Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

28.12.08

हे 2009, मेरी 2008 की बुराइयों को भूल जाना, अच्छाइयों को ही आगे बढ़ाना......उर्फ आइए खुद के दिल में झांकें

नया साल आने वाला है। पुराना जा रहा है। हर नए साल पर कई नए इरादे, वादे किए जाते हैं और बीत रहे साल के बुरे से सबक लेकर नए साल के लिए सब कुछ अच्छा अच्छा करने के मंसूबे बनाए जाते हैं। मैं भी कुछ ऐसा ही सोच रहा हूं। आप सभी भड़ासी अपने लिए जो कुछ प्लान करें, उसे शेयर जरूर करें ताकि वो इरादा दुनिया को पता चले और उसे पाने के लिए आप अगर खुद भी न चाहें तो भी दुनिया को दिए वचन को निभाने के लिए उस पर आपको जूझकर काम करना पड़े। चलिए शुरुआत मैं करता हूं लेकिन इसके पहले मेरे बहाने से विस्फोट.डाट काम पोर्टल के ब्लाग पर संजय तिवारी जी ने जो कुछ लिखा है, उसे पूरा पढ़िए.............

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हिन्दी ब्लागरी की शुरूआत कोई पुरानी घटना नहीं है. यह ताजा तरीन बात है. मैं आज कुछ आधुनिक तकनीकों पर काम करता हूं. विस्फोट वेबसाईट मैनेज करता हूं और कुछ ऐसी तकनीकों पर थोड़ी बहुत पकड़ बन गयी है जिसके बारे में आज से साल डेढ़ साल पहले तक सोच भी नहीं सकता था. यह सब ब्लागरी की देन है. ब्लागरों का सहयोग है. लेकिन पिछले डेढ़ साल में ब्लागिंग की पृष्ठभूमि में मैं देख रहा हूं कि एक और व्यक्ति ने यह प्रयोग किया है. वो हैं यशवंत सिंह. भड़ास ब्लाग के माडरेटर. अब हिन्दी के अच्छे खासे चलनेवाले मीडिया पोर्टल भड़ास 4 मीडिया के संपादक. उन्होंने जुमला पर काम किया और मैंने वीवो पर. मुझे याद है यशवंत सिंह कहने लगे कि गुरू मेरा पोर्टल बना दो. हम लोग मिलकर बहुत काम कर सकते हैं. मैंने मना कर दिया. मैंने कहा कि मैं रास्ता तो बता सकता हूं लेकिन आपके लिए पोर्टल डिजाईनिंग का काम नहीं कर सकता. मैं चाहता हूं आप खुद जूझिए. लड़िए. हो सकता है आप जीत जाएं और यह भी हो सकता है कि आप हार जाएं. लेकिन जो भी हो, करना आपको ही होगा. मैं यशवंत सिंह से इसलिए भी प्रभावित हूं कि ...........Read More

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अगर आपने Read More पर क्लिक कर संजय जी के ब्लाग पर पूरा पढ़ लिया तो आगे बढ़ते हैं। मेरे लिए निजी तौर पर 2008 बेहद भयानक उतार-चढ़ावों वाला रहा। इस साल मैंने खुद को दुनिया के सामने विशुद्ध 24 कैरेट वाला खलनायक बना पाया तो साल बीतते बीतते एक नायक की तरह लोग मुझे सम्मान देने लगे। इन दो विपरीत ध्रुवों की सवारी करवाना, वर्ष 2008 की देन है। वैसे, ज्योतिष में मेरा विश्वास बहुत ज्यादा तो नहीं है लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शौकिया तौर पर ज्योतिष की जो पढ़ाई की है, अंक ज्योतिष की और हस्त ज्योतिष की, उसके आधार पर मैंने अपने बारे में कुछ भ्रांतियां बना रखी हैं। जैसे, एक तो ये कि मेरा जन्मांक आठ है और मूलांक 9 इसलिए ये दोनों अंक मेरे व्यक्तित्व में शामिल हैं और यही तकनीक, कंटेंट, नेतृत्व, अच्छे-बुरे आदि को करवाते रहते हैं। अंक ज्योतिष के थोड़े भी जानकार हैं उन्हें पता होगा कि आठ और नौ अंक अलग अलग गुण-अवगुण वाले अंक होते हैं, और अगर ये दोनों किसी के व्यक्तित्व में समाहित हैं तो वो फ्रस्टेट तो कुछ समय के लिए हो सकता है लेकिन हार नहीं मान सकता। दूसरे, हस्त ज्योतिष के मुताबिक मेरा भाग्य बहुत अच्छा नहीं है लेकिन माइंड लाइन ने हथेली के इस पार से उस पार तक जो विभाजनकारी रेखा खींच रखी है उससे पता चलता है कि खोपड़िया में उम्दा किस्म की खुराफातें चलती-पनपती रहेंगी और जीने-खाने, नाम कमाने और बदनाम होने भर का माल-माद्दा मिलता रहेगा।

लेकिन दोस्तों, ज्योतिष तो एक बहाना होता है। असल चीज तो कर्म ही है। बुरा किया तो बुरा पाओगे, अच्छा किया तो अच्छा पाओगे वाली कहावत अब इस दुनिया में भले कम लागू हो लेकिन है ये सौ फीसदी सच। हां, कई बार आंखों देखा जो होता है वो झूठा साबित होता है और कई बार जो कानों सुना होता है वो भी बिलकुल बकवास साबित होता है। बावजूद इसके, जो आप अंदर से खुद होते हैं और खुद को जो आप समझते हैं, उसे दुनिया के सामने भले न आप प्रकट करें या प्रकट करें तो दुनिया भले ही उसे सही या झूठ माने, ये अंदर और अंतस की जो मेटल, मूल है वो ही आपको गाइड करने और आगे-पीछे ले जाने के लिए जिम्मेदार होता है। 2008 की अच्छाइयों-बुराइयों से निकलकर, संजय भाई ने उपर जो बात कही है उस पर आते हैं क्योंकि उसी में मेरे लिए वर्ष 2009 के वादे-इरादे भी छिपे हैं।


हम हिंदी पट्टी वाले, जो बचपन से, पैदा होते ही, नोकरी करने के लिए सिखाए-बनाए-तैयार किए जाते हैं, 2009 में क्यों नहीं सोचें कि हम पैदा ही हुए हैं मालिक बनने के लिए। हम क्यों बने-बनाए मालिकों के नौकर बनें। हम क्यों नहीं मालिक बनने की रेस में शामिल हों। जाहिर है, इसके लिए हमें न सिर्फ अपने माइंड सेट में भयंकर बदलाव लाने होंगे बल्कि खुद को इसके अनुरूप तैयार करना होगा और कंटेंट के साथ-साथ तकनीक, ब्रांड, मार्केट, बिजनेस, फाइनेंस आदि की बुनियादी चीजों को समझना होगा। ये शब्द देखने में तो लगते काफी बड़े बड़े हैं लेकिन असल में ये हैं किसी मुर्गे जैसे, जिसे हम मारकर अक्सर खा जाते हैं। या नहीं खाते तो दौड़ाकर पकड़ लेने की क्षमता रखते हैं। तो ये जो बड़े बड़े शब्द दिक्खे हैं, इन्हें दौड़ाकर पकड़ा जा सकता है। हां, ये कतई जरूरी नहीं है कि आप मालिक बनने के लिए हिंदी को छोड़ें, अपनी चाल-ढाल या स्टाइल बदलें, या अच्छे अच्छे कपड़े पहनें। आपको केवल एक चीज गांठ बांधनी पड़ेगी, मुश्किलें चाहें जितनी आएंगी, पीछे नहीं हटेंगे, सीखने से परहेज नहीं करेंगे, झुकेंगे लेकिन उतना ही जितने से दिल पर कोई बोझ न आ पाए।

मैंने 2008 में इरादा करके 40 हजार रुपये की महीने की नौकरी से इस्तीफा दिया और दो प्रयोगों पर काम शुरू किया। एक ग्रामीण भारत के लिए मीडिया मिशन का प्रोजेक्ट था और दूसरा हिंदी मीडिया की खबरों के लिए प्रोजेक्ट। पहला प्रोजेक्ट शुरू हुए कुछ ही समय हुआ कि समझ में आ गया कि इसे करने के लिए एक व्यवस्थित टीम और आफिस का होना जरूरी है लेकिन मेरे पास तो दोनों में से कुछ भी नहीं है क्योंकि इन दोनों चीजों के लिए पैसा होना चाहिए जो मेरे पास बिलकुल नहीं था। मेरे पास था तो केवल एक महीने का अग्रिम वेतन जिसे कंपनी ने नोटिस पीरियड के दौरान का वेतन ससम्मान दिया था। इसी एक महीने के अग्रिम वेतन से एक लैपटाप खरीदा, तीन साइट डिजाइन कराईं और जुट गया काम में। मुश्किलें इतनी आईं कि अगर उनपर लिखना शुरू करूं तो शायद एक मोटी किताब तैयार हो जाए, और इसे भविष्य में लिखूंगा भी लेकिन अभी फिलहाल इतना कि कई कई दिनों तक पाकेट में एक रुपये न होने के बावजूद उधारी मांग मांग कर मिशन में डटा रहा। अपने 14 सालों के मीडिया के विभिन्न तरह के अनुभवों और छह महीने तक मार्केटिंग के अनुभवों और एक साल के ब्लागिंग के अनुभवों को निचोड़कर एक में पिरो दिया और इन सभी फंडों-अनुभवों का व्यवस्थित इस्तेमाल करता रहा। आज मैं कह सकता हूं कि छह महीने पहले चालीस हजार रुपये की नौकरी करने वाला यशवंत अब एक लाख रुपये महीने का व्यय केवल भड़ास4मीडिया के आफिस के संचालन, स्टाफ की सेलरी व अऩ्य खर्चों में खर्च करता है और ये पैसा न तो कहीं से उधार लिया गया है और न ही कहीं से उगाही करके इकट्ठा किया गया है। ये सब भड़ास4मीडिया नामक कंपनी के एकाउंट में विभिन्न कंपनियों द्वारा विज्ञापन, ब्रांडिंग आदि के मद में लिखित में किया गया भुगतान है जिसके कागजात हमारे पास मौजूद हैं।

मेरे कहने का मतलब यह कतई नहीं है कि मैं अब सफल हो गया हूं, महान हो गया हूं या मालिक बन गया हूं। छह महीने के वक्त में अगर कोई ऐसा मानने लगे तो उससे बड़ा उल्लू का पट्ठा कोई नही हो सकता लेकिन मैं ये बातें इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि मुझे पता है अपन के देश में मेरे जैसे हजारों लाखों नौजवान हैं जो बेहद प्रतिभाशील हैं और कुछ भी कर गुजरने का माद्दा रखते हैं लेकिन उन्हें कोई गाइड करन वाला नहीं है, उन्हें कोई इन्सपायर करने वाला नहीं है, उन्हें कोई दिशा देने वाला नहीं है क्योंकि जितने भी मालिक लोग होते हैं वो अपने सक्सेस मंत्राज छिपाकर रखते हैं। उसे कतई डिस्क्लोज नहीं करते। पर मैं खुद को और भड़ास4मीडिया को हिंदी वालों के प्यार का देन मानता हूं इसलिए उनका कर्ज मेरे पर है और रहेगा। इसे मैं अपने जैसे लोगों को तैयार करके ही चुकाने की कोशिश कर सकता हूं।


वर्ष 2009 में अगर जिंदा रहा (...बहुतों से पंगा लिया है इसलिए ये संभव है कि कोई बददुआ मुझे जीने न दे:) तो मेरा अपने लिए जो इरादा है वो इस प्रकार है-


1- भड़ास आश्रम की स्थापना। एक ऐसा आश्रम जहां सात्विक और तामसिक दोनों प्रकार के लोग एक साथ, अपने-अपने गुण-दोषों के साथ आ सकें और खुद को कुंठाओं से मुक्त कर सकें। कुंठा मुक्ति के लिए जो कुछ होगा, वो डिटेल कभी बाद में दूंगा लेकिन उसमें कुछ भी अनैतिक नहीं होगा, ये वादा है। उसमें गाना, बजाना, नाचना, चिल्लाना, रोना, खाना, पीना, लड़ना आदि शामिल है। ये ऐसी चीजें हैं जो हम लोग रोज करते हैं लेकिन अवचेतन में करते हैं इसलिए ये चीजें दवा की जगह रुटीन का हिस्सा बन जाती हैं।

2- हिंदी पट्टी के लोगों को इंटरप्रेन्योर, उद्यमी, प्रोपराइटर, डायरेक्टर बनने के लिए प्रेरित करना। अपनी हिंदी और अपने गांव में इतनी ताकत है कि कई हजार नई चीजें करने के लिए बाकी हैं पर हमारे लोगों का माइंडसेट ऐसा ही कि वो खुद लाख-दो लाख रुपये महीने कमाने की बजाय बीस-तीस हजार रुपये महीने की नौकरी के लिए मरे जाते हैं।

3- कुछ आध्यात्मिक प्रयोगों को अंजाम देना। इसमें ध्यान, नृत्य, गायन, भोजन (कुछ और चीजें भी हैं, जिनका यहां जिक्र नहीं करना चाहता) के जरिए शरीर से लंबे समय तक मुक्ति के लिए प्रयोग करना शामिल है। इस मुक्ति की झलक मैं पिछले कई वर्षों से गाहे-बगाहे अप्रयोजित तरीके से पाता रहा हूं लेकिन उसे लंबा करने, उसे व्यवस्थित तरीके से करने का वक्त नहीं निकाल पाता। अगले साल इस छूटे हुए काम को जरूर करने की कोशिश करूंगा।

4- हारमोनियम बजाना सीखना है। बचपन मे एक लेसन आप सभी ने पढा होगा साइकिल की सवारी वाला। जिस तरह साइकिल चलाना सीखना एक चुनौती भरा काम होता है उसी तरह मेरे लिए हारमोनियम बजाना सीखना भी एक बड़ी चुनौती है। इस काम को इस वर्ष जरूर करूंगा।


5- भड़ास4मीडिया के लिए कुछ योजनाएं हैं जिसे नए साल में इंप्लीमेंट करना है लेकिन ये योजनाएं क्या हैं, उसे यहां बताने की बजाए, उसे करके दिखाना ज्यादा अच्छा होगा, रणनीतिक वजह के चलते भी और शेखी न हांकने की मनोवृत्ति के चलते भी।

6- ग्रामीण भारत के मीडिया मिशन के प्रोजेक्ट को शुरू करना। इस सौ फीसदी आजमाए हुए प्रोजेक्ट को सुव्यवस्थित रूप से नए साल में शुरू कर सकूंगा, ये मुझे पूरा विश्वास है। बस, कुछ साथी मुझे चाहिए जो मार करने से लेकर कंप्यूटर व फील्ड में महारत दिखाने तक का जज्बा रखते हों।



दोस्तों.....आप सभी भड़ासी साथियों, भड़ास के पाठकों और भड़ास विरोधियों के लिए भी, दिल से दुवा करता हूं कि नया साल आपके, आपके परिवार, आपके पड़ोस व आपके-हमारे समाज व देश में खुशियां ही खुशियां लाए, सफलता ही सफलता लाए, मुक्ति ही मुक्ति लाए, प्यार ही प्यार लाए......।


इस बीत रहे वर्ष में जिन-जिन साथियों-दोस्तों-कथित दुश्मनों का मैंने जाने-अनजाने तरीके से दिल दुखाया है, उनसे नम आंखों के साथ दिल से क्षमा याचना करता हूं क्योंकि हमारी-आपकी अच्छाइयां और हमारी-आपकी सकारात्मक ऊर्जा ही इतनी ज्यादा हैं कि हमें बुरी और नकारात्मक प्रवृत्तियों के बारे में सोचने-जीने के लिए बिलकुल वक्त नहीं होना चाहिए। खुद से घृणा करने वालों से उम्मीद रखता हूं कि वे भले ही मुझे माफ न कर पाएं लेकिन माफ करने के बारे में सोचने की शुरुआत जरूर करेंगे। वैसे भी, हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि वो जिंदगी के किसी भी पल से खुद को व्यवस्थित व पाजिटिव बनाने की शुरुआत करे और मैं यह शुरुआत इस बीत रहे वर्ष के अंतिम तीन महीनों से कर सका हूं और इसको नए साल में आगे बढ़ाऊंगा।


आभार के साथ
जय भड़ास
यशवंत सिंह
09999330099

18 comments:

akshat saxena said...

yashwant bhai pranam,
umeed karta hu jo kuch bhi aap ki khawish hai ya jo bhi aap dusro ke liye karna chahte hai nischit taur par ishwar aapki is mano kamna ko purna kare aap jaise vyaktitva ke log is duniya me bahut kam hai jo dusro ke baare me sochte hai warna aaj ki duniya me ti insaan sirf apne hi sudh ke baare me sochta hai ye aapki team aur aapka hi sneh hai jiski wajah se aaj aap blogging ki duniya me no. 1 bane hue hai apne aradhya se yahi prarthana karta hu ki aapko dirghayu pradan kare taki aapke saare project poore ho sake jiska khwab aap sanjoye hue hai......ek baat aur bhai apna pyar hum sab par aise hi banaye rakhiiyega.
apka anuj......
akshat saxena

संजय तिवारी said...

यह सब अपना पोर्टल बनाने का कमाल है कि आप इतने उदार हो गये हैं.

arjun sharma said...

Hazaron khwashisein ho itni ki har khwahish pe dum nikle. hamari dua hai ki yashwant ka aashram jaroor bane. per yashwant khud ashram ka prani na bane, are bhai ashram chalane wale ko to mushakkat karni hi padti hai verna log kahenge TOO VI DERE VICH BEH GYA FAQEER BAN KE, KI KHATIYA MAIN TERI HEER BANKE, happy new year
Arjun Sharma

SANJEET KUMAR said...

yaswant sir ji
namaskaar
aapka ye likha hua padha sachmuch bahut hi acha laga aap yu hi hum log ko prarit kerte rahe..aane wale salo me aapka project safal ho aise kaamna hai..mai pradhanji.com me suru se hi kaam kerna chata tha aur aaj bhi chata hun..per sach hai bina setup ke kuch nahi ho sakta ..lekin aap bharosa rakhe jab bhi pradhanji.com start hoga...aap begusari ke liye nischint rahe mai kaam karunga agar aap chaiyenge to...aane wale salo me aap aur aapka project safal ho aise bhagwan se kaamna hai
jai bhadas

sanjeet,begusarai

ShivBhakt said...

बधाई हो सर
बहुत अच्छा लगता है आपकी तररकी देख कर। और आगे भी उम्मीद है की एसा ही सुभ समाचार मिलता रहेगा। भगवान करे २००९ की आपकी उम्मीदे पुरी हों। और नया साल आपके हिसाब से चले। कुछ लोग आपके बताये रास्ते और आपके मार्गदर्शन में कुछ नया करे. मैं भी इस नए साल को अपने हिसाब से चलने के लिए लगा हूँ।
अनुग्रह प्रताप सिंह

ShivBhakt said...

बधाई हो सर
बहुत अच्छा लगता है आपकी तररकी देख कर। और आगे भी उम्मीद है की एसा ही सुभ समाचार मिलता रहेगा। भगवान करे २००९ की आपकी उम्मीदे पुरी हों। और नया साल आपके हिसाब से चले। कुछ लोग आपके बताये रास्ते और आपके मार्गदर्शन में कुछ नया करे. मैं भी इस नए साल को अपने हिसाब से चलने के लिए लगा हूँ।
अनुग्रह प्रताप सिंह

ShivBhakt said...

बधाई हो सर
बहुत अच्छा लगता है आपकी तररकी देख कर। और आगे भी उम्मीद है की एसा ही सुभ समाचार मिलता रहेगा। भगवान करे २००९ की आपकी उम्मीदे पुरी हों। और नया साल आपके हिसाब से चले। कुछ लोग आपके बताये रास्ते और आपके मार्गदर्शन में कुछ नया करे. मैं भी इस नए साल को अपने हिसाब से चलने के लिए लगा हूँ।
अनुग्रह प्रताप सिंह

Anurag TIwari said...

संजय जी ने सुगर कोटिंग के साथ भड़ास4मीडिया पर जो विस्फोट.कॉम किया अच्छा लगा. उस से भी मधुर लगा यशवंत जी का उन तथ्यों को सहजता से स्वीकार करना और उजागर करना कि उनकी हिन्दी समाज और हिन्दी ब्लागर्स के लिए भविष्य की योजनायें क्या हैं.

संजय जी का सुझाव अच्छा है कि और पत्रकार भाई जो ब्लागर हैं वे भी पोर्टल उद्यमी बन सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि हर इंडस्ट्री में बाद में जो सुधार होता है उसमे कई सुधार की आंधी में बह जाते हैं.उदाहरण के तौर पर डॉट.कॉम उद्योग को ही लें, कई बन गए तो कई गुमनामी के अंधेरे में खो गए.

इसका दूसरा पहलु यह भी कि जब तक प्रयोग न होंगे तब तक परिपक्वता भी नही आएगी. तो क्यों न संजय भाई और यशवंत भाई अलग अलग प्रयोग करते हुए भी नवागंतुकों का मार्ग दर्शन करें? सहजीविता के पश्चात् योग्यतम की उत्तरजीविता का सिद्धांत लागू होना ही नव-उद्यमियों के लिए श्रेयस्कर होगा.

भड़ास निकलेगी तो विस्फोट होना लाजिमी है, और विस्फोट सदैव नव- सृजन के लिए राह बनाता है. नए साल पर यही उम्मीद कर सकता हूँ कि ब्लागिंग की दुनिया और परिपक्व होगी और फलेगी फूलेगी. सभी विस्फोटक भड़ासियों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें...
जय भड़ास
सादर
अनुराग

प्रकाश गोविन्द said...

यशवंत भाई
आपने बड़े ही इंकलाबी और धारदार तरीके से
नव वर्ष की शुभकामनाएं दी हैं ! सच कहूँ तो
यह शुभकामना पात्र की जगह संग्रहणीय लेख
बन गया है !
बहुतों के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हो सकता है !
कई बातें अत्यन्त सटीक और अर्थपूर्ण हैं -
"हम क्यों बने-बनाए मालिकों के नौकर बनें।
हम क्यों नहीं मालिक बनने की रेस में शामिल
हों। खुद को इसके अनुरूप तैयार करना होगा और कंटेंट के साथ-साथ तकनीक, ब्रांड, मार्केट, बिजनेस, फाइनेंस आदि की बुनियादी चीजों को समझना होगा।"

नए साल की भावी योजनाओं को पढ़कर अच्छा लगा ! पढ़कर मैंने भी संकल्प लिया है कि अब दुबारा अपनी दिनचर्या में ओशो के सक्रिय ध्यान
को अवश्य शामिल करूंगा !

आपके हारमोनियम सीखने के जज्बे को सलाम करता हूँ ! दुआ करता हूँ कि आप कामयाब हों ! (हालांकि मैं भी पिछले ७-८ वर्षों से गिटार सीखने की तमन्ना दबाये बैठा हूँ )

ग्रामीण भारत का मीडिया मिशन प्रोजेक्ट क्या है ? इसके बारे में उत्सुकता हो रही है जानने की !
जो भी हो अगर इरादे नेक और बुलंद हों तो
रास्ते स्वयं बनते चले जाते हैं !

नववर्ष कर्म और चिंतन से परिपूर्ण हो !
मेरी हार्दिक शुभकामनाएं !

akhilesh kr singh said...

yashwant sir naye saal mein aap aur hum bhadasi tarakki karen aur bhadas4media bhi tarakki kare iski ummid hai

Anonymous said...

Namasakar aur jai Bhadas, Yashwant ji
Bhadas ke bare mein abhi kuch din pehle hi pata chala. Ab maloom hua ki media houses mein kya chalta hai. Apka Patra bahut bahut prernadayi laga.
gramin bharat ka media mission project ke bare mein janana chahata hun. Ummid karta hun aap zarur batayenge. Naye varsh ki hardik shubhkamanayen.
Preshask-
Balbir Singh Gulati
Dehradun
steffy.gulati@sify.com

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

=========>(V)
:)
:(
:) :) :) :)
हम भी ...हम भी ...उदारता-उदारता खेलेंगे
जय जय भड़ास

Ajay Mehta said...

yashwant ji parnam, navvarsh ki shubkamneyan. main to bas ek bat kahunga, gar buland hon hosle to raste to Dariya main bhi ban jate hain.

Ajay Mehta said...

यशवनत जी परनम, नव वरष कि शुभ कामनाऐ मैं तो बस एक बात कंहुगा, गर बुलंद होन हौसले, रासते तो दरिया मैन भी बन जाते है

प्रदीप मिश्र said...

meri bahut-bahut shubhkamnayein

michal chandan said...

कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता..एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों।
बहुत बहुत बधाई हो यशवंत भाई। वाकई आपने हिंदी बेल्ट वालों को एक प्रेरणा देने की प्रशंसनीय कोशिश की है, हम कामना करते है कि नए साल में आपकी भावी योजनाएं मूर्त रूप ले, जिससे हम सब जुड़े रहे। जय भड़ास...

BHARTI said...

yashwant ji aapke sapne jaroor sakar honge. happy new year
bharti

BHARTI said...

yashwant ji aapke sapne jaroor sakar honge. happy new year
bharti