Krishan pal Singh-
कश्मीर फाइल्स फिल्म 32 वर्ष पहले घाटी में बर्बर और पाशविक अत्याचार के बल पर उजाड़े गये कश्मीरी पंडितों की कहानी को नये सिरे से सुनाती है। लेकिन क्या इसे निरपेक्ष रूप से एक मार्मिक फिल्म भर कहा जा सकता है। निश्चित रूप से इसके पीछे राजनीतिक दुराशय है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती और इसने फिल्म के नैतिक पक्ष को संदिग्ध बना दिया है। सबसे बड़ी आपत्तिजनक बात यह है कि इस फिल्म की आड़ में जो विमर्श खड़ा किया जा रहा है उसका मकसद इसके पहले के देश के सारे भाग्यविधाताओं को एक लाइन से हिन्दू विरोधी और देश विरोधी साबित करना है। यहां तक कि भाजपा की ही पार्टी के सबसे बड़े यशस्वी राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी पर भी इस तरह के छींटे पड़ने की परवाह नहीं की गई है। हर प्रसंग पर तत्कालीन भाग्य विधाताओं का फैसला परिस्थिति सापेक्ष होता है और वर्तमान की बदली हुई परिस्थिति में उस फैसले के आधार पर उनकी मंशा को लेकर कोई निष्कर्ष निकालने में बहुत सावधानी की जरूरत पड़ती है अन्यथा उनके साथ न्याय नहीं हो सकता।
24.3.22
कश्मीर फाइल्स की आड़ में अभी तक के देश के सारे भाग्य विधाताओं को लाइन में लगाने के प्रयास से क्या हल होगा
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19.3.22
बीजेपी की जीत में मायावती की गुप्त मदद
Unmesh Gujarathi-
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों ने 403 सीटों में से 273 सीटों पर जीत हासिल की है। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार बीजेपी को 52 सीटों का नुकसान हुआ है। बीजेपी के लिए ये जीत इतनी आसान नहीं थी। इसलिए बीजेपी ने भी दलित और जातिगत आधारित राजनीति का कार्ड खुल कर खेला। भाजपा ने भी अपनी एक समय की दुश्मन बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ अंदरखाने में गठबंधन बनाकर, समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोटों में सेंध लगा कर किसी तरह सत्ता हथिया ली है।
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न्यायपलिका और न्यायधीश से आज भी उम्मीदें जिंदा है...
के. सत्येन्द्र-
कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायधीश को पैसे से प्रभावित करने के मामले से समूचा कानून जगत स्तब्ध है लेकिन यह भी सत्य है कि बहुत से ऐसे मामले सामने आ ही नही पाते ।
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वरिष्ठ कवि बुद्धिसेन शर्मा का निधन
प्रयागराज। नगर के वरिष्ठ कवि बुद्धिसेन शर्मा का मंगलवार की सुबह निधन
हो गया। 26 दिसंबर 1941 को कानपुर में जन्मे बुद्धिसेन शर्मा प्रयागराज
के करैलाबाग कॉलोनी में निवास करते थे, लंबे समय से बीमार होने के कारण
अपने शार्गिद इश्क़ सुल्तानपुरी के साथ गौरीगंज में रह रहे थे। उन्होंने
आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। समाचार पत्र
‘दैनिक प्रताप’, ‘भारत’ और ‘मनोरमा’ पत्रिका में उन्होंने काम किया था।
मुशायरों में भाग लेने के लिए कई देशों की यात्रा की थी। देश राष्टपति के
हाथों उन्हें ‘साहित्य श्री’ की उपाधि मिली थी। इसके अलावा वर्ष 2019 में
गुफ़्तगू द्वारा उन्हें ‘अकबर इलाहाबादी सम्मान’ प्रदान किया गया था।
उनका एक ग़ज़ल संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला था। श्री शर्मा का अंतिम
संस्कार मंगलवार को शाम चार बजे रसूलाबाद घाट पर किया जाएगा।
गु़्फ़्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, प्रभाशंकर शर्मा, मनमोहन सिंह
तन्हा, नरेश कुमार महरानी, अनिल मानव, शैलेंद्र जय, नीना मोहन
श्रीवास्तव, विजय प्रताप सिंह, मासूम रजा राशदी, संजय सक्सेना, अफ़सर
जमाल, डॉ. नीलिमा मिश्रा, इश्क़ सुल्तानपुरी, रेशादुल इस्लाम, शिवाजी
यादव, देवेंद्र प्रताप वर्मा, संजय सागर, अर्चना जायसवाल, शिवपूजन सिंह
सरिता श्रीवास्तव, डॉ. मधुबाला सिन्हा, जया मोहन, दयाशंकर प्रसाद आदि ने
उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
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12.3.22
भारत में केवल एक नेता की जरूरत है जो नई कांग्रेस बनाने की घोषणा करे
करणीदानसिंह राजपूत-
भारत में केवल एक नेता की जरूरत है जो नई कांग्रेस बनाने की घोषणा करे। नया विधान और नया निशान हो। अब घोषणा हो ताकि सन 2024 के लोकसभा आमचुनाव से पहले संपूर्ण देश भर में उठाव हो सके। इसके बाद कॉन्ग्रेस का मानस बदल जाएगा स्वरूप बदल जाएगा और लोग जाग जाएंगे। केवल नामों में पदों में जिंदा रहने वाले लोग पूरे देश में खत्म हो जाएंगे। कॉन्ग्रेस इसलिए पिट रही है हार रही है कि उसमें से कोई एक भी व्यक्ति घोषणा नहीं कर रहा।
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उत्तर प्रदेश के चुनाव में कैसे भारी पड़ी व्यवहारिक सच्चाईयां
Krishan pal Singh-
उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव नतीजे सामने आ चुके हैं। अब समय उनके निष्कर्षो के चीढ़ फाड़ का है। मुझ सहित अधिकांश राजनीतिक विश्लेषक प्रदेश की सरकार के बारे में अपने अंदाजे बिफल हो जाने से परेशान हैं। चुनाव में किसी तरह की हेरा फेरी साबित करने का कोई सबूत तलाशने से भी नहीं मिला सो प्राश्यचित इस बात का है कि जमीनी सच्चाई जानने में हमसे कहां चूक हुई। बड़ी संख्या में खिन्न लोग हमें मिले थे जिन्होंने चुनाव के पहले सरकार के कामों पर तीव्र असंतोष प्रकट किया था जबकि इनमें से अधिकांश ने 2017 में भाजपा की ही पालकी ढ़ोने में गुरेज नहीं किया था। हमारे लिए पहेली बन गया है कि ये वोट कहां चले गये। आकलन में हमसे कहां से चूक हुई ताकि भविष्य में अपनी विश्वसनीयता के लिए हम अधिक सतर्कता से काम कर सकें।
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9.3.22
कनाडा की महिला संस्था ने असमिया कवयित्री को किया सम्मानित
Vikram Singh Rathod-
असमिया कवयित्री और गायिका तनुप्रिया कलिता को यूनिवर्सल विमेंस नेटवर्क, कनाडा द्वारा वूमेन ऑफ़ इंस्पिरेशन अवार्ड २०२२ में सांस्कृतिक राजदूत के रूप में नामित किया गया है । उन्हें यह नामांकन साहित्य और संगीत में उनके योगदान के लिए मिला है।
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उत्तर प्रदेश में छुट्टा गोवंश की समस्या : चुनौतियां एवं समाधान
उत्तर प्रदेश में छुट्टा पशुओं की समस्या एक मानव जनित सामाजिक समस्या है जिसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव कृषि पर पड़ा है. गाँव गाँव में सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु खुले आम घूम रहे हैं और फसल को बर्बाद कर रहे हैं. किसानों की व्यथा अंततः विभिन्न मंचों के माध्यम से राजनैतिक दलों, प्रशासन एवं सरकार तक भी पहुंच चुकी है. विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से उठता रहा. स्वयं प्रधानमन्त्री तक को इस समस्या को स्वीकारते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन देना पड़ा. विभिन्न दलों के घोषणा पत्र और चुनावी भाषणों के दौरान छुट्टा गोवंश की समस्या की चर्चा हुयी. अगले सप्ताह तक प्रदेश में नयी सरकार का गठन हो जाना है, आगामी सरकार के समक्ष भी इस समस्या के समाधान हेतु कारगर उपाय करने का दबाव होगा. आइये, जमीनी सच्चाई को स्वीकारते हुए समस्या और समाधान पर कुछ समझने की चेष्टा करें.
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7.3.22
पत्रकारिता का राष्ट्रधर्म
जयराम शुक्ल-
राष्ट्रवाद इन दिनों विमर्श के केन्द्र पर है। भारत के संदर्भ में और वैश्विक संदर्भ में भी। राजनीतिक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पक्ष व विपक्ष पर खूब चर्चाएं हुईं, हो रही हैं, तो भला पत्रकारिता इससे क्यों अछूती रहे। उसमें भी राष्ट्रवाद के तत्व तलाशे जा रहे हैं।
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महिला दिवस विशेष : दख़ल ज़रूरी है आह्लादिनी का
-डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'
सृष्टि की उत्पत्ति से, सृजन की वेदिका से, अक्ष के केन्द्र से, धर्म के आचरण से, कर्म की प्रधानता से, कृष के आकर्षण से, सनातन के सत्य से , चेतन के अवचेतन से, जो ऊर्जा का ऊर्ध्वाधर प्रभाव पैदा होता है, वह निःसंदेह सृजन के दायित्वबोध के कारण संसार की आधी आबादी को समर्पित है। ब्रह्माण्ड की समग्र अवधारणा के केन्द्र में जो भाव स्थायी रूप से विद्यमान है, उन भावों के पोषण, पल्लवन और प्रवर्तन के लिए सृष्टि की प्रथम सृजक को पूजनीया के साथ-साथ पालक और पोषक की भूमिका का निर्वहन भी करना चाहिए।
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27.2.22
राजस्थान भास्कर में अब पंचांग भी गलत छपने लगा!
Priyanka-
राजस्थान में प्रकाशित दैनिक भास्कर में अब पंचांग भी गलत छपने लगा. इसकी चर्चा फेसबुक पर हो रही और लोग कमियों के बारे में बता रहे हैं.
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13.2.22
इमरान खान मुसीबत में, पाकिस्तान में अनिश्चितता
pankaj mishra-
1965 के भारत -पाकिस्तान के युद्ध के बाद सोवियत संघ की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच ताशकन्द में समझौते की बातचीत हो रही थी. इस बातचीत में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान कर रहे थे. पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल में थे .इसी दौरान एक बार सोवियत प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बीच जुल्फिकार अली भुट्टो ने जनरल अयूब के कान में कुछ कहा .भुट्टो की बात सुनते ही जनरल साहब को गुस्सा आ गया और जोर से बोले "उल्लू के पट्ठे बकवास बंद करो ".
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मोदी शाह नड्डा जी चुनाव में कांग्रेसियों को नहीं, लोकतंत्र सेनानियों को गले लगाओ।
करणीदानसिंह राजपूत-
लोकतंत्र सेनानियों ने तो आपातकाल में कुर्बानियां देने के लिए सब कुछ छोड़ दिया था। अत्याचार सहे।आप तो उन कुर्बानियां देने वाले लोकतंत्र सेनानियों के हाल जानने के लिए भी कभी नहीं निकले। आपके पास देने को समय तक नहीं है। लोकसभा में मोदी जी द्वारा आपातकाल में कुरबानियां देने वालों पर भाषण देना और सेनानियों का जीवन उनके घर जाकर देखने में बड़ा अंतर है। असली आंसुओं और मगरमच्छी आंसुओं में जो अंतर होता है वह आपके भाषण की असलियत है।
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11.2.22
आरएसएस का हिन्दू राष्ट्र का सपना उत्तर प्रदेश में क्यों लड़खड़ाया
Krishan pal Singh-
यह तो सर्वविदित है कि आरएसएस का लक्ष्य देश में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना रहा है। अब जबकि आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष 2025 में पूरे होने जा रहे हैं तो अपने शताब्दी वर्ष में हिन्दू राष्ट्र के सपने को साकार रूप देने के लिए वह अधीरता की हद तक जल्दबाजी में है। अधिकांश लोग हिन्दू राष्ट्र से सिर्फ यह तात्पर्य रखते हैं कि इसका अर्थ मुसलमानों सहित सभी गैर हिन्दू अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे के नागरिक के रूप में व्यवहारिक रूप से बसर करने को अपनी नियति मान लेने के लिए मजबूर करना है जबकि हिन्दू राष्ट्र के वास्तविक सरोकार इससे कहीं आगे हैं। इसका अभीष्ट देश में वर्ण व्यवस्था के शासन को कायम करना है लेकिन आज बक्त जहां पहुंच चुका है उसमें इस दुराग्रह से कई जटिलतायें पैदा हो सकती हैं जिनके बारे में आरएसएस ख्याल नहीं कर सकी है। वैसे भी हिन्दू राष्ट्र के अपने अंतर्विरोध भयानक हैं जिसे अपनी कल्पना में उसने भुला दिया था। उत्तर प्रदेश में अपने हस्तक्षेप से आरएसएस ने हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को फलीभूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया था पर अब यह उसके गले की फांस बन गया है जिसके कारण भाजपा को उत्तर प्रदेश में अपनी सत्ता की वापिसी के लिए लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं।
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ABP Network marks 50% growth in total unique visitors
Comscore Data, Dec 2020-Dec 2021
Only news publisher in the top-10 category to register 50% y-o-y growth
Noida, 11th February 2022: ABP Network’s growth story continues, and shows how the trailblazer in the digital space has emerged as a leader in a short span.
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4.2.22
69000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने सरकार के विरुद्ध बिगुल फूंका
69000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित ओबीसी तथा एससी वर्ग के अभ्यर्थियों ने शिक्षक भर्ती में हुए 19000 से अधिक आरक्षण घोटाले के विरोध में सरकार के विरुद्ध बिगुल फूंक दिया है l
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31.1.22
पत्रकारों को प्रेस बैग, डायरी, पेन व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया
धनहा : मधुबनी व पिपरासी प्रखंड के बार्डर पर स्थित विजय राज मेवाड़ कंट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के हॉट मिक्स प्लांट पर रविवार को मधुबनी प्रखंड प्रमुख विजया सिंह व प्रमुख प्रतिनिधि विजय सिंह ने गंडक पार के पत्रकारों के सम्मान में एक सभा का आयोजन किया था।
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29.1.22
झारखण्ड के बहादुर योद्धा-भगवान बिरसा मुंडा
(जन्म-1875,मृत्यु-1900)
भारत की आज़ादी के 75 साल का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इसी दौरान उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जा रहा है जिनका देश को स्वतंत्र कराने में कुछ न कुछ योगदान रहा है। लेकिन वे इतिहास के पन्नों में नहीं हैं। बहुत से स्वतंत्रता सेनानी ऐसे हैं जिनका नाम सदैव लोगों की जु़बान पर रहता है, कहीं न कहीं किसी न किसी तरह से उनका ज़िक्र भी होता है, उनके बारे में कुछ स्वतंत्रता संबंधी कार्यक्रमों में कुछ पढ़ने और सुनने को मिल जाता है, बहुत से बहुचर्चित नामों को सामान्य जनता भी बखूबी जानती है, लेकिन कुछ नाम गुमनामी के अँधेरे में खो गये हैं। हालांकि स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान अद्वितीय है और अगर कहा जाए कि उनके योगदान के बिना आज़ादी सम्भव नहीं थी तो इसमें कोई अतिश्योक्ति न होगी। उनके अन्दर भी देशप्रेम का जज्बा कूट-कूटकर भरा था। वे भी अपने भारतदेश पर अंग्रेजों का आधिपत्य बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते थे। उन्हें अपने देश से भगाने और अपने देश को स्वतंत्र कराने के लिये उन्हांेने अपने तरीके से इस स्वतंत्रता संग्राम को लड़ा और उनकी यह लड़ाई बहुत अहम और महत्वपूर्ण भी थी। ऐसा करते हुए उन्होंने बहुत-सी तकलीफों का भी सामना किया, परन्तु इन सबकी परवाह किये बिना उन्होंने अपने जीवन में इस लड़ाई को बिना रुके लड़ा और कुछ हद तक उसमें कामयाबी भी पाई।
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Ye company ek sal se salary nahi de rahi hai
Bajarang Yadav-
Dear sir / Ma'am
Good morning
Kya mein jis company me kam karta hoo uske liye RTI lga sakta hoo?
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इस बार दिए गए 128 पद्म सम्मानों के लिए लगभग 50 हजार अर्जियां आई थीं!
डॉ. वेदप्रताप वैदिक-
पद्म पुरस्कारों की प्रामाणिकता? इस बार घोषित पद्म पुरस्कारों पर जमकर वाग्युद्ध चल रहा है। कश्मीर के कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद को पद्मभूषण देने की घोषणा क्या हुई, कांग्रेस पार्टी के अंदर ही संग्राम छिड़ गया है। एक कांग्रेसी नेता ने बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और कम्युनिस्ट नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य के कंधे पर रखकर अपनी बंदूक दाग दी। भट्टाचार्य को भी भाजपा सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया है। उन्होंने यह सम्मान लेने से मना कर दिया।
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24.1.22
द्विवेदी की कविता को बच्चन की कविता बता दिया अमर उजाला बदायूं ने
खुद को शुद्ध हिंदीभाषी अखबार कहने वाले अमर उजाला का दावा तो त्रुटिरहित अखबार देने का है। यहां के अधिकारी भी खुद को बेहद काबिल मानते हैं और खबरों में नुक्ताचीनी करने से गुरेज नहीं करते लेकिन बदायूं के रिपोर्टर, डेस्क वाले और बरेली में बैठे आला अधिकारी इन दिनों अखबार में कम बल्कि चुनावी डग्गे में ज्यादा ध्यान दे रहे है।
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हिंदी उपन्यासकार अनूपलाल मंडल, उनकी कथायात्रा और औपन्यासिक विन्यास
■ डॉ. सदानंद पॉल (लेखक)
'मैला आँचल' में बरारी-समेली के क्रांतिकारी नक्षत्र मालाकार के व्यक्तित्व और कृतित्व को 'चलित्तर कर्मकार' नाम से चित्रित किया गया है और असली नाम को किसी खौफ़ के कारण बदला गया है, जबकि अनूपलाल मंडल ने अपने उपन्यास 'तूफान और तिनके' में नक्षत्र मालाकार के किसी छद्म नाम तक का उल्लेख नहीं किया है, किंतु उसे नामी डाकू के रूप में चित्रित किया है, जो बड़े किसानों, जमींदारों और जमींदारों को पत्र व संवाद भेज देते थे कि फलाँ गाँव में गरीबों में अनाज बाँट दो, अन्यथा अनाज लूट लिया जाएगा । सत्यश:, यह अनाज गरीबों में बंटती थी । परंतु उपन्यासकार ने नक्षत्र मालाकार व उनके छद्म नाम का भी उल्लेख न कर 'साहस' से साफ बचते व भागते नज़र आये हैं। जो हो, कलम के जादूगर रामवृक्ष बेनीपुरी ने अनूपजी की प्रशंसा में कलम तोड़ दिए हैं, "अनूप उपन्यास-लेखक हैं, किंतु उसका जीवन स्वयं एक उपन्यास है । ...... संसार के असंख्य प्रहारों को हँस-हँस कर झेलनेवाले इस योद्धा की जीवनी स्वयं भी एक उत्तम उपन्यास का उपादान है । अनूप कलाकार योद्धा है, साहित्यकार साधक है । उसकी कूची में हरी, पीली, गुलाबी रंगीनियों की कमी नहीं । उसकी लेखनी में खट्टे-मीठे-तीते रसों का अभाव नहीं ।"
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लोकतंत्र में सत्ता त्याग और सेवा का दुर्गम-पथ है
डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र-
पश्चिमी देशों की तथाकथित आधुनिकता ने बीसवीं शताब्दी में सारे विश्व को दूर तक प्रभावित किया और समाज की शासन-व्यवस्था के लिए राजतंत्र के स्थान पर लोकतंत्र का नया विचार दिया। यद्यपि भारत सहित अनेक देशों में गणतांत्रिक व्यवस्था प्राचीन एवं मध्यकालीन राज्यों में भी सफलतापूर्वक संचालित होती रही है, महाराष्ट्र में अष्टप्रधान का व्यवस्थापन इसी जनतांत्रिक शक्ति का भिन्न स्वरूप प्रकट करता है किंतु संपूर्ण देश में निर्वाचन के माध्यम से राजनीतिक दलों की आंतरिक संरचना और संपूर्ण राष्ट्र की व्यापक व्यवस्था का नया लोकतांत्रिक स्वरूप निश्चय ही पश्चिम के आधुनिक चिंतन की देन है।
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पीएम रैली में गई बसों का भुगतान न होने से नाराज मालिकों ने सौंपा ज्ञापन
Rahul Mishra-
भुगतान न होने पर सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी
सीतापुर। बीते माह बहराइच में हुई पीएम रैली में जाने वाली परिवहन डिपों की बसों का भुगतान न होने के कारण नाराज वाहन स्वामियों ने एआरएम से भुगतान करने की मांग की है।
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22.1.22
अखिलेश के बिजली सियासत की हवा निकालेगी बीजेपी
संजय सक्सेना, लखनऊ
उत्तर
प्रदेश की योगी सरकार जल्द ही किसानों को मुफ्त बिजली देने की घोषणा कर
सकती है. ऐसा करके वह सपा के उस वादे की हवा निकालेगी जिसमें सपा प्रमुख ने
समाजवादी सरकार बनने पर किसानों को सिंचाई के लिए और शहरी क्षेत्र में 300
यूनिट मुफ्त बिजली देने की बात कही थी. वैसे इससे पहले आम आदमी पार्टी भी
300 यूनिट श्री बत्ती देने का वादा कर चुकी है, लेकिन आप के वादे को इसलिए
ज्यादा से गंभीरता से नहीं लिया क्या क्योंकि वह सत्ता की दौड़ में कहीं
नजर नहीं आ रही है, जबकि सपा के लिए अखिलेश का वादा गेम चेंजर बन सकता है.
इसीलिए योगी सरकार भी फ्री बिजली का बड़ा दांव चल सकती है.
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यूपी चुनाव में नहीं चलेगा बीजेपी का 'गुजराती फार्मूला'
अजय कुमार, लखनऊ
बगावत क़े डर से आलाकमान ने बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट काटने की बदली रणनीति
भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी (योगी सरकार के खिलाफ) वोटिंग के प्रभाव को कम करने के लिए गुजरात वाला फार्मूला नहीं अपनाएगी. गौरतलब हो गुजरात में सत्ता विरोधी लहर का असर कम करने के लिए बीजेपी ने कई ऐसे विधायकों का टिकट काट दिया था जिनसे जनता नाराज चल रही थी. इसका उसे गुजरात में फायदा भी मिला था. लेकिन यही फॉर्मूला बीजेपी आलाकमान ने यूपी में लागू करने का सोचा तो उसकी चिंता बढ़ गई. बीजेपी के पास जो इनपुट आया है उसके अनुसार यदि सिटिंग विधायकों का बड़ी संख्या में टिकट काटा गया तो पार्टी में बगावत जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.
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युवा किसान कवि गोलेन्द्र पटेल की 8 कविताएँ
1).
जोंक
•••••••••••••••••
रोपनी जब करते हैं कर्षित किसान ;
तब रक्त चूसते हैं जोंक!
चूहे फसल नहीं चरते
फसल चरते हैं
साँड और नीलगाय.....
चूहे तो बस संग्रह करते हैं
गहरे गोदामीय बिल में!
टिड्डे पत्तियों के साथ
पुरुषार्थ को चाट जाते हैं
आपस में युद्ध कर
काले कौए मक्का बाजरा बांट खाते हैं!
प्यासी धूप
पसीना पीती है खेत में
जोंक की भाँति!
अंत में अक्सर ही
कर्ज के कच्चे खट्टे कायफल दिख जाते हैं
सिवान के हरे पेड़ पर लटके हुए!
इसे ही कभी कभी ढोता है एक किसान
सड़क से संसद तक की अपनी उड़ान में!
■
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14.1.22
The ABP News-CVoter fifth opinion poll predicts BJP’s victory in UP and Goa
Manipur and Uttarakhand are showing signs of a nail biting contest for power
AAP leading the race to form the government in Punjab
Noida, January 2022: The ABP News-CVoter (Centre for Voting Opinion & Trends in Election Research) fifth opinion poll predicts BJP’s victory in UP and Goa. While, Manipur and Uttarakhand are showing signs of a nail biting contest for power. In Punjab, AAP is likely to form the government as it is inching close to the majority mark, as per the recent survey. The EC had announced the election dates in the five states with UP going to poll in seven phases from 10th February to 7th March, while Punjab, Uttarakhand and Goa will vote on 14th February and Manipur on 27th February and 3rd March. The election results will be declared on 10th March.
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नियम और कानून से भी बड़ा हो गया नोएडा का प्रेस क्लब
मीडिया, यानी देश का चौथा स्तंभ। पत्रकारों के लिए देशभर के विभिन्न जिलों में प्रेस क्लब बनाए गए हैं. ऐसा ही एक प्रेस क्लब नोएडा में भी है. प्रेस क्लब के गठन से लेकर आज तक यहां पैनल का कब्जा है. पत्रकारों के रोष के बाद किसी चुनाव कराने का फैसला हुआ लेकिन चुनाव में सभी नियमों को ताक पर रखा जा रहा है. हैरानी की बात है कि प्रेस क्लब की कार्यकारिणी में नामी संस्थानों के पत्रकार जुड़े हैं. वह भी इसमें शामिल हैं.
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10.1.22
सतर्क रहें तो तीसरी लहर नहीं बरपा सकेगी कहर
कृष्णमोहन झा-
भारत में कोरोना संक्रमण की रफ्तार एक बार फिर भयावह गति से बढ़ने लगी है और एक दिन में 1लाख 80000 से अधिक मामले सामने आने के बाद अब यह माना जा रहा है कि देश में कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है। दक्षिण अफ्रीका में मिला कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रान भारत में 27 राज्यों में पांव पसार चुका है और यह यह आंकड़ा रोज ही बढ़ता जा रहा है। पश्चिम बंगाल , महाराष्ट्र, और दिल्ली में कोरोना संक्रमण की रफ्तार अब डराने लगी है । सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीश, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाजपा सांसद मनोज तिवारी के साथ ही महाराष्ट्र सरकार के दस मंत्री और बीस विधायक , मध्यप्रदेश सरकार के दो मंत्रियों सहित अनेक वरिष्ठ राजनीतिक नेता और देश के कई अस्पतालों के चिकित्सक , स्वास्थ्य कर्मी भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रान से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या भी देश में लगभग चार हज़ार तक पहुंच चुकी है यद्यपि राहत की बात यह है कि ओमिक्रान को डेल्टा वैरिएंट से अधिक संक्रामक होने के बावजूद उससे कम घातक बताया जा रहा है और ओमिक्रान संक्रमित मरीज अस्पतालों से जल्दी ही स्वस्थ हो कर घर लौट रहे हैं।
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सम्पादक मण्डल जौनपुर जनपद इकाई की कार्यकारिणी घोषित
वीरेन्द्र गुप्ता कोषाध्यक्ष, डा. ब्रजेश यदुवंशी प्रवक्ता व शम्भूनाथ सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष
जौनपुर। सम्पादक मण्डल उत्तर प्रदेश की जनपद इकाई की बैठक सोमवार को कलेक्टेªट स्थित पत्रकार भवन में सम्पन्न हुई जिसकी अध्यक्षता अध्यक्ष रामजी जायसवाल ने किया। इस मौके पर सदस्यता अभियान पर बल देते हुये नयी कार्यकारिणी का गठन कर घोषणा भी कर दी गयी।
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11 जनवरी को दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाने वाले इंसुलिन की खोज और उपयोग के 100 साल पूरे
मुंबई। आज (11 जनवरी 2022) से 100 साल पहले कोई भी कल्पना नहीं कर सकता था कि डाइबिटीज़ (मधुमेह) के टाइप 1 स बच्चों का जीवन बचाया जा सकता था,लेकिन 11 जनवरी 1922 को कनाडा में लियोनार्ड थॉम्पसन के लिए इंसुलिन की खोज और इसके पहले उपयोग ने दुनिया भर में डाइबिटीज़ (मधुमेह) वाले लोगों की नियति बदल दी। बैंटिंग, बेस्ट, मैकलियोड और कोलिप की टीम को इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा खोजों में से एक के लिए सम्मानित किया गया।
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फ़ेक न्यूज़ समाज के लिए ख़तरनाक, हो चुकी है सैकड़ों मौतें : डॉ मनीष जैसल
मंदसौर विश्वविद्यालय के सूचना और पुस्तकालय विभाग द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया
फ़ेक न्यूज़ से बचाव के टूल्स एंड टेक्निक विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में फ़ैक्टशाला के मीडिया ट्रेनर डॉ मनीष जैसल बतौर प्रशिक्षक उपस्थित रहे। डेटा लीड्स और इंटरन्यूज़ पूरे देश में फ़ेक न्यूज़ और मिसइन्फ़ॉर्ममेशन से जुड़े पहलुओं को लेकर जन जागरूकता अभियान चला रहा है।
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सनातन संस्कृति को संजीवनी प्रदान करने वाला महानायक
डॉ. शंकर सुवन सिंह-
विवेकानंद का तात्पर्य ख़ुशी से है। विवेक+आनंद अर्थात विवेकानंद। विवेक का सम्बन्ध ज्ञान से है। आनंद का सम्बन्ध सुख और दुःख से परे है। जो व्यक्ति सुख और दुःख दोनों स्थितियों में समभाव (एक सामान) रहता है वही आनंदित है। खुश वह है जो आनंदित है। कर्म का सम्बन्ध विद्वता से है। कर्म, ज्ञान प्राप्ति के लिए होना चाहिए। ज्ञान समता का मूलक है। अज्ञानता विषमता का मूलक है। कहने का तातपर्य ज्ञानी व्यक्ति आनंदित है। यहां ज्ञान का तात्पर्य आध्यात्मिक ज्ञान से है। सुख, शांति का प्रतीक है। दुःख, अशांति का प्रतीक है। शांति और अशांति के बीच तारतम्यता बैठा लेना ही आनंद है।
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8.1.22
यूपी विस चुनाव में इस बार क्या कम नजर आएंगे दागी उम्मीदवार
संजय सक्सेना, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में चुनाव का बिगुल बजते ही तमाम राजनैतिक दलों ने प्रत्याशी चयन का काम तेज कर दिया है. हर पार्टी जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश कर रही हैं. बात डिमांड की कि जाए तो अबकी से भाजपा और उसके बाद समाजवादी पार्टी में टिकट के दावेदारों की संख्या सबसे अधिक दिखाई दे रही है.सभी दलों के छोटे-बड़े सभी नेता टिकट की आस लगाए बैठा है तो ऐसे दावेदारों की संख्या भी कम नहीं है जिनकी अपराधिक या दबंग वाली छवि है.अपराधिक छवि के यह नेता कहीं मतदाताओं को डरा कर तो कहीं अपनी बिरादरी में रॉबिनहुड वाली छवि के सहारे चुनाव जीतना चाहते हैं.ऐसा पहली बार नहीं है जब दागी-दबंग चुनाव मैदान में ताल ठोंकने का सपना देख रहे हैं.पिछले कुछ दशकों में राजनीति में अपराधिक / दबंग / माफिया वाली छवि के नेताओं का बोलबाला बढ़ा है. इसकी शुरुआत कांग्रेस राज में हो गई थी, जिसको आगे चलकर भाजपा,समाजवादी पार्टी,बहुजन समाज पार्टी और अन्य छोटे-छोटे दलों ने भी खूब बढ़ावा दिया.
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आचार संहिता लागू होते ही सरकारी और सियासी मोर्चे पर काफी कुछ बदल जाता है
अजय कुमार,लखनऊ
उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान होते ही सरकारी स्तर पर काफी बदलाव आ जाएगा. किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश सहित उत्तराखंड,पंजाब,गोंवा,मणिपुर में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही ना सिर्फ राजनीतिक हलचल तेज हो जाएगी,बल्कि इन प्रदेशों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो जाएगी. उक्त प्रदेशों में आचार संहिता लागू होने के बाद चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक आचार संहिता का पालन किया जाएगा. ऐसे में जानते हैं कि आचार संहिता क्या होती है और जब तक आचार संहिता लागू रहती है, तब तक कौन-कौन से काम नहीं किए जाते हैं.
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4.1.22
अपने पुराने Realme 8S को एक्सचेंज करें लावा ProudlyIndian Agni 5G के साथ
मुम्बई, 4 जनवरी, 2022: भारतीय स्मार्टफोन ब्राण्ड लावा इंटरनेशनल लिमिटेड ने स्मार्टफोन यूज़र्स के लिए अपनी तरह के अनूठे एक्सचेंज ऑफर की घोषणा की है। अब आप Realme 8S को एक्सचेंज कर लावा का सबसे चर्चित 5G स्मार्टफोन- अग्नि ले सकते हैं। रियलमी 8एस के 6 जीबी और 8 जीबी- दोनों वेरिएन्ट्स के बदले यूज़र इस ऑफर का लाभ उठा सकते हैं।
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2.1.22
BIGG BOSS के सेट पर पत्रकार अमिताभ बुधौलिया के कविता संग्रह 'घंटा फर्क पड़ेगा' के साथ नजर आईं भारती सिंह
उपन्यासकार और कवि अमिताभ बुधौलिया का नया हास्य-व्यंग्य काव्य संग्रह-'घंटा फर्क पड़ेगा' इन दिनों चर्चाओं में है। साहित्य-फिल्म और टीवी के कई बड़े नाम उनके लेखन को सराह चुके हैं। कॉमेडियन भारती सिंह और उनके एंकर-लेखक पति हर्ष लिंबाचिया भी अमिताभ की कविताओं के प्रशसंक हो गए हैं।
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1.1.22
भास्कर की रिपोर्टिंग- डिप्टी एसपी को बना दिया बैंक कर्मी
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30.12.21
आतंकियों के एंट्री गेट 'तब्लीगी जमात' पर सउदी अरब का प्रहार
विष्णुगुप्त-
सउदी अरब ने आतंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है और आतंकवाद की जड़ पर बहुत ही सटीक व कड़ा प्रहार किया है, सउदी अरब की आतंकवाद की जड़ में सटीक और कड़े प्रहार की गूंज पूरी दुनिया में दिखायी देगी, मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भी मदद मिलेगी। भारत जैसे देशों को भी राहत मिलेगा। यह अलग बात है कि मुस्लिम दुनिया के कट्टरंपथी इस कार्रवाई के खिलाफ अपने गुस्से जाहिर करेंगे और सउदी अरब की आलोचना भी करने से पीछे नहीं हटेंगे। पर सउदी अरब आगे भी अपनी कार्रवाईयों को विराम नहीं देगा, क्योंकि सउदी अरब के अस्तित्व का प्रश्न है। आतंक अब सउदी अरब को भी अपने आगोश में ले लिया है, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक और लेबनान की तरह ही मुस्लिम आतंकी सउदी अरब को भी अपने आगोश में लेना चाहते हैं और सउदी अरब को हिंसा, अलगाव तथा अराजकता का प्रतीक बनाना चाहते हैं। सउदी अरब किसी भी स्थिति में अब आतंकी मानिकसता से छूटकारा चाहता है, सउदी अरब अपने आप को आतंकियों को सुरक्षित पनाहगार के तौर पर स्थापित नहीं करना चाहता है। ओसामा बिन लादेन के सबक से सउदी अरब ने काफी कुछ सीखा है और यह महसूस किया है कि आतंकी किसी के लिए भी हितैषी नहीं हो सकते हैं। आतंकी मानवता के दुश्मन हैं, इनसे दूर रहना और इनका दमन करना ही सही नीति है।
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29.12.21
लावा ने अपने अग्नि 5 जी उपभोक्ताओं के लिए वाईडवाईन एल1 अपडेट की घोषणा की
मुम्बई, 29 दिसम्बर, 2021: अग्रणी भारतीय स्मार्टफोन ब्राण्ड लावा इंटरनेशनल लिमिटेड ने अपने अग्नि 5 जी उपभोक्ताओं के लिए वाईडवाईन एल1 अपडेट की घोषणा की है। यह अपग्रेड एचडी कंटेंट व्यूइंग और अग्नि 5 जी डिवाइसेज़ में ओटीटी कंटेंट की स्ट्रीमिंग को आसान बनाएगा, जिससे यूज़र व्यूइंग का शानदार अनुभव पा सकेंगे। अग्नि में वाईडवाईन एल1 अपडेट पर उपभोक्ताओं के फीडबैक को ध्यान में रखते हुए यह घोषणा की गई है।
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28.12.21
हिंदी में बोलने पर टोके जाने का जवाब मालवीय जी ने कुछ यूं दिया...
डॉ.शंकर सुवन सिंह
महामाना मालवीय जी मर्मज्ञ पुरुष थे। अद्वितीय प्रतिभा के धनी पण्डित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसम्बर,1861 को इलाहाबाद(प्रयागराज)में हुआ था। वर्ष 2021 में महामना मालवीय की 160वीं जयंती है। इस अवसर पर मालवीय जी के द्वारा सामाजिक,राजनैतिक और शैक्षणिक क्षेत्र में किये गए कार्यों को याद किया जाता है। इस दिन उनके आदर्शों को जीवन में उतारने की कोशिश होती है। पंडित मदन मोहन मालवीय जी के पूर्वज मालवा प्रान्त के निवासी थे। अतएव इन्हें मालवीय कहा जाता था। मदन मोहन मालवीय को धार्मिक संस्कार विरासत में मिले थे।
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26.12.21
23.12.21
113 भाषाओं और उप भाषाओं के 176 कवियों वाला अंतरराष्ट्रीय कविता महोत्सव
meethesh nirmohi-
त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय कविता महोत्सव... कोकराझार - आसाम (भारत)..... पिछले दिनों कोकराझार - आसाम में शांति और प्रेम की थीम पर आयोजित त्रिदिवसीय (14से16 नवम्बर,21)अन्तरराष्ट्रीय काव्योत्सव, भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ । बोड़ो साहित्य दिवस के अवसर पर गौरांग नदी के किनारे बोडोफा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस अनूठे, ऐतिहासिक और अविस्मरणीय साहित्योत्सव के लिए बीटीआर सरकार , उसके मुखिया श्री प्रमोद बोड़ो तथा साहित्य अकादेमी ,नई दिल्ली से पुरस्कृत कवि और असम सरकार में कैबिनेट मंत्री श्री यू. जी. ब्रह्मा,बोड़ो साहित्य सभा और उससे जुड़े साहित्यकारों की जितनी प्रशंसा की जाए कम है ।
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22.12.21
काकोरी : वीर रस कवि सम्मेलन - एसपी और इंस्पेक्टर ने भी सुनाई कविताएं
लखनऊ : शहीदों को नमन करने काकोरी फिर से आए हैं... काकोरी एक्शन के अमर बलिदानियों के 94वें बलिदान दिवस पर काकोरी शहीद मंदिर प्रांगण में आयोजित वीर रस कवि सम्मेलन व मुशायरे का आगाज़ प्रातः 9 बजे जी. पी. ओ. हजरतगंज स्थित काकोरी स्तम्भ पर एस. डी. एम. सदर, साहित्य शिरोमणि डा. रंगनाथ मिश्रा सत्य, पण्डित बेअदब लखनवी, अनिल किशोर शुक्ल "निडर", कृष्णानंद राय, उदय खत्री, यादवेंद्र कुमार व उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के राम प्रकाश सिंह द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि से हुआ । तत्पश्चात काफिला बाजनगर स्थित काकोरी शहीद मंदिर पहुंचा जहाँ एस. डी. एम. सदर, पण्डित बेअदब लखनवी , डा. रंगनाथ मिश्रा "सत्य" द्वारा दीप प्रज्वलित कर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के द्वारा आयोजित होने वाले भव्य समारोह व चित्र प्रदर्शनी का शुभारम्भ हुआ ।
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भारतीय समाज एकरंगा बनाने की कोशिश बेहद खतरनाक
नवसाधना कला केन्द्र में 'राष्ट्रीय एकता, शांति और न्याय' शिविर का समापन
वाराणसी ।तीन दिन तक 'प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण' शिविर के समापन पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये कार्यकर्ता इस नारे के साथ अपने घरों को लौट गये कि 'हम होंगे कामयाब एक दिन, मन में है विश्वास...'। साझी विरासत और मेल-जोल की भारतीय संस्कृति का विस्तार करने की शपथ लेने के साथ ही उन्होंने माना कि सतरंगी भारतीय संस्कृति को एकरंगी बनाने की कोशिश ही मुल्क के लिए सबसे बड़ा खतरा है जिससे मुल्क को बचाने की जरूरत है.
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हिंदू देह है और हिंदुत्व उसकी आत्मा
डा. कृष्णगोपाल मिश्र-
आजकल हिंदू और हिंदुत्व में अंतर की चर्चा जोरों पर है। पिछले दिनों एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता ने राजस्थान की एक सभा में हिंदू और हिंदुत्व को लेकर जो ज्ञान दिया है उसे सुनकर बड़े-बड़े विद्वान और भाषाविद् भी आश्चर्यचकित हैं क्योंकि इससे पहले इन शब्दों की ऐसी ज्ञानगर्भित व्याख्या कभी पढ़ने-सुनने में नहीं आयी है। ऐसा लगता है कि हमारे विकासशील देश में राजनीति के साथ-साथ भाषा, साहित्य, इतिहास, दर्शन, विज्ञान, अर्थशास्त्र आदि सभी विषयों पर कुछ भी बोलने का एकाधिकार हमारे नेताओं ने अपने पक्ष में सुरक्षित कर लिया है। अब इन विषयों के विद्वानों की आवश्यकता नहीं रही। सारे विषय राजनीति के स्वार्थ सागर में समा गए हैं और अब जो राजनेता कहें वही अंतिम सत्य है।
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18.12.21
झुकने के बजाय पत्रकार ने सवाल क्यों कर दिया?
arun srivastava-
सलाम कीजिए आली जनाब आये हैं... तो आली जनाब के आगे झुक जाना चाहिए था। झुकने के बजाए सवाल करने लगे, वो भी ऐरे-गैरे से नहीं सांसद से और जब सांसद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हो वो भी राक्षसी बहुमत प्राप्त वाली सरकार का, तब सवाल! अब यह मत कहिएगा कि, इससे ज्यादा सांसद तो स्व. राजीव गांधी सरकार के पास भी थे और उसमें से कई बाहुबली भी रहे होंगे। रहे होंगे पर किसी ने सरेआम घोषित तो नहीं किया था न कि, मैं एक विधायक या सांसद ही नहीं हूँ ... यहाँ के लोग जानते हैं कि इसके पहले मैं क्या था। फिर यह बात उन्होंने किसी के कान में नहीं कही थी। सरे-आम कहा था और लाउडस्पीकर से कहा था। अब चूक यह हो गई कि, यह नहीं बताया कि, ' इसके पहले वो क्या थे ?
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14.12.21
निर्वाचन पास वाले पत्रकारो की अलग मतदान व्यवस्था की जाए
Vikram Srivastava-
चुनावों के दौरान निर्वाचन पास वाले पत्रकारो को अलग मतदान व्यवस्था के लिए राजधानी के सैकड़ो पत्रकारों के हस्ताक्षर किये हुए मांग पत्र को आज मंगलवार को वरिष्ठ पत्रकार विक्रम श्रीवास्तव ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीमती सौजन्या को सौपा दिया है।
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ABP News-CVoter third opinion poll predicts victory of BJP in four states with AAP in the lead in Punjab
Noida: The ABP News-CVoter (Centre for Voting Opinion & Trends in Election Research) November 2021 opinion poll predicts a narrow win for the BJP in UP, Uttarakhand and Goa, with its seat share falling precariously close to the majority mark in UP and Uttarakhand. Punjab and Manipur remain too close to call for any party, with AAP and BJP leading in Punjab and Manipur respectively.
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कलम और बॉर्डर के सिपाही को जर्नलिस्ट क्लब ने दी श्रद्धांजलि
कानपुर-देश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत और पत्रकार ब्रजेश दीक्षित के आकस्मिक निधन के बाद शनिवार को कानपुर जर्नलिस्ट क्लब में कलम और बॉर्डर के सिपाही को एकसाथ श्रद्धांजलि दी गयी, श्रद्धांजलि सभा में पत्रकार भावुक दिखे सीडीएस स्व. बिपिन रावत और पत्रकार ब्रजेश दीक्षित को श्रद्धांजलि दी गई और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगतों की आत्मा की शान्ति की प्रार्थना की गई।
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पत्रकारिता की ऐसी स्थिति लोकतंत्र के लिए बहुत भयावह है
प्रवेश चौहान-
आज की मीडिया इंडस्ट्री में एक नया प्रचलन बढ़ गया है। पत्रकार सरकार से सवाल ना पूछ कर विपक्ष से सवाल पूछता है। अगर कोई मीडिया हाउस सरकार से सवाल करता भी है तो उस पर इनकम टैक्स काले साए की तरह मंडराता रहता है। अभी कुछ समय पहले ही देश के जाने-माने प्रतिष्ठित अखबार दैनिक भास्कर पर लगातार छापे पड़े थे। जिस कारण सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इससे पहले वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा जिस यूट्यूब चैनल के लिए काम करते हैं उस यूट्यूब चैनल न्यूज़ क्लिक के दफ्तर पर छापे मारे गए थे। यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या छापा मारने से सरकार पत्रकारों की आवाज दबा लेगी। खैर यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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पुणे में नहीं है हिंदी के रिपोर्टर्स के लिए कोई खास मौका
आज देश में पुणे बहुत तेजी से बढ़ते शहर के रूप में जाना जाता है। कभी यह सिर्फ एजुकेशन के लिए जाना जाता था, लेकिन आज हर क्षेत्र में यह विकास कर रहा है, लेकिन यहाँ पर आज भी हिंदी रिपोर्टर्स के लिए कोई स्थान नहीं है। कभी वो छोटी सैलरी पर काम करने को मजबूर हो जाते हैं तो कभी उन्हें दूसरी भाषा की ओर मुड़ना पड़ता है। जो तटस्थ होकर हिंदी के लिए ही काम करना होता है वे मजबूरी में सिर्फ ट्रांसलेशन का काम करते हैं। उन्हें निखरने का मौका ही नहीं मिलता है। वो सिर्फ एक ट्रांसलेटर बनकर रह जाते हैं।
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11.12.21
मोदी सरकार यदि हार गई तो क्या बेरोजगार अन्य राजनीतिक दल पर भरोसा कर सकते हैं?
Maheshwari Mishra-
बेरोजगारी भत्ता अभी तक सिर्फ चुनावी घोषणा बनकर रह गया है... देश के युवा उसी भ्रमजाल में फंस रहे हैं जिस भ्रमजाल 7 साल पहले फंसे थे। तब कांग्रेस के प्रति लोगों में आक्रोश था और भाजपा-आरएसएस का साइलेंट सेल लोगों की नफरत की आग में घी डाल रहा था और फिर साहब आए गुजरात का विकास मॉडल पेश किया। दो करोड़ हर साल रोजगार देने का वादा किया। महंगाई का रोना रोया।
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7.12.21
किसानों की आत्महत्याओं के कारणों का निवारण कैसे हो
- शैलेन्द्र चौहान
किसान आत्महत्याओं के बारे में जानने के लिए इस दुखांतिका का इतिहास जान लेना भी आवश्यक है। और इसे महाराष्ट्र राज्य के संदर्भ में जानना अधिक तर्कसंगत होगा। सन 1990 में अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' के ग्रामीण मामलों के संवाददाता पी. साईंनाथ ने किसानों द्वारा नियमित आत्महत्याओं की सूचना दी। आरंभ में ये रपटें महाराष्ट्र से आईं। जल्दी ही आंध्रप्रदेश से भी आत्महत्याओं की खबरें आने लगी। शुरुआत में लगा कि अधिकांश आत्महत्याएं महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों ने ही की हैं। लेकिन महाराष्ट्र के राज्य अपराध लेखा कार्यालय से 2010 में प्राप्त आँकड़ों को देखने से स्पष्ट हो गया कि पूरे महाराष्ट्र में कपास सहित अन्य नकदी फसलों के किसानों की आत्महत्याओं की दर बहुत अधिक रही है। आत्महत्या करने वाले केवल छोटी जोत वाले किसान नहीं थे बल्कि मध्यम और बड़े जोतों वाले किसान भी थे। राज्य सरकार ने इस समस्या पर विचार करने के लिए कई जाँच समितियां बनाईं। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सरकार द्वारा विदर्भ के किसानों पर व्यय करने के लिए 110 अरब रूपए के अनुदान की घोषणा की। बाद के वर्षों में कृषि संकट के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, आंध्रप्रदेश, पंजाब, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी किसानों ने आत्महत्याएँ की। 2009 में भारत के राष्ट्रीय अपराध लेखा कार्यालय ने 17368 किसानों के आत्महत्या की रपटें दर्ज कीं। सबसे ज़्यादा आत्महत्याएँ महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुई थी। इन 5 राज्यों में 10765 यानी 62% आत्महत्याएँ दर्ज हुई।
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सिनेमा और टीवी के श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश देने की एफडब्लूआइसीई ने फिर की मांग
shashikant singh-
फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज (एफडब्लूआइसीई) ने महाराष्ट्र सरकार को एक ज्ञापन भेजकर सिनेमा,टीवी शो और मनोरंजन के दूसरे माध्यम से जुड़े श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश और उन्हें पीएफ तथा इ एस आई की सुविधा दिए जाने की फिर से मांग की है।
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हाय ये योगी जी का पोस्टरी विकास
priyanshi singh-
मोदी के नाम पर पुनः सत्ता में आना चाहती भाजपा.... उत्तरप्रदेश जहां की गली गली अब आगामी विधानसभा चुनाव के रंग में रंगी हुई है और प्रदेश की सत्ताधारी सरकार का कहना ही क्या यह रोज एक नई रणनीति के साथ जनता को लुभाने के लिए एक नया दावं खेल देते हैं। वही आजकल इन्होंने जनता के मध्य मोदी मंत्र के जाप का आरम्भ कर दिया है और अब यह प्रदेश में मोदी ब्रांड के नाम से एक बार पुनः सत्ता में आने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि भगवा रंग की चुनर ओढे इस सरकार को ऐसा लगता है की मोदी इनके लिए तुरुप का इक्का है जिनका एक संबोधन जनता को अपने शाब्दिक मायाजाल में गाँस लेगा।
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अगर मीडिया में जाना है तो मल्टीटास्कर बनना मत भूलना
priyanshi singh-
बुर्जुग कहावत कहते थे कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं आजकल यह दिखाई भी दे रहा है। पत्रकार सुनने में जितना खूबसूरत लगता है कॉलेज लाइफ में यह हमें उतना ही खूबसूरत दिखाई भी देता है। लेकिन जैसे ही स्नातक की पढ़ाई पूरी होती है हम इसकी हकीकत से रूबरू होने लगते हैं। क्योंकि रोजगार की भूख से हमारा पेट बिलख उठता है और हम आय दिन रोजगार के लिए समाचार संस्थानों के चक्कर लगाने लगते हैं लेकिन वहां हमें मिलता एक दाना भी नहीं क्योंकि बड़े संस्थान बड़े पत्रकारों को जानते हैं और उनकी भूख शांत करने की योजनाओं के साथ चलते है। वहीं यदि कही कोई लोकल न्यूज़ चैनल आपको अपने यहां मौका दे देता है तो यह आपके लिए वैसा रोजगार सिद्ध होता है जैसे ढोल के अंदर पोल। जो बिना टाँकी के शानदार बजता रहे यानी सैलरी में पूरी डेस्क का काम सम्भाल ले। वहीं यदि उसे सब नहीं आता है तो वह उसे सीखे अन्यथा उनके हिसाब से लोगों की कमी नही है जो कम पैसे में सब जगह हांथ पसार कर काम कर सकते हैं। लेकिन एक बात तो है इन लोकल चैनलों की इन्हें कंटेंट तो ऐसा चाहिए जो सभी पोर्टल से भिन्न हो और एक नजर में लोगों को अपनी और आकर्षित करें इनके व्यू भी बढ़वाए लेकिन लेखक ऐसा बिल्कुल नहीं चाहिए जो सिर्फ उत्त्तम कोटि का कंटेंट बनाए।
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5.12.21
मीडिया का यह सच अगर कॉलेजों में बता दिया जाए तो पत्रकारों की भड़ास न निकले
Aman Rathaur
journalist.aman.rathaur@gmail.com
मीडिया में काम कर रहे लोगों के व्यवसायिक जीवन की अनुभूति और असलियत में जमीन-आसमान का अंतर है। हाईलेवल पर्सनालिटी के लोगों के साथ उठना-बैठना, पत्रकारिता से राजनेताओं और बयूरोक्रेट्स को अपनी मुट्ठी में रखना। अलग-अलग कई शाखाओं और पदों पर काम करने का अनुभव; रोज नई चुनोतियों का सामना करके कुछ सीखना; अच्छा खासा पैसा और हाथ मे पावर, अक्सर पत्रकारों की ऐसी ही छवि लोग बनाते है। पर जिस प्रकार अभिनेता पर्दे पर कुछ तथा असलियत में अलग होते हैं। वैसे ही पत्रकार कैमरे के आगे और पीछे काफी अलग होता है।
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1.12.21
सबको सुधारने का दावा करने वाले पत्रकार ने महिला को सरेआम गरिया दिया
के. सत्येंद्र-
पुरानी आग ठंडी भी नही हुई थी कि फिर से धधक पड़ी!
गोरखपुर : गोरखपुर जनपद के चौरीचौरा थानाक्षेत्र में आज एक महिला ने एक टी वी चैनल के पत्रकार पर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी । सार्वजनिक तौर पर इस घटना से आहत महिला ने अपनी सहायक महिलाओ को एकत्र कर इस घटना के संबंध में अपना बयान कैमरे पर दिया है । महिला का आरोप है कि वो अपने सहायक महिला साथियों के साथ पत्रकार हरेंद्र दूबे से मिली और उनसे अपनी मदद करने को कहा।
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झूठ क्यों बोलते हो 15 लाख मिले तो थे ....याद करो वो वाक्या जब !
के. सत्येंद्र-
सबको मिले थे पंद्रह लाख याद करो जब एक जनसभा में मोदीजी ने कहा भाईयों और बहनों...अयोध्या में दीपावली पर एक साल में 3 लाख दिए जलाए, तो बोलो 5 साल में कितने दिए ?
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28.11.21
जब आंदोलन में बैठे किसानों को बीजेपी ने कभी किसान माना ही नहीं तो मोदी ने बिल वापस क्यों ले लिया?
praveshchauhan405@gmail.com
हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए यह बात तो हम सभी जानते हैं। मगर कुछ बातें हैं जो अब सभी लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं। पहली बात, कई बार भाषणों में बीजेपी के मंत्रियों द्वारा यह कहते हुए हमने भी सुना है कि जो किसान वहां बैठे हैं। वह वास्तव में किसान नहीं उपद्रवी, खालिस्तानी और नकली किसान जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। सबसे बड़ा सवाल यहां पर, जब दिल्ली को घेरे वहां पर बैठे हुए लोग किसान नहीं थे तो फिर नरेंद्र मोदी ने आखिर बिल वापस क्यों ले लिया।
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सामाजिक एकता का खात्मा डेमोक्रेसी को चैलेंज: प्रो. मलिक
वाराणसी।आज वाराणसी के नव साधना प्रेक्षागृह,तरना में राइज एंड एक्ट के तहत एक दिवसीय " राष्ट्रीय एकता, शांति व न्याय" विषयक सम्मेलन में वक्ताओं ने राष्ट्रीय एकता,शांति और न्याय की स्थापना को लेकर अपने-अपने विचार रखे। वक्ताओं का मत था कि राष्ट्रीय एकता के कमजोर होने से लोकतंत्र कमजोर होता है। जरूरत हमें सामाजिक ताने-बाने को मजबूती प्रदान करते हुए देश की एकता अखंडता को अक्षुण रखने का प्रयास करना चाहिए।
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दैनिक जागरण ने अटल बिहारी को राष्ट्रपति बना दिया
दैनिक जागरण में शनिवार 27 नवंबर को एक ख़बर सभी संस्करण में छपी है। जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति लिख दिया। यह खबर किसी रिपोर्ट्स ने नहीं बल्कि खुद आउटपुट हेड दिवाकर मिश्र ने लिखी है जो डेस्क पर बिंदी मात्रा की गलती पर माफीनामा लिखाते रहते है और सार्वजनिक डेस्क के साथियों को गालियां देकर अपमानित भी करते हैं।
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गैरोला स्मृति सम्मान पर उठे सवाल
अरुण श्रीवास्तव-
देहरादून। उत्तरांचल प्रेस क्लब ने अपने डा.पीतांबर दत्त बड़थ्वाल सभागार में एक समारोह आयोजित कर तीन स्थानीय पत्रकारों चांद मोहम्मद मनीष भट्ट और मो. अफजाल अहमद सहित सामाजिक कार्यकर्ता राजीव उनियाल जी को कोरोना से संक्रमित लोगों की मदद करने के लिए " पत्रकार अनूप गैरोला स्मृति सामाजिक सक्रियता सम्मान " से नवाज़ा है। इस सम्मान का इतिहास क्या है, भूगोल क्या है पता नहीं। आसान शब्दों में कब शुरू हुआ, कितनी बार कितनों को दिया गया पता नहीं।
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21.11.21
शशिभूषण प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान से नवाजे जाएंगे पत्रकार : आईपीसी
नई दिल्ली : आज वरिष्ठ पत्रकार शशिभूषण प्रसाद सिंह की जयंती समारोह के मौके पर अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद् के द्वारा पत्रकार सम्मान की बात कही गई । बताते चले कि शशिभूषण प्रसाद सिंह बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले थे । जिन्होंने हिंदुस्थान समाचार की नींव बिहार में स्थापित की व कई वर्षों तक संपादन का कार्य किया । इसके अलावा उन्होंने हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्लीज की स्थापना की व संपादन करते रहे । इसी वर्ष 71 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से वे पत्रकारिता जगत को अलविदा कह चले ।
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सी एम सिटी के एस आई सी का तुगलकी फरमान ...सिर्फ मान्यता प्राप्त पत्रकार ही मिलें!
के. सत्येंद्र-
गोरखपुर के ए डी एम (एफ आर) साहब से मैं कहना चाहता हूँ कि आपके मना करने के बावजूद हमने फिर से बदतमीजी कर दी और फिर से मैंने आपके जनपद के एक होनहार अफसर द्वारा जारी किए गए तुगलकी फरमान की रिकॉर्डिंग खबर बनाकर वायरल कर दी है । तुगलकी फरमान जारी करने वाले इन साहब से जब मैं मिला तो मुझे यह अहसास हुआ कि ये साहब शायद एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं । ये दिन भर अपने आफिस में बैठ कर अपनी ही उधेड़ बुन में लगे रहते हैं और अपने मुखबिरों से जिला अस्पताल गोरखपुर में होने वाले भ्रष्टाचार का कमीशन प्रतिशत का हिसाब किताब लगाते रहते हैं।
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मजीठिया वेज बोर्ड : तारीख...तारीख ... तारीख...
अरुण श्रीवास्तव-
है तो यह एक मुंबइया फिल्म का डायलाग लेकिन मजीठिया वेजबोर्ड पर काफी हद तक लागू होता है। आखिर अब तक हर किसी को तारीख ही मिली। किसी को श्रम विभाग से मिल रही है तो किसी को श्रम न्यायालय से। शायद वो खुशकिस्मत होंगे जिन्हें हाई कोर्ट से तारीख मिल रही है। वो भी तब जब बामुश्किल तीन सेपांच फीसद लोगों ने साहस दिखाया और कोर्ट के सुझाए रास्ते को अपनाते हुए वेजबोर्ड की रिपोर्ट की संस्तुतियों के अनुसार वेतन और अन्य परिलाभ मांगा लेकिन 10 साल बाद उन्हें मिला क्या ... ?
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भ्रष्टाचार और कदाचार के नए नए कीर्तिमान गढ़ रही है सी एम सिटी की पुलिस
के. सत्येंद्र-
गोरखपुर : यूपी पुलिस तो बेमिसाल थी आज भी है और शायद हमेशा यूँ ही बेमिसाल बनी रहेगी लेकिन योगी जी की गोरखपुर पुलिस तो योगी जी के नाक के नीचे खुद ही अपने कर्मकांडों से अपनी आबरू कई बार तार-तार कर चुकी है । सी एम सिटी में ही वर्दीधारियों ने चेकिंग के नाम पर कभी सर्राफ को लूटा तो कभी ब्लैकमेल कर डॉक्टर से लाखों रुपये ऐंठ लिए । कभी किसी की दीवार गिरा कर वसूली की तो कभी होटल में व्यवसाई को पीट-पीटकर मार डाला। कमाई के मामले में तो लगता है जैसे अपनी गोरखपुर पुलिस को कोई विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
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महिलाओं की तरह ही पुरुष भी असमानता का शिकार होते हैं
डॉ. विक्रम चौरसिया-
मर्द को दर्द नहीं होता कहावत को सच मानकर,जो हम पुरुष ता उम्र अपना दर्द छिपाते है,जी हां वो पुरुष ही होते है,जी हां, मैं पुरुष हूं ! ध्यान से देखो मां के पेट से जब मैं दुनियां में आता हूं, परिवार के सपने पूरे करने का जरिया बन जाता हूं, कोई मुझे बुढ़ापे का सहारा कहता है, तो किसी की आंखों का तारा बन जाता हूं। लेकिन फिर भी मैं अत्याचारी कहलाता हूं। जी हां, मैं पुरुष हूं ! देखे तो किसी भी सभ्य समाज के जीवन रूपी गाड़ी के पुरुष और महिला दोनों ही पहिये हैं ,जबकि अक्सर पुरुष नेपथ्य में रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों व दायित्वों का भलीभांति निर्वहन करते हुए जीवन गुजार देता है,जबकि किसी भी लोकतांत्रिक देश या सभ्य समाज में दोनों को बराबर का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन हमने पिछले दिनों लखनऊ में सरेआम पुरुष का धज्जियां उड़ते हुए देखें तो वही ऐसे ही बहुत से झूठे आरोप पुरुषों पर लगा दिया जाता है।
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20.11.21
गंगा-यमुना की सफाई के नाम पर हुए भ्रष्टाचार में सबने हाथ धोए हैं...
-शैलेन्द्र चौहान
नदियों को प्रदूषण से क्या कोई बचा पाएगा... राजधानी दिल्ली में यमुना नदी पर ओखला बैराज के पास विगत कई वर्षों से जहरीले झाग की मोटी परत दिखती है। इस वर्ष राजनीतिक कारणों से छठपूजा के अवसर पर यह विशेष चर्चा में रही। यह झाग इस नदी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का नतीजा है। कई साल से यह नजारा दिख रहा है लेकिन हालात बेहतर होते नहीं दिखते। दो चार दिन आरोप-प्रत्यारोप के बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। दिल्ली सरकार ने इसी साल जनवरी में झाग रोकने के लिए 9 सूत्री कार्य योजना बनाई, जिसका नतीजा अभी तक शून्य ही रहा है। बजट में दिल्ली सरकार ने यमुना क्लीनिंग प्रोजेक्ट के लिए 2,074 करोड़ रुपये आवंटित किए लेकिन उसका नतीजा भी अभी तक शून्य ही रहा है। दिल्ली सरकार ने यमुना की सफाई के लिए 2018 से 2021 के बीच तीन साल में करीब 200 करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन अभी तक उस खर्च का कुछ असर नहीं दिखा।
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Complaint againstYOUTUBE STAR CANADA TV
sir,
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किसानों के संघर्ष के आगे केंद्र सरकार के झुकने पर आप कार्यकर्ताओं ने पटना में बांटी मिठाई
आम आदमी पार्टी, बिहार के प्रभारी सह बुराड़ी विधानसभा, दिल्ली के विधायक श्री संजीव झा ने किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष के बाद केंद्र सरकार द्वारा तीनों काले कृषि कानून वापस लेने की घोषणा को जनतंत्र की जीत करार दिया। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा तीनों काले कानून वापस लेने की घोषणा के पश्चात् सिंधु बार्डर लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसान भाईयों से मिलकर उन्हें मीठाई खिलाई एवं उनकी ऐतिहासिक जीत के लिए उन्हें बधाई भी दी।
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किसान कानून को लेकर मीडिया के एंकर क्या बोले... व्यंग्यकार पंकज प्रसून को पढ़िए
Pankaj Prasun-
कृषि कानून रद्द होने के बाद आज शाम टीवी पर यही होने वाला है..
अमीश देवगन - आज मोदी जी के दरियादिली की जीत हुई है। उन्होंने विपक्ष को एक झटके में उखाड़ फेंका है।
अब क्या करेंगे यह खालिस्तानी ,कहां जाएंगे देशद्रोह करने? कृषि कानूनों को काला कानून बताने वाले विपक्ष के काले कारनामे कब बन्द होंगे। आज की डिबेट है -कृषि कानून निरस्त, विपक्ष हुआ पस्त।
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19.11.21
किसानों का ऐतिहासिक संघर्ष ज़िंदाबाद!
साल भर से जारी अभूतपूर्व किसान आंदोलन के दबाव में आज केंद्र सरकार को तीनों प्रतिगामी कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। यह किसानों की एक ऐतिहासिक जीत है। जनवादी लेखक संघ किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे को इस जीत के लिए मुबारक़बाद देता है और उनका क्रांतिकारी अभिनंदन करता है।
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14.11.21
कंगना तो बहाना हैं अपनी सोच को मनवाना है
arun srivastava-
अच्छा-खासा समय लग गया यह सोचने में कि, कंगना पर लिखूं या न लिखूं। आखिर में बाल लोकतंत्र में कम्युनिस्टों ने भी तो कहा था कि, देश की जनता भूखी है ये आजादी झूठी है जेएनयू के छात्रों ने भी हमें चाहिए आजादी वाला गीत गाया था। पर इसको लेकर पार्टी के अंदर अच्छी-खासी बहस चली और कन्हैया ने आजाद भारत में क्यों चाहिए आजादी पर अपना पक्ष रखा था।
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सौरभ द्विवेदी के जाते ही लल्लनटॉप की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में
Ankit-
युवाओं में बेहद लोकप्रिय द लल्लनटॉप इसके सम्पादक सौरभ द्विवेदी के जाते ही विश्वसनीयता के सवालों के घेरे में आ गया है। अभी हाल में ही इसकी टीम ने लखनऊ प्रवास के दौरान एक हाइटेक स्मार्ट गांव लतीफ़पुर के विषय में एक स्टोरी वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में एक गांव और उसके पूर्व प्रधानपति का प्रशस्ति गान किया गया है। पहली नज़र में यह एक सामान्य वीडियो लगता है लेकिन बारीकी से देखने पर लल्लनटॉप के इस वीडियो की चतुराई पकड़ में आ जाती है। जो सीधे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर देती है। इसे निम्न बिन्दुओं में साफ़ समझा जा सकता है-
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13.11.21
मध्यवर्गीय संघर्ष और विषमताओं की ताकत का आख्यान
शैलेन्द्र चौहान-
गजानन माधव मुक्तिबोध उन गिने चुने कवियों में थे जिन्होंने विज्ञान और फैंटेसी के आधुनिक तथा कलात्मक बिंब और भाव कविता में लिए। उनकी एक कविता 'मुझे मालूम नहीं' में मनुष्य की उस असहायता का चित्रण है जिसमें वह यथास्थिति तोड़ नहीं पाता। वह दूसरों के बने नियमों तथा संकेतों से चलता है। उसका स्वयं का सोच दूसरों के सोच पर आधारित होता है। दूसरों का सोच सत्ता के आसपास का चरित्र होता है। सत्ता अपने को स्थापित करने के लिए मनुष्य के सोच की स्थिरीकरण करती है। परन्तु मनुष्य की चेतना कभी कभी चिंगारी की भांति इस बात का अहसास कराती है कि वह जो सामने का सत्य है उससे आगे भी कुछ है। संवेदनहीन होते व्यक्ति की संवेदना को वह चिंगारी पल भर के लिए जागृत करती है।
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1.11.21
धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान की आत्मा है : प्रो.मंडल
वाराणसी।जिस आइडिया ऑफ इंडिया का सपना आजादी के आंदोलन के दौरान परवान चढ़ा था आज वह बर्बाद हो रहा है. मुल्क नफरत, गैर बराबरी और कारपोरेट फासीवाद की आग में झुलस रहा है यदि समय रहते स्वतन्त्रता, समता,बंधुता और इंसाफ पर आधारित आईडिया ऑफ़ इंडिया/भारत की परिकल्पना के लिए संघर्ष नहीं किया जाएगा तो हमारी बसुधैव कुटुम्बकम की विरासत खतरे में पड़ जाएगी। आज जरूरत है कि संविधान की प्रस्तावना को आत्मसात कर उसे सुदुर ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाए ,जिससे जन मानस को न सिर्फ संवैधानिक मूल्यों की जानकारी हासिल हो बल्कि इन मूल्यों पर आधारित समाज निर्मित करने में भी आसानी हो।उक्त बातें मात्रिधाम स्थित अंजलि में राइज एंड एक्ट प्रोग्राम के तहत आयोजित *भारत की परिकल्पना* विषयक एक संगोष्ठी में वक्ताओं ने कही।
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31.10.21
मोदी सरकार चली गई तो भी रोजगार नहीं मिलेगा
देश के युवा उसी भ्रमजाल में फंस रहे हैं जिस भ्रमजाल 7 साल पहले फंसे थे। तब कांग्रेस के प्रति लोगों में आक्रोश था और भाजपा-आरएसएस का साइलेंट सेल लोगों की नफरत की आग में घी डाल रहा था और फिर साहब आए गुजरात का विकास मॉडल पेश किया। दो करोड़ हर साल रोजगार देने का वादा किया। महंगाई का रोना रोया।
और चुनाव जीतने के बाद सच्चाई आपके सामने है। अब भी वक्त कुछ ऐसा ही है पार्टी बदल गई। अब सभी पार्टियां सरकार के प्रति लोगों में फैली नाराजगी की आग और भड़का रहे हैं पर सवाल वही है कि क्या देश के हर नागरिक को आजीवका का अधिकार (रोजगार) मिलेगा?
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भारत-मोदी को एक समझने की गलती न करें विपक्ष
संजय सक्सेना, लखनऊ
कांग्रेस के एक नेता हुआ करते थे देवकांत बरूआ।बरूआ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे। बरूआ की पहचान कांग्रेस के दिग्गज नेता सहित पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा के वफादारों में भी होती थी।बरूआ ने ही आपातकाल के दौरान 1975 में नारा दिया था,‘इंदिरा इज इंडिया एंड इंडिया इज इंदिरा’।यह नारा उस वक्त इंदिरा गांधी की ताकत को दिखाता था। एक समय इंदिरा को ‘कामराज की कठपुतली’ और ‘गूंगी गुड़िया’ कहा जाता था। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद दुनिया ने उनका एक अलग रूप देखा। बैंकों का राष्ट्रीयकरण, पूर्व रजवाड़ों के प्रिवीपर्स समाप्त करना, 1971 का भारत-पाक युद्ध और 1974 का पहला परमाणु परीक्षण... इन फैसलों से इंदिरा ने अपनी ताकत दिखाई। हालांकि 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया। इसकेे बाद इंदिरा ने आपातकाल लागू कर दिया। इसी समय आया था ‘इंदिरा इज इंडिया और इंडिया इज इंदिरा’ का नारा।हालांकि,इसके ठीक बाद 1977 में हुए चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हार गई थी। यहां तक की प्रधानमंत्री रहते इंदिरा गांधी तक को हार का सामना करना पड़ा था। देश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी। कांग्रेस ने 1977 की हार के लिए मंथन किया तो इसके कारणों में आपातकाल के साथ ही विमर्श में यह बात भी निकल कर आई कि ‘इंदिरा इज इंडिया एंड इंडिया इज इंदिरा’ के नारे का वोटरों के बीच काफी गलत प्रभाव पड़ा था और एक बड़ा वर्ग इससे बेहद नाराज भी था। इसी लिए इस नारे ने भी कांग्रेस की हार में प्रमुख भूमिका निभाई थी।कांग्रेस पर हमला करने के लिए विपक्ष आज भी इस नारे को उसक(कांग्रेस)े खिलाफ जुमले की तरह इस्तेमाल करता है।
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27.10.21
पोल-खोल अधिकारी अमिताभ ठाकुर ज़बरन रिटायर,लेकिन भ्र्ष्टाचारी को बार बार तैनाती
योगी सरकार में भी समाज कल्याण अधिकारी का दबदबा, तीन महीने में मिली दोबारा तैनाती
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FARMERS CRY FOUL CENTER'S BOGUS INSURANCE SCHEME
UNMESH GUJARATHI
SPROUTS BRAND STORY
On the face of mounting farmer suicides in the various states amidst failures on part of the insurance companies under the aegis of the centre to clear the pending claims form the farming community being on the rise, there prevails widespread disillusionment with the union government’s Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana(PMFBY). Repeated cries for help from small and marginal farmers who feel cheated on this count has lent its voice in the form of a political outrage being expressed over the Centre’s scheme of things benefitting private insurance firms at the cost of the farming community’s financial stakes.
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24.10.21
न्यूज़18 राजस्थान के हिस्ट्रीशीटर पत्रकार प्रेमदान ने बुजुर्ग शंकरदान का मकान हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाए
Sabal Singh Bhati-
sabalbhati@gmail.com
न्यूज़18 राजस्थान के हिस्ट्रीशीटर पत्रकार प्रेमदान ने बुजुर्ग शंकरदान का मकान हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाए, नगर पालिका ने पट्टा किया निरस्त, पुलिस नही कर रही कोई कार्रवाई
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सौरभ द्विवेदी ने पत्रकारिता के एक और शिखर को छुआ
Krishan pal Singh-
लल्लन टॉप के साथ साथ इंडिया टुडे की भी जिम्मेदारी
उरई | इण्डिया टुडे ग्रुप ने सौरभ द्विवेदी को एक और बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है | उन्हें लल्लन टॉप के साथ साथ इण्डिया टुडे हिंदी का भी सम्पादक नियुक्त कर दिया गया है | उनकी इस उपलब्धि से पूरा शहर इतरा उठा है | बेहद कम उम्र में हिंदी पत्रकारिता में राष्ट्रीय स्तर पर शिखर छूने वाले सौरभ यहीं के निवासी हैं जिससे यहाँ के लोगों को उन पर नाज होना लाजिमी है |
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जिस अखबार का प्रधान संपादक गिरफ्तार हुआ, वह समाचार पत्र पत्रकारों का कर रहा है सम्मान
Rakesh Sharma-
जयपुर। कूटरचित दस्तावेजों से धोखाधड़ी करने के एक मामले में दैनिक राष्ट्र-सम्मत समाचार पत्र के प्रधान संपादक घनश्याम स्वरुप बाघी को अलवर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कई दिनों बाद गत दिनों राजस्थान हाईकोर्ट से उसकी जमानत हुई। बाघी पर चार अन्य आपराधिक केस भी दर्ज है, जो अलवर व जयपुर के पुलिस थानों में दर्ज है। जिस राष्ट्र-सम्मत समाचार पत्र का प्रधान संपादक धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार हो चुका है और उस पर अन्य आपराधिक मुकदमें भी दर्ज हैं, वह समाचार पत्र और भारत पत्रकार संघ (अंपजीकृत) रविवार 24 अक्टूबर, 2021 को दौसा में पत्रकारों का सम्मान कर रहा है।
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इस दिवाली दें अपने घर को प्रकृति की सुरक्षा
Amrita Raj Singh-
· बढ़ते प्रदूषण के कारण वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए लोग आक्सीजन उत्सर्जन करने वाले पेड़ - पौधों की मांग बढ़ी।
· वृक्षवन नर्सरी द्वारा पौधों और गमलों पर 20% की छूट दिया जा रहा है।
· इस फेस्टिवल सीजन में ‘हाउस प्लांट’ होंगे बेहतरीन गिफ्ट
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मीडिया फ्रेंडली मुख्यमंत्री मीडिया से दुखी क्यों ?
सत्य पारीक-
अशोक गहलोत को मीडिया फ्रेंडली मुख्यमंत्री माना जाता है लेकिन इन दिनों वे मीडिया का ही मैनेजमेंट नहीं कर पा रहें हैं क्योंकि वे अपने भगत मीडिया कर्मियों को लाभ के पदों पर सुशोभित कर गैर पत्रकार को अपने प्रचार की कमान सौंप बैठे हैं । इसी कारण मुख्यमंत्री का मीडिया सम्भालने वाला विशेषाधिकारी बदनामी का सबब बन कर घूम रहा है । वैसे जिस लोकेश शर्मा को मीडिया मैनेजमेंट सौंप रखा है उसका मीडिया से दूर दूर का वास्ता नहीं होने से मुख्यमंत्री का टूल बनना स्वीकार किया । जिसे बचाने के लिये मुख्यमंत्री को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अन्डरहैन्ड समझौता करना पड़ा है । वो समझौता जिससे कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है जो भाजपा के पूर्व महापौर के भृष्टाचार से जुड़ा है । यानि मीडिया मैनेजर से राजनीतिक हित साधने के बाद उसका बचाव करना भारी पड़ रहा है ।
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20.10.21
भारत में राजनेता ही सबसे बड़े वैज्ञानिक होते हैं
- शैलेन्द्र चौहान
भारत की इस धरती पर कई ऐसे महान वैज्ञानिक पैदा हुए हैं, जिन्होंने अपनी खोज और रिसर्च से दुनिया के विकास को नई दिशा दी है। विडंबना यह है कि यह काम वे भारत में रहते हुए नहीं कर सके। उन्हें पश्चिमी देशों में रहने की सुविधा मिली तभी उनकी खोज फलीभूत हुई। भारत में विज्ञान हो, एकेडमिक्स हो, तकनीक और प्रौद्योगिकी हो या चिकित्सा का क्षेत्र हो सब में अनचाहा राजनीतिक-प्रशासनिक हस्तक्षेप न केवल विशेषज्ञों का मनोबल गिराता है बल्कि उन्हें बुरी तरह अपमानित भी किया जाता है। इससे यह भलीभांति समझा जा सकता है कि भारत में राजनेता ही सबसे बड़े वैज्ञानिक और विद्वान होते हैं। एक हुए हैं खगोल भौतिकी के क्षेत्र के बड़े वैज्ञानिक डॉ. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर।
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18.10.21
जौनपुर News : रामजी जायसवाल अध्यक्ष व छोटे लाल चुने गये महासचिव
सम्पादक मण्डल उत्तर प्रदेश की जनपद इकाई का चुनाव सम्पन्न
वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रेश मिश्र व युवा पत्रकार अमित गुप्ता के पुत्र के निधन पर जताया गया शोक
जौनपुर। सम्पादक मण्डल उत्तर प्रदेश के जनपद इकाई का चुनाव सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित पत्रकार भवन में सम्पन्न हुआ। संरक्षक जय प्रकाश मिश्र की देख-रेख में चुनाव प्रक्रिया की अध्यक्षता कार्यवाहक अध्यक्ष राकेशकान्त पाण्डेय ने किया। साथ ही 5 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति का गठन हुआ जिसमें पूर्व अध्यक्ष जय प्रकाश मिश्र, डा. ब्रजेश यदुवंशी, शम्भूनाथ सिंह, छोटे लाल सिंह व सै. मेंहदी हुसैन रिजवी सामिन शामिल किये गये।
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12.10.21
गांधी नहीं सुहाते तो मोदी से कहो कि बापू के नाम से राज चलाना बंद करें
करणीदानसिंह राजपूत-
गांधी बाबा के नाम पर कांग्रेस ने राज चलाया और अब भाजपा भी गांधी बाबा के नाम पर ही राज कर रही है।
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कोयले की कमी से यूपी में भी गहरा रहा है बिजली संकट
अजय कुमार,लखनऊ
लखनऊ। देश के विभिन्न राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी बिजली उत्पादन के लिए कोयले का संकट गहराता जा रहा है।उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वामित्व वाली विद्युत इकाइयों में कोयले की जबर्दस्त किल्लत के कारण बिजली उत्पादन कम हो गया है। यूपी में मांग के मुकाबले तीन हजार मेगावॉट कम बिजली का उत्पादन हो रहा है। जिसके कारण गांवों तथा कस्बों में बिजली की अत्यधिक कटौती की जा रही है।
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जयप्रकाश नारायण और अमिताभ बच्चन का जन्मदिन : एक फिल्मी महानायक तो दूसरा जननायक
संजय सक्सेना, लखनऊ
देश आज दो महानायकों का जन्मदिन मना रहा है। एक रूपहले पर्दे के महानायक अमिताभ बच्चन हैं तो दूसरे जननायक जय प्रकाश नारायण हैं। एक का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जो अब प्रयागराज हो गया में तो दूसरे का जन्म बिहार के सिताब दियारा में हुआ था। दोनों में अगर कोई समानता थी तो यही थी कि दोनों ने ही कायस्थ परिवार में जन्म लिया था। अमिताभ को फिल्मी पर्दे का एंग्री मैन कहा जाता था तो जयप्रकाश नारायण जेपी’ को स्वतंत्रा सेनानी का रूतबा हासिल था।1975 में जयप्रकाश नारायण का लोहा देश की जनता ने तब माना जब उन्होंने कांग्रेस की आयरन लेडी कही जाने वाली इंदिरा गांधी के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था।
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A MULTI CRORE FSI SCAM IN SRA PROJECT
UNMESH GUJARATHI/ DIVAKAR SHEJWAL
SPROUTS BRAND STORY
A multi-crore Slum Redevelopment scam has come to light when the complaints that lay for nearly a decade with the MIDC police station, in the western suburbs of India’s financial capital, Mumbai continued gathering dust and the original slum residents petitioned the High Court in wake of police inaction. The scam running into nearly INR 2000 crores involves the registration of bogus documents with fictitious names of tenants. The complaint pertains to the up-market city developers, Hub Town Private Ltd, having obtained FSI far in excess of their entitlement by virtue of a huge SRA scam in Andheri (East), a Western suburb of Mumbai.
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9.10.21
सावधान...5 फर्जी पत्रकारों की टीम घूम रही है...
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में कुछ पत्रकारों को लेकर पंचायत सचिव संघ के वाट्सअप ग्रुपों में एक खबर चल रही है. बाद में पंचायत सचिव संगठन गुप का ये स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
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8.10.21
रहस्यमय पीएम केयर्स फंड : देश का धन है तो फिर देश जानकारी क्यों नहीं ले सकता?
करणीदानसिंह राजपूत-
देश में पहले से ही प्रधानमंत्री राहत कोष सन 1948 ईसवी से स्थापित है और 73 वर्षों से संचालित है। प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में प्रधानमंत्री राहत कोष का संपूर्ण संचालन प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कर दिया था जो वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही अधीन है। ऐसी अधिकारिता के होते हुए पीएम केयर्स फंड की स्थापना की आवश्यकता क्यों हुई? इसमें देश का धन लगा है तो देश को इसके संचालन व जमा खर्च की जानकारी भी होनी चाहिए, लेकिन वह जानकारी दी नहीं जा रही।
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नई शिक्षा नीति 2020 कहीं बाल अधिकारों का हनन ना करने लगे!
डॉ मनीष जैसल-
हर बच्चे की विशिष्ट क्षमता, पहचान के साथ उनके विकास को ध्यान में रखते हुए बुनियादी साक्षरता और अवधारणात्मक समझ विकसित करने का लक्ष्य लिए मौजूदा सरकार ने पिछले वर्ष नई शिक्षा नीति को लागू करने का निर्णय लिया था । दरअसल यह कार्य योजना 2015 में अपनाए गए सतत विकास एजेंडा 2030 के लक्ष्य 4 जिसमें वैश्विक शिक्षा विकास एजेंडा प्रस्तावित है उसको ध्यान में रखकर बनाई गयी । जिसमें 2030 तक सभी के समावेशी और समान गुणवत्ता युक्त शिक्षा सुनिश्चित करने और जीवन पर्यन्त शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा दिए जाने की बात स्वीकारी गयी है । यह तथ्य भी सत्य है कि अगले दशक तक भारत दुनिया का सबसे युवा जनसंख्या वाला देश होगा और इन्हीं युवाओं की उच्चतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता पर ही भारत का भविष्य निर्भर करेगा ।
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5.10.21
दुनिया को आईना दिखाती धार्मिक स्थलों में यौन शोषण की रिपोर्ट!
CHARAN SINGH RAJPUT-
फ्रांस के एक जांच आयोग की रिपोर्ट में खोला गया हजारों पादरियों और स्टाफ का सालों पुराना कच्चा-चिट्ठा!
जांच आयोग ने अपनी रिसर्च में पाया कि सन 1950 से लेकर अब तक कम से कम 2900 से लेकर 3200 पीडोफाइल पादरी या चर्च के अन्य सदस्यों का खुलासा हा चुका है, भारत में भी धर्म स्थलों में यौन शोषण के मामले उजागर हुए हैं, गत दिनों चले मी टू अभियान में हज जाने वाली महिलाओं के साथ भी यौन शोषण के मामले उजागर हुए थे..
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कू ऐप की ओर से पत्रकारों के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन
लखनऊ के हजरतगंज इलाके के एक होटल में कू ऐप की ओर से पत्रकारों के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया. इस वर्कशॉप में लखनऊ के तमाम पत्रकार शामिल हुए. कू ऐप की ओर से आई टीम ने अपने ऐप की बारीकियां पत्रकारों को समझाईं और इस स्वदेशी ऐप के बारे में बताया.
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