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10.2.08

डा.रूपेश को मुनव्वर सुल्ताना का "जय श्री राम"

मुंबई के ऊपर जब जनसंख्या और ट्रैफ़िक का वज़न बढ़ने लगा तो नवी मुंबई का निर्माण हुआ । मानखुर्द से आगे समुद्र पर ब्रिज बना कर वाशी को रेलवे ने जोड़ दिया और फिर ट्रेन हर साल छह माह में एक नया गांव लपक लेती और वो शहर बन जाता । इस तरह ट्रेन पनवेल तक आ गयी तो हम लोग भी चेम्बूर से रहने के लिये पनवेल आ गए । गांव देखते देखते शहरों में तब्दील हो गए । स्थानिक लोगों के कारोबारों का रंग भी चटख़ होने लगा ,कल तक जो लोग फ़टेहाल थे अब उनकी जमीनें करोड़ों की कीमत देनें लगीं । लोग बढ़ने लगे तो शराब का कारोबार भी बढ़ गया । दिवा गांव और खोपोली की भट्ठियों से बन कर आने वाली शराब ने भी जलवे दिखाने शुरू कर दिए । पुलिस व राजनेताओं की मिलीभगत के कारण शराब माफ़िया का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता और समाज सेवक कहलाने वाले तो बस जहरीली शराब पीकर मरने वालों के घर जाकर शोक मना आते हैं ।
जनाब डा.साहब ने तो एक अलग ही तरीका निकाला इसके विरोध में ;रोज ही अजीब से अंदाज में ट्रेन में ट्रक के ट्यूब्स में शराब भर कर लाने वालों से सीधे शराब खरीदते पूरी कीमत देकर और बिना कुछ कहे जमीन पर फेंक देते और घर चले आते । कुछ दिनों तक उन लोगों ने बर्दाश्त किया फिर इन्हें शराब बेचने से ही इन्कार कर दिया कि आप डबल पैसे भी दो तो हम आपको दारू नहीं देंगे । कुछ दिन ये जनाब भेस बदल-बदल कर शराब लेते रहे पर पहचान लिये जाने पर फिर रुकावट हो गई । अब उनके पास खड़े रह कर लोगों को बोलना शुरू कर दिया कि मुझे दारू दिलाओ ये लोग मुझे दारू नहीं देते । खीझ कर उन लोगों ने मारने की धमकी भी दी ,मोटरसायकल तोड़ डाली पर हमारे डाक्टर साहब तो मानते ही नहीं हैं । कल से दोनो हाथों और पैरों को मरहम-पट्टी करे बिस्तर पर हैं ,पता चला है कि शराब माफ़िया से जुड़े लोगों ने हमला किया है । कुछ समझाओ तो भगवत गीता सुनाने लगते हैं और कहते हैं कि अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखिए । इनकी माताजी संग में ही रहती हैं बता रहीं थी कि ये पागल अपने पिता की मौत पर जरा भी दुखी नहीं था लेकिन अभी जब एक जख़्मी उल्लू का बच्चा मर गया तो फूट-फूट कर रोया ।
इस शख़्स के कितने रूप हैं नहीं मालुम पर वो हमारे लिए तो फ़ायदेमन्द ही हैं ना ? अब बहुत सारे लोगों को लगेगा कि मैं शायद कोई बच्ची हूं जो कि किसी से प्रभावित हो गयी हू इसलिए इतना लिख रही हूं लेकिन ऐसा नहीं है इन जनाब के कारण मैं आज बिना दवा के स्वस्थ हूं ।

2 comments:

राजीव तनेजा said...

डाक्टर साहब को मेरा भी सलाम.....

जय भड़ास....

यशवंत सिंह yashwant singh said...

असल मर्द हैं डाग्डर साहब, उम्मीद है, हम दूर से ही सही, उन्हें नैतिक समर्थन देकर उनके अभियान, उनकी सोच व उनके काम को मजबूती देते रहेंगे।
यशवंत