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25.2.08

डा.रूपेश के लिये फ़तवा कि वे मर्द हैं इस बात का प्रमाण दें वरना........

हद हो गई, डा.रूपेश के सुझाव पर मैं अपने स्कूल के बच्चों को लेकर आद्यक्रांतिवीर अमर शहीद वासुदेव बलवंत फड़के के गांव(शिरढोण) क्या चली गयी इधर भड़ास पर मनीषा को लेकर समस्या हो गयी । यह गांव पनवेल से दस मिनट की बस यात्रा पर है और मुझे मालुम नही था । जब जनाब ने पूछा तब काफ़ी शर्मिंदगी हुई । अभी घर आयी तो देखा कि डा.साहब हमारे घर पधारे हैं और हमारे अब्बा दि ग्रेट से दीन की चर्चा में मशगूल हैं । सलाम-कलाम के बाद उन्होंने मुझे सारी बात बताते हुए भड़ास देखने को कहा वैसे मैं घर में इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर पाती क्योंकि कनेक्शन ही नहीं है ,जनाब किसी का लैपटाप मांग कर लाए हुए थे । सब कुछ देखा जाना,एक बात कहना चाहती हूं कि मुस्लिम लोग कहते हैं कि क़ुरान शरीफ एक मुकम्मिल क़िताब है ,उसमें औरत मर्द बच्चे जानवर सारी दुनिया ;सब बातें लिखी हैं पर जब जनाब ने पूछा कि क्या आपकी धर्म पुस्तक में लैंगिक विकलांग लोगों के बारे में कुछ है तो मै और अब्बा उन्हें इस बात का जवाब नहीं दे पाए तो रिक्वेस्ट है अपने मुस्लिम भड़ासी भाई-बहनों से कि अगर उन्हें ऐसी कोई जानकारी हो तो बताएं जरूर वरना मेरा इस बात से यकीन उठ जाएगा कि क़ुरान शरीफ एक मुकम्मिल क़िताब है और यह नज़रिया मुझे डा.रूपेश ने दिया होगा तो फिर इल्तजा है कठमुल्लाओं से कि डा.रूपेश के लिये फ़तवा जारी कर दें क्योंकि उन्होंने एक मुसलमान का यकीन झकझोर दिया । अब सुनिए मैं क्या कहती इस मुद्दे पर..........................
पहली बात ,मसिजीवी जी को अगर शंका हुई तो उन्होंने उसे भड़ास पर निकाल दिया और इसके लिए आप सब लोगों ने उन्हें एक अत्यंत सरलचित्त आदमी मान कर फ़ट से माफ़ कर दिया लेकिन मैं हरगिज नहीं करूंगी तब तक जब तक पूरी भड़ास न निकल जाये । अबरार भाईजान कहते हैं कि यह शंका थी तो निवारण करना चाहिए मैं कहती हूं शंका नहीं लघुशंका थी जो उन्होंने भड़ास के मंच पर आकर हमारे सामने पतलून खोल कर करी थी ताकि मेरे जैसी औरतें शायद उनकी मर्दानगी की लम्बाई महसूस करके प्रभावित हो जायें ।
दूसरी बात ,अगर अबरार भाईजान को लगता है तो मैं मुनव्वर सुल्ताना भी भड़ास पर मौजूद सभी स्वयंभू मर्दों की सैक्जुअल आइडेंटिटी की सूचना का अधिकार रखती हूं । सब लोग अपने बच्चों का डी.एन.ए. टैस्ट करा कर शहर के कलेक्टर से प्रमाणित करवा कर फोटो के साथ भड़ास पर भेज दें ।
तीसरी बात ,क्या मरदानगी का प्रमाण इंसान के जिस्म पर लटकता एक अंग होता है या उसे उसकी पत्नी या प्रेमिका प्रमाणित करती है ? या उसकी रुकावट का समय क्या है ? या फिर किसी इंसान के काम बताते हैं कि वह कितना बड़ा मर्द है ?
चौथी बात कि अब भड़ास निकल गयी है, मसिजीवी जी के कान मैंने बड़ी बहन के नाते से मरोड़े हैं और यह खूबसूरत सा नाता मुझे भड़ास के मंच से मिला है ,मुझे उम्मीद है कि आप लोग इस नाते का बुरा नहीं मानेंगे ।
आखिरी बात ,जिनके पास अच्छा वकी़ल करने का पैसा हो वो एक P.I.L. दर्ज कराएं जो कि लैंगिकता प्रमाणित करवाने के अधिकार के संबंध में हो ताकि मनीषा दीदी जैसे बच्चों के लिए समाज में इज्जत की नौकरी वगैरह का आसानी से इंतजाम हो सके ।
भड़ास जिन्दाबाद

6 comments:

अबरार अहमद said...

sultana ji mudde ko modne se hakikat nahi badal jayegi, aur jahaan tak aapke suchna mangne ki bat hai to DNA riport kya sabit karegi aur kalektar kya prmanit karega. hamara bachha khud javab dega ki vo kiska beta hai. hosla rakhiye itni jaldi aapa nahi khote abhi bat tisre ki ho rahi hai hum patto ki aad se khel nahi khelte apne hosle ki udan udte hain.

मुनादीवाला said...

आपका नया खुलाचिट्ठा कोई मेंबरशिप नहीं
यहॉं सब एकदम खुला...भड़ास क्‍या जो चाहे निकालो। कोई मेंबर ऊंबर नहीं बनना कोई झंझट नहीं। अरे कोई पार्टी खोले हैं कि एमपी बनना है। चैनलहू नहीं खोलना। तो काहे मेंबरशिप। जो यार लिखना चाहे सीधे khulachittha.post@blogger.com पर मेल करदे। पोस्‍ट सीधे अपने आप छप जाएगी, हमारे पास नहीं आएगी सीधे ब्‍लॉग पर जाएगी। डायरेक्‍ट आपही मालिक हर लिखे के, कोई झंझट नहीं कोई गिनती नहीं कि आज इतने हो गए आज उतने। तो फिकर काहे की, हो जाओ शुरू।
http://khulachittha.blogspot.com/

मुनादीवाला said...

आपका नया खुलाचिट्ठा कोई मेंबरशिप नहीं
यहॉं सब एकदम खुला...भड़ास क्‍या जो चाहे निकालो। कोई मेंबर ऊंबर नहीं बनना कोई झंझट नहीं। अरे कोई पार्टी खोले हैं कि एमपी बनना है। चैनलहू नहीं खोलना। तो काहे मेंबरशिप। जो यार लिखना चाहे सीधे khulachittha.post@blogger.com पर मेल करदे। पोस्‍ट सीधे अपने आप छप जाएगी, हमारे पास नहीं आएगी सीधे ब्‍लॉग पर जाएगी। डायरेक्‍ट आपही मालिक हर लिखे के, कोई झंझट नहीं कोई गिनती नहीं कि आज इतने हो गए आज उतने। तो फिकर काहे की, हो जाओ शुरू।
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डा०रूपेश श्रीवास्तव said...

मैं मुनव्वर आपा,अबरार जी,यशवंत दादा,मसिजीवी जी और सभी भड़ासियों से एक बात कहना चाहता हूं कि आप लोग इस मुद्दे को व्यर्थ में मत खींचिए और अब मुझे अबरार भाई की टिप्पणी पढ़ कर लग रहा है कि उन्होंने मुनव्वर आपा की बात को ठीक से या तो पढ़ा नहीं है या फिर उनके मन में अभी भी मनीषा दीदी को लेकर संदेह बचा है क्योंकि जो लिखा है पोस्ट उसमें बस आपने पहली बात,तीसरी बात,चौथी बात और आखिरी बात को छोड़ दिया बस दूसरी बात को लेकर उलझ गए हैं । उन्होंने तो एक बात दीन के बारे में भी लिखी है तो बेहतर है कि उसका उत्तर खोज कर उन्हें दिया जाए । अब मेरी भड़ासी डाक्टरी यह बताती है कि किसी का बेटा या बेटी अपनी वल्दियत वही बताते हैं जो उसकी मां उसे बताती है या फिर डी.एन.ए.टैस्ट । लगे हाथ अगली पोस्ट में पत्तों की जो आड़ आपके गले में अटक रही है उसे निकाल लीजिए ताकि मन निर्मल और शान्त हो सके जिससे हम सब पहली बात,तीसरी बात,चौथी बात और आखिरी बात पर आगे चर्चा कर सकें ।
जय भड़ास

हरे प्रकाश उपाध्याय said...

rupesh bhai sab kuchh log likh bol ke thk jate hain fir bhi unki bhads atki rhti hai...ve chir sankalu hote hain...ve smadhan ke lie nhi shagl vsh shanka krte hain...unke eelag ke lie ho ske to koi dva agli post me btaen...yh rog mahamari ki trh fail rha hai...

Anonymous said...

HAREPRAKASH JI IN GADHO KE LIYE GALI KA VAR BHI SACHMUCH KOI ASAR NAHI DE RAHA HAI..KUCHH DUSRA TARIKA HOGA NA TO BATAIEGA.
JAI BHADAS
JAI YASHVANT