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31.5.08

प्रेम कवितायेँ

प्रेम कवितायेँ

साठ पार के इस कवि को लिखनी है एक प्रेम कविता ,
अपने मन के भीतर के प्रेम के सोते को वह फिर उदगारना चाहता है ,
स्मृतियों की खोह मे कहाँ तक भटक सकेगा यह कवि ,
क्या याद आ सकेगा जीवन का पहला गीत ,
प्यार की उस पहली झुरझुरी को कैसे महसूस करेगा यह कवि ,
अभिव्यक्ति की अबोध निश्चलता कैसी उपजेगी कवि के भीतर ,
दिल की किन परतों मे तटोलेगा वे शब्द जिनकी मिठास शायद अब भी कायम हो,
आख़िर कितना मुश्किलहै इस उम्र मे प्रेम कवितायेँ लिखना ।

दीपेंद्र

2 comments:

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा said...

भाई,सच तो ये है कि किसी भी उम्र में सबसे कठिन काम प्रेम कविता लिखना है क्योंकि किस्मत वालों को प्रेम होता है और फिर उसे कविता में लिखना तो और टेढ़ी अभिव्यक्ति है रोने-धोने से फुर्सत नहीं रहती.......

Unknown said...

सत्य वचन मनीषा दीदी,
अभिव्यक्ति नहीं ये कवि की कल्पना है और बेचारे कवि कल्पना की उड़ान के सहारे अपनी अभिव्यक्ति करते रहते हैं.