर्धारित मूल्य से 10 से 50 रुपए ज्यादा दाम ग्राहकों से वसूला जा रहा है. पूर्व में कई बार शराब की मनमाने दामों पर बिक्री को लेकर भी खबरें प्रकाशित की जा चुकी है परंतु शायद बोकारो जिला प्रशासन सहित बोकारो जिला के आबकारी अधिकारी इस बात से कोई भी इत्तेफाक नहीं रखते हैं कि मदिरा दुकानों में क्या खेल चल रहा है. काफी अनियमितताओं के साथ संचालित होने वाली शराब की दुकानों पर विभागीय मेहरबानी संबंधित दुकान संचालकों की मिली भगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है. 

इतना ही नहीं ग्राहकों को शराब खरीदने के बाद दुकानदारों के द्वारा बिल तक मुहैया नहीं कराया जाता है जबकि शासन की तरफ से स्पष्ट निर्देश है कि ग्राहकों को बिल दिया जाना चाहिए यह बात अलग है कि विभाग के द्वारा विक्रेताओं को पर्चियां तक उपलब्ध कराई गई हैं ऐसे में पर्चियो की उपलब्धता होने के बावजूद भी ग्राहकों को बिल उपलब्ध ना होना किसी और की तरफ इशारा कर रहा है अधिकतर शराब दुकानों के संचालकों के द्वारा अभी भी इस पूरे काम को बेखौफ होकर अंजाम दे रहे हैं. चाहे कुछ भी हो जाए तो सिर्फ ग्राहकों की ही कटनी होती है.

जानिए क्या कहतें हैं नियम? 

बाजार में उपलब्ध वस्तुओं को लेकर कई तरह के नियम बनाए गए हैं जिसमें से प्रमुख है पैकेज्ड कमोडिटीज नियमावली के नियम 6(1) (ई) में कहा गया है कि खुदरा बिक्री के लिए हर पैकेज पर खुदरा बिक्री मूल्य का उल्लेख होता है. नियम 2 (एम) "खुदरा बिक्री मूल्य" को अधिकतम मूल्य के रूप में परिभाषित करता है जिस पर वस्तु को अंतिम उपभोक्ता को बेचा जा सकता है और मूल्य एमआरपी के रूप में मुद्रित किया जाएगा जो सभी करों सहित है. नियम 18(5) यह भी कहता है कि कोई भी थोक व्यापारी या खुदरा विक्रेता निर्माता या पैकर या आयातक द्वारा इंगित खुदरा बिक्री मूल्य को मिटा, धुंधला या परिवर्तित नहीं करेगा. सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान पर आते हैं. नियम 18 (2) कहता है, "कोई भी खुदरा व्यापारी या निर्माता, पैकर, आयातक और थोक व्यापारी सहित अन्य व्यक्ति किसी भी वस्तु की बिक्री उसके खुदरा बिक्री मूल्य से अधिक मूल्य पर पैक किए गए रूप में नहीं करेगा. एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचना पैकेज्ड कमोडिटीज नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है. 

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत भी एमआरपी से अधिक कीमत पर सामान बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी जा सकती है हालांकि इसके लिए ग्राहकों के पास वस्तु का बिल का होना अनिवार्य है. परंतु शराब के मामले में तो ग्राहक पूरी तरह से ठगा महसूस कर रहा है एक तरफ जहां जिम्मेदार प्रशासन मौन धारण किए हुए हैं वहीं दूसरी तरफ ग्राहकों को बिल ना मिल पाने की वजह से वह उपभोक्ता न्यायालय की शरण में भी नहीं जा पा रहे हैं. हालांकि नियमों के उल्लंघन पर कानून में जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. 

आइए बताते हैं क्या है विभाग के हुक्मरानों का कहना?

सम्बंधित मामले में आबकारी अधिकारी से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया गया तो आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर संजीत देव ने बताया कि ऐसा कोई व्यक्ति नही है जो सरकार द्वारा संचालित दुकानदार अवैध वसूली कर सकता है अगर इस तरह की शिकायत है और जिस तरह से अवैध वसूली का वीडियो प्राप्त हुआ संबंधित दुकानदार के साथ कार्रवाई की जाएगी. उपभोक्ताओं के अधिकार का हनन बर्दास्त नहीं किया जायेगा. 

13.1.24

डॉ अभिज्ञात को मिलेगा तीसरा मनीषा त्रिपाठी स्मृति अनहद सम्मान- 2023


हि
न्दी भाषा के महत्वपूर्ण कवि और कथाकार डॉ. अभिज्ञात को तीसरा मनीषा त्रिपाठी स्मृति अनहद कोलकाता सम्मान- 2023 प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान मनीषा त्रिपाठी फाउंडेशन फिल्म तथा वेब पत्रिका अनहद कोलकाता की तरफ से हर वर्ष प्रदान किया जाता है.

अनहद कोलकाता के प्रबंध निदेशक उमेश त्रिपाठी ने बताया कि यह सम्मान हर वर्ष कला की किसी भी विधा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले एक कला साधक को दिया जाता है। इसके पूर्व यह सम्मान हिन्दी के महत्वपूर्ण कवि केशव तिवारी और महिलाओं के सवालों को अपनी कविता में पुरजोर तरीके से उठाने वाली रूपम मिश्र को दिया जा चुका है। सम्मान स्वरूप ग्यारह हजार रुपये की मानदेय राशि सहित प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।

अभिज्ञात हिन्दी में उस परम्परा के लेखक हैं, जिनकी जड़ें आज भी गाँव में हैं। अभिज्ञात ने अपने लेखन के माध्यम से समाज के वंचितों और शोषितों के प्रश्नों को उठाया है और पिछले तीस सालों से लगातार साहित्य की दुनिया में सार्थक-सक्रिय रहे हैं। पेशे से पत्रकार अभिज्ञात के दस कविता संग्रह, तीन कहानी संग्रह और तीन उपन्यास प्रकाशित हैं।

इस बार निर्णायक हिन्दी के महत्वपूर्ण कवि केशव तिवारी एवं अनहद कोलकाता के संस्थापक विमलेश त्रिपाठी थे। केशव तिवारी ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि यह सम्मान एक ऐसे साहित्यकार को दिया जा रहा है, जो अपने रचना और जीवन के बीच की खाई को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य की ओर प्रवृत हैं एवं उन्होंने अपने साहित्य में समय के ज्वलंत मुद्दे उठाए हैं।

डॉ. अभिज्ञात को यह सम्मान कोलकाता में ही आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा, जिसमें कोलकाता एवं भारत के अन्य हिस्से से आए साहित्यकार शामिल होंगे।

12.1.24

Demand for action on Mark Zuckerberg's controversial post

Azad Adhikar Sena National president Amitabh Thakur has written to Police Commissioner Lucknow and Electronics Ministry, Government of India for action in the extremely controversial posts made by Meta founder Mark Zuckerberg.


He said Mr Zuckerberg wrote on Facebook and Instagram that he is raising cows in his ranch to produce the best quality beef and is giving beer to them.


He said cows are extremely sacred in India and such posts are going to deeply hurt the religious sentiments of Indians.


Amitabh Thakur said Mr Zuckerberg might not know this fact but the officials of Facebook and Instagram in India would necessary have known this and needed to take appropriate action immediately in the matter.


He said the gross negligence of the social media officials is clearly objectionable.


Amitabh Thakur has sought registration of FIR in the matter and immediate deletion of these posts in India. He has also requested to direct the social media intermediaries to device effective means to immediately react in any such instances in future.

9.1.24

12thfail की वास्तविक कहानी और फिल्म में बहुत अंतर है..

विनय जायसवाल-

12thfail की वास्तविक कहानी और फिल्म में बहुत अंतर है. सिनेमा को कभी भी डाक्यूमेंट्री की तरह से नहीं लेना चाहिए. व्यवसायिक फ़िल्मकार, कला फिल्मकार से बहुत अलग होता है. 


व्यवसायिक फ़िल्मकार के सामने फिल्म को बाजार के अनुसार परोसने का दबाव होता है. उसे बाजार के मापदंडों पर खरा उतरना पड़ता है और लागत निकालने के साथ ही मुनाफा भी कमाना पड़ता है. इसीलिए उसे वास्तविक कहानी को बड़े कैनवास के लिए तैयार करना पड़ता है. 

शायद यही कारण है कि विधु विनोद चोपड़ा ने मनोज शर्मा की गरीबी और श्रद्धा के प्यार को ज़रूरत से ज्यादा चढ़ा बढाकर पेश किया है. जिसके दादा और पिता दोनों सरकारी नौकरी में रहे हों और जिनके पास कई बीघा जमीन हो वह उतना भी गरीब नहीं होगा कि फिल्म एक बड़े हिस्से में उसे एक ही कमीज पहने दिखाया जाय. किस गरीब के घर दुनाली बन्दुक होगी? 

फिल्म को रोमांचक बनाने के लिए कई घटनाक्रम क्रिएट किये गए हैं जैसे वास्तविक कहानी में एसडीएम है न कि डीएसपी और उस एसडीएम से मनोज की पहचान अच्छे क्रिकेट कमेंटरी की वजह से है न कि नक़ल रोकने की वजह से. जुगाड़ छोड़वाने वाली कहानी पूरी तरह काल्पनिक है. मनोज एसडीएम के पास जाता ज़रूर है लेकिन वहां एसडीएम जैसा बनने की इच्छा लेकर जाता है. 

इसी तरह मनोज काफी लम्बे समय तक ग्वालियर में रहकर तैयारी करता है और अनुराग पाठक / प्रीतम पांडे से काफी समय से परिचित है न कि एकाएक स्टेशन पर मिलता है. इसी तरह मनोज ने दिल्ली की जगह ग्वालियर में लायब्रेरी और चक्की में काम किया है. श्रद्धा मनोज से कभी चक्की पर मिली ही नहीं है. 

इंटरव्यू का दृश्य भी अतिरंजित है. फ़िल्में वास्तविक कहानियों से बहुत दूर होती हैं. उनसे ज़रूरत भर का मोटिवेशन लेना चाहिए बाकी आँख और कान खुले रखने चाहिए. ऑफिस अधिकारी से लेकर विधायक के चमचे को चप्पल से पीटने, थाने में बन्दुक लाकर गोली मारने की धमकी देना, डीएसपी के बंगले में जबरदस्ती आधी रात घुस जाना, थाने अंदर दरोगा को अर्दब देना कि आईपीएस बनते ही सबसे पहले तुम्हें सस्पेंड करूँगा इत्यादि पूरी तरह फ़िल्मी ड्रामा है, जिसका हकीकत से कोई लेना देना नहीं है. 

इसलिए संभलकर भाई साहब. गैंग ऑफ़ वासेपुर में रामाधीर सिंह ने ऐसे ही नहीं कहा है कि जब तक सिनेमा है लोग चूतिया बनते रहेंगे. 

लेखक SAIL में बतौर AGM कार्यरत हैं.

8.1.24

'कच्छा-बनियान' में डकैती ही नहीं शादी भी कर सकते हैं..

डॉ. मुकेश कुमार उपाध्याय- 


एक समय 'कच्छा-बनियान' पहन कर डाका डालने जाया जाता था लेकिन अभी 'कच्छा-बनियान' पहनकर शादी के लिए जाने की ख़बरों से मीडिया प्लेटफॉर्म भर गए हैं। शादी से सुर्ख़ियां बटोरना फायदे का सौदा है। शादी तो करनी ही है, लगे हाथ सुर्ख़ियां भी बटोर ली जाएं। थोड़ा सा तड़का ही तो लगाना है! यह तड़का लगाया है जिम ट्रेनर और फिटनेस एक्सपर्ट नूपुर शिखरे ने। 




हाल ही में आमिर खान की बेटी आयरा के साथ उनका विवाह हुआ है। और वे विवाह के लिए पैदल दौड़कर रवाना होते हैं। इस दौरान वे सिर्फ एक बनियान और शॉर्ट्स पहने हुए हैं। 

इस स्टोरी में कई रोचक एंगल हैं: पहला एंगल नूपुर के आमिर खान का दामाद बनने का है तो दुसरा लव स्टोरी का है। तीसरा पिता के साथ फिटनेस ट्रेनर के रूप में शुरू हुई जान पहचान का बेटी के साथ रोमांस में बदलले और फिर शादी तक पहुंचने का है। चौथा हिंदू मुसलमान का भी है। नपुर शिखरे की जिंदगी और उनके करिअर के भी एंगल हैं। ऐसे ही आमिर खान और उनकी बेटी आइरा के जीवन के एंगल्स का खजना इस में मौजूद है। 

आइरा मानसिक अवसाद से ग्रस्त होने के बाद किस तरह जिम ट्रेनर नपुर की मेहनत से सामान्य जीवन में लौटीं। आइरा-नूपुर की शादी के बहाने दिगगज फिल्म स्टार आमिर खान के निजी जीवन से लेकर फिल्मी करिअर तक की ढेरों स्टोरीयों ने सिर उठना शुरू कर दिया है, लेकिन अकेला विवाह प्रसंग विचित्रताओं के चलते जबरदस्त चर्चा में है। इतना कि लिखने और देखने वालों का सिर चक्कर खा सकता है। 8 किमी की रेस और आउटफिट के रूप में 'कच्छा-बनियान'! यह वाला एंगल सब पर भारी है। टॉप स्टोरी यही है...बड़ी खबर यही है। नूपुर शादी के लिए चंद दोस्तों के साथ पैदल दौड़कर रवाना होते हैं। 

तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं 

सुर्खियों वाली शादियां पहले से होती आ रही हैं। यह सुर्ख़ियां पॉजिटिव नेगेटिव या मिलीजुली, किसी तरह की हो सकती हैं। एक समय विराट कोहली की शादी की चर्चाओं ने बुलंदी का आसमान छुआ था, लेकिन उनकी शादी की आलोचना में कहा गया था कि विराट ने विदेशी धरती पर विवाह रचा कर भारत की जमीन को मिलने वाले फायदों के बारे में नहीं सोचा! इस मामले में रणदीप हुडडा और लेन लैसराम की मणिपुरी शादी ज्यादा वाहवाही लूटाने वाली रही। लोग उसमें एक भी नेगेटिव नरेटिव नहीं ढूंढ पाए। फिलहल नूपुर शीखरे की शादी के तौर-तरीकों पर लोग ताने कस रहे हैं। उनका कहना है, भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मूल स्वरूप में सहजने के जितने जतन किए जा रहे हैं, उतने ही प्रयास इनकी टांगे तोड़ने के लिए किए जा रहे हैं। 

भारत में विवाह की परंपरा का विशेष स्थान है। सामाजिक, परिवारिक और आध्यातमिक धराटल पर टिका यह अनुष्ठान बहुत पवित्र मना जाता है और सात जन्मों तक एक दुसरे को जोड़ने का संकल्प दिलाता है। ट्रोलर्स का कहना है कि विवाह की पवित्रता को दिनों-दिन ग्रहण लग रहा है। लोग इसकी मूल भावना के बजाय मस्ती और बेतुकी हरकतों का तड़का लगाने की सोच में डूबते जा रहे हैं। नूपुर और आइरा खान ने बदलाव की छलांग लगाकर इसे मजाक की हद तक पहुंचा दिया है। 

एक एंगल ये भी: आमिर का साला उनका बाहनोई भी है.. बेटी की शादी पर खानदान की कुंडली वायरल 

आमिर खान का साला उनका बाहनोई भी है, यानी आमिर खान अपने बहनोई के साले भी हैं। तामम लोगों के लिए इसमें कुछ खास नहीं है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह अजीब इसलिए है क्योंकी आमिर खान की पत्नी एक उच्च वर्गीय हिंदू परिवार से आती हैं। और ऐसे परिवारों में इतनी नजदीक शादियां नहीं होती हैं। आमिर की बहन फरहत खान दत्ता हैं। उनके पति राजीव दत्ता हैं, जो आमिर खान की पहली पत्नी रीना दत्ता के भाई हैं। आमिर की बड़ी बहन निकहत खान का विवाह भी उच्च वर्गीय हिंदू परिवार के संतोष हेगडे से हुआ है। दोनों बहनों ने उच्च कुलीन हिंदुओं से शादी की तो अमीर ने भी अपनी दोनों शादियां उच्च कुलीन हिंदू परिवारों में की। 

अब उनकी अगली पीढ़ी ने भी इस रीवाज को कायम रखा है। यानी बेटी आइरा की शादी कुलीन हिंदू लड़के नपुर शिखरे से हुई है। आइरा खान की अनोखी शादी तो चर्चा में है ही, इस बहाने फिल्म इंदुस्ट्री के दिगगज कलाकार आमिर के परिवार की कुंडली को एक बर फिर से खंगाला जा रहा है। पर्सनल लाइफ के खूब चर्चा हो रहे हैं। आइरा की शादी के मौके पर ढेर सारे वीडियोस में जो बताया जा रहा है, वह उन लोगों के लिए खासा दिलचस्प है जिन्हें अभी तक इसकी कोई जानकारी नहीं है। 

हैरान करने वाली बात यह है कि एक बेहद कामयाब एक्टर, दो शादियां करने के बाद भी विवाहित जीवन में सफल नहीं कहा जा सकता है! उनकी एक भी पत्नी उनके लिए जीवन साथी साबित नहीं हो सकी। दोनों बीवियों से उनका तलाक़ हो चुका है। पहली पत्नी रीना दत्ता से दो बच्चे आइरा और junaid खान हैं। दूसरी पत्नी किरण राव से एक बेटा अज़ाद राव खान है। 

हालाँकि एक सुखद संयोग यह भी है कि दोनों पत्नियाँ और तीनों बच्चे शादी के मौके पर बहुत खुश और एक साथ नजर आ रहे हैं। इस पर यूजर्स कहते हैं कि कलाकार दो तरह का जीवन जीते हैं, एक कैमरे के सामने और दुसरा कैमरे के पीछे।

4.1.24

पुण्यतिथि विशेष : कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे.... गोपालदास नीरज

संजय सक्सेना, लखनऊ 


आज से सौ साल पहले यानी 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के छोटे से जिला इटावा के पुरावली गाँव के एक हिन्दू कायस्थ परिवार बाबू ब्रज किशोर सक्सेना के यहा बेटे का जन्म हुआ था. ब्रज किशोर के नाम से ही इस बात का अहसास हो जाता था कि उनकी आस्था किससे जुड़ी है. कृष्ण भक्त इस परिवार ने बड़े अरमानों के साथ बेटे का नाम भी गोपाल रखा. जो अपनी लेखनी के चलते कालांतर में गोपालदास नीरज के नाम से हिन्दी साहित्य की महना विभूति बन गया. मात्र 6 वर्ष की आयु में गोपाल के पिता जी गुजर गये थे, गोपालदास नीरज का पालन-पोषण उनकी मॉ ने ही किया. 

उत्तर प्रदेश के जिला एटा से हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद गोपाल ने इटावा की कचहरी में कुछ समय टाइपिस्ट का काम किया, फिर एक सिनेमाघर में नौकरी की. कई छोटी-मोटी नौकरीयाँ करते हुए 1953 में हिंदी साहित्य से एम.ए. किया और अध्यापन कार्य से संबद्ध हो गये. 

इस बीच कवि सम्मेलनों में उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी थी. इसी लोकप्रियता के कारण उन्हें मुम्बई तब की बंबई से एक फ़िल्म के लिए गीत लिखने का प्रस्ताव मिला और फिर यह सिलसिला आगे बढ़ता ही गया. नीरज ने कभी मुड़कर नहीं देखा. फिल्मी इंडस्ट्री में भी नीरज अत्यंत लोकप्रिय गीतकार के रूप में प्रतिष्ठित हुए और उन्हें तीन बार फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया. 

जीवन के अंतिम पड़ाव में नीजर का मुम्बई की चकाचौंध वाली जिंदगी से मन ऊब गया तो वह इटावा के पास के ही जिले अलीगढ़ वापस लौट आए. जहां उनके बच्चे रहते थे. 

गोपालदास नीरज का पहला काव्य-संग्रह ‘संघर्ष’ 1944 में प्रकाशित हुआ था. अंतर्ध्वनि, विभावरी, प्राणगीत, दर्द दिया है, बादल बरस गयो, मुक्तकी, दो गीत, नीरज की पाती, गीत भी अगीत भी, आसावरी, नदी किनारे, कारवाँ गुज़र गया, फिर दीप जलेगा, तुम्हारे लिए आदि उनके प्रमुख काव्य और गीत-संग्रह हैं अपनी लेखनी के चलते नीरज जी विश्व उर्दू परिषद पुरस्कार और यश भारती से सम्मानित किए गए थे तो भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पदम् श्री और 2007 में पद्म भूषण से अलंकृत किया था. 

उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें भाषा संस्थान का अध्यक्ष नामित कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था. नीरज को बम्बई के फिल्म जगत से गीतकार के रूप में पहली बार नई उमर की नई फसल के गीत लिखने का निमन्त्रण दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया. पहली ही फ़िल्म में उनके लिखे कुछ गीत जैसे कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे और देखती ही रहो आज दर्पण न तुम, प्यार का यह मुहूरत निकल जायेगा बेहद लोकप्रिय हुए जिसका परिणाम यह हुआ कि वे बम्बई में रहकर फ़िल्मों के लिये गीत लिखने लगे. 

फिल्मों में गीत लेखन का सिलसिला मेरा नाम जोकर, शर्मीली और प्रेम पुजारी जैसी अनेक चर्चित फिल्मों में कई वर्षों तक जारी रहा. गोपाल दास नीरज अपनी आलोचना करने से कभी नहीं चूकते थे. 

अपने बारे में उनका एक शेर आज भी मुशायरों में फरमाइश के साथ सुना जाता है.जिसके चंद बोल थे,‘इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में. इसी तरह से ‘न पीने का सलीका न पिलाने का शऊर, ऐसे भी लोग चले आये हैं मयखाने में. ‘काफी लोकप्रिय हुआ. 

 नीरज जी की कालक्रमानुसार प्रकाशित साहित्य कृतियों की बात की जाये तो संघर्ष (1944), अन्तर्ध्वनि (1946), विभावरी (1948),प्राणगीत (1951), दर्द दिया है (1956), बादर बरस गयो (1957), मुक्तकी (1958), दो गीत (1958), नीरज की पाती (1958). गीत भी अगीत भी (1959),आसावरी (1963), नदी किनारे (1963), लहर पुकारे (1963), कारवाँ गुजर गया (1964), फर दीप जलेगा (1970), तुम्हारे लिये (1972), नीरज की गीतिकाएँ (1987) काफी लोप्रिय हुईं. 

गोपालदास नीरज को फ़िल्म जगत में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये 1970 के दशक में लगातार तीन बार जिन गीतों के लिए नामांकित किया गया, उसमें 1970 में काल का पहिया घूमे रे भइया! (फ़िल्म.चंदा और बिजली), 1971 में बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ (फ़िल्म.पहचान), 1972 में ए भाई! ज़रा देख के चलो (फ़िल्म मेरा नाम जोकर शामिल थीं.पद्म भूषण से सम्मानित कवि, गीतकार गोपालदास ’नीरज’ ने दिल्ली के एम्स में 19 जुलाई 2018 की शाम लगभग 8 बजे अन्तिम सांस ली। तो हिन्दी साहित्य का एक सितारा अस्त हो गया. 

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फर्क : पहले बलातकारी बचाएं जाते रहे, अब जेल है उनकी जगह

2017 से पहले यूपी में राह तो छोड़िए, लोग अपने बेडरुम में भी सुरक्षित नहीं थे। राह चलते युवतियों का किडनैप कर सामूहिक बलातकार की घटनाएं आमबात हुआ करती थी। खास यह है कि अगर कोई बलातकारी पकड़ भी जाता था, सपा मुखिया के उस बयान पर कार्रवाई नहीं होती थी, बच्चे है बच्चों से गलतियां हो जाया करती है। परिणाम यह रहा कि छुटभैये सपाई गुंडे तो छोड़िए विजय मिश्रा व गायत्री प्रजापति जैसे उसके विधायक व मंत्री खुल्लमखुल्ला बलातकार की घटनाओं को न सिर्फ अंजाम देते थे, बल्कि पीड़िता की रपट ही नहीं लिखी जाती थी और जनमानस के दबाव में लिखी भी गयी तो एफआर लगा दी जाती रही। जबकि योगीराज में न सिर्फ पीड़िता की रपट लिखी जाती है, बल्कि दुद्धी-सोनभद्र के भाजपा विधायक रामदुलार गौड़, विजय मिश्रा सहित बीएचयू आईआईटी छात्रा के छेड़खानी के आरोपी भाजपा आईटी सेल कार्यकर्ता भी जेल की हवा खा रहे है। मतलब साफ है पहले जेबकतरे से लेकर लूट, हत्या, डकैती व बलातकार जैसे संगीन अपराधों के आरोपियों को बचाने के लिए सपाई न सिर्फ पूरी ताकत झोक देते थे, बल्कि फर्जी मुकदमों में बेगुनाहों को जेल भेजवा देते थे, आज बुलडोजरराज में रपट दर्ज तो हो ही रहे है, समय पर अपराधियों की सजा भी हो रही है. सुरेश गांधी-

ताजा मामला, बीएचयू आईआईटी छात्रा के संग हुई गैंगरेप का है। देर से ही सही पुलिस ने पीड़िता के बयान पर दर्ज गुमनाम आरोपियों को ढूढ़ निकाला और जेल भेज दिया। खास है कि ये आरोपी कोई और नहीं बल्कि भाजपा के आईटी सेल के चार मनबढ़ युवक थे और इनके वीआईपीज फोटो देखकर एकबारगी पुलिस के भी रोंगटे खड़े हो गए, लेकिन योगीराज के जीरो टॉलरेंस अपराध नीति के आगे पुलिस ने साहस का परिचय देते हुए इन्हें न सिर्फ जेल भेज दिया, बल्कि उसके पास इतना पुख्ता सबूत है कि सजा होने से भी इन्हें कोई नहीं बचा सकता। जबकि ये आरोपी अगर सपाई होते और अखिलेश का राज होता तो हस्र क्या होता वो विजय मिश्रा व गायत्री प्रजापति जैसे अपराधियो का नाम बताने के लिए काफी है। उस दौर में सपाई गुंडो का हाल यह था कि अपराधी पार्टी के है तो कार्रवाई भूल जाइए, ये जेबकतरों, लूटेरे व हत्यारों को बचाने के लिए पुलिस की वर्दी तक फाड़ डालते थे और किसी पत्रकार ने इनके कारनामों की बखिया उधेड़ने की कोशिश की तो फर्जी रपट दर्ज कर न सिर्फ उसके घर-गृहस्थी तक लूटवा लेते थे, बल्कि जगेन्द्र जैसे पत्रकारों की हत्या तक करवा देते थे। फिरहाल, आमआदमी को छोड़िए बुलडोजरराज में सर्वाधिक प्रभावशाली माफिया डॉन मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद व विजय मिश्रा जैसे अपराधियों के साथ क्या हो रहा है, ये सर्वविदित है। ताबड़तोड़ न सिर्फ बुलडोजर उनके अवैध कब्जों पर गरज रहे है, बल्कि अवै संपत्ति भी सील हो रही है, सजाएं धड़ाधड़ हो रही है। यह अलग बात है कि कुछ सपाई चहेतो को यह सब नहीं दिख रहा है, लेकिन जनता सब समझ रही है। 2022 का परिणाम तो योगी के बुलडोजर संस्कृति पर जनता ने दिया है। बता दें, योगीराज में हर अपराध पर कार्रवाई होती है। किसी बेगुनाह को नेताओं के प्रभाव में फसाया नहीं जाता है। अपराधियों के अवैध कब्जे एक-एक कर ढहाएं जा रहे है। एनसीआरबी के आंकड़े देखने से लगता है बाबा ने यूपी को ठंडा कर दिया है। जहां हर तीसरे रोज दंगा होते थे, वहां आज तक एक भी दंगा नहीं हुए। मतलब साफ है 2017 के पहले और 2017 के बाद का उत्तर प्रदेश बदल चुका है। तमाम सर्वे रिर्पोटो की मानें तो योगी सरकार की ‘पुलिस कार्रवाई’ में अखिलेश सरकार से चार गुना अधिक है। 2017-18 से 2021-2022 की अवधि में ’पुलिस कार्रवाई’ में 162 व्यक्ति मारे गए, जबकि 2012 से 2017 तक 41 लोगों की जान गई थी. मार्च 2017 में सत्ता में आने के बाद से यूपी में आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार कथित गोलीबारी में संदिग्ध अपराधियों को गोली मारने के लिए कुख्यात हुई है. यह अलग बात है कुछ कुंठाग्रस्त आलोचकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इन पुलिस ‘मुठभेड़ों’ को न्यायेतर, फर्जी हत्याएं करार दिया गया है, जिन्हें आदित्यनाथ सरकार द्वारा अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ बताती है. आंकड़े के मुताबिक 2017 से 2022 तक पुलिस ने 3,574 व्यक्तियों या संदिग्ध अपराधियों को गोली मार दी. हालांकि, अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान मारे गए संदिग्ध अपराधियों की संख्या या मारे गए व्यक्तियों के वर्षवार विवरण के उपलब्ध नहीं कराया गया था. पुलिसकर्मियों पर हमलों के मामले में भी आदित्यनाथ का पहला कार्यकाल यादव के शासन की तुलना में आगे रहा है. 2012-2017 में पुलिसकर्मियों पर हमले की 4,361 घटनाएं हुईं, जो 2017 से 2022 तक बढ़कर 5,972 पहुंच गईं. योगी सरकार पर लगातार ‘फर्जी मुठभेड़’ करने का आरोप लगता रहा है, दूसरी ओर, यूपी पुलिस का कहना है कि वे अपराधियों को केवल आत्मरक्षा में गोली मारते हैं. आंकड़े के मुताबिक योगीराज में आईपीसी की धाराओं के तहत हर साल औसतन 3 लाख 40 हजार 170 मामले दर्ज हुए. इनमें हिंसक वारदातों की संख्या 59 हजार 277 थी. जबकि अखिलेश सरकार मे हर साल अपहरण की औसतन 17 हजार 784 मामले दर्ज किए गए. वहीं चोरी की 49 हजार 874 मामले दर्ज हुए. वहीं रेप के हर साल औसतन 3 हजार 507 मामले दर्ज किए गए. वहीं आईपीसी और स्थानीय कानूनों के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध के 56 हजार 174 मामले हर साल दर्ज किए गए. इसी तरह दंगों के हर साल औसतन 7 हजार 345 मामले दर्ज किए गए. बता दें, अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री थे. इस दौरान आईपीसी की धाराओं के तहत हर साल औसतन 2 लाख 37 हजार 821 मामले दर्ज किए गए. वहीं हिंसक वारदातों के हर साल औसतन 44 हजार 39 मामले दर्ज किए गए. इसी तरह अपहरण के 12 हजार 64 मामले औसतन हर साल दर्ज किए गए. वहीं चोरी के मामले दर्ज करने का औसत हर साल 42 हजार 57 का था. इस दौरान बलात्कार के 3 हजार 264 मामले औसतन हर साल दर्ज किए गए. वहीं आईपीसी और स्थानीय कानूनों के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध के 36 हजार 41 मामले हर साल दर्ज किए गए. अखिलेश सरकार में दंगों के हर साल औसतन 6 हजार 607 मामले दर्ज किए गए. अखिलेश यादव की सरकार में ही मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे. इसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. बसपा प्रमुख मायावती 2007 से 2012 तक प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं. उनके कार्यकाल में आईपीसी की धाराओं के तहत हर साल औसतन 1 लाख 72 हजार 290 मामले दर्ज किए गए. इस दौरान हिंसक वारदातों का औसत हर साल 28 हजार 248 मामलों का था. इस दौरान अपहरण के 6 हजार 162 मामले औसतन हर साल दर्ज किए गए. वहीं चोरी के 16 हजार 1 मामले औसतन हर साल दर्ज किए गए. बलात्कार के औसतन 1 हजार 777 मामले हर साल दर्ज किए गए. आईपीसी और स्थानीय कानूनों के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध के 22 हजार 125 मामले दर्ज किए गए. दंगों के 4 हजार 469 मामले औसतन हर साल दर्ज किए गए. योगी के जीरों टॉलरेंस नीति से जनता खुश जनता की नजर में यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न सिर्फ बेहतर है बल्कि कानून व्यवस्था में भी अव्वल है। उनके बुलडोजर एक्शन, पुलिसिया कामकाज, ट्रांसफर पोस्टिंग, कल्याणकारी योजनाएं, भ्रष्टाचार, विधायक निधि, सांसद निधि आदिद में अखिलेश की तुलना में बेहद संतुलित और जनहितैषी ढंग से संचालित हो रहे हैं.

2.1.24

SAIL launches story writing competition - 2024

•Will showcase the skills of writers across the country •Company will felicitate the winners with attractive prizes & certificates New Delhi, 02 january 2024: Steel Authority of India Limited (SAIL) has launched “SAIL Story Writing Competition– 2024” titled "You, Me and SAIL" today, inviting writers from all over the country to participate and showcase their creative writing skills. The aim of SAIL Story Writing Competition - 2024 is to inspire people of all ages to explore their imaginations, sharpen their writing skills, and connect with SAIL, as well as to make people aware of SAIL's contribution the Nation development. With the theme of "You, Me and SAIL", there is no limit to the range of emotions and experiences that writers can explore in their submissions. The competition is open to writers of all ages and levels of experience, from first-time writers to established authors. Entrants are encouraged to explore their imagination and creativity in crafting their stories. This year's competition offers exciting prizes to the winners, publication opportunities, and certificates. Additionally, all winning entries will be featured in SAIL’s in-house Magazine SAILNews, giving writers a chance to gain exposure and recognition. Participants are encouraged to submit original and unpublished stories, in no more than 800 words, that explore the theme in innovative and imaginative ways. To enter the competition, participants must submit their original stories by 15th February, 2024 to sailstory2024@gmail.com. The submission guidelines and rules are available on SAIL website (www.sail.co.in) and also attached with this press release. Steel Authority of India Limited (SAIL) is one of the largest steel-making companies in India and one of the Maharatnas of the country’s Central Public Sector Enterprises (CPSEs). SAIL has always stood committed to the cause of nation building.

1.1.24

बिहार पुलिस एक कालजयी उपन्यास

बिहार पुलिस एक कालजयी उपन्यास कुछ किताबों की कहानी लिखी नहीं जाती, अपितु उसे जीया जाता है। कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ मुझे श्री तत्सम्यक मनु रचित उपन्यास 'बिहार पुलिस' को पढ़कर। उपन्यास में रहस्य है, रोमांच है, छात्र जीवन है, तो वहीं बिहार पुलिस, झारखंड पुलिस सहित होमगार्ड्स की ज़िन्दगानी भी हैं। उपन्यास को सटीकता प्रदान करने के लिए लेखक ने कई न्यूज़पेपर कटिंग्स का भी इस्तेमाल किया है। इसके अलावा उपन्यास में लेखक ने भाँति-भाँति के मुद्दे उठाए हैं, जिसे पढ़कर यही लगता है कि उपन्यास लेखन में काफी शोध हुआ है और यही शोधपरक जानकारी उपन्यास को 'कालजयी' बनाता है। लेखक को 'कालजयी' रचना के लिए हार्दिक बधाई और प्रणाम। समीक्षक : अपर्णा कुमारी यादव, झारखंड।

हापुड़ में आज़ाद अधिकार सेना की जिला कार्यकारिणी का गठन

उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ में आज़ाद अधिकार सेना की नवगठित जिला कार्यकारिणी का गठन हो गया है. नवगठित जिला कार्यकारिणी ने जनपद में भ्र्ष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ने की बात को रखकर पार्टी के कथन को मज़बूत करने का काम किया है. बताते चलें की आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर के संरक्षण में पार्टी तेजी से उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में विस्तार कर रही है.

देवरिया में युवक को गोली मारने वाले पुलिस की पहुंच से दूर

•देवरिया में अपराधियों के हौसले हैं बहुत बुलंद •नए डीजीपी से है लोगों को बहुत उम्मीद देवरिया 31 दिसंबर। एक तरफ देश के मुखिया नरेंद्र मोदी तथा प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ एवं बड़े-बड़े आला हुकमरान शनिवार को अयोध्या में बैठ कर आम लोगों को राम राज्य की सपना को दिखाने में व्यस्त थे कि उसी दौरान अयोध्या से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर मुख्यमंत्री के गृह जनपद से सेटे देवरिया जिले के कोतवाली थाना अंतर्गत चितामन चक गांव में दुस्साहसी अपराधियों ने मां के सामने बेटे को गोली मार दी और खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन करते हुए फरार हो गये। वह तो भगवान श्री राम का आशीर्वाद था कि गोली गले को भेदते हुए निकल गई वरना वहीं पर मां की आंखों के सामने ही बेटा ढेर हो गया होता। घायल बेटे का इलाज मेडिकल कॉलेज देवरिया में हो रहा है। जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। पुलिस ने विधिक औपचारिकताओं को निभाते हुए तीन युवकों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच कर रही है। लेकिन समाचार लिखे जाने तक या यू कहे की घटना के 24 घंटा बीत जाने के बाद भी अपराधी पुलिस से कोसों दूर है। इस संबंध में पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर संजय रेड्डी ने बताया कि शनिवार को सुबह करीब ग्यारह बजे तीन बदमाश एक मोटरसाइकिल से चिंतामन चक गांव के रहने वाले 26 वर्षीय युवक रोहित यादव पुत्र राम बदन यादव के घर पहुंचे और उस समय घर पर मौजूद रोहित यादव की मां से कहा कि वह अपने बेटे को बुला दे। उससे कुछ बात करनी है। मां ने यह सोचकर कि बेटे के कुछ दोस्त आए हैं उन्होंने बेटे को आवाज देकर बुला दी और बेटा ज्यों ही घर से बाहर आता है तो उसे गोली मार दी जाती है। मां ने यह सपने में भी नहीं सोचा था की उसी के दरवाजे पर आए हुए उसके बेटे के दोस्त जान के दुश्मन बनकर आए हैं। यही है राम राज्य की संकल्पना उत्तर प्रदेश में। विशेष तौर पर देवरिया जिले में अपराधिक घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं देवरिया पुलिस प्रशासन केवल कागजी और झूठी वाह वाही लूटने में व्यस्त है। उल्लेखनीय है कि कुछ माह पहले देवरिया जिले के रुद्रपुर थाना अंतर्गत फतेहपुर में जमीनी विवाद में छह लोगों की हत्या हो गई थी जिसमें एक ही परिवार के पांच लोग मारे गए थे। जिस मामले में पूरा प्रदेश हिल गया था। जानकार बताते हैं कि प्रदेश सरकार ने देवरिया जिले के इतिहास में पहली बार किसी एस डी एम एवं पुलिस के सी ओ को लापरवाह पाए जाने पर निलम्बित किया था। लोगों का कहना है कि देवरिया जिले के पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा बहुत ईमानदार हैं, लेकिन उनकी ईमानदारी का लाभ आमजन को नहीं मिल रहा है। यहां पर अपराधी अपराध की घटनाओं को करने में जरा सा भी संकोच नहीं करते हैं। आए दिन हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार, तस्करी जैसे बड़े अपराध हो रहे हैं लेकिन अपराधियों के मन से कानून का भय समाप्त हो चुका है। नए वर्ष 2024 में लोगों को उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश के नए पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार के पद भार ग्रहण करने के उपरांत हो सकता है कि उनके कार्य प्रणाली और तेवर से देवरिया जिले के पुलिस के अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति जागरुक होगे।

28.12.23

मुशायरों के मक़बलू शायर थे बुद्धिसेन शर्मा : फ़रमान नक़वी


गुफ़्तगू की तरफ से आयोजित किया गया ‘बुद्धिसेन शर्मा जन्मोत्सव-2023’ !!

प्रयागराज। बुद्धिसेन शर्मा हमारे शहर के बड़े शायरों में शमुार किए जाते
रहे हैं। मुशायरों की दुनिया में बहुत मक़़बूल थे। काव्य पाठ करने के
लिए उन्हें इंग्लैंड और अमेरिका में भी आमंत्रित किया गया था। आज उनके
जन्म दिन पर जिस तरह से ‘गुफ़्तगू’ ने उन्हें याद किया है, यह बेहद ज़रूरी
और उल्लेखनीय है। ऐसे शायरों को याद करना हमारी जिम्मेदारी है।

चंडीगढ़ में 18 जनवरी से आंदोलन शुरू करेंगे पंजाब के किसान

 -अमरीक-

पंजाब के पांच किसान संगठन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 18 जनवरी से चंडीगढ़ में आंदोलन शुरू करेंगे। पहले घोषणा की गई थी कि आंदोलन और धरना-प्रदर्शन चंडीगढ़ सीमा के मोहाली में किया जाएगा लेकिन अब किसान राज्य की राजधानी में डटेंगे। सेक्टर 35 स्थित किसान भवन में किसान संगठनों की विशेष बैठक हुई। इस बैठक में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) की ओर से बलबीर सिंह राजेवाल, अखिल भारतीय किसान फेडरेशन के प्रेम सिंह, किसान संघर्ष कमेटी के कमलप्रीत सिंह पन्नू, आजाद किसान संघर्ष कमेटी के हरजिंदर सिंह टांडा और बीकेयू मानसा के भोग सिंह ने शिरकत की। बैठक में आगामी आंदोलन की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया गया।

1.12.23

एक थे वीपी सिंह !

विक्रम बृजेंद्र सिंह-
 
वीपी सिंह की पुण्यतिथि... वो नवें दशक का उत्तरार्द्ध था और इंदिरा गांधी की शहादत के बाद 'चक्रवर्ती' राज कर रही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चौतरफा घेर लोकनायक जयप्रकाश नारायण की ही तरह लगभग 'जननायक' बन चुके थे गहरवार ठाकुर ! पूर्व रियासत मांडा के राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह । कांग्रेस और राजीव गांधी से बगावत की थी उन्होंने। इसलिये कइयों ने उन्हें जयचंद-मीरजाफर और ब्रूटस भी कह डाला !...बावजूद वीपी का जादू पूरे हिंदुस्तान में सिर चढ़कर बोला।

23.11.23

Microsoft Outlook Lite Expands its Reach with Vernacular features and SMS support for Indian Users

 With features such as translation, voice typing, and transliteration, users can compose and read emails in their preferred regional language and can also access and manage their SMSes in Outlook Lite. 

New Delhi : Microsoft has announced new vernacular features in Outlook Lite, an email and SMS app designed specifically for Indian users that combines the best of email, and SMS in one place. 

कासगंज में VIP न्यूज के तथाकथित पत्रकार रंजीत राय का ऑडियो वायरल।

अतुल यादव-

कासगंज में VIP न्यूज के तथाकथित पत्रकार रंजीत राय का एक और कारनामा, अब राशन डीलर को धमकाकर अवैध उगाही के दवाब बनाने का ऑडियो वायरल

कासगंज: यूपी के कासगंज में नाकारा अफसरशाही के चलते तथाकथित पत्रकारों की चांदी है. जिले मैं अपराधिक किस्म के लोग पत्रकारिता का चोला ओढ़ भोले भाले लोगों को धमका कर जमकर अवैध उगाही कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ऑडियो ने कासगंज की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ऑडियो मैं एक तथाकथित पत्रकार रंजीत राय जिले के एक राशन डीलर को धमकाकर उसे मिलने की बात कर रहा है।
 
पत्रकार साहब का लहजा सुन कर ऐसा लगता है कि जिले के डीएसओ साहब ने अपना पद छोड़ कर जिले के पूर्ति विभाग की कमान रंजीत राय को सौंप दी है और पुलिस ने तो खुला संरक्षण प्रदान कर रखा है।
 
दरअसल रंजीत राय नाम के ये महान शख्स जिले की पत्रकारिता को शर्मशार करने का बीड़ा उठाए हुए हैं और जिला प्रशासन व पुलिस अपनी आंख और कान बंद किए बैठे हैं, पूरी जानकारी के मुताबिक रंजीत राय ने सदर कोतवाली क्षेत्र के मौहल्ला नाथूराम के रहने वाले राशन डीलर अहसान को फोन कर जो धमकाया उसे सुन कर आप भी कह उठेंगे कि जिले के डीएम और एसपी को अब जिले की कमान रंजीत राय को सौंप देनी चाहिए क्योंकि जो हड़काने का जज्बा रंजीत राय मैं है वो तो दरोगा जी मैं भी नहीं होगा।
 
सुनिए पूरा ऑडियो.....
 

 

प्रदूषण के असली कारण खोजने होंगे

रजनीश कपूर-

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या को हम कई सालों से सुनते आ रहे हैं। एक से एक सनसनीखेज वैज्ञानिक रिपोर्टो की बातों को हमें भूलना नहीं चाहिए। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि दिल्ली से निकलने वाले गंदे कचरे, कूड़ा करकट को ठिकाने लगाने का पुख्ता इंतजाम अभी तक नहीं हो पाया। सरकार यही सोचने में लगी है कि यह पूरा का पूरा कूड़ा कहां फिंकवाया जाए या इस कूड़े का निस्तार यानी ठोस कचरा प्रबंधन कैसे किया जाए? जाहिर है इस गुत्थी को सुलझाए बगैर जलाए जाने लायक कूड़े को चोरी छुपे जलाने के अलावा और क्या चारा बचता होगा? इस गैरकानूनी हरकत से उपजे धुंए और जहरीली गैसों की मात्रा कितनी है जिसका कोई हिसाब किसी भी स्तर पर नहीं लगाया जा रहा है। इन सबके चलते आम नागरिकों पर सरकार द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंधों से असुविधा हो रही है। परंतु सरकार या उसकी प्रदूषण नियंत्रण करने वाली एजेंसियाँ असल कारण तक नहीं पहुँच पा रहीं।

सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर पत्रकार रंजीत राय ने लोगों को लूटा

अतुल यादव-

कासगंज : यूपी के कासगंज में VIP न्यूज चैनल के पत्रकार रंजीत राय ने जिले में आतंक मचा रखा है, वह ग्रामीण इलाकों के लोगों को पत्रकार बनाने के नाम पर अपनी ठगी का शिकार बना रहा है। रंजीत राय पर आरोप है कि वो गांव गांव जाकर भोले भाले लोगों से मिलता है और युवाओं को पत्रकार बनाने का सपना दिखाकर उनसे पैसों की मांग करता है। ग्रामीण इलाकों में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर रंजीत राय विधवाओं और वृद्धों से भी पैसों की ठगी करता है।

Vote for your favourite Sportsperson at ‘CNN-News18 Indian of the Year 2023’

 New Delhi | November 17, 2023: Celebrating the relentless spirit of India’s sports icons who have brought glory to the nation, ‘CNN-News18 Indian of the Year’ (IOTY), news television’s biggest awards platform, has unveiled the nominees in the Sports category this year. The awards platform would honour exceptional sportspersons whose talent and commitment have elevated India's standing on the global sports stage. 

16.11.23

ताकि बहिष्कार की नौबत ही न आए

राजीव शर्मा-

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक सूची बहुत तेज़ी से शेयर की जा रही है, जिनमें ग़ाज़ा मामले को लेकर कुछ ख़ास कंपनियों के प्रॉडक्ट्स का बहिष्कार करने की अपील की गई है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी जब-जब फ़लस्तीन-इसराइल तनाव बढ़ा तो मेरे पास ऐसी ही एक सूची पहुँची थी।

क़र्ज़ की किश्तें: कितनी आसान, कितनी पेचीदा

रजनीश कपूर-

त्योहारों के मौसम में ग्राहकों को आकर्षित करने के इरादे से ज़्यादातर कंपनियाँ अपने उत्पादों पर आकर्षक ऑफर चला देते हैं। इनमें कई तरह के ऑफर होते हैं जैसे हर ख़रीद पर मुफ़्त उपहार। एक के साथ एक फ़्री। पुराना लाओ नया पाओ ऑफर आदि। परंतु इन सब में सर्वप्रथम ऑफर ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ का है। ग्राहक इस ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ के झाँसे में बड़ी आसानी से आ जाते हैं। परंतु क्या ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ वास्तव में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के, ग्राहकों को मिलती है?

बीएचयू की मुस्लिम छात्रा ने पीएम मोदी पर की पीएचडी

अजय कुमार,लखनऊ

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी एक बार फिर चर्चा में है,अबकी से चर्चा का विषय न तो राजनैतिक है, न ही कोई धार्मिक वजह है.इस बार वाराणसी ‘बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय’ की एक मुस्लिम  छात्रा की वजह से सुर्खियों में है. दरअसल, राजनीति विज्ञान की मुस्लिम शोध छात्रा नजमा परवीन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पीएचडी  की है.उन्होंने अपने अध्ययन में मोदी को राजनीति का महानायक बताया है.परवीन ने कहा है कि वह(मोदी) देश के भरोसेमंद नेता हैं. वह मुसलमानों के विरोधी नहीं, बल्कि हितैषी हैं. आध्यात्मिक चिंतक व समाज सुधारक भी हैं. वर्ष 2014 का चुनाव वंशवाद की समाप्ति और एक पार्टी के अधिनायकवाद को खत्म करने वाला रहा. शाही रक्त पर साधारण रक्त की विजय हुई थी।


टारगेट पूरा करने के चक्कर मे भूँजा बनकर रह गया है, यू पी में गंगेस्टर एक्ट !

 सत्येंद्र कुमार-

भारत एक ऐसा देश है जहाँ का कानून तमाम ख़ामियों से भरा होने के बावजूद इसके नायाब होने का ढिंढोरा पूरी बेशर्मी के साथ पीटा जाता है । अंग्रेजो ने ये कानून इसलिए बनाये थे कि इस कानून के जरिये गोरे लोग कालों को दबा कुचल सके और उनपर राज कर सकें । आज गोरे तो नही रहे लेकिन कानून वही है । नियति ने ऐसा खेल दिखाया कि आज इस कानून की बाग़डोर कालों के हाथ मे है और इसकी चोट अपने लोग अपनों पर ही कर रहे हैं । यहाँ 13 साल से ऊपर के बच्चे को वयस्क मानकर उसका पूरा टिकट वसूल किया जाता है लेकिन 16 साल के बलात्कारी को अवयस्क मानकर रियायत दे दी जाती है । यहाँ शराब और गुटखे के पाउच पर सेहत के लिए हानिकारक है लिखकर बेचा जा सकता है लेकिन पटाखों पर  पर्यावरण के लिए हानिकारक है लिखकर उसे फोड़ा नही जा सकता ।

अंग्रेजी की एक कहावत है "रूल्स आर मेड फ़ॉर फूल्स" मतलब नियम कानून सिर्फ मूर्खों के लिए बनाए गए हैं । यहाँ मूर्ख का अर्थ मात्र ऐसे लोगों से है जो कानून से ही चलना चाहते हैं लेकिन एक न एक दिन कानून के ही चुंगल में फंसा दिए जाते हैं । इसके ठीक उलट हिंदी में एक कहावत है "समरथ को नही दोष गुसाई" मतलब नियम कानून को मानने की बाध्यता हमेशा कमजोर अर्थात मूर्खों के लिए होती है । कमजोर के लिए अपने को निर्दोष साबित करना केवल तभी संभव हो सकता है जब खुद उसके पास वैसी या उससे बड़ी ताकत आ जाये । यदि आज के माहौल की तुलना कुछ वर्षों पूर्व से कर ली जाए तो पहले मान्या सुर्वे, हाजी मस्तान, संदीप भाटी, लॉरेंस विशनोई, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी, सुधीर सिंह, प्रदीप सिंह, श्री प्रकाश शुक्ला जैसे खतरनाक लोगों को गैंगेस्टर का रुतबा और तमगा हासिल था लेकिन आज बिस्कुट और साइकिल चुराने वाला चिमरखी टाइप का मरियल आदमी भी गैंगेस्टर है बशर्ते ये चोरी उसने अकेले नही बल्कि किसी के साथ मिलकर की हो ।

आज प्रदेश के लगभग हर जिले में गैंगेस्टर का टास्क और टारगेट पूरा करने की ऐसी होड़ पुलिस में मची है कि मर चुके आदमी पर भी आंख बंद कर गैंगेस्टर ठोक दिया जा रहा है । चिमरखी टाइप का चोर भी गैंगेस्टर हो सकता है पोल खोलने वाला पत्रकार और डिग्री बेचने वाला डॉक्टर भी गैंगेस्टर हो सकता है । दुकानदार और व्यवसायी तथा किसान भी गैंगेस्टर हो सकता है लेकिन एक पुलिस वाला यदि चरस की स्मगलिंग में दो तीन लोगों के साथ पकड़ लिया जाए तो वो गैंगेस्टर नही हो सकता और वहाँ गैंगेस्टर एक्ट फेल हो जाता है ।

टारगेट पूरा करने की पुलिसिया ललक ने गैंगेस्टर शब्द का रुतबा और जलवा दोनो खत्म कर दिया है । वास्तव में जो गैंगेस्टर हैं उनका रुतबा और मोह अब गैंगेस्टर शब्द से भंग हो चुका है । कहने के लिए तो पुलिस रिकॉर्ड में गैंगेस्टरों की संख्या राक्षसी बालों की तरह बढ़ रही है लेकिन अभियोजन पक्ष का रिकॉर्ड देखने  से पता चलता है कि गैंगेस्टर के मामलों मे अदालतों में सजा सिर्फ मुख्तार अंसारी जैसे लोगों को होती है जो वाकई में गैंगेस्टर शब्द को परिभाषित करते हैं । बाकी चिमरखी टाइप लोगों को कटघरे में देखते ही अदालतें समझ जाती हैं ये चिमरखी गैंगेस्टर है नही बल्कि बनाये गए हैं अदालत का वक्त जाया करने के लिए !

अब सवाल यह उठता है कि क्या हमारी पुलिस वाकई अपराध समाप्त करने की ओर बढ़ रही है या गैंगेस्टर जैसी धारा का उपयोग कर उन लोगो को भी सामाजिक तौर पर एक बड़ा अपराधी घोषित कर दे रही है,जो समाज की मुख्य धारा से फिर वापस जुड़ सकते थे और एक सामान्य जिंदगी जी सकते थे । पत्रकार तो फिर से कलम और डॉक्टर फिर से छुरी कैची ही चलाएगा साथ ही किसान भी फिर से खेती ही करेगा लेकिन बाकी के चिमरखी चोर टाइप क्या करेंगे ? वे निश्चित तौर पर अपराध की ओर अग्रसर होंगे और भविष्य में सिस्टम तथा आम जन के लिए परेशानी का सबब बनेंगे ।

8.10.23

उपराष्ट्रपति के साथ मुख्यमंत्री के शीतयुद्ध का पटाक्षेप

सत्य पारीक-

        2014 से पहले जब राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति राज्यपाल का कहीं कार्यक्रम होता था तो राष्ट्रीय गरिमा से परिपूर्ण होता था । क्योंकि उस समय तक तीनों पदों वाले पद की गरिमा का विशेष ध्यान रखते थे लेकिन 2014 के बाद उक्त पदों पर जातिय आधार पर निर्वाचन होने लगा इस कारण राजनीति में रचे बसे नेताओं को ये पद मिलने लगे । नेताओं के इन पदों पर आते ही पद गरिमा तार तार होने लगी जो गिर कर यहां तक आगई कि पहले उक्त पदों वालों के कार्यक्रमों की शुरुआत व समापन राष्ट्रीय गायन से होता था वो अब राजनीतिक आलोचना से शुरू हो कर उसी पर सम्पन्न हो जाता है , शुक्र इस बात का है कि राष्ट्रपति इससे बचे हुए हैं लेकिन कब तक ! क्योंकि जातियता ने इस पद को लपेटे में ले लिया है ।

28.9.23

Press Club Elections 2023 Violate Delhi High Court's Orders of 2010

Yashwant Singh-

The Press Club of India comes under the Companies Act: 1956. Thus Press Club of India is a registered company. The 'Ordinary voting members are considered as shareholders' of the company,  i.e PCI. As per the Companies Act, no new members/ shareholders can cast a vote in Annual General Body meetings and elections for one year, from the date of their membership. The same law is applicable to the Press Club of India; which is flouting the 'Orders of 2010, by Honb'le Delhi High Court, procured by Sandeep Dixit, ex Secretary General of The Press Club of India and Nirnimesh Kumar, who was then a Legal Correspondent of The Hindu. Vinay Kumar, Sandeep Dixit and Nirnimamesh worked at The Hindu. In 2010, the Delhi High Court, gave a 'direction and Order' that no new member from 2008 can participate in the voting in 2010 elections. 

19.9.23

विश्वकर्मा योजना पिछड़ों के लिये सौगात या झांसा

kp singh-

भाजपा और इण्डिया गठबंधन के बीच तू डाल डाल मैं पात पात का खेल चल रहा है। एक शह देता है तो दूसरा काट निकालकर उल्टी शह दे डालता है। इस बाजी में कौन जीतेगा इसका नतीजा तो 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सामने आयेगा। फिलहाल तो लोग इस रोमांचक और रोचक लड़ाई का मजा ले रहे हैं। वैसे लड़ाई में भी दोनों तरफ कई पैंच हैं जिससे खेल का सस्पेंस और बढ़ गया है। ताजा पेंच डालने की कारीगरी नीतिश कुमार ने दिखाई है ऐंकरों के बहिष्कार के मुद्दे पर। बताया तो यह गया था कि इण्डिया की मुंबई में हुयी बैठक में सर्वसम्मति से इस बहिष्कार का फैसला लिया गया था। जिसमें भले ही नीतिश कुमार खुद मौजूद न रहे हों लेकिन उनके प्रतिनिधि तो थे और उन्होंने भी शायद यही कहा था कि जो पंचन की राय वही उनकी राय है। फिर नीतिश कुमार को इत्तेफाक कैसे हो गया। ऐसी प्रायोजित नाराजगी के पीछे कोई न कोई रहस्य होता है। क्या नीतिश के रूठने के पीछे यह तो रहस्य नहीं है कि विपक्षी एकता के लिये शुरूआत उन्होंने की, पूरे कुनबे को उन्होंने जोड़ा लेकिन अब वे अलग थलग से हैं। उन्हें वह भाव नहीं दिया जा रहा जिसकी अपेक्षा थी। शायद वे विपक्षी गठबंधन के संयोजक पद को पाने के तलबगार थे भले ही खुले तौर पर उन्होंने यह कहा हो कि उन्हें संयोजक बनने की कोई हसरत नहीं है। पर लगता यह है कि एक ओर वे बड़प्पन भी ओढ़े रखना चाहते थे दूसरी ओर चाहते थे कि अन्य लोग समझदारी दिखाकर उनके गले में संयोजक बनाने की माला डाल दें पर किसी ने उनका नाम भी नहीं लिया। शरद यादव ने तो अपनी यह नियति स्वीकार कर ली है पर संभवतः नीतिश इसे पचा नहीं पा रहे। फिलहाल जो भी हो उनके और पत्ते अभी आगे खुलेंगे। नीतिश जी बड़े महीन नेता हैं। हालांकि उनके सामने एनडीए में जाने का विकल्प अब नहीं रह गया है लेकिन इण्डिया के गांधी या जयप्रकाश बनने का चांस भी उनके हाथ नहीं आ रहा। इस कुंठा में इण्डिया के लिये अगर उन्होंने फिदाइन बनने की ठान ली हो तो क्या आश्चर्य है बतर्ज खेलेंगे नहीं तो खेल बिगाड़ेंगे।

18.9.23

News18 India airs “Vishwa Mitra” – An exclusive documentary on Prime Minister Narendra Modi's Birthday


September 18, 2023: On the occasion of Prime Minister Shri Narendra Modi's birthday, News18 India, India's No.1 Hindi news channel, aired an exclusive documentary that showcased the life and leadership of India’s PM for viewers. The documentary, titled Vishwa Mitra, was broadcast on the 17th of September, 2023.

ABP Majha Unveils an Exciting Line-Up as Bappa Majha Returns to Delight Viewers

Mumbai, September 18, 2023: ABP Majha, Maharashtra's leading news channel, is happy to announce the return of its popular show Bappa Majha, with an exciting line-up of celebrations and unique programming. Scheduled to air from September 19th to September 28th, these programs promise to captivate viewers with an array of exclusive content.

News18 celebrates Hindi Diwas with a grand contest – Hindi Ke Samrat

News18, India's No. 1 News Network, once again brought back its unique celebration of the Hindi Diwas – Hindi ke Samrat - that is celebrated on the 14th of September every year. The third edition of this award-winning contest received an overwhelming response this year, generating a reach of over 22 million. This initiative stands testimony to News18’s commitment to not only celebrating the cultural heritage of its viewers but also deeply integrating itself as a brand into the socio-cultural fabric of its audience.

16.9.23

स्मरण/ सुनील दुबे : व्यक्तित्व की कमी, संपादन की खूबी

आलोक पराड़कर -

ये 1997-98 का कोई वार था। लखनऊ से प्रकाशित 'हिन्दुस्तान' के लिए बनारस में ब्यूरो की तैयारी थी, कुछ लोगों को रखा जाना था। छह-सात साल 'आज' में काम करने के बाद मैं वहां से मुक्त था और मुझे नौकरी की तलाश थी। बताया गया कि स्थानीय संपादक सुनील दुबे स्वतः साक्षात्कार लेंगे। कई लोग थे, मैं भी पहुंचा। पत्रकारिता पर थोड़ी बातचीत के बाद उन्होंने बस ये ही पूछा था कि 'आज' की नौकरी क्यों छोड़ी? मुझे याद नहीं कि मैंने क्या वजह बताई लेकिन फिर मुझे पता चला कि मुझे वाराणसी ब्यूरो में रख लिया गया है। हमारी छोटी-सी टीम संपादकीय टीम थी जिसमें मेरे साथ राधेश्याम कमल, अजय चतुर्वेदी, आशुतोष पांडेय और डॉक्टर प्रभा रानी थीं। काशी विद्यापीठ और कांग्रेस से जुड़े डाक्टर सतीश कुमार लंबे समय से दिल्ली 'हिन्दुस्तान' के लिए खबरें किया करते थे, इसलिए वे भी इस टीम में शामिल माने गए। हमारा नेतृत्व ब्यूरो चीफ शेखर कपूर करते थे। बाद में ए.के.लारी भी आए। दुबे जी जब भी बनारस आते, लारी जी और रंजीत गुप्त उनके साथ होते। दुबे जी इनके साथ किसी पंडित जी से भी मिलने जाते। कई बार ये भी कहा जाता कि जल्द ही रंजीत गुप्त भी हमारे साथ आ जाएंगे जो उन दिनों 'राष्ट्रीय सहारा' में थे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 


अखबार की डेड लाईन बनी घोड़े की लगाम

 ग्रामीण पत्रकारिता में अखबार की डेड लाईन का बड़ा महत्त्व है। बाई लाईन खबर के तो क्या कहने ! मजा ही मजा ! नाम भी पहचान भी बहुत करीबियों से मिलता सम्मान भी। उसी से जाना जाता है कि खबर कहां से लिखी गई। जब पत्रकार की डेड लाईन न हो तो वह पत्रकार है या कोई पीड़ित आम जन यह उसके लिए आत्म ग्लानि का विषय होता है। संस्थान ग्रामीण पत्रकारों की डेड लाईन बन्द कर उनको सजा देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने किया मेक इंडिया नं-1 पत्रिका का विमोचन

पटना- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी मीडिया सेल, बिहार  द्वारा निर्मित पत्रिका, ‘‘मेक इंडिया नं-1’’ का विमोचन अपने कर कमलों से किया। ‘मेक इंडिया नंबर-1’ की परिकल्पना दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की दूरस्त परिकल्पना है। इस पत्रिका में भारत को दुनिया का नंबर वन राष्ट्र बनाने की परिकल्पना एवं प्रयासों के संबंध में विस्तृत रूप से चर्चा की गयी है।

भड़ास पर नामज़द खबर देख पब्लिक ऐप के ग्रुप एडमिन (एसाइनमेंट)ने बगैर सूचना के ग्रुप से निकाला

Sudhir Awasthi -
asudhir81@gmail.com



अपने आप को सर्वश्रेष्ठ न्यूज ऐप के रूप में बताकर मियां मिट्ठू बन कर झूठी वाहवाही लूटने की आदतों में सुमार हो चुके public न्यूज ऐप ने पिछले काफी लंबे अर्से से अपने रिपोर्टर को महज रिपोर्टर नहीं बल्कि विज्ञापन का दलाल बनाने पर जुटा हुआ है।

पटना में युवा पत्रकारों का बनाया हुआ झोपड़ी का कार्यालय पटना नगर गिगम ने हटवाया...

Abhishek Kumar Singh
64singh@gmail.com    

बशीर बद्र की एक पंक्ति है...लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में..आपलोग भी सोच रहे होंगे मुझे बशीर बद्र साहब की याद क्यों आ गई.. दरअसल आज हमारे सभी भाइयों की मेहनत से बनाई हुई झोपड़ी उजड़ गई...पटना के वीरचंद पटेल मार्ग स्थित राजद कार्यालय के पास  युवा पत्रकारों ने कोरोना काल में  बैठने के लिए 10 बाई 10 की एक झोपड़ी बनाई थी...

देश के नंबर वन अखबार में अगडे पिछड़े की राजनीति में अखबार का बेड़ा गर्क, लगातार गिरावट रहा प्रसार

देश के नंबर वन अखबार के धनबाद कार्यालय से मिल रही जानकारी के मुताबिक संताल के साहिबगंज, पाकुड, गोड्डा, देवघर जैसे संस्करण को भागलपुर मे पारमार्जित किए गए हैं। ये सभी संस्करण अब यहां संपादित और प्रकाशित किए जाएंगे। इधर धनबाट से अजय पांडे, दिलिप दास(कायस्थ), वीरेंद्र पांडेय, विनय सिंह, शैलेन्द्र मिश्रा सहित कई लोगों का स्थानांतरण भागलपुर किया गया है।

इस धोखाधड़ी के लिए किस संस्था को ज़िम्मेदार ठहराया जाए?

sandeep kumar
journalistkumar899@gmail.com


ग़ाज़ियाबाद ज़िले में साहिबाबाद के लाजपत नगर इलाक़े से साइबर फ़्रॉड की एक बहुत बड़ी वारदात सामने आई है…जालसाजी की शुरुआत कैनरा बैंक के कर्मचारी ने की….और उसके साथ कुछ और लोगों ने मिलकर 5 लाख से ज़्यादा का साइबर फ़्रॉड किया ….15 जुलाई को पीड़ित ने कैनरा बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर एफ़डी की डुप्लीकेट कॉपी लेने के लिए फ़ोन किया…तो उधर से एक लिंक व्हॉट्सएप पर भेजकर उसमें डीटेल्स भरने के लिए कहा गया…

प्रजातंत्र टीवी जिंगा OTT पर लॉन्च हो चुका है, अब चंद दिनों के बाद जिओ टीवी और जिओ फायबर भी दिखेगा।

प्रजातंत्र टीवी न्यूज़ चैनल सीधी व साहसिक पत्रकारिता के लिए खड़ा हो रहा है । प्रजातंत्र टीवी टीम की यह कोशिश होगी कि वह हर दर्शक की उम्मीदों पर खरा उतरे। चैनल उन खबरों को लोगों तक प्राथमिकता के साथ पहुंचाएगा जो खबरिया चैनल नहीं दिखा पाते हैं. रिपोर्टर्स के माध्यम से न्यूज चैनल छोटे-छोटे शहरों और गांवों की महत्वपूर्ण खबरों को दर्शकों तक पहुंचाएगा. प्रजातंत्र टीवी न्यूज़ चैनल सेटेलाइट मल्टीसिस्टम ऑपरेटर्स के साथ-साथ कई प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध होगा, क्योंकि प्रजातंत्र टीवी की टीम का लक्ष्य प्रजा की आवाज बनना है कौशलेन्द्र प्रताप सिंह के प्रधान संपादकत्व में प्रजातंत्र टीवी न्यूज़ चैनल कुछ ही दिनों में लॉन्च हो रहा है प्रजातंत्र टीवी जिंगा OTT पर लॉन्च हो चुका है अब चंद दिनों के बाद जिओ टीवी और जिओ फायबर भी दिखेगा एडिटर इन चीफ कौशलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिओ फायबर के बाद एयरटेल डीटीएच पर भी जल्द ही यह दिखेगा चैनल की लांचिंग की तैयारियाँ जोरों पर है। दिल्ली में लांचिंग कार्यक्रम रखा जायेगा है।

बुंदेलखंड का बुंदेला परिवारःसियासी ताकत और पारिवारिक अदावत का घालमेल

अजय कुमार,लखनऊ

उत्तर प्रदेश के दक्षिण और मध्य प्रदेश के पूर्वाेत्तर में स्थित बंुदेलखंड आजकल काफी सुर्खियों में है. एक वजह है कि देश की राजधानी दिल्ली से सटी औद्योगिक नगरी नोएडा के गठन के 47 वर्ष बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नोयडा की ही तर्ज पर बुंदेलखंड का विकास करने के लिए इस क्षेत्र में नोयडा से भी आकार में बड़ा एक और नया औद्योगिक शहर बनाने का निर्णय लिया है.बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के नाम से नया औद्योगिक शहर झांसी-ग्वालियर मार्ग बसाया जाएगा.योगी सरकार द्वारा 12 सितंबर 2023 को कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई.खास बात ये है कि बीडा का आकार नोएडा से भी बड़ा होगा. नोएडा का गठन 13 हजार हेक्टेयर जमीन से किया गया था. बीडा का गठन करीब 14 हजार हेक्टेयर जमीन से किया जा रहा है.बीडा के लिए सरकार पहले चरण में 5000 करोड़ रुपये की राशि देगी.योगी सरकार का यह फैसला निश्चित ही तौर पर मील का पत्थर साबित होगा.इससे रोजगार के अवसर बढेगें तो क्षेत्र में खुशहाली आयेगी.

फोर लेन में आई जमीन तो किसान को मिले एक करोड़ रुपये, इन ठगों को पता चला तो शातिर तरीके से लूट लिया

 



15.9.23

कानपुर जर्नलिस्ट क्लब ने हिंदी दिवस पर गोष्ठी का किया आयोजन

कानपुर : 14 सितम्बर हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को अशोक नगर स्थित कानपुर जर्नलिस्ट क्लब के तत्वावधान में हिन्दी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग भाषायी सरलीकरण के लिए परिचर्चा की गयी जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार कुमार त्रिपाठी ने की जहाँ वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी भाषा के चलन में काफी व्रद्धि हुई है लेकिन अभी भी हिन्दी के उन्नयन में सार्थक प्रयासों की जरूरत है। वही वरिष्ठ पत्रकार कैलाश अग्रवाल ने कहा कि हिंदी भाषा के जो विद्यालय है उनमें पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए कलम के माध्यम से पत्रकार उपयुक्त माहौल बनाये ताकि अभिवावकों में अंग्रेजी भाषा के स्कूल कालेजो में बच्चों को पढ़ाने की विवशता न हो।

वंशवाद का हंगामा क्यों है वरपा

 केपी सिंह-

लोग आश्चर्यचकित हैं कि इन सयानों को अचानक वंशीय शासन का भूत क्यों सताने लगा है जबकि पिछले 42 वर्षों से देश में कोई भी ऐसा नेता प्रधानमंत्री नहीं बना जिसकी जड़ें किसी वंश परम्परा में ढूंढी जा सकें। इस दौरान तो एक पूरी पीढ़ी बचपन से जवानी का दौर पूरा करते हुये बुढ़ापे में प्रवेश कर चुकी है और एक बिल्कुल नयी पीढ़ी मैदान में आ गयी हैं। सो इन पीढ़ियों को ऐसे किसी खतरे की सुध क्यों हो। लोकतंत्र में निश्चित अंतराल के बाद होने वाले चुनावों में सत्ता को जनता जनार्दन के सामने परीक्षा देनी पड़ती है जिसमें मुख्य रूप से उसका आकलन इस आधार पर होता है कि उसने बेरोजगारी, महंगाई, लोगों की आर्थिक बदहाली दूर करने और समाज में खुशगवार माहौल कायम करने के उद्देश्य को किस हद तक सफल किया। यह मौलिक मुद्दे अगले चुनाव के केन्द्र में भी हैं लेकिन इन पर डट कर जबाव देने की तैयारी करने की बजाय ऐसे मुद्दे प्लांट करने की कसरत की जा रही है जो स्वाभाविक तौर पर लोगों के चिंतन में हो ही नहीं सकते। इसमें सहायक बनकर मीडिया का एक वर्ग अपनी जगहसाई करा रहा है। जी हां बात हो रही है आज एक प्रमुख हिंदी दैनिक में पटना के एक पत्रकार के प्रकाशित आलेख की जो अपनी युवावस्था में बिहार की राजनीति के बारे में धारदार खबरें देने के लिये विख्यात थे लेकिन आज सत्ता प्रतिष्ठान के खबरची की भूमिका अदा करके संतोष का अनुभव कर रहे हैं।

मजीठियाः अब रिव्यू में हारा जागरण, 20जे की ढाल काम ना आई, कैटेगरी पर दिखाया आईना, लगाया जुर्माना

 साथियों, इलाहाबाद हाईकोर्ट से आज एक बड़ी खबर आई है। रिकवरी के मामले में सिंगल बेंच और डबल बेंच में हारने के बाद दैनिक जागरण ने सिंगल बेंच के ऑर्डर के खिलाफ रिव्यू पेटिशन डाली थी। जिसे माननीय अदालत ने मैरिट के आधार पर खारिज करके जागरण को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने 20 जे को ढाल बनाने वाली कंपनियों पर टिप्पणी की और साथ ही कैटेगरी के मुद्दे पर एक कदम और आगे जाते हुए रिक्वासिफिकेशन पर भी स्थिति साफ कर दी। 20जे और कंपनी की कैटेगरी/क्वासिफिकेशन में यह आदेश अन्य साथियों के लिए भी काफी काम का है। आज के रिव्यू और इससे पहले का आदेश सभी साथियों को अपने वकीलों को उपलब्ध करवा देना चाहिए।

'स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान' अवधेश प्रधान को

चित्तौड़गढ़। साहित्य संस्कृति के संस्थान संभावना द्वारा 'स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान' की घोषणा कर दी गई है। संभावना के अध्यक्ष डॉ के सी शर्मा ने बताया कि वर्ष 2023 के लिए 'स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान' बनारस निवासी प्रसिद्ध आलोचक अवधेश प्रधान को उनकी चर्चित कृति 'सीता की खोज' के लिए दिया जाएगा। डॉ शर्मा ने बताया कि प्रधान की यह कृति भारतीय साहित्य की सुदीर्घ परम्परा में सीता जैसे कालजयी चरित्र का विशद अध्ययन है जिसमें संस्कृत साहित्य से लगाकर लोक साहित्य तक व्याप्त सीता के चरित्र का सिंहावलोकन है। वाराणसी निवासी वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार प्रो काशीनाथ सिंह, भोपाल निवासी वरिष्ठ हिंदी कवि राजेश जोशी और जयपुर निवासी वरिष्ठ लेखक डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल की चयन समिति ने सर्व सम्मति से इस कृति को सम्मान के योग्य पाया। काशीनाथ सिंह ने वक्तव्य में कहा कि प्रो.अवधेश प्रधान आधुनिक,मध्यकालीन और पौराणिक साहित्य के गम्भीर अध्येता हैं। अनंत रामकथाओं में से सीता के उज्ज्वल चरित्र को खोज निकालना अनूठा कार्य है। उन्होंने कहा कि प्रधान जी की खोज से असहमत तो हुआ जा सकता है,उसे अनदेखा या उसकी उपेक्षा नही की जा सकती। इसके पीछे उनका गहन श्रम है और दृष्टि भी। राजेश जोशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि अवधेश प्रधान जैसे विद्वान मध्यकालीन और आदिकालीन भारतीय साहित्य का जिस तरह पुनरावलोकन करते हैंवह हम सबके लिए बहुत उपयोगी और ज्ञानवर्धक है। डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने अपनी अनुशंसा में कहा कि पांडित्य और गहन शोध के साथ प्रधान जी की सहज-सरल भाषा इस कृति को अविस्मरणीय बनाती है। उन्होंने कहा कि उनका अध्ययन काशी की ज्ञान परम्परा का नया सोपान है।

हिन्दी दिवस को अनुष्ठान के रूप में नहीं, उत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए

सप्रेम संस्थान द्वारा हिन्दी दिवस के अवसर पर कला लेखन में हिन्दी के महत्त्व पर विशेष टेलिफोनिक बातचीत ।
 
भूपेंद्र कुमार अस्थाना-

   लखनऊ, 14 सितम्बर 2023, हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं, बल्कि एक अभिव्यक्ति है। हिन्दी का व्यक्तित्व वर्णमाला में काफी विशाल है। हिन्दी में ही वह सामर्थ्य है कि संसार की किसी भी बोली और भाषा को ज्यों का त्यों लिखित रूप दे सकती है। अब बात आती है कला साहित्य में लेखन की तो साहित्य में तो बहुत हिन्दी लेखन हुआ और हो भी रहा है। लेकिन कला के क्षेत्र में ख़ास तौर पर दृश्यकला में इसका विशेष अभाव रहा है। अमूमन साहित्यकार, कवि इस विधा में जो भी लेखन किया है वही रहा है कलाकारों की अपेक्षा साहित्यकार का योगदान ज्यादा रहा है। हालांकि आज कुछ कलाकार कला समीक्षक इस विधा में भी लेखन कार्य कर रहे हैं लेकिन कम है। हिंदी में कला पर पुस्तकें भी कम हैं अंग्रेजी की अपेक्षा। हिन्दी हमें आमजन तक पहुंचाती है। इसीलिए हिन्दी कला लेखन और संवाद कला को आमजन तक पहुंचाने में एक सीमा तक सहायक रहा है। वहीं कला विद्यार्थीयों ,अध्येताओं आदि के लिए भी कला इतिहास और समकालीन कला पर हिन्दी पुस्तकें महत्वपूर्ण रहती हैं।कला विकास के लिए हिन्दी एक उपयोगी भाषा है। हाँ, इस पर और गंभीर स्तर पर काम होना शुभकारी रहेगा। आर्ट क्यूरेटर, कला लेखक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने कहा कि गुरुवार को हिन्दी दिवस के अवसर पर सप्रेम संस्थान और अस्थाना आर्ट फ़ोरम की तरफ से विषय - कला लेखन और आम आदमी तक कला पहुंचाने में हिंदी का महत्व और वर्तमान परिदृश्य में हिन्दी कला लेखन,समीक्षा में हिंदी का क्या महत्व है ? पर कुछ कलाकारों, कला लेखकों के विचार संग्रह करने की कोशिश की गयी। यह संग्रह टेलीफोनिक माध्यम से किया गया। जिसमें देश के अनेक हिंदी भाषा में लिखने वाले कला लेखकों, कलाकारों ने अपने विचार साझा किया।

हैपी हिन्दी दे

अरुण श्रीवास्तव-

सभी हिंदी भक्तों, हिन्दी प्रेमियों, हिन्दी आधारित कवियों और हिन्दी को राष्ट्र भाषा घोषित करने/कराने में दिन रात एक करने वालों को भी ... "हैपी हिन्दी डे" (आखिर इतना तो अधिकार उनका भी बनता है) हिन्दी के मास्साब इस बार क्षमा करेंगे .. उन्हें हाल ही (5 सितंबर शिक्षक दिवस पर) बधाई दी जा चुकी है। हालांकि यह बात अलग है कि अपने अंडर में शोध करने वाले छात्र का लिखा अपने नाम छपवाने वाले गुरुजी के नाम पर हम शिक्षक दिवस मनाते आ रहे हैं।

14.9.23

ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में भारत-अफ़्रीका संबंधों को लेकर दो दिनों परिचर्चा की शुरुआत

दिल्ली, 14 सितम्बर, 2023

भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुए जी 20 के आयोजन की उपलब्धियों और संदेशों को आम जन तक पहुँचाने के लिए दिल्ली विश्वविद्याल की कल्चरल काउंसिल ने अलग अलग कॉलेज़ों के साथ मिलकर कार्यक्रम करवाने का फ़ैसला किया। इसके तहत आज ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज(इवनिंग) में भारत-अफ़्रीका के संबंधों को लेकर दो दिनों की परिचर्चा की शुरुआत हुई। आयोजन की शुरुआत भारत की विदेश राज्यमंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने इस बात को रेखांकित किया कि जी 20 के इस आयोजन के दौरान अफ्रीकी देशों को आमंत्रित देश का दर्जा देना बहुत बड़ी शुरुआत है।

12.9.23

वामपंथी पार्टियों के पत्र के बाद बागेश्वर की जिलाधिकारी अनुराधा पाल के खिलाफ जांच के आदेश

राजकुमार सिंह परिहार-

वामपंथी नेताओं की शिकायत पर बागेश्वर की जिलाधिकारी अनुराधा पाल के खिलाफ जांच के आदेश। मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड, डॉ वी षणमुगम ने कुमाऊँ कमिश्नर को दिये जांच के आदेश।

11.9.23

जी-20 में आयीं फर्स्ट लेडी को बस्तर की महिलाओं की ओर से मिलेट का उपहार


फर्स्ट लेडी ने बस्तर की महिला किसानों के मिलेट से बने लड्डू का लिया स्वाद

महिलाओं ने बस्तर आने का दिया निमंत्रण

रायपुर। बस्तर का मिलेट विशेषकर रागी से बने लड्डू जी-20 में आये राष्ट्राध्यक्षों और उनकी पत्नी को काफ़ी भाया। अवसर था जी-20 देशों में भाग लेने वाले प्रमुखों की प्रथम महिलाओं और जीवनसाथियों को 9 सितंबर को पूसा रोड पर आईएआरआई परिसर में एक कृषि प्रदर्शनी के लिए विशेष निमंत्रण दिया गया।

सर मेरी बात मुख्यमंत्री योगी जी तक पहुंचा दो, देवरिया के अधिकारी सुन नहीं रहे हैं!

opl Srivastava-

देवरिया 11 सितंबर। सर मेरी बात मुख्यमंत्री योगी जी तक पहुंचा दो। जी हां यह बात एक पढ़ी-लिखी लेकिन मजबूर एवं विवश महिला की है क्योंकि उत्तर प्रदेश की देवरिया जिले में प्रशासनिक अधिकारी बे लगाम हो गए हैं उनको ना तो लखनऊ में बैठे वरिष्ठ उच्च अधिकारियों का डर है और ना ही योगी जी का।

Stop ED director from new enquiry, SC urged

National president of Azad Adhikar Sena Amitabh Thakur has sent a letter petition to the Chief Justice of India praying before him to immediately stop ED director Sanjay Mishra from initiating any new enquiry.

पर्युषण महापर्व 12 सितम्बर से प्रारम्भ, आठ दिन हरि सब्ज़ियों का करेंगे त्याग

जैन धर्म के प्रमुख महापर्व पर्युषण 12 सितम्बर से प्रारम्भ होंगें जो कि 19 सितम्बर को “संवत्सरी महापर्व” (क्षमापर्व) के दिवस के साथ पूर्ण होंगे। श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र ने बताया कि देश के विविध अंचलों चातुर्मासरत श्रमण - श्रमणियों के पावन सान्निध्य में जैन धर्मावलम्बि तप - त्याग - साधना - आराधना पूर्वक 8 दिवस इस महापर्व को मनाएगें। इन अष्ट दिवसों में जैन अनुयायियों के मुख्यतया पांच प्रमुख अंग हैं स्वाध्याय, उपवास, प्रतिक्रमण, क्षमायाचना और दान.

10.9.23

गीताश्री की किताब 'बलम कलकत्ता'

 संदीप तोमर-

पुस्तक का नाम: बलम कलकत्ता

लेखक: गीताश्री

प्रकाशन वर्ष: 2021

मूल्य : 201 रुपए

प्रकाशक: प्रलेक प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड 

बिहार के मुजफ्फरपुर में जन्मी गीताश्री एक प्रतिष्ठित पत्रकार हैं, जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ हिंदी पत्रकार (वर्ष 2008-2009) के लिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार भी जीता है। अब तक उनके दस कहानी संग्रह, पाँच उपन्यास, स्त्री-विमर्श पर चार शोध पुस्तकें प्रकाशित हैं, चोदह किताबों का सम्पादन-संयोजन भी उनके नाम दर्ज है। वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक 'भूत-खेला' एक चर्चित किताब रही है। अपनी इस पुस्तक के लिए उन्होंने बहुत सारे शोध किए। शिवना प्रकाशन से कथाकार गीताश्री के सम्पादन में रेखाचित्रों का एक महत्त्वपूर्ण संग्रह भी प्रकाशित हुआ था- ‘रेखाएँ बोलती हैं’। शहरगोई (संस्मरण) भी इसी वर्ष प्रकाशित रचना है।

बसपा अकेले के चक्कर में वोटकटुआ पार्टी बनकर न रह जाये

संजय सक्सेना, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट का नतीजा भारतीय जनता पार्टी से कहीं अधिक बहुजन समाज पार्टी के लिए  खतरे की घंटी नजर आ रहा है.घोसी में वोटिंग से चंद घंटे पहले बसपा सुप्रीमों मायावती ने जिस अलोकतात्रिक तरीके से अपने वोटरों से वोट नहीं देने या फिर नोटा का बटन दबाने का आहवान किया था उसे दलित वोटरों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया और समाजवादी पार्टी के पक्ष में खुलकर मतदान किया.यदि ऐसा न होता तो घोसी में समाजवादी पार्टी को इतनी बड़ी जीत कभी नहीं मिलती.समाजवादी पार्टी बसपा के दलित वोट बैंक को अपने में मिलने के लिए काफी समय से हाथ-पैर मार रही थी,उसका यह सपना काफी हद तक घोसी में पूरा हो गया.बसपा सुप्रीमों को यह समझना होगा कि एक बार दलित वोटर ने उनसे किनारा कर लिया तो दोबारा वापसी असंभव नहीं तो मुश्किल जरूरी हो सकती है.वैसे भी दलित वोटर अपने लिये नये सियासी ठिकाने की तलाश कर रहा था.इसकी सबसे बड़ी वजह है मायावती का राजनीति से मोहभंग होना.बसपा सुप्रीमों अब राजनीति में काफी कम समय देती हैं.पार्टी के पुराने नेताओं ने भी बसपासे दूरी बना ली है. घोसी  उपचुनाव के नतीजे ने बसपा के अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने के अरमानों को भी बड़ा झटका दिया है.अच्छा होता कि बसपा घोसी चुनाव से दूरी नहीं बनाती,इससे बसपा को कम से कम अपने वोट बैंक में बिखराव तो नहीं देखने को मिलता.मायावती का चुनाव नहीं लड़ने के फैसले पर इस लिए भी उंगली उठ रही है क्योंकि कुछ समय पूर्व आजमगढ़ लोकसभा उप-चुनाव में बसपा ने शानदार प्रदर्शन किया था,भले वह चुनाव नहीं जीत पाई थी,लेकिन दलितों के साथ-साथ मुस्लिम वोटरों ने भी उसके पक्ष में बड़ी तादात में मतदान किया था,जिसके चलते सपा तीसरे नंबर पर सिमट गई थी.अच्छा होता मायावती आजमगढ़ से निकले टेंªड को घोसी में भी अपना प्रत्याशी उतार कर पार्टी के लिए दलित-मुस्लिम वोट बैंक की संभावनाएं बरकरार रखती,लेकिन बसपा की गैरमौजूदगी में हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित सपा की जीत से अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में पिछड़ो-दलितों और अल्पसंख्यकों(पीडीए) का समाजवादी पार्टी या आइएनडीआइए की तरफ झुकाव बढ़ने के प्रबल आसार हैं.

इण्डिया बनाम भारत विवादः बात निकली है तो जायेगी दूर तलक

केपी सिंह-

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने चिर परिचित स्वभाव के अनुरूप फिर एक नये विवाद को छेड़ डाला है। अभी तक उन्हें इण्डिया शब्द बहुत प्रिय लगा करता था। उन्हें लगता था कि भारत की बजाय इण्डिया कहने में ज्यादा स्मार्ट बोध है। इण्डिया से उनके नारों में टंकार भी अच्छी बन जाती थी। विपक्ष द्वारा अपने गठबंधन का नाम इण्डिया करने के पहले उन्हें रोज इण्डिया नाम जुड़े स्लोगन को गढ़ने की लत सी लगी हुयी थी। मेक इन इण्डिया, जीतेगा इण्डिया और न जाने कितने स्लोगन की फेहरिस्त है जो मोदी ने बड़े उमंग से गढ़े थे। लेकिन अब उन्हें इण्डिया से एलर्जी हो गयी है। हर जगह अंग्रेजी में भी लिखा जा रहा है तो इण्डिया की बजाय भारत जबकि यह अभी तक रहे रिवाज के विपरीत है। अन्य देशों ने भी मोदी की मर्जी देखते हुये इसका अनुकरण शुरू कर दिया है। विपक्ष पूंछ रहा है कि क्या कल को वे अपने गठबंधन का नामकरण इस तरह कर लें कि उसका संक्षिप्त नाम भारत हो जाये तो मोदी भारत नाम को भी बदल डालेंगे। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस मामले में बीजेपी की बड़ी प्यारी चुटकी ले डाली है।

बुनियादी चिंताओं का प्रतिनिधित्व करती है नंद बाबू की रचनाएं : प्रोफेसर हाड़ा

उदयपुर में नन्द चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी पर आयोजन

उदयपुर ।  प्रसिद्ध समाजवादी कवि और साहित्यकार नंद चतुर्वेदी की रचनाएं मूलतः समाज के उन सभी पक्षों का प्रतिनिधित्व करती है, जो आधुनिक समाज में परिलक्षित हो रही है. इन रचनाओं में  जहां एक ओर स्त्री के प्रति चिंता है तो दूसरी ओर समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति संवेदनशीलता, राजनीति और आधुनिकता पर कटाक्ष है तो मानवतावादी चिंतन का  प्रतिनिधित्व भी. उक्त विचार राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर और विद्या भवन रूरल इंस्टीट्यूट के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वाधान में  आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी  “नंद चतुर्वेदी : साहित्यिक मंथन” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रख्यात समीक्षक प्रोफेसर   माधव हाडा ने व्यक्त किए.

पुस्तक समीक्षा - राजेन्द्र अवस्थी की कविताएँ

 डॉ- शिवशंकर अवस्थी
महासचिव, ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

मेरे पिताजी डॉ- राजेन्द्र अवस्थी ने अपनी साहित्यिक यात्र का प्रारम्भ एक कवि के रूप में किया था। ये जबलपुर तथा नागपुर के उनके युवा दिन थे। कवि सम्मेलनों में भाग लेना उनकी आदत में शुमार था। नागपुर में वे दैनिक नवभारत में साहित्य संपादक और नागपुर साहित्य सम्मेलन के मंत्री थे तथा कवि सम्मेलनों के संयोजन-संचालन में पारंगत थे। तब वे राजेन्द्र प्रसाद अवस्थी ‘तृषित’ के नाम से लिऽा करते थे। समय बीतता गया और वे राजेन्द्र प्रसाद अवस्थी तृषित से मात्र राजेन्द्र अवस्थी रह गए। यह परिवर्तन अथवा रूपांतरण उनकी गांव और शहर और फिर शहर से महानगर की यात्र का भी संकेतक है। हमारा परिवार नागपुर से बम्बई गया और फिर दिल्ली आकर हम यहां बस गए। पिताजी ने फिर मुड़कर नहीं देऽा। बहुत कम ही ऐसा अवसर आया कि वे नागपुर या जबलपुर गए। शहर से महानगर की उनकी यात्र-प्रक्रिया का प्रभाव उनकी रचनात्मक दृष्टि पर भी पड़ा, पद्य छूटता गया और गद्य उनकी प्राथमिकता हो गया। लेकिन गद्य में भी काव्य की कमनीयता बनी रही। उनका कवि हृदय कभी सुप्त नहीं हुआ, वह जीवंत रहा, वे लिऽते रहे। 

दल बदलू नेता बनने से नहीं चलेगा काम

Aman Pandey-

बीते 5 सितंबर को 6 राज्यों के 7 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए। नतीजतन 8 सितंबर की शाम होते-होते उपचुनाव के नतीजे भी डिक्लीयर हो गए। 7 सीटों में से 3 बीजेपी जबकि 4 सीटों पर विपक्ष पार्टियों की झोली में गए। सबसे ज्यादा जिस सीट को मीडिया ने तवज्जो दी वो है उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट। सपा के सुधाकर सिंह ने बीजेपी के दारा सिंह चौहान को 40 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हराया। लेकिन घोसी की हार को समझना भी अत्यन्त जरूरी।


 

9.9.23

छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीदी का रिकॉर्ड बनाया, इस साल 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की आशा : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल


अच्छी बारिश हो रही, उत्पादन भी अच्छा होने की उम्मीद : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 23.93 करोड़ रूपए का किया भुगतान

गोबर विक्रेताओं को 5.36 करोड़, स्व-सहायता समूहों एवं गौठान समितियों को 2.77 करोड़ रूपए का भुगतान

स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के रूप में 13.55 करोड़ रूपए का भुगतान

रायपुर, 09 सितम्बर 2023/मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से गोधन न्याय योजना के अंतर्गत ऑनलाईन राशि वितरण कार्यक्रम में हितग्राहियों के बैंक खातों में 23 करोड़ 93 लाख रूपए अंतरित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल बारिश अच्छी हो रही है और उत्पादन भी अच्छा होने की उम्मीद है। हमारी सरकार हर साल धान खरीदी का रिकॉर्ड बनाया है। इस साल हमें आशा है कि 125 लाख मीट्रिक धान खरीदी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस बार भी छत्तीसगढ़ से चावल खरीदी का कोटा घटा दिया है, हमारे बारदाने का कोटा भी कम कर दिया है। मैंने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आग्रह किया है।

हीरक जयंती पर रायपुर मेडिकल कॉलेज को मिला उपहार, मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने मेडिकल कॉलेज के 700 बिस्तर क्षमता वाले नए चिकित्सालय भवन का किया भूमिपूजन

मुख्यमंत्री ने हीरक जंयती समारोह का किया शुभारंभ

छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य मशीनरी हर संकट से निपटने के लिए तैयार – श्री भूपेश बघेल

रायपुर मेडिकल कॉलेज में जीनोम सिक्वेन्सिंग लैब शुरू होगा



रायपुर. 9 सितम्बर 2023. मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज रायपुर के पंडित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय में 700 बिस्तर क्षमता वाले नए एकीकृत चिकित्सालय भवन का भूमिपूजन किया। चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के लिए 322 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक सर्वसुविधायुक्त चिकित्सालय भवन का निर्माण शीघ्र प्रारंभ होगा। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में महाविद्यालय के हीरक जयंती समारोह का शुभारंभ भी किया। आज से ठीक 60 साल पहले 9 सितम्बर 1963 को रायपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई थी। उप मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव, संसदीय सचिव श्री विकास उपाध्याय, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. प्रीतम राम, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री कुलदीप जुनेजा, विधायक श्री सत्यनारायण शर्मा, महापौर श्री एजाज ढेबर, रायपुर नगर निगम के सभापति श्री प्रमोद शर्मा और रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती डोमेश्वरी वर्मा दोनों कार्यक्रमों में शामिल हुईं।

8.9.23

पुस्तक समीक्षा - पांव ज़मीन परः लोक जीवन की लय का स्पंदन

मोहन सपरा-

कवि-कथकॎार-आलोचक शैलेन्द्र चौहान का संस्मरणात्मक उपन्यास उर्फ़ कथा रिपोर्ताज ‘पांव ज़मीन पर’ बोधि प्रकाशन जयपुर से प्रकाशित हुआ है। लोक जीवन की लय को स्पंदित और अभिव्यक्त करती शैलेन्द्र चौहान की कथा रिपोर्ताज ‘पांव जमीन पर’ एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति है। कवि कथाकार शैलेन्द्र का लेखन एक सचेत सामाजिक कर्म है। उनका चिन्तन प्रतिबद्धता का चिन्तन है। वह जन प्रतिबद्ध लेखक हैं। विवेच्य किताब में शैलेन्द्र चौहान ने भारतीय ग्राम्य जीवन की जो बहुरंगी तस्वीर उकेरी है उसमें एक गहरी ईमानदारी है और अनुभूति की आंच पर पकी संवेदनशीलता है। ग्राम्य जीवन के जीवट, सुख-दु:ख, हास-परिहास, वैमनस्य, खान-पान, बोली-बानी, रहन-सहन आदि को बहुत जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है। यह सब मिलकर पाठक के समक्ष सजीव चित्र की सृष्टि करते हैं और चाक्षुष आनंद देते हैं। लोक जीवन का उत्सव इनमें कदम-कदम पर झलकता है।

मौत ऐसे करती है पीछा... बरसात से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े हुए तो आकाशीय बिजली ने किया अंत, देखें तस्वीरें

DINESH KUMAR Jaiswal-
    
अयोध्या। इनायत नगर थाना क्षेत्र स्थित सिद्धनाथन मंदिर के पास बाइक से अपने घर वापस लौट रहे दो किशोरों की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई है। घटना की जानकारी पाकर मौके पर पहुंची इनायतनगर पुलिस ने दोनों किशोर का शव कब्जे में लेकर पंचायत नामा कराने के उपरांत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद दोनों किशोर के परिजनों में कोहराम मच गया है। 



 

6.9.23

नवभारत टाइम्स द्वारा भास्कर की 2 दिन पुरानी खबर चोरी

महोदय, कृपया संलग्न 2 स्क्रीनशॉट का अवलोकन करने का कष्ट करें । नवभारत टाइम्स के NBT app पर आज सौरभ दीक्षित के नाम से सबसे ऊपर बैनर पर एक खबर लगाई गई है जो रविवार को दैनिक भास्कर के App, डिजिटल एडिशन और समाचार पत्र में प्रकाशित हो चुकी है। दैनिक भास्कर में 2 दिन पहले ये खबर नीरज झा के नाम से प्रकाशित है। 

यूपी की करीब एक दर्जन सीटों ने बढ़ा रखी है बीजेपी की टेंशन

स्वदेश कुमार-

भारतीय जनता पार्टी के नेता भले ही सार्वजनिक रूप से अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर जीत का दावा कर रहे हों, लेकिन अंदर खाने की खबर यही है कि फिलहाल बीजेपी आलाकमान 68-70 सीटों से आगे जीत का अनुमान नहीं लगा पा रहा है.बीजेपी मुस्लिम बाहुल्य कुछ सीटों पर हमेशा से कमजोर रही है तो कई मौजूदा सांसद जनता के बीच अपनी खराब छवि के चलते पार्टी के लिए बोझ बन गए हैं.अब आलाकमान को यह तय करना है कि ऐसे सांसदों का क्या किए जाये जो इस बार बीजेपी के लिए जीत की गारंटी नहीं रह गए हैं.यह सब बातें बीजेपी के आंतरिक सर्वे में भी समाने आ चुकी हैं.इसी लिए पार्टी ने कुछ लोकसभा सीटों के प्रत्याशी बदलने का भी मन बना लिया है. सूत्र बताते हैंे कि पार्टी के आंतरिक सर्वे में करीब 16 सीटें ऐसी मिली हैं, जहां पर पार्टी की स्थिति अत्यंत कमजोर है। इन सीटों पर जीत के लिए पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है,लेकिन अच्छी बात यह कि इन सीटों पर भी बीजेपी हार की संभावना के बीच भी लड़ती हुई नजर आयेगी. पार्टी के भीतर कुछ सांसदो का टिकट काटे जाने की चर्चा शुरू होते ही उन सांसदों ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक में बैठे अपने आकाओं के यहां दौड़ लगाना शुरू कर दिया है,जिनकी टिकट बंटवारे में अहम भूमिका रहती है.लेकिन बीजेपी आलाकमान इन सब बातों को अनदेखा करते हुए मिशन 80 पूरा करने में लगा है.